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लोकतंत्र समर्थक, भूमि तथा पर्यावरण कार्यकर्ता एशिया में सबसे ज़्यादा असुरक्षितः रिपोर्ट
एशियन फ़ोरम फ़ॉर ह्यूमन राइट्स एंड डेवलपमेंट की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि एशिया महाद्वीप मानवाधिकार कार्यकर्ताओं (एचआरडी-मानवाधिकार रक्षकों) के लिए ख़तरनाक क्षेत्र बना हुआ है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Jun 2019
लोकतंत्र समर्थक, भूमि तथा पर्यावरण कार्यकर्ता एशिया में सबसे ज़्यादा असुरक्षितः रिपोर्ट

रोज़ाना मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर हमले की ख़बरों के बीच हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया महाद्वीप मानवाधिकार कार्यकर्ताओं (एचआरडी-मानवाधिकार रक्षकों) के लिए ख़तरनाक क्षेत्र बना हुआ है।

एशियन फ़ोरम फ़ॉर ह्यूमन राइट्स एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट "डिफ़ेंडिंग इन नंबर्स" में हिंसा तथा दुर्व्यवहार के 688 मामलों को शामिल किया गया है जो 2017 और 2018 के बीच 18 देशों के मानवाधिकार संगठनों, स्थानीय समुदायों और मीडिया घरानों के लगभग 4,854 लोग प्रभावित हुए।

मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मिशेल फ़ोर्स्ट ने कहा, “पूरे एशिया में मानव अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने को लेकर एचआरडी को धमकी दी जाती है, परेशान किया जाता है, सताया जाता है और कभी कभी तो उन्हें मार ही दिया जाता है। मानवाधिकार रक्षकों के लिए संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र में दर्ज उनके कई अधिकारों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है। हालांकि वर्ष 2018 में इस घोषणापत्र के अपनाने की 20वीं वर्षगांठ मनाई गई है।”

इस रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि के दौरान सबसे सामान्य उल्लंघन 327 मामलों में न्यायिक उत्पीड़न के थे और 249 मामलों में (मनमानी) गिरफ़्तारी और हिरासत के मामले सामने आए। हिंसा (164 मामले); डराना- धमकाना (148 मामले); और निष्पक्ष मुक़दमा से इनकार (61 मामले) भी बार-बार होने वाले हिंसाओं में थे। रिपोर्ट में कहा गया है, "कई बार दोनों साथ साथ हुए और एचआरडी को क़ानूनी लड़ाई या ज़्यादा गंभीर मामलों में समय, ऊर्जा तथा संसाधनों की दिशा बदलने के लिए एचआरडी पर दबाव डालकर उनको अपने कार्य को करने से रोकने के लिए एक दूसरे को सहयोग किया।"

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भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, फ़िलीपींस, थाईलैंड और वियतनाम सहित नौ देशों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ मानव अधिकारों के लिए किए गए उनके काम के परिणामस्वरूप एचआरडी को मार दिया गया था। उक्त समय सीमा में कुल 61 ऐसे मामले दर्ज किए गए। अन्य सामान्य हिंसाएँ जिन्हें एचआरडी के तहत शामिल किया जाना चाहिए: प्रशासनिक उत्पीड़न (39 मामले); यात्रा पर प्रतिबंध (36 मामले); जान के ख़तरे (30 मामले); और अपहरण (30 मामले)।

इन मामलों में एचआरडी में लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं और भूमि तथा पर्यावरण कार्यकर्ता सबसे ज़्यादा निशाना बनाए जाने वाले समूह थे। एशिया में बढ़ते दमनकारी संदर्भ को दर्शाते हुए दर्ज किए गए 688 मामलों में से 210 मामलों में लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता पीड़ित थें जो कुल मामलों का 30% है। भूमि तथा पर्यावरण कार्यकर्ता जो सरकारी और ग़ैर-सरकारी कर्मियों के प्रमुख लक्ष्य हैं वे प्राकृतिक संसाधनों तक पहुँचने और मेगा विकास परियोजनाओं को लागू करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं वे एचआरडी के दूसरे सबसे प्रभावित समूह थे। फ़ोरम-एशिया के आंकड़ों के अनुसार उन्हें 688 मामलों में से 135 में पीड़ितों के रूप में चिह्नित किया गया है। यह कुल मामलों का लगभग 20% है।

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पिछले वर्षों की तरह सरकारी या ग़ैर-सरकारी कर्मी एचआरडी के उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के घोर दोषी हैं। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार सरकारी कर्मी जैसे कि पुलिस, न्यायपालिका और सशस्त्र बल दर्ज किए गए 688 मामलों में से 520 में शामिल थे। यह कुल मामलों का लगभग 75% है। ग़ैर-सरकारी कर्मी जो शामिल हैं लेकिन राष्ट्रीय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों, डेवलपमेंट फ़ाइनेंस इंस्टीट्यूशन (डीएफआई), सशस्त्र समूहों और चरमपंथी समूहों तक सीमित नहीं हैं वे 66 मामलों में दोषियों के तौर पर दर्ज किए गए। इन ग़ैर-सरकारी कर्मियों के लिए सरकार के साथ मिलकर घिनौनी हरकतें करना आम बात थी। 55 मामलों में दोषी अज्ञात थे।

Asian Forum for Human Rights and Development
Human rights Defenders
Condition of HRDs in India
attacks against human rights activists
attacks against environmental activists
attacks against journalists

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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License