कोरोना के इलाज के नाम पर निजी अस्पताल जिस तरह सरकारी-संरक्षण में लोगों को लूटने में लगे हैं, वो हैरतअंगेज है!
कोरोना के इलाज के नाम पर निजी अस्पताल जिस तरह सरकारी-संरक्षण में लोगों को लूटने में लगे हैं, वो हैरतअंगेज है! दूसरी तरफ प्रशासनिक मशीनरी, ख़ासकर पुलिस लाकडाऊन या कानून-उल्लंघन के नाम पर किस तरह लोगों पर ज़ुल्म ढा रही है, उसका ताजा उदाहरण है तूतीकोरिन कांड! दुखद है कि हमारी संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाएं आज समाज को बुरी तरह निराश कर रही हैं. जामिया में पुलिस ज़ुल्म और उससे जुड़े अन्य मसलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ताज़ा रिपोर्ट इसका उदाहरण है. वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का विश्लेषण: