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भारत
राजनीति
क्षेत्रीय दलों को सबसे ज़्यादा चंदा कॉर्पोरेट घरानों से, शिव सेना सबसे बड़ी लाभार्थीः एडीआर रिपोर्ट
साल 2016-17 में कॉर्पोरेट घरानों के लिए बीजेपी बेहद पसंदीदा रही जिसे क़रीब 513 करोड़ रूपए डोनेशन मिला।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Aug 2018
ADR Report

देश भर के क्षेत्रीय दलों को सबसे ज़्यादा चंदा कॉर्पोरेट क्षेत्रों से मिले हैं। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्रीय दलों ने 2016-17 में कॉर्पोरेट योगदान से अपनी कुल आय 347.74 करोड़ रुपए का क़रीब 60 प्रतिशत से अधिक हासिल किया है। 91.53 करोड़ रूपए (ज्ञात स्रोतों से आय) में से क्षेत्रीय दलों को विभिन्न व्यावसायिक घरानों से 5.2.2 करोड़ रुपए मिले। हालांकि इस रिपोर्ट ने उन व्यवसायिक घरानों के नाम का खुलासा नहीं किया है जिसने इन दलों को पैसे दिए।

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इस रिपोर्ट ने क्षेत्रीय दलों की आय को तीन हिस्सों में विभाजित किया है- ज्ञात स्रोतों से हुई आय, अज्ञात स्रोतों से हुई आय और अन्य ज्ञात स्रोतों से प्राप्त आय। जबकि ज्ञात स्रोतों से चंदा 20,000 रुपए सेज़्यादा और कम है जिसका विवरण ईसीआई (निर्वाचन आयोग) को क्षेत्रीय दलों द्वारा दिए गए चंदा के रिपोर्ट के माध्यम से उपलब्ध है, वहीं अज्ञात स्रोतों में 20,000 रुपए से नीचे के चंदा के लिए आय का स्रोत दिए बिना आईटी रिटर्न में घोषित आय शामिल है।

इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि राजस्व में कई गुना कमी के बावजूद शिवसेना कॉर्पोरेट क्षेत्र की सबसे पसंदीदा पार्टी रही और 22.77 करोड़ रुपए हासिल किया। इसके बाद सिरोमनी अकाली दल (एसएडी) और समाजवादी पार्टी (एसपी) का स्थान है जिसने क्रमशः 14.26 करोड़ और 6.65 करोड़ चंदा हासिल किया। समृद्ध क्षेत्रीय दल पार्टी विशेष चंदों के चलते और समृद्ध हो गए। शिवसेना को अकेला 2.36 करोड़ रुपए का चंदा मिला जबकि एसपी को 1.1 9 करोड़ रुपए पर ही संतोष करना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि आम आदमी पार्टी इस सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। इसे कॉर्पोरेट स्रोतों की तुलना में इंडिविजुअल चंदा अधिक मिला।

क्षेत्रीय दलों के चंदे का पैटर्न राष्ट्रीय दलों से भिन्न है। पहले के एक रिपोर्ट ने सुझाव दिया कि चुनावी ट्रस्ट के इस्तेमाल के ज़रिए कॉरपोरेट घराने राष्ट्रीय पार्टियों को अपना पैसा देते हैं। साल 2016-17 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए बेहद पसंदीदा रही जिसने क़रीब 513 करोड़ रुपए की भारी रक़म दान की। इस पार्टी को केवल दो चुनावी ट्रस्टों के माध्यम से 53 प्रतिशत चंदा दिए गए। ये ट्रस्ट थे सत्य इलेक्टोरल ट्रस्ट और भद्रम जनहित शालिका ट्रस्ट।

सत्य इलेक्टोरल ट्रस्ट ने बीजेपी को 251.22 करोड़ रुपए दान किए जबकि भद्रम जनहित शालिका ट्रस्ट ने पार्टी को 30 करोड़ रुपये दिए। दिलचस्प बात यह है कि साल 2013 में बनाई गई सत्य इलेक्टोरल ट्रस्ट हाल के वर्षों में बीजेपी को सबसे ज़्यादा चंदा दिया है।

सत्य इलेक्टोरल ट्रस्ट जिसने अपना नाम प्रूडेंट ट्रस्ट में बदल दिया है इसने डीएलएफ और हीरो ग्रुप जैसे कई समूहों से योगदान मिला। ये ट्रस्ट साल 2013 में दूरसंचार कंपनी भारती एंटरप्राइजेज ग्रुप द्वारा पंजीकृत था लेकिन इसका दावा है कि वह स्वतंत्र है। इसी तरह भद्रम जनहित शालिका ट्रस्ट जिसने बीजेपी को 30 करोड़ रुपए का चंदा दिया था वह पहले एसआईएल कर्मचारी कल्याण ट्रस्ट के नाम से जाना जाता था।

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