NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
क्या दिल्ली सच में डेंगू से लड़ने के लिए तैयार है ?
मिडिया रिपोर्ट के हिसाब से दिल्ली में मलेरिया के मरीजों की संख्या पिछले एक हफ्ते में 18 से बढ़कर 31 हो गई है, तो वहीं इस सीजन में डेंगू के 14 और चिकनगुनिया के 7 मामले अभी तक सामने आ चुके हैं।
मुकुंद झा
26 Jun 2019
dbc
image courtesy- hindustan times

दिल्ली में बारिश का मौसम शुरू होने वाला है। इस मौसम में दिल्ली में कई बीमारियां  होती है जैसे चिकनगुनिया ,डेंगू और मलेरिया।इसके बचाव के लिए मुख्यमंत्री केजरीवाल ने व्यापक कार्ययोजना की समीक्षा भी की है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को विभिन्न विभागों के सीनियर अधिकारियों के साथ मीटिंग भी की और कहा कि दिल्ली सरकार डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। लेकिन क्या सही में दिल्ली इन बीमारियों से लड़ने के लिए  तैयार है ? 

लेकिन ज़मीनी हकीकत तो कुछ और ही कह रही है। मानसून से पहले ही बीमारियों ने एकबार फिर से अपना सर उठान शुरू कर दिया है। मिडिया रिपोर्ट के हिसाब से  दिल्ली में मलेरिया के मरीजों की संख्या पिछले एक हफ्ते में 18 से बढ़कर 31 हो गई है, तो वहीं इस सीजन में डेंगू के 14 और चिकनगुनिया के 7 मामले अभी तक सामने आ चुके हैं।  

वहीं दूसरी ओर नगर निगम के अस्पतालों में जरूरी दवाओं की भरी कमी है। इसके आलावा मलेरिया ,डेंगू और चिकनगुनिया के खिलाफ ज़मीन पर  काम करने वाले घरेलू प्रजनन जांचकर्ताओं (डीबीसी) यानी वो लोगो जो घर-घर जाकर जाँच करते हैं,  उनका कहना है कि डेंगू और मलेरिया के मच्छर पनप नहीं रहे हैं। अगर कहीं पैदा हो रहे हैं तो वे, उनके रोकथाम के लिए भी कार्य करते हैं। इनकी संख्या अभी  3500  है जो कि जरूरत से कम है। जो कर्मचारी काम भी कर रहे हैं, उन्हें कई महीनों तक सैलरी नहीं मिलती है। इसके आलावा भी उनको कई तरह की समस्या है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वो हड़ताल पर जाएंगे।   

पिछले साल भी डीबीसी के 3500 कर्मचारी ने 17 दिनों तक नई दिल्ली स्थित एमसीडी मुख्यालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे थे। वे सभी अपना वेतन मांग  रहे थे, जिसका कि कई महीनों में भुगतान नहीं किया गया था और मांग कर रहे थे कि उन्हें स्थायी किया जाए।  लेकिन उस समय कर्मचारियों को अश्वशान दिया गया था कि उनकी सभी समस्याओ का हल कर दिया जाएगा लेकिन आज यह कर्मचारी उसी हालात में काम करने को मज़बूर हैं। डीबीसी  टीम जो शहर को डेंगू,मलेरिया और चिकनगुनिया की व्यापक महामारी से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, उनकी यह  स्थिति है कि एमसीडी प्रशासन या दिल्ली सरकार में इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। 
 
एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष देवन्द्र शर्मा ने कहा हम डीबीसी कर्मचारियों से उम्मीदी की जाती है कि हम दिल्ली की डेंगू और अन्य जानलेवा बीमारियों से रक्षा करे। वो हम करते भी है लेकिन जब हमारा और हमारे  परिवार का पेट खाली हो तो हम यह कैसे करे ? उन्होंने बतया कि  उन लोगो को  पिछले तीन महीने से सैलरी नहीं मिली थी। अभी अंदोलन के डर से एमसीडी ने  लोन लेकर केवल एक महीने का वेतन दिया है अभी दो महीने का वेतन वाकया है। 

इसके साथ ही उन्होंने कहा की डीबीसी कर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्या यह है की वो लोग लगभग 20-20  साल से काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोई पोस्ट (पद ) नहीं है। यानी  जैसे आप किसी भी विभाग में कार्य करते हैं तो आपकी एक पोस्ट होती है, आप फील्डवर्कर हैं या क्लर्क या और कुछ और लेकिन हमरे साथ ऐसा नहीं है। इसके अलावा एमसीडी कहती है कि हम उसके कर्मचारी नहीं है, जबकि हम सारे काम करते हैं, अपने काम के अलावा भी हमसे अन्य काम लिया जाता है जैसे अवैध होडिंग हटना, हाउस टेक्स वसूलना आदि। इसके बजूद भी हमरे साथ सौतेला व्यव्हार किया जाता है। क्यों ? उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी मांगों का हल जल्द नहीं किया गया तो वो एकबार फिर अंदोलन के लिए मज़बूर हो जाएंगे। 

ये हालत तो उन कर्मचारियों की है जो डेंगू और अन्य जानलेवा बीमारियों के रोकथाम के लिए कार्य करते हैं। इसके अलावा एमसीडी के सरकारी अस्पतालों के भी हालत गंभीर है। 

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अस्पतालों में फंड की कमी है और उनकी हालत कितनी खराब है ? इसका अंदाज़ इसी से लगता है कि एमसीडी के सबसे बड़े अस्पतालों में शामिल हिंदू राव हॉस्पिटल में जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया है, जबकि इमरजेंसी की दवाएं अब कुछ दिनों की ही बची हैं। 

 हालत इतनी खरब है अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक  ब्लड टेस्ट करने वाली किट भी नहीं है।   इस  अस्पताल में रोज़ाना 2 से 3 हजार मरीज रोज आते हैं . ऐसे में जब आने वाले दिनों में मॉनसून आएगा और उसके बाद मरीज़ों की संख्या तेज़ी से बढ़ेगी तो अस्पताल को चलाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।  ऐसा नहीं है की ये हालत सिर्फ अभी अभी कुछ दिनों पहले ही अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों ने कई महीनो से वतन न मिलाने को लकेर हड़ताल पर चले गए थे। 

dengue
chickenguniya
dengue in delhi
mosquito breeding workers
mcd hospital in delhi
mcd in dengue

Related Stories

दिल्ली में डेंगू के मामले बढ़े, अब तक 6 की मौत, स्वास्थ्य मंत्री ने की स्थिति की समीक्षा

बिहारः पटना में डेंगू का क़हर, एक रिटायर्ड अधिकारी की मौत

बिहार: वायरल फीवर की चपेट में बच्चे, कोविड और चमकी बुखार की तरह लाचार हेल्थ सिस्टम

डेंगू, बारिश से हुई मौतों से बेहाल यूपी, सरकार पर तंज कसने तक सीमित विपक्ष?

EXCLUSIVE :  यूपी में जानलेवा बुखार का वैरिएंट ही नहीं समझ पा रहे डॉक्टर, तीन दिन में हो रहे मल्टी आर्गन फेल्योर!

फ़िरोज़ाबाद में डेंगू, वायरल बुखार का क़हर; स्वास्थ्य सुविधा चरमाराई, बच्चे सबसे अधिक प्रभावित

ग्राउंड रिपोर्टः  यूपी में सवा सौ से ज्यादा बच्चों की मौत, अभी और कितनी जान लेगा 'मिस्ट्री फीवर'!

मथुरा में डेंगू से मरती जनता, और बांसुरी बजाते योगी!

'स्वच्छ भारत' के ढोल के बीच मलेरिया से मरता भारत

यूपी: बुखार से लगातार जाती बच्चों की जान, पश्चिम में डेंगू-मलेरिया तो पूर्वांचल में इंसेफ़ेलाइटिस का क़हर!


बाकी खबरें

  • Mothers and Fathers March
    पीपल्स डिस्पैच
    तख़्तापलट का विरोध करने वाले सूडानी युवाओं के साथ मज़बूती से खड़ा है "मदर्स एंड फ़ादर्स मार्च"
    28 Feb 2022
    पूरे सूडान से बुज़ुर्ग लोगों ने सैन्य शासन का विरोध करने वाले युवाओं के समर्थन में सड़कों पर जुलूस निकाले। इस बीच प्रतिरोधक समितियां जल्द ही देश में एक संयुक्त राजनीतिक दृष्टिकोण का ऐलान करने वाली हैं।
  • गौरव गुलमोहर
    यूपी चुनाव: क्या भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं सिटिंग विधायक?
    28 Feb 2022
    'यदि भाजपा यूपी में कम अंतर से चुनाव हारती है तो उसमें एक प्रमुख कारण काम न करने वाले सिटिंग विधायकों का टिकट न काटना होगा।'
  • manipur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान
    28 Feb 2022
    मणिपुर विधानसभा के लिए आज पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। मतदान का समय केवल शाम 4 बजे तक ही था। अपराह्न तीन बजे तक औसतन 67.53 फ़ीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
    28 Feb 2022
    हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
  • Sergey Lavrov
    भाषा
    यूक्रेन की सेना के हथियार डालने के बाद रूस ‘किसी भी क्षण’ बातचीत के लिए तैयार: लावरोव
    28 Feb 2022
    लावरोव ने यह भी कहा कि रूस के सैन्य अभियान का उद्देश्य यूक्रेन का ‘‘विसैन्यीकरण और नाजी विचारधारा से’’ मुक्त कराना है और कोई भी उस पर कब्जा नहीं करने वाला है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License