NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या सनातन संस्था और अभिनव भारत के बीच कोई संबंध है?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार गौरी लंकेश हत्या मामले की जांच कर रही कर्नाटक स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) द्वारा जमा किए गए दस्तावेज़ों में पहली बार सनातन संस्था और अभिनव भारत के बीच संबंधों को उजागर किया गया है।
कनिका कत्याल
11 May 2019
क्या सनातन संस्था और अभिनव भारत के बीच कोई संबंध है?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार गौरी लंकेश हत्या मामले की जांच कर रही कर्नाटक स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) द्वारा जमा किए गए दस्तावेज़ों में पहली बार सनातन संस्था और अभिनव भारत के बीच संबंधों को उजागर किया गया है। सनातन संस्था पर एक्टिविस्ट और बुद्धिजीवियों की हत्या में शामिल होने का आरोप है और अभिनव भारत पर 2006 के मालेगांव विस्फ़ोट सहित चार विस्फ़ोटों  का आरोप है। एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) महाराष्ट्र की चार्जशीट के अनुसार बीजेपी के टिकट पर भोपाल निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रही प्रज्ञा ठाकुर मालेगांव विस्फ़ोट में एक आरोपी हैं। हालांकि गौरी लंकेश हत्या मामले में जांच कर रही एसआईटी ने लंकेश की हत्या के लिंक या तो अभिनव भारत या ठाकुर से होने की बात से इनकार किया है।


अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ अभिनव भारत के सदस्यों ने बंदूकों, विस्फ़ोटकों और निशाना लगाने के तरीक़ों की ट्रेनिंग देने के लिए पूरे भारत में 19 शिविरों का आयोजन किया। इन शिविरों ने दर्जनों लोगों को प्रशिक्षण दिया जिन्हें सनातन संस्था की एक गुप्त इकाई द्वारा भर्ती किया गया था। इस संगठन पर बुद्धिजीवियों नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे, कन्नड़ विद्वान एमएम कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्याओं का आरोप था।

इन शिविरों में शामिल हुए चार गवाहों के साथ गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी ने 2011 से 2016 तक देश भर में आयोजित कई गुप्त शिविरों में अभिनव भारत के सदस्यों द्वारा बम बनाने के लिए प्राप्त किए गए प्रशिक्षण का विवरण दिया। एसआईटी जांच के अनुसार पाँच प्रशिक्षण शिविर जैसे 2011 में जालना, जनवरी 2015 में जालना, अगस्त 2015 में मंगलौर, नवंबर 2015 में अहमदाबाद और जनवरी 2016 में नासिक में अभिनव भारत के संदिग्धों द्वारा प्रशिक्षण लिए गए। इन गवाहों ने पाँच बम विशेषज्ञों के बारे में भी बताया जिसमें शिविरों में एक बाबा और चार गुरु शामिल थे। बाबा की पहचान सुरेश नायर के रूप में की गई जो 2007 के अजमेर दरगाह विस्फ़ोटों का एक आरोपी है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार कर्नाटक एसआईटी ने तीन अन्य बम विशेषज्ञों की पहचान संदीप डांगे, रामजी कलसांगरा और अश्विनी चौहान के रूप में की थी। एटीएस महाराष्ट्र की जांच के अनुसार मालेगांव विस्फ़ोट के लिए रामजी कलसांगरा को प्रज्ञा ठाकुर ने अपनी मोटरसाइकिल से विस्फ़ोटक पहुँचाया था। ये तीनों समझौता एक्सप्रेस मामले में घोषित अपराधी हैं। उनके नाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की वेबसाइट पर अपलोड की गई मोस्ट वांटेड सूचियों में हैं। पाँचवां बम विशेषज्ञ प्रताप हाजरा है जो पश्चिम बंगाल में एक अन्य हिंदूवादी संगठन भवानी सेना से जुड़ा है।

Demolishing democracy.jpg

11 साल से फ़रार रहे सुरेश नायर को गुजरात एटीएस ने नवंबर 2018 में गिरफ़्तार किया था। उस पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। शेष चार आरोपी जो कथित रूप से अभिनव भारत के सदस्य हैं और जिन्होंने इन लोगों को प्रशिक्षित किया है वे अभी भी फ़रार हैं।


मार्च 2017 में जयपुर की एक विशेष एनआईए अदालत ने अजमेर विस्फ़ोट में भूमिका को लेकर देवेंद्र गुप्ता और भावेश पटेल को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। अजमेर विस्फ़ोट मामले के आरोपी रहे असीमानंद द्वारा क़बूल किए जाने के आधार पर इन लोगों को गिरफ़्तार किया गया था।

हालांकि बाद में असीमानंद को एनआईए ने बरी कर दिया था लेकिन उनके क़बूलनामे ने एनआईए को संदीप डांगे, मेहुल, सुरेश भाई, रामचंद्र कालसरा, सुनील जोशी और भरत भाई के साथ देवेंद्र गुप्ता और भावेश पटेल तक पहुँचने में मदद की थी जो हैदराबाद के मक्का मस्जिद और 2006 के मालेगांव विस्फ़ोट मामले के आरोपी थे।

जयपुर अदालत ने सुरेश नायर की प्रमुख संदिग्ध के रूप में पहचान की थी और समझौता एक्सप्रेस विस्फ़ोट सहित चार आतंकी हमलों में फ़रार आरोपी संदीप डांगे और रामजी कलसांगरा के बारे में पूछताछ के लिए उसे हिरासत में रखा था।

डांगे और कलसंगारा दोनों पर 10 लाख रुपये का इनाम है।

rewards.jpg

एनआईए पर अपलोड की गई प्रारंभिक चार्जशीट के अनुसार स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी (मृतक), रामचंद्र कलसांगरा, विष्णु पटेल (फ़रार) और अन्य लोगों के साथ संदीप डांगे ने "बम का बदला बम" सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। चार्जशीट में उनके प्रशिक्षण पर भी विस्तार से लिखा गया है जो इंदौर से नई दिल्ली तक फैला है। प्रशिक्षण के बाद "प्रशिक्षण में हिस्सा लेने वालों ने हिंदू मंदिरों पर हुए हमला का बदला लेने के लिए मुस्लिम बहुल स्थानों और धार्मिक स्थलों पर हमला करने का फ़ैसला किया।"

फ़रवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने एमएम कलबुर्गी, गौरी लंकेश, नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्याओं के बीच संबंधों को बताया था और लंकेश हत्याकांड की जांच कर रहे एसआईटी को कलबूर्गी मर्डर मामले को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। इस जांच की निगरानी कर्नाटक उच्च न्यायालय की धारवाड़ पीठ द्वारा की जाएगी।

लंकेश हत्या मामले में गिरफ़्तार तीन लोग 40 वर्षीय श्रीकांत पांगरकर, महाराष्ट्र के शिवसेना के पूर्व पार्षद 26 वर्षीय शरद कालस्कर जो 2013 नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले में कथित शूटर है और एक मैकेनिक 29 वर्षीय वासुदेव सूर्यवंशी जिसने सनातन संस्थाओं के लिए कथित तौर पर मोटरसाइकिल चुरा ली थी। इन संस्थाओं का संबंध 2015 और 2017 के बीच बुद्धिजीवियों और स्वतंत्र विचारकों की हत्याओं से जुड़ा है। इन आरोपियों ने जो विवरण दिया था उसके आधार पर सुरेश नायर उर्फ़ "गुरुजी" की पहचान हुई थी।

gauri lankesh
Sanathan Sanstha
Abhinav Bharat
MM Kalburgi
narendra dabholkar
Govind Pansare

Related Stories

वे दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी या गौरी लंकेश को ख़ामोश नहीं कर सकते

दाभोलकर हत्याकांड की सुनवाई जल्द शुरू होगी; पुणे कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए

गौरी लंकेश : आँखें बंद कर जीने से तो अच्छा है आँखें खोलकर मर जाना

सताए हुए लोगों की ‘अक्का’ बन गई थीं गौरी

अगर हम अपनी आवाज़ उठाएंगे, तो गौरी की आवाज़ बुलंद होगी

"वैज्ञानिक मनोवृत्ति" विकसित करने का कर्तव्य

दाभोलकर हत्याकांड : उच्च न्यायालय ने आरोपी विक्रम भावे को जमानत दी

अमित शाह के बीमार होने की कामना से हर किसी को सावधान क्यों रहना चाहिए

2020 में भी बोल रही हैं गौरी

देश में एक साथ उठ खड़े हुए 500 से ज़्यादा महिला, LGBTQIA, छात्र-शिक्षक, किसान-मज़दूर संगठन


बाकी खबरें

  • स्मार्ट सिटी में दफन हो रही बनारस की मस्ती और मौलिकता
    विजय विनीत
    स्मार्ट सिटी में दफन हो रही बनारस की मस्ती और मौलिकता
    22 Aug 2021
    बनारस का मज़ा और मस्ती लुप्त होती जा रही है। जनता पर अनियोजित विकास जबरिया थोपा जा रहा है। स्मार्ट बनाने के फेर में इस शहर का दम घुट रहा है... तिल-तिलकर मर रहा है। बनारस वह शहर है जो मरना नहीं, जीना…
  • विपक्षियों में सहमति, योगी की राजनीति और गडकरी का नेहरू-प्रेम
    न्यूज़क्लिक टीम
    विपक्षियों में सहमति, योगी की राजनीति और गडकरी का नेहरू-प्रेम
    21 Aug 2021
    सत्ताधारी भाजपा यूपी के चुनावों की तैयारी में अभी से जुट गयी है. वह इन दिनों तालिबान पर सियासी-खेल 'खेलने' में लगी है. जहां किसी खास व्यक्ति के किसी बयान में वह तनिक गुंजायश देखती है, फौरन ही समूचे…
  • ‘ईश्वर के नाम पर’ शपथ संविधान की भावना के विरुद्ध
    वसंत आदित्य जे
    ‘ईश्वर के नाम पर’ शपथ संविधान की भावना के विरुद्ध
    21 Aug 2021
    संविधान कहता है कि राज्य को विचार और कर्म में धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए और यही बात राजनीतिक पार्टियों के लिए भी लागू होती है।
  • मोदी सरकार ने दिखाया है कि हमें विभाजन के दर्द को किस तरह याद नहीं करना चाहिए
    स्मृति कोप्पिकर
    मोदी सरकार ने दिखाया है कि हमें विभाजन के दर्द को किस तरह याद नहीं करना चाहिए
    21 Aug 2021
    भारत को विभाजन को याद करने की जरूरत है, लेकिन मोदी सरकार ने इसके लिए ऐसी तारीख़ चुनी, जिसका मक़सद ध्रुवीकरण को बढ़ावा देना और उनकी पार्टी को चुनावी फायदा दिलाना है। ना कि इसके ज़रिए शांति और…
  • भारत अमेरिका की अफ़गान नीति का पिछलग्गू न बन कर, स्थानीय ताकतों के साथ मिलकर काम करे
    अमिताभ रॉय चौधरी
    भारत अमेरिका की अफ़गान नीति का पिछलग्गू न बन कर, स्थानीय ताकतों के साथ मिलकर काम करे
    21 Aug 2021
    ‘किसी भी सूरत में, तालिबान शासित अफगानिस्तान भारत के लिए एक बेहद चिंताजनक विषय बना रहने वाला है, जिसका वहां करोड़ों डॉलर मूल्य का निवेश लगा हुआ है...’
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License