NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
साहित्य और संघर्ष: क्रन्तिकारी पहल की शुरुआत
मानव मुक्ति का ज्वलंत इतिहास, जीवन की सच्चाईयों पर प्रकाश और स्वाधीनता का भाव, १९३० के दशक में प्रगतिशील साहित्य का सार बने। प्रगतिशील लेखकों ने इन मूल्यों को अपनी कृतियों द्वारा देश भर में लोगों तक पहुंचाया। वो आवाज़ बने जनता की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी की चुनौतियों और आकांक्षाओं की। इस आवाज़ को ठोस स्वरुप मिला १९३६ के प्रोग्रेसिव राइटर्स के लखनऊ में हुए पहले सम्मलेन में।
आईसीएफ़
31 Oct 2019

मानव मुक्ति का ज्वलंत इतिहास, जीवन की सच्चाईयों पर प्रकाश और स्वाधीनता का भाव, १९३० के दशक में प्रगतिशील साहित्य का सार बने। प्रगतिशील लेखकों ने इन मूल्यों को अपनी कृतियों द्वारा देश भर में लोगों तक पहुंचाया। वो आवाज़ बने जनता की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी की चुनौतियों और आकांक्षाओं की। इस आवाज़ को ठोस स्वरुप मिला १९३६ के प्रोग्रेसिव राइटर्स के लखनऊ में हुए पहले सम्मलेन में।

प्रगतिशील लेखक संघ के लेखकों के लेख का व्याख्यान करते हुए, संजय मुट्टू और समन हबीब ने "आसमा हिलता है जब गाते हैं हम" कार्यक्रम को रूप दिया जो १३ अक्टूबर को स्टूडियो सफ़दर में आयोजित किया गया।

भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ को १९३५ में सज्जाद ज़हीर ने गठित किया था, हालांकि इसका बीज १९३२ में सज्जाद ज़हीर, अहमद अली, डॉक्टर राशिद जहां और महमूद-उज़-ज़फर की लिखी किताब "अंगारे" से हो चुका था। यह समूह, अपने लेखन से सामाजिक समानता और न्याय की बातें करते हैं।

इससे जुड़े कुछ लेखकों में रशीद जहाँ, इस्मत चुग़ताई, गजानन माधव मुक्तिबोध,  डॉ॰ अशरफ़, अली सरदार जाफरी, कृष्ण चन्दर, मुंशी प्रेमचंद, कैफ़ी आज़मी, वामिक जौनपुरी, मजाज़, कन्हैया लाल मुंशी आदि शामिल हैं।

इस भाग में हम सुनेंगे प्रगतिशील लेखक संघ के शुरुआती दौर के बारे में, रशीद जहाँ की कहानी "परदे के पीछे", जो की अंगारे में छपी थी, का एक अंश और इस्मत चुग़ताई  के अलीगढ विमेंस कॉलेज के दिनों की कुछ बातें।

pwa
progressive writers association
Attack on freedom of expression
IPTA

Related Stories

प्रेम, सद्भाव और इंसानियत के साथ लोगों में ग़लत के ख़िलाफ़ ग़ुस्से की चेतना भरना भी ज़रूरी 

इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा यूपी में: कबीर और भारतेंदु से लेकर बिस्मिल्लाह तक के आंगन से इकट्ठा की मिट्टी

समाज में सौहार्द की नई अलख जगा रही है इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा

नफ़रत के बीच इप्टा के ‘’ढाई आखर प्रेम के’’

आज़ादी के 75वर्ष: 9 अप्रैल से इप्टा की ‘‘ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा’’

नहीं रहे अली जावेद: तरक़्क़ीपसंद-जम्हूरियतपसंद तहरीक के लिए बड़ा सदमा

प्रलेस का राष्ट्रीय सम्मेलन 13 से जयपुर में, जुटेंगे देश भर से लेखक


बाकी खबरें

  • नीरज चोपड़ा : एक अपवाद, जिसे हमें सामान्य बनाने की जरूरत है
    लेस्ली ज़ेवियर
    नीरज चोपड़ा : एक अपवाद, जिसे हमें सामान्य बनाने की जरूरत है
    09 Aug 2021
    नीरज चोपड़ा का स्वर्ण पदक एक जश्न का मौक़ा है, लेकिन यह हमें याद दिलाता है कि जब खेलों की बात होती है, तो हमें और क्या करने की ज़रूरत है। हमें बेहतर अवसंरचना, भीतरी इलाकों तक ज़्यादा नेटवर्किंग और…
  • ‘अगस्त क्रांति’ के दिन मज़दूर-किसानों का ‘भारत बचाओ दिवस’, देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन!
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ‘अगस्त क्रांति’ के दिन मज़दूर-किसानों का ‘भारत बचाओ दिवस’, देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन!
    09 Aug 2021
    इस विरोध प्रदर्शन के लिए 9 अगस्त के दिन को इसलिए चुना गया है क्योंकि इसी दिन 1942 में अंग्रेज़ों के खिलाफ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत हुई थी। दरअसल ये पिछले कुछ समय से किसानों और मज़दूरों के आंदोलनों…
  • नये इंडिया को सोना मिला- धन्यवाद मोदी जी!
    राजेंद्र शर्मा
    नये इंडिया को सोना मिला- धन्यवाद मोदी जी!
    09 Aug 2021
    कटाक्ष: आख़िरकार, मोदी जी की मेहनत रंग लायी। बेशक, खिलाडिय़ों ने भी मेहनत की थी। पर हमारे खिलाड़ी तो हमेशा ही मेहनत करते थे...
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत बचाओ दिवस, कोविशील्ड, कोवैक्सीन की एक-एक खुराक पर अध्ययन और अन्य
    09 Aug 2021
    आज के डेली राउंडअप में हम बात करेंगे भारत बचाओ दिवस, किसानों की महापंचायत, कोरोना वैक्सीन की खुराकों और बाकी मुद्दों की
  • कम होती नौकरियों के साथ कम होती आमदनी से तबाह हो रही लोगों की ज़िंदगी
    सुबोध वर्मा
    कम होती नौकरियों के साथ कम होती आमदनी से तबाह हो रही लोगों की ज़िंदगी
    09 Aug 2021
    नौकरियों की किल्लत तो है ही, इसके अलावा जो कहीं ज्यादा चिंता की वजह है, वह है — जिनकी नौकरियां बच गयी है, उससे होने वाली आमदनी में आती गिरावट।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License