NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
'चाबी छीन ली गयी, धमकी दी गयी': जयपुर हाईवे पर बढ़ायी गयी सुरक्षा की क़ीमत अदा करते ट्रक ड्राइवर
फ़ंसे हुए ट्रक डाइवर का आरोप था कि हरियाणा पुलिस ने उनसे आगे नहीं बढ़ने के लिए कहा। इस बीच, किसान उन्हें भोजन और आश्रय मुहैया करा रहे हैं।
रौनक छाबड़ा
08 Jan 2021
राजस्थान-हरियाणा सीमा पर तैनात इन ट्रकों की कतार को देखा जा सकता है।
राजस्थान-हरियाणा सीमा पर तैनात इन ट्रकों की कतार को देखा जा सकता है। फ़ोटो: रौनक छाबड़ा

शाहजहांपुर/ अलवर: दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे स्थित किसान विरोध स्थल पर फ़ंसे ट्रक ड्राइवरों ने पिछले कुछ दिनों से हरियाणा पुलिस द्वारा “बढ़ायी गयी सुरक्षा” की आड़ में “अनावश्यक उत्पीड़न” का आरोप लगाया। हालांकि, पुलिस ने इस आरोप से इनकार किया है।

ज़्यादातर ड्राइवरों ने बताया कि वे दो दिनों से विरोध स्थल पर फंसे हुए हैं, गुरुवार को  उन्होंने राज्य पुलिस को भारी वाहनों की किसी भी तरह की आवाजाही की अनुमति नहीं देने के लिए दोषी ठहराया। उन्होंने बताया कि उन्हें एक मामूली यू-टर्न या बैरियर से गुज़रने की अनुमति तक नहीं दी जा रही है, यहां तक कि हाईवे रूट के साथ कई डाइवर्जन भी बना दिये गये हैं।

ट्रक वालों ने इस तरह "जबरदस्ती" किये जाने का आरोप लगाया, क्योंकि उनकी चाबियां छीन ली गयीं और उन्हें इस बात की धमकियां दी गयीं कि अगर किसान दिल्ली की तरफ़ बढ़ने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए उनके ट्रकों का इस्तेमाल पुलिस सुरक्षा के लिए बैरिकेड्स के तौर पर किया जा सकता है।

जब विवादित कृषि क़ानूनों के विरोध में किसानों के दिल्ली मार्च को हरियाणा पुलिस द्वारा रोक दिया गया था, तब से  मुख्य रूप से राजस्थान और हरियाणा के दक्षिणी ज़िलों से आने वाले ये किसान दिसंबर के मध्य से ही राष्ट्रीय राजधानी से 130 किमी दूर दोनों राज्यों को जोड़ने वाले इस बॉर्डर प्वाइंट पर ही रह रहे हैं।

तब से मुंबई की तरफ़ जाने वाले एक रास्ते और फिर बाद में दिल्ली को जयपुर से जोड़ने वाले दोनों ही हाईवे को बंद कर दिया गया है।

इस नाकेबंदी के लिए अधिकारियों की तरफ़ से जो कुछ इस्तेमाल किया जा रहा है,उनमें न सिर्फ़ पीले बैरिकेड्स हैं, बल्कि इसके लिए वे पत्थर, बोल्डर, भारी शिपिंग कंटेनरों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, इस तरह के ये मंज़र राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाक़े में स्थित सिंघू टिकरी जैसे दूसरे  किसान विरोध स्थलों से अलग नहीं है।

एक ट्रक ड्राइवर, भंवर सिंह ने बताया कि जिस समय कुछ पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ "छल" किया,उस समय वह मानेसर में मारुति सुजुकी कारखाने में ऑटो पार्ट्स देने के बाद गुजरात के अहमदाबाद वापस जा रहे थे।

34 वर्षीय इस शख़्स ने न्यूज़क्लिक को बताया, “दोपहर का समय था और मैं अपनी आगे के सफ़र के लिए डीज़ल भराने के लिए पास आ गया था। कुछ पुलिस कर्मियों ने विरोध स्थल तक लिफ़्ट के लिए मुझसे संपर्क किया। इसके बदले उन्होंने मुझे बैरिकेड्स से गुज़र जाने की अनुमति देने का वादा किया। जब हम यहां पहुँचे, तो उन्होंने मुझे कहा कि जबतक आगे बढ़ने के लिए नहीं कहा जाए, मैं यहीं रुका रहूं।”  

इस सप्ताह मंगलवार को यह सब उस समय हुआ, जब किसानों का एक जत्था पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ने और दिल्ली की ओर बढ़ने में कामयाब रहा। कथित तौर पर पुलिस की तरफ़ से आंसू गैस और मिर्ची के हथगोले इस्तेमाल करने के बाद उन्हें रोक दिया गया था।

इसके बाद से दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है,राष्ट्रीय राजधानी तक जाने वाले इस इलाक़े के कई चौराहों पर पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया है।

विरोध स्थल पर इस तरह के दबाव का सामना करने वालों में सिर्फ़ सिंह ही नहीं हैं। दिल्ली से जयपुर के लिए सामान लेकर सफ़र कर रहे 32 वर्षीय विजय साहनी ने बताया,“पुलिस हमें न तो गुज़रने दे रही है और न ही यू-टर्न लेने दे रही है। हम सभी को बिना किसी कारण के चुपचाप यहां रुकने के लिए कहा गया है।”

35 वर्षीय ख़ालिद ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र में एक डिलीवरी के लिए हरियाणा के सांपला से चलने के पहले इस बैरिकेडिंग के बारे में पूरी तरह पता ही नहीं था, हालांकि उन्हें इतना ज़रूर पता था कि किसानों ने दिल्ली के आसपास राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया है।

ख़ालिद ने न्यूज़क्लिक को बताया, “मैं कल (6 जनवरी) दोपहर यहां पहुंचा और यहां कुछ 40-50 ट्रक देख सकता था। मुझे लगा कि यह ट्रैफिक जाम विरोध के चलते है।”

लेकिन, जैसे ही ख़ालिद ने यू-टर्न लेने और दूसरे रास्ते से जाने की कोशिश की,तो ख़ालिद बताते हैं, "एक पुलिस कर्मी मेरे पास आया और ज़बरदस्ती मेरी चाबी छीन ली।" उन्होंने आगे बताया, “जब मैंने विरोध किया, तो उन्होंने "धमकी दी" कि मुझे ट्रक की चाबी "अगले 10 दिनों तक वापस नहीं मिलेगी।"

हालांकि, बावल के डीएसपी, राजेश कुमार ने विरोध स्थल पर फ़ंसे ट्रकों में पुलिस के हाथ होने से इनकार किया। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया, “ट्रक ड्राइवर यहां हो रहे विरोध के कारण ट्रैफिक जाम में फ़ंसे हुए हैं…जो कोई यहां से निकल पाने में सक्षम है, वह अपने वाहन को हटा रहा है। हम किसी को रोक नहीं रहे हैं। ”  

ट्रक की चाबियां छीने जाने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा: “पुलिस ऐसा क्यों करेगी ? इनको कोइ भड़का रहा है।"

लेकिन, राजस्थान में अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के नेता, अमरा राम ने इस मुद्दे पर एक अलग ही प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हम पिछले 5-6 दिनों से कम से कम 50-60 ट्रकों को यहां फ़ंसे हुए देख रहे हैं। इससे पहले ऐसा नहीं था।”

कुमार ने जो दावा किया था, उससे यह बात अलग थी, उनके मुताबिक़ तो यह कथित जाम एक "रोज़मर्रा" की घटना है।

राम ने न्यूज़क्लिक को बताया कि विरोध स्थल से किसान नेताओं ने पहले बावल के पुलिस अधीक्षक से संपर्क साधा था, उनसे ट्रक ड्राइवरों को "परेशान" नहीं करने का आग्रह किया गया था, लेकिन, कोई फ़ायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से बेकार की बात है। इन ड्राइवरों का क्या दोष है? उन्हें अपने ट्रकों को ले जाने की अनुमति दी जानी चाहिए। हमने मंच से इसके बारे में ऐलान भी किया था, लेकिन पुलिस ने नहीं सुनी।”

इस बीच, प्रदर्शनकारियों के लिए लंगर दिन-रात तैयार किए जा रहे हैं, किसानों की तरफ़ से ट्रक ड्राइवरों के लिए कम से कम भोजन का ध्यान रखा जा रहा है।राम ने बताया, “हम उन ड्राइवरों को भी आश्रय दे रहे हैं, जिन्हें इसकी ज़रूरत है। ”

हालांकि, इस मुश्किल वक़्त में यह बेहद सराहनीय क़दम है, लेकिन 28 वर्षीय चिंतित हनुमान के चेहरे पर इस राहत का कोई निशान नहीं दिख रहा है।उन्होंने कहा, “मेरे पास जयपुर के लिए एक जरूरी डिलीवरी है। मेरा मालिक मुझे हर घंटे इस बात को पूछने के लिए फ़ोन कर रहा है कि मैं यहां से निकल पाने में सफल रहा या नहीं।”

हनुमान हरियाणा के पानीपत से आ रहे थे और "अब 48 घंटे से ज़्यादा समय से" उन्हें विरोध स्थल पर रोका हुआ है।

उन्होंने गुरुवार दोपहर को न्यूज़क्लिक को बताया, "अभी बोला है कि 5 बजे तक जाने देंगे।मुझे उम्मीद है कि वे ऐसा करने देंगे। वैसे भी,अब इसका कोई मतलब नहीं रह गया है, क्योंकि मैं पहले ही देर हो चुका हूं। मुझे इसके लिए दंड भुगतना होगा।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

‘Keys Snatched, Threatened’: At Jaipur Highway, Truck Drivers Pay Price for Enhanced Security

farmers
farmers protest
delhi-jaipur highway
Truck Drivers
haryana police
All India Kisan Sabha

Related Stories

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल


बाकी खबरें

  • aicctu
    मधुलिका
    इंडियन टेलिफ़ोन इंडस्ट्री : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ख़राब नियोक्ताओं की चिर-परिचित कहानी
    22 Feb 2022
    महामारी ने इन कर्मचारियों की दिक़्क़तों को कई गुना तक बढ़ा दिया है।
  • hum bharat ke log
    डॉ. लेनिन रघुवंशी
    एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता
    22 Feb 2022
    सभी 'टूटे हुए लोगों' और प्रगतिशील लोगों, की एकता दण्डहीनता की संस्कृति व वंचितिकरण के ख़िलाफ़ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगा, जो इस प्रणाली से लाभ उठाते…
  • MGNREGA
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ग्रामीण संकट को देखते हुए भारतीय कॉरपोरेट का मनरेगा में भारी धन आवंटन का आह्वान 
    22 Feb 2022
    ऐसा करते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र ने सरकार को औद्योगिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर आने की उसकी उम्मीद के खिलाफ आगाह किया है क्योंकि खपत की मांग में कमी से उद्योग की क्षमता निष्क्रिय पड़ी हुई है। 
  • Ethiopia
    मारिया गर्थ
    इथियोपिया 30 साल में सबसे ख़राब सूखे से जूझ रहा है
    22 Feb 2022
    इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 70 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है क्योंकि लगातार तीसरी बार बरसात न होने की वजह से देहाती समुदाय तबाही झेल रहे हैं।
  • Pinarayi Vijayan
    भाषा
    किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन
    22 Feb 2022
    विजयन ने राज्य विधानसभा में कहा, ‘‘केरल विभिन्न क्षेत्रों में कहीं आगे है और राज्य ने जो वृद्धि हासिल की है वह अद्वितीय है। उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक हितों के साथ की गयी अनुचित टिप्पणियों के तौर पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License