NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मौलिक मोदी के बेलिबास बोल
असल मोदी और प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में अपनी बात कहने वाले मोदी अलग अलग हैं।
वीरेन्द्र जैन
13 Dec 2016
मौलिक मोदी के बेलिबास बोल
मौलिक मोदी के बेलिबास बोल
गत दिवस मोरादाबाद में आयोजित परिवर्तन रैली में मोदी का भाषण सुनने के बाद वह सज्जन भी निराश दिखे जो उन्हें भाजपा और भारत का एक मात्र उद्धारक मानने लगे थे। उनका कहना था कि असल मोदी और प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में अपनी बात कहने वाले मोदी अलग अलग हैं। चुनावी भाषणों के समय मूल मोदी सामने आ जाते हैं। सम्बन्धित व्यक्ति की नाराजी उनके उस कथन को लेकर थी जिसमें उन्होंने जनधन वाले खातों में विमुद्रीकरण के बाद जमा किये गये काले धन को वापिस न करने का आवाहन किया था। इस सम्बन्ध में मोदी जी ने कहा था कि जिनके खातों में किन्हीं सम्पन्न लोगों ने अपना काला धन जमा करवाया है वे उसे वापिस न करें। सरकार उसे कानूनी रूप देकर उसी व्यक्ति का धन बनाने के बारे में दिमाग लगा रही है।
 
तकनीकी रूप से मोदी का उक्त कथन न केवल गैरकानूनी था अपितु अनैतिक भी था। सरकार कानूनी कार्यवाही करके अवैध धन को जब्त कर सकती है, सम्बन्धित पर उचित करारोपण करके दण्ड वसूल सकती है, सजा दे सकती है, किंतु संविधान की शपथ लिए हुये प्रधानमंत्री जैसा कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से अमानत में खयानत करने जैसा बयान नहीं दे सकता। नैतिकता का तकाजा भी यही है कि लिये हुए धन को जिन शर्तों पर लिया गया हो उसी के अनुसार वापिस किया जाये। जो काम सरकार का है वह सरकार करे। विमुद्रीकरण योजना घोषित करते समय भी इस बात के लिए सावधान किया गया था कि कोई भी व्यक्ति यदि दूसरे के धन को अपने खाते में जमा करायेगा तो वह दण्ड का भागी होगा। यदि किसी ने जानबूझ कर ऐसा किया है तो उसे नियमानुसार दण्डित किया जा सकता है, न कि उस धन को वापिस न देने की सलाह देकर दबंगों से द्वन्द की सलाह देनी चाहिए।
 
इसी अवसर पर उन्होंने अपने विरोधियों के आरोपों का उत्तर देने के बजाय अपने गैर जिम्मेवार होने का प्रमाण यह कहते हुए दिया कि मेरा कोई क्या बिगाड़ सकता है मैं तो फकीर हूं, अपना थैला लेकर चल पड़ूंगा। किसी देश के जिम्मेवार पद पर पहुँचने के बाद क्या ऐसी वापिसी सम्भव है? यदि युद्ध के समय कोई सैनिक अपनी नौकरी छोड़ कर जाने लगे तो क्या उसे जाने दिया जा सकता है। स्मरणीय है कि राजीव गाँधी की हत्या के बाद बहुत सारे काँग्रेसजनों ने सोनिया गाँधी को काँग्रेस की कमान सम्हालने का आग्रह किया था किंतु उन्होंने दस साल तक इस जिम्मेवारी को लेने से इंकार किया पर एक बार जिम्मेवारी लेने के बाद आये अनेक संकटों के बाद भी पीछे नहीं हटीं। इसी तरह मनमोहन सिंह जो स्वभाव से एक ब्यूरोक्रेट हैं, ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेवारी सौंप दिये जीने के बाद उसे पूरी ईमानदारी और जिम्मेवारी से निभाया व गठबन्धन के दबावों और विपक्षियों की आलोचना के परिणाम स्वरूप जन्मी विपरीत परिस्तिथियों में भी पीछे नहीं हटे, भले ही उनकी गैर जिम्मेवार आलोचना भी की गई।
 
श्री नरेन्द्र मोदी एक लोकप्रिय वक्ता हैं किंतु यह लोकप्रियता आज के कवि सम्मेलनों के चुटकलेबाज कवियों की लोकप्रियता जैसी शैली के कारण है। किंतु जब उक्त शैली में प्रधानमंत्री पद के साथ भाषण देते हैं तो वे पद की गरिमा को गिरा रहे होते हैं। उल्लेखनीय है कि गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद घटित प्रायोजित दंगों में उनकी भूमिका पर कई आरोप लगे थे और जब उस समय की उत्तेजना के प्रभाव से चुनाव को बचाने के लिए तत्कालीन चुनाव आयुक्त लिग्दोह ने चुनावों को स्थगित किया था तब श्री मोदी ने उनकी जिस भाषा में सार्वजनिक मंचों से आलोचना की थी, वह बहुत असंसदीय भाषा में थी। अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए विख्यात उस अधिकारी पर साम्प्रदायिक आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा था कि शायद वे सोनिया गाँधी से चर्च में मिलते होंगे। स्वयं सोनिया गाँधी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने उनके विदेशी मूल पर सवाल उठाने के लिए जर्सी गाय जैसी उपमा का प्रयोग किया था। इसी दौरान मुसलमानों के खिलाफ बोलते हुए उन्होंने पाँच बीबियां पच्चीस बच्चे जैसा जुमला उछाला था। गुजरात के नरसंहार की पक्षधरता करते हुए उन्होंने क्रिया की प्रतिक्रिया जैसा बयान भी दिया था, क्योंकि उनकी भाषा ही यही रही है।
 
गुजरात नरसंहार पर अटलबिहारी वाजपेयी द्वारा राजधर्म के पालन का बयान देने के बाद उनसे उम्मीद की गई थी कि वे केवल सुशासन पर ध्यान देंगे। संयोग से उसके बाद उनके सामने कोई कठिन चुनौती नहीं आयी इसलिए बयान चर्चा में नहीं रहे, जब तक कि उन्हें प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी घोषित नहीं कर दिया गया। लोकसभा चुनावों के दौरान उन्होंने विदेशी मीडिया को दिये इकलौते साक्षात्कार के बाद चुनावी तिथि से ठीक पहले दिये कुछ फिक्स साक्षात्कारों को छोड़ कर कोई साक्षात्कार नहीं दिया। उक्त इकलौते साक्षात्कार में उन्होंने 2002 के दंगों की हिंसा में मारे गये लोगों की तुलना कुत्ते के पिल्ले से कर दी थी।
 
माना जाता है कि जब वे सहज होकर बोलते हैं तो भाषा और प्रतीकों में आदर्श मानकों से डिग जाते हैं। पिछले दिनों उन्होंने आमसभाओं में जो कहा उसका नमूना देखिए-
·         अगर में सौ दिन में काला धन नहीं लाया तो मुझे फाँसी पर चढा देना
·         मैं इतना बुरा था तो मुझे थप्पड़ मार लेते
·         अगर मैं वादा तोड़ूं तो मुझे लात मार देना
·         दलितों को कुछ मत कहो चाहे मुझे गोली मार दो
·         अगर पचास दिन में सब ठीक नहीं किया तो मुझे ज़िन्दा जला देना
 
नोटबन्दी के लिए जो कारण गिनाये गये थे उनमें से कोई भी पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है तथा समर्थक वर्ग में उनकी छवि खराब हो चुकी है। वे देश के महत्वपूर्ण पद पर हैं और पार्टी व गठबन्धन में उन्हें कोई चुनौती देने का साहस नहीं कर पा रहा है।
 
पाकिस्तानी सीमा पर हो रही गोलीबारी, और तथा गुर्जर, जाट, पटेल, मराठाओं के आन्दोलनों व उन आन्दोलनों के प्रति सरकार का रवैया देखते हुए कहा जा सकता है कि देश के लिए यह कठिन समय है।    
Courtesy: नेपथ्यलीला
नरेंद्र मोदी
भाजपा
अच्छे दिन
काला धन

Related Stories

कार्टून क्लिक : नए आम बजट से पहले आम आदमी का बजट ख़राब!

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

रोज़गार में तेज़ गिरावट जारी है

अविश्वास प्रस्ताव: विपक्षी दलों ने उजागर कीं बीजेपी की असफलताएँ

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष

चुनाव से पहले उद्घाटनों की होड़

अमेरिकी सरकार हर रोज़ 121 बम गिराती हैः रिपोर्ट

नोटबंदी: वायू सेना ने सौंपा 29.41 करोड़ का बिल


बाकी खबरें

  • srilanka
    न्यूज़क्लिक टीम
    श्रीलंका: निर्णायक मोड़ पर पहुंचा बर्बादी और तानाशाही से निजात पाने का संघर्ष
    10 May 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने श्रीलंका में तानाशाह राजपक्षे सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन पर बात की श्रीलंका के मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. शिवाप्रगासम और न्यूज़क्लिक के प्रधान…
  • सत्यम् तिवारी
    रुड़की : दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवार ने घर के बाहर लिखा 'यह मकान बिकाऊ है', पुलिस-प्रशासन ने मिटाया
    10 May 2022
    गाँव के बाहरी हिस्से में रहने वाले इसी मुस्लिम परिवार के घर हनुमान जयंती पर भड़की हिंसा में आगज़नी हुई थी। परिवार का कहना है कि हिन्दू पक्ष के लोग घर से सामने से निकलते हुए 'जय श्री राम' के नारे लगाते…
  • असद रिज़वी
    लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी
    10 May 2022
    एक निजी वेब पोर्टल पर काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर की गई एक टिप्पणी के विरोध में एबीवीपी ने मंगलवार को प्रोफ़ेसर रविकांत के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में घेर लिया और…
  • अजय कुमार
    मज़बूत नेता के राज में डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के इतिहास में सबसे कमज़ोर
    10 May 2022
    साल 2013 में डॉलर के मुक़ाबले रूपये गिरकर 68 रूपये प्रति डॉलर हो गया था। भाजपा की तरफ से बयान आया कि डॉलर के मुक़ाबले रुपया तभी मज़बूत होगा जब देश में मज़बूत नेता आएगा।
  • अनीस ज़रगर
    श्रीनगर के बाहरी इलाक़ों में शराब की दुकान खुलने का व्यापक विरोध
    10 May 2022
    राजनीतिक पार्टियों ने इस क़दम को “पर्यटन की आड़ में" और "नुकसान पहुँचाने वाला" क़दम बताया है। इसे बंद करने की मांग की जा रही है क्योंकि दुकान ऐसे इलाक़े में जहाँ पर्यटन की कोई जगह नहीं है बल्कि एक स्कूल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License