NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
क्या ऐसे होगा स्वस्थ भारत का निर्माण ?
मिड-डे मील का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सही पोषण युक्त भोजन उपलब्ध करवाना है ताकि कोई बच्चा कुपोषण का शिकार ना हो, लेकिन ये विडंबना ही है कि इस योजना के चलते ना जाने अब तक कई बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
सोनिया यादव
24 Aug 2019
mid day meal
Image courtesy: NDTV

बच्चे देश का भविष्य होते हैं और इसी भविष्य को संवारने के लिए देश भर के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को सही पोषण युक्त भोजन उपलब्ध करवाना है ताकि कोई बच्चा कुपोषण का शिकार ना हो और स्वस्थ भारत का निर्माण हो सके। लेकिन ये विडंबना ही है कि इस योजना के होने के बावजूद अब तक कितने बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

एनडीटीवी की खबर के अनुसार हाल ही में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक सरकारी स्कूल में लगभग 100 छात्रों को मिड-डे मील के तौर पर रोटी और नमक बांटा गया। वीडियो में बच्चे स्कूल के बरामदे में फर्श पर बैठे हैं और वे नमक के साथ रोटियां खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस खबर ने एक बार फिर पूरी व्यवस्था को सवालों के कठघरे में ला खड़ा किया है। आखिर बच्चों को पौष्टिक आहार के बजाय नमक और रोटी कैसे दिया जा सकता है?

इस मामले पर मिर्जापुर के जमालपुर ब्‍लॉक निवासी राजू ने न्यूज़क्लिक से कहा, ‘यहां स्कूलों में बहुत बुरे हालात हैं। कभी बच्चों को खाने में नमक-रोटी तो कभी नमक-चावल भी दे देते हैं। जो कभी-कभी दूध आता है, वो बांटा ही नहीं जाता। बच्चों के लिए केले भी आते हैं लेकिन वो कभी नहीं दिए जाते।’

ग्रामिणों का कहना है कि मिड डे मील का खाना स्कूल प्रशासन के लोग अपने घर ले जाते हैं, उसे बेचकर पैसे कमाते हैं। बच्चों को नमक-रोटी या पानी जैसी दाल ही खाने के नाम पर दिया जा है। 

इस संबंध में एक जांच अधिकारी ने न्यूज़क्लिक को नाम ना बताने की शर्त पर बताया, ‘शुरुआती जांच में घटना सही पाई गई है और इसमें स्कूल के शिक्षक प्रभारी और ग्राम पंचायत के सुपरवाइजर की गलती लग रही है। कार्रवाई के तौर पर दोनों को निलंबित कर दिया गया है।’

उधर उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि वह दिसंबर 2018 के आंकड़ों के अनुसार राज्य भर में 1.5 लाख से अधिक प्राइमरी और मिडल स्कूलों में मिड-डे मील मुहैया करवा रही है। इस स्कीम के तहत एक करोड़ से अधिक बच्चों को योजना का लाभ दिया जाना है। उत्तर प्रदेश मिड-डे मील अथॉरिटी पूरे राज्य में इसकी देखरेख का काम करती है, उसकी वेबसाइट पर मिड-डे मील का मेन्यू दिया गया है। मेन्यू में दाल चावल, रोटी और सब्जी शामिल हैं। मील चार्ट के मुताबिक खास दिनों पर फल और दूध भी दिया जाना चाहिए।

इस बीच जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने बच्‍चों को नमक और रोटी बांटने के आरोपी शिक्षकों मुरारी और अरविंद त्रिपाठी को सस्‍पेंड कर दिया है। डीएम ने एबीएसए जमालपुर ब्रजेश सिंह को निलंबित करने की रिपोर्ट शासन को भेजी है। इसके अलावा BSA प्रवीण तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 

केंद्र सरकार के मुताबिक मिड-डे मील योजना को प्रति बच्चे को प्रति दिन न्यूनतम 450 कैलोरी प्रदान करने के हिसाब से डिजाइन किया गया था, इसमें प्रति दिन कम से कम 12 ग्राम प्रोटीन भी शामिल होना चाहिए। यह भोजन प्रत्येक बच्चे को वर्ष में कम से कम 200 दिन परोसा जाना चाहिए।

गौरतलब है कि मीड डे मील में प्रशासन की लापरवाही  का यह कोई पहला मामला नहीं है।  अक्सर भोजन में अनियमितताओं की खबरें सुर्खियां बनती हैं और फिर गायब हो जाती हैं लेकिन स्थिति जस की तस बनी रहती है।

इसी सप्ताह पुणेे में मध्यान भोजन खाने से कम से कम 21 बच्चों के बीमार होने की खबर सामने आई थी, कुछ ही दिन पहले छत्तीसगढ़ और कई अन्य राज्यों से भी गड़बड़ी के मामले उजागर हुए हैं।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुसार देशभर में तीन साल के दौरान मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) खाने से 900 से अधिक बच्चों के बीमार होने के मामले सामने आए हैं। मंत्रालय को इस अवधि के दौरान भोजन की घटिया गुणवत्ता के संबंध में 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 शिकायतें मिलीं थी।

जाहीर है पूरी योजना घोटाले के जाल में जकड़ी हुई है। बच्चों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता से कटौती कर अधिकारी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं लेकिन एक बड़ा सवाल सरकार की भूमिका पर भी उठता है। आखिर इतने मामलों के बाद भी कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है, जिससे भ्रष्ट अधिकारियों को सबक मिल सके।
 

dream to Build healthy India
mid day meal
malnutrition in children
Government schools
UttarPradesh
mirzapur
meal salt-rice
central government mid day meal scheme
human resource development ministry

Related Stories

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 

सरकार ने बताया, 38 हजार स्कूलों में शौचालयों की सुविधा नहीं

वायु प्रदूषण: दिल्ली में स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय 29 नवंबर से फिर खुलेंगे

कुपोषित बच्चों के समक्ष स्वास्थ्य और शिक्षा की चुनौतियां

ओडिशा: रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न-आय वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित

स्कूल तोड़कर बीच से निकाल दी गई फोर लेन सड़क, ग्रामीणों ने शुरू किया ‘सड़क पर स्कूल’ अभियान

मोदी जी! विकलांग को दिव्यांग नाम नहीं, शिक्षा का अधिकार चाहिए

यूपी: रोज़गार के सरकारी दावों से इतर प्राथमिक शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन

कोविड-19: बिहार में जिन छात्रों के पास स्मार्ट फोन और इंटरनेट नहीं, वे ऑनलाइन कक्षाओं से वंचित


बाकी खबरें

  • अभिलाषा, संघर्ष आप्टे
    महाराष्ट्र सरकार का एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर नया प्रस्ताव : असमंजस में ज़मीनी कार्यकर्ता
    04 Apr 2022
    “हम इस बात की सराहना करते हैं कि सरकार जांच में देरी को लेकर चिंतित है, लेकिन केवल जांच के ढांचे में निचले रैंक के अधिकारियों को शामिल करने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता”।
  • रवि शंकर दुबे
    भगवा ओढ़ने को तैयार हैं शिवपाल यादव? मोदी, योगी को ट्विटर पर फॉलो करने के क्या हैं मायने?
    04 Apr 2022
    ऐसा मालूम होता है कि शिवपाल यादव को अपनी राजनीतिक विरासत ख़तरे में दिख रही है। यही कारण है कि वो धीरे-धीरे ही सही लेकिन भाजपा की ओर नरम पड़ते नज़र आ रहे हैं। आने वाले वक़्त में वो सत्ता खेमे में जाते…
  • विजय विनीत
    पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव
    04 Apr 2022
    पत्रकारों की रिहाई के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए संयुक्त पत्रकार संघर्ष मोर्चा का गठन किया है। जुलूस-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आंचलिक पत्रकार भी शामिल हुए। ख़ासतौर पर वे पत्रकार जिनसे अख़बार…
  • सोनिया यादव
    बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
    04 Apr 2022
    बीएचयू में प्रशासन और छात्र एक बार फिर आमने-सामने हैं। सीएचएस में प्रवेश परीक्षा के बजाए लॉटरी सिस्टम के विरोध में अभिभावकों के बाद अब छात्रों और छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।
  • टिकेंदर सिंह पंवार
    बेहतर नगरीय प्रशासन के लिए नई स्थानीय निकाय सूची का बनना ज़रूरी
    04 Apr 2022
    74वां संविधान संशोधन पूरे भारत में स्थानीय नगरीय निकायों को मज़बूत करने में नाकाम रहा है। आज जब शहरों की प्रवृत्तियां बदल रही हैं, तब हमें इस संशोधन से परे देखने की ज़रूरत है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License