NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
खोरी बेदखली मामला: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक महीने बाद मंडराते भय के बादल
यहां के निवासियों का आरोप है कि गांव के बाहर बुलडोजरों की कतार को देखकर यहां पर भय का माहौल व्याप्त है। वहीं दूसरी तरफ हरियाणा सरकार के पास बेदखली के बारे में अदालत को सूचित करने के लिए करीब दो हफ्ते का ही समय बचा हुआ है।
सुमेधा पाल
08 Jul 2021
खोरी बेदखली मामला: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक महीने बाद मंडराते भय के बादल

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में खोरी गांव के 1 लाख से अधिक निवासियों को वहां से बेदखल करने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के एक महीने बाद भी निवासियों ने अपने संघर्ष को जारी रखा हुआ है क्योंकि वे सरकार की ओर से मिल रहे भय और उदासीनता से जूझ रहे हैं।

दिल्ली-हरियाणा सीमा पर स्थित इस गांव में 10,000 से अधिक घर हैं और अब इन्हें बिजली और पानी की आपूर्ति से मरहूम कर दिया गया है। राज्य सरकार को छह हफ्ते की अवधि पूरी होने पर 27 जुलाई तक सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी है। पिछले एक महीने से लगातार विरोध प्रदर्शनों ने जहां एक तरफ यहां के निवासियों के बीच में उम्मीद जगाए रखी है, वहीं कल शाम गांव की सीमाओं पर 10 बुलडोजरों की कतारबद्ध पंक्ति ने उनके भीतर एक बार फिर से भय और दहशत के माहौल को पैदा कर दिया है। इसके साथ ही यहां के निवासियों का दावा है कि जैसे ही वे इस बारे में मुहं खोलते हैं और विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत करते हैं तो पुलिस द्वारा उन्हें लगातार हैरान-परेशान किया जाता है।

वर्तमान स्थिति के बारे में विवरण देते हुए गांव की एक निवासी सपना गुप्ता ने न्यूज़क्लिक को बताया “हम नियमित तौर पर विरोध सभाएं करते रहते हैं और यह हमारी एकता है जिसने हमें अभी तक महफूज बनाये रखा है। सरकार ड्रोन के जरिये इस इलाके की निगरानी कर रही है। कल तो उन्होंने इलाके में बुलडोजर तक भेज दिए। हालांकि, लोगों के घरों से बाहर निकलने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हमारा यह दृढ मत है कि यह हमें अपने घरों को छोड़ने के लिए डराने-धमकाने के लिए किये जा रहे कई उपायों में से ही एक और कोशिश है। पूर्व में कई लोग यहां से पलायन कर गये थे, लेकिन वे अब वापस आ गये हैं और अपने आवास और जीवन के अधिकार के लिए संघर्ष करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

30 जून को अंबेडकर पार्क में निवासियों के जुटान पर कार्रवाई में लोगों पर लाठी चार्ज किया गया था और उन्हें हिरासत में भी ले लिया गया था। निवासियों ने 7 जुलाई को उसी पार्क में एक और मीटिंग आयोजित की, जिसमें उन्होंने वर्तमान में जारी कार्रवाई के बारे में अपने-अपने अनुभव को साझा किया। 

इस बीच जहां एक ओर प्रतिरोध का सिलसिला जारी है, खोरी के निवासियों को आशंकाओं के बीच में जीवन बिताना पड़ रहा है। एक निवासी शमशेर ने अपनी आपबीती का वर्णन करते हुए कहा “मुझे आज लगातार दूसरी बार पुलिस ने पकड़ लिया। सादी वर्दी पहने पुरुषों ने मुझे हिरासत में लेने और अपने साथ ले जाने की कोशिश की। 30 तारीख को भी विरोध प्रदर्शन के बाद मुझे हिरासत में ले लिया गया था।”

उनका कहना था “आज जब उन्होंने मुझसे संपर्क साधा, तो मुझे आशंका थी कि एक बार फिर से मुझे पुलिस थाने ले जाया जायेगा। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि क्यों मुझे बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। इस तथ्य के बावजूद कि मैं यहां के निवासियों का प्रतिनिधित्व करता आ रहा हूं और सरकार के साथ हमारी बेदखली को रोकने के लिए समाधान तलाशने के लिए लगातार बातचीत में भी शामिल हूं।”

कथित तौर पर शमशेर सहित सात सदस्यों के एक प्रतिनिधि समूह ने 4 जुलाई को हरियाणा भवन में हरियाणा सरकार के अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री के ओएसडी अजय गौड़, तहसीलदार यशवंत सिंह और बड़कल के एसपी सुखबीर सिंह शामिल थे। निवासियों की मांग थी कि किसी भी फैसले से पहले एक सर्वेक्षण किया जाए और इस बात का आश्वासन मांगा कि इलाके को ध्वस्त नहीं किया जायेगा।

इसके बाद, 6 जुलाई को खोरी के 500 से अधिक निवासी जंतर-मंतर पर भी इकट्ठा हुए थे और वे प्रधानमंत्री के आवास का घेराव करने का मन बना रहे थे। अगले कुछ दिनों के लिए भी इसी प्रकार के विरोध प्रदर्शन की तैयारी की गई है।

अदालत की ओर से अरावली पर्वत श्रृंखला के हरित आवरण को बचाने की मुहिम में आवासीय कॉलोनी को खाली करने और ध्वस्त करने के आदेश दिए गए थे। अदालत ने अपने 7 जून के फैसले में हरियाणा सरकार के अधिकारियों से छह हफ्ते के भीतर इस मामले में अनुपालन रिपोर्ट को दाखिल करने के लिए कहा था, जिसमें शीर्षस्थ अदालत के फैसले के बाद चार या उससे अधिक व्यक्तियों के एक स्थान पर इकट्ठा होने पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए गांव में धारा 144 लागू कर दी गई थी। 

जहां अदालत ने जमीन को खाली कराने आदेश दिया है, वहीं गांव के निवासी जो मुख्यतया प्रवासी श्रमिक हैं, वे ऐसे समय में अपने सर पर छत को खो देने की चिंता में घुल रहे हैं, जब महामारी पहले से ही कई जिंदगियों और आजीविका के साधनों को छीन चुकी है। 

इस आदेश के विरोध के प्रयास में और पुनर्वासन एवं आवास की मांग करते हुए निवासियों ने 11 जून को एक विरोध प्रदर्शन का भी आयोजन किया था। हालांकि, 100 के करीब लोगों को अपनी आवाज उठाने के आरोपों का सामना करना पड़ा, जबकि अन्य को हिरासत में ले लिया गया था। यहां के निवासियों के खिलाफ लगाये गए आरोपों में आईपीसी की धारा 109, 114, 147, 149, 186, 188, 269, 283, 341 और 506 सहित आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 61 शामिल है। आरोप है कि यहां के निवासियों ने मुख्य सड़क पर जमा होकर राज्य सरकार और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की थी।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Khori Evictions: A Month After Supreme Court Orders, Fears Loom Large

Khori Demolition
Eviction
Aravalli Eviction
Disaster Management Act
Right to Housing
Haryana Government
Supreme Court on Khori Demolition

Related Stories

कार्टून क्लिक: ये दुःख ख़त्म काहे नहीं होता बे?

सभी के लिए घर : एक बुनियादी जरूरत, लेकिन ग्रामीण भारत में ज़्यादातर लोगों के लिए दूर की कौड़ी

100 करोड़ वैक्सीन डोज़ : तस्वीर का दूसरा रुख़

बार-बार विस्थापन से मानसिक, भावनात्मक व शारीरिक रूप से टूट रहे आदिवासी

तमिलनाडु: दलदली या रिहायशी ज़मीन? बेथेल नगर के 4,000 परिवार बेदखली के साये में

फरीदाबाद की संजय नगर बस्ती पर रेलवे ने चलाया बुलडोज़र, उजड़ गए बरसों से रह रहे दलित मज़दूर परिवार

खोरी गांव पर उच्चतम न्यायालय: जिनके घर तोड़े गए, उनके पुनर्वास के लिए जल्द कदम उठाए हरियाणा सरकार"

खोरी गांव में चल रही तोड़-फोड़ की कार्रवाई के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुई प्रेस कांफ्रेंस

खोरी गांव में घरों का तोड़े जाना जारी, राजद्रोह क़ानून पर मुख्य न्यायाधीश के अहम सवाल और अन्य ख़बरें

खोरी गांव : पुलिसिया दमन के बीच आज भी जारी रहा तोड़-फोड़, हरियाणा सरकार की पुनर्वास योजना हवा हवाई


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़, यूनियन ने बताया ऐतिहासिक निर्णय
    26 Apr 2022
    न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति अभय एस. ओका की पीठ ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र भी वैधानिक कर्तव्यों का पालन करते हैं तथा वे सरकार की विस्तारित इकाई बन गए हैं। पीठ ने कहा कि 1972 (ग्रेच्युटी का…
  • नाइश हसन
    हलाल बनाम झटका: आख़िर झटका गोश्त के इतने दीवाने कहां से आए?
    26 Apr 2022
    यह बहस किसी वैज्ञानिक प्रमाणिकता को लेकर कतई नहीं है। बहस का केन्द्र हिंदुओं की गोलबंदी करना है।
  • भाषा
    मस्क की बोली पर ट्विटर के सहमत होने के बाद अब आगे क्या होगा?
    26 Apr 2022
    अरबपति कारोबारी और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क की लगभग 44 अरब डॉलर की अधिग्रहण बोली को ट्विटर के बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। यह सौदा इस साल पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए अभी शेयरधारकों और अमेरिकी…
  • भाषा
    कहिए कि ‘धर्म संसद’ में कोई अप्रिय बयान नहीं दिया जाएगा : न्यायालय ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव से कहा
    26 Apr 2022
    पीठ ने कहा, “हम उत्तराखंड के मुख्य सचिव को उपरोक्त आश्वासन सार्वजनिक रूप से कहने और सुधारात्मक उपायों से अवगत कराने का निर्देश देते हैं।
  • काशिफ काकवी
    मध्य प्रदेश : मुस्लिम साथी के घर और दुकानों को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद अंतर्धार्मिक जोड़े को हाईकोर्ट ने उपलब्ध कराई सुरक्षा
    26 Apr 2022
    पिछले तीन महीनों में यह चौथा केस है, जहां कोर्ट ने अंतर्धार्मिक जोड़ों को सुरक्षा उपलब्ध कराई है, यह वह जोड़े हैं, जिन्होंने घर से भाग कर शादी की थी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License