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भारत
राजनीति
क्या प्रदेश में बढ़ती बेरोज़गारी पर वसुंधरा राजे को 'गौरव' है ?
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी हर साल राज्य में 15 लाख रोज़गार पैदा करने की बात की थी। लेकिन सूत्र बताते हैं कि इस साल विधान सभा के बजट सेशन में एक सवाल के जवाब से पता चला कि पिछले पाँच साल सिर्फ 50,000 के आस पास ही नौकरियाँ पैदा की गयीं।
ऋतांश आज़ाद
13 Aug 2018
vasundhara raaje

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चुनावी प्रचार के लिए प्रदेश भर में 'गौरव यात्रा' पर निकली हुई हैं। यात्रा की शुरुवात में अमित शाह ने कहा था कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश भर में महिलाओं, युवाओं और सभी प्रदेशवासियों के लिए बहुत काम किया है। बीजेपी के प्रचार के लिए निकाली जा रही इस 'गौरव यात्रा' पर हाई कोर्ट ने सरकार  को नोटिस भेजा है। नोटिस की वजह है कि यह है कि सरकार पर आरोप है कि इस यात्रा में सरकारी पैसा और संसाधनों पर इस्तेमाल किया गया है। 
 
लेकिन मुख्य सावल यह है कि जिस विकास पर 'गौरव' दर्शाया जा रहा है, उनकी ज़मीनी हकीकत क्या है ? अगर राजस्थान में बेरोज़गारी की स्तिथि के बारे में बात की जाए इस 'गौरव ' की हवा निकलने में देर नहीं लगेगी।  
 
देश भर की तरह ही राजस्थान में भी बेरोज़गारी एक बहुत बड़ी समस्या बनकर उभरी है। जिस तरह मोदी ने सत्ता में आने से पहले यह वादा किया था कि वह युवाओं को हर साल 2 करोड़ नौकरियाँ देंगे। उसी तरह मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी हर साल राज्य में 15 लाख रोज़गार पैदा करने की बात की थी। लेकिन सूत्र बताते हैं कि इस साल विधान सभा के बजट सेशन में एक सवाल के जवाब से पता चला कि पिछले पाँच साल सिर्फ 50,000 के आस पास ही नौकरियाँ पैदा की गयीं। 
 
इसके साथ ही नेशन कॅरियर सर्विस हिसाब के हिसाब से राजस्थान में 8,80,144 लोगों ने खुदको बेरोज़गार पंजीकृत कराया था। लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गयी इस योजना के तहत सिर्फ 19,605 वेकेंसियां निकाली गयीं। इसका अर्थ है कि बेरोज़गारी के हिसाब से सिर्फ 2.2 % वेकेंसियां थीं। हमें यह भी समझना होगा कि बहुत से बेरोज़गार खुद को पंजीकृत नहीं कराते। 
 
 राजस्थान में मुख्य तौर पर लोग खेती और पशुपालन से जुड़े हुए हैं। कृषि संकट के बढ़ जाने की वजह से या तो लोग भारी संख्या में बेरोज़गार हो गए हैं। दूसरी तरफ निजी निवेश में भी कोई बढ़ौतरी नहीं हुई है और न ही सरकार ने औद्योगीकरण की तरफ कोई कदम बढ़ाये हैं। पिछली बार इसी मुद्दे बात करते हुए भाकपा माले के राज्य कमिटी सदस्य शंकर लाल चौधरी ने कहा था कि कि Rajasthan Eligibility Exam for Teachers एक परीक्षा हुआ करती थी, जिसमें योग्यता साबित करने के बाद छात्रों को नौकरियाँ मिल जाती थीं। लेकिन पिछले 4 सालों से REET के तहत भर्तियां नहीं की जा रही हैं, क्योंकि परिणामों में गफलत के चलते मामला हाई कोर्ट में चला गया। लेकिन चुनाव पास आने की वजह अब सरकार ने इस परीक्षा के तहत 35,000 वेकेंसियां निकाली हैं। राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन में भी बहुत खामियां होने की वजह से वहाँ भी भर्तियाँ नहीं हुई। 
 
राजस्थान में पिछले सालों में ग्रामीण रोज़गार की स्कीम नरेगा द्वारा भी रोज़गार नहीं पैदा किये जा रहे हैं। शंकर लाल चौधरी के हिसाब से "गाँवों में जेसीबी मशीने लगा रखी हैं, जिनके ज़रिये काम कराया जा रहा है। गाँव  के सरपंच, प्रधान , कांट्रेक्टर और स्थानीय राजनेता मनरेगा के अंतर्गत मिलने वाले वाले पैसे को इस तरह खर्च कर रहे हैं। जहाँ 100 लोगों को काम मिलना चाहिए वहाँ सिर्फ 6 -7 लोगों को काम मिलता है। बाकी के पैसे का हिसाब नहीं है। इसके अलावा आरक्षण के ज़रिये जो लोगों को नौकरियाँ मिलनी चाहिए वहाँ एक भी भरती नहीं हुई। "
 
सूत्रों के हिसाब से इसके साथ ही वसुंधरा राजे की सरकार ने करीब 30,000 सरकारी स्कूलों का एकीकरण कर दिया था। इस वजह से राज्य भर में  करीब 90,000 अध्यापकों और कर्मचारियों के खाली पद ख़तम हो गए थे। योजना यह भी थी कि 300 स्कूलों को निजी हाथों में सौंप दिया जाए। लेकिन भारी जन विरोध के बाद सरकार को इस फैसले के
से पीछे हटना पड़ा। 
 
 पिछले कई सालों से Rajasthan Administrative and Subordinate Services की परीक्षा में धांधलेबाजी के चलते एग्जाम हुआ ही नहीं है। इसमें करीब 1500 से 2000 वेकेंसियां निकलती थी। लेकिन पिछले कई सालों से इसका मामला कोर्ट में चल रहा था। लेकिन चुनाव नज़दीक आने की वजह से अब एग्जाम कराया जा रहा है। 
 
बेरोज़गारी का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस साल जनवरी में जब विधान सभा में पियोन की नौकरी के लिए 18 वेकेंसी निकली तो उसके लिए 12,453 ने इंटरव्यू दिया। इनमें से 129 इंजीनियर , 23 वकील , 393 पोस्ट ग्रेजुएट और CA शामिल थे। जबकि इस नौकरी के लिए सिर्फ 10 पास होने की आवश्यकता थी। दिलचस्प बात ये है कि 18 चुने गए लोगों में से एक नौकरी पाने वाले एक व्यक्ति बीजेपी के विधायक के बेटे थे। 
 
इस सब को देखते हुए सवाल उठता है कि क्या वसुंधरा राजे जी को बेरोज़गारी बढ़ाने पर 'गौरव है '?  अगर नहीं तो 'गौरव यात्रा' किस बात की। 

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rajasthan government
gaurav yatra
BJP

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