NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
मध्य प्रदेश : आज भी जारी है नर्मदा की लड़ाई, बिना पुनर्वास हटने से इंकार
नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले नर्मटा घाटी के विस्थापितों ने बिना समुचित पुनर्वास एवं मुआवजा के सरदार सरोवर बांध में 139 मीटर तक पानी भरने के खिलाफ मध्य प्रदेश के बड़वानी में प्रदर्शन किया।
राजु कुमार
02 Aug 2019
Narmada bachao andolan

नर्मदा घाटी की लड़ाई के 34 साल हो गए। आज भी यह लड़ाई सड़क, संसद और न्यायपालिका में चल रही है। नर्मदा बचाओ आंदोलन ने विस्थापितों को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने के अपने संकल्प के तहत एक बार फिर मध्य प्रदेश के बड़वानी में बड़ा प्रदर्शन किया। नर्मदा घाटी के विस्थापितों ने बिना समुचित पुनर्वास एवं मुआवजा के सरदार सरोवर बांध में 139 मीटर तक पानी भरने के खिलाफ यहां संकल्प रैली निकाली और उसके बाद एक आम सभा का आयोजन किया।

आम सभा में उपस्थित विस्थापित परिवारों ने यह संकल्प लिया : ‘‘आज नर्मदा घाटी के हम हजारों भाई-बहन, किसान, मजदूर सभी एकत्रित होकर बड़वानी में अपना संकल्प व्यक्त कर रहे हैं कि सरदार सरोवर में 139 मीटर तक पानी भरने का हठग्रह, जो गुजरात सरकार एवं भारत सरकार मिलकर आगे बढ़ा रही है, उसका विरोध करते हैं और हम डूब क्षेत्र में 32,000 परिवार के रहते हुए अपनी प्रकृति, संस्कृति व नदी बर्बाद नहीं होने देंगे।’’

इस संकल्प रैली में सरदार सरोवर बांध से बरगी बांध तक के विस्थापितों ने हिस्सा लिया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं। उपस्थित वक्ताओं का स्पष्ट कहना था कि वे गुजरात सरकार की मनमानी को मंजूर नहीं करेंगे और बिना पुनर्वास बांध के उच्चतम स्तर तक पानी भरने का विरोध करेंगे।

NBA Agitation in Badwani (2).jpg

उल्लेखनीय है कि नर्मदा नदी पर बनने वाले बड़े बांधों में से एक है सरदार सरोवर। नर्मदा बचाओ आंदोलन की वजह से इसके विस्थापितों को आंशिक लाभ मिल पाया है। समुचित पुनर्वास के अभाव में ये आज भी आंदोलन कर रहे हैं। केन्द्र में मोदी सरकार आने के बाद विस्थापितों के विरोध के बाद सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 122 मीटर से 139 मीटर कर दी गई, जो कि इस बांध की अंतिम ऊंचाई है। नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि34 सालों में लगभग 15 हजार आदिवासी, दलित किसान परिवारों को, विशेषकर गुजरात और महाराष्ट्र में जमीन के साथ पुनर्वास मिला लेकिन मध्य प्रदेश ने बहुत ही कम विस्थापितों को अपने राज्य में जमीन दी। आज भी डूब क्षेत्र में हजारों परिवार बसे हैं। मध्य प्रदेश में आज भी डूब क्षेत्र में धर्मशालाएं, पंचायतें, मंदिर, मस्जिद,  और बाजार, चालू हैं और मूल गांव में ही जीवन है। इसलिए बिना पुनर्वास के इन गांवों को डुबाया नहीं जा सकता।

मध्य प्रदेश में सरकार बदलने के बाद सरकार के रूख में बदलाव आया है। मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि गुजरात बिजली तक नहीं दे रहा है एवं हजारों लोगों का पुनर्वास बाकी है, जिसका खर्च गुजरात को ही देना है। ऐसे में मध्य प्रदेश गुजरात को अधिक पानी नहीं दे सकता है। मध्य प्रदेश सरकार के इस कदम का संकल्प सभा में जुटे करीबन 7000 लोगों ने स्वागत किया। 

बरगी बांध विस्थापितों की लड़ाई लड़ रहे राजकुमार सिन्हा ने कहा कि बरगी, महेश्वर, ओंकारेश्वर, जोबट बांधों के विस्थापितों का भी जीविका के साथ पुनर्वास नहीं हुआ है। विकास के झूठे दावों की पोल खुल चुकी है। उनका कहना है कि नर्मदा में अब बड़े बांध न बनाकर विकेन्द्रित जल नियोजन की दिशा में आगे बढ़ना होगा, यही नर्मदा आंदोलन की सीख है।

संकल्प रैली में गुजरात सरकार के भूतपूर्व पर्यावरण मंत्री प्रवीण सिंह जडेजा भी शामिल हुए। उन्होंने गुजरात की ओर से नर्मदा आंदोलन से माफी मांगते हुए कहा कि हम जो गुजरात के कच्छ एवं सौराष्ट्र के नाम पर पानी मांगते रहे व सरदार सरोवर का समर्थन किया, वह गलत साबित हुआ है और नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा उठाई गई हर बात सच साबित हुई है। उन्होंने कहा कि गुजरात और केंद्र की सरकार न विस्थापितों की पक्ष में हैं, न ही किसानों के पक्ष में हैं।

NBA Agitation in Badwani (3).jpg

सौराष्ट्र के किसानों का संगठन क्रांति संगठन ने वहां की हकीकत बताई कि मध्य प्रदेश के किसानों को डुबोकर गुजरात सरकार सौराष्ट्र के किसानों को भी पर्याप्त पानी नहीं दे रही है। गुजरात सरकार अडानी एवं अंबानी के उद्योगों को पानी दे रही है। मुदिता विद्रोही और स्वाति देसाई ने गुजरात के विकास मॉडल की विकृति बताते हुए कहा कि गुजरात के लोग भी अब समझ गए हैं कि उन्हें नर्मदा का सब्ज़बाग दिखाया गया और नर्मदा बचाओ आंदोलन की बात ही सत्य है।

एनएपीएम के संयोजक पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने कहा कि नर्मदा लिंक परियोजनाओं सहित सभी बड़े बांधों पर अब पुनर्विचार करना चाहिए। मध्य प्रदेश के सभी जन संगठनों का इस पर साथ मिलना जरूरी है। मध्य प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष चिन्मय मिश्र ने कहा कि नर्मदा घाटी की लड़ाई विकास नीतियों की दिशा की लड़ाई है। रैली में आए ऊर्जा विशेषज्ञों ने कहा कि वे नर्मदा की पूरी हकीकत एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे और सरदार सरोवर डूब क्षेत्र में वर्तमान में मौजूद 32000 परिवार एवं बरगी से लेकर हर बांध की लाभ हानि की सच्चाई भी उजागर करेंगे। परिणीता दांडेकर बताया कि अमेरिका ने आज तक 1000 से अधिक बांधों को तोड़कर नदियों को खुला किया है।  

विस्थापितों का कहना है कि वे संपूर्ण पुनर्वास और पर्यावरण सुरक्षा के बिना डूब क्षेत्र से नहीं हटेंगे। मध्य प्रदेश सरकार भी गुजरात और केंद्र से संघर्ष करे और साथ ही विस्थापितों के हक को और नर्मदा को बहती रखने की मांग को स्वीकार करे।

Rehabilitation
Narmada River
Narmada Bachao Andolan
Parliament
Indian judiciary
Sardar sarovar Dam
NAPM
narmada link pariyojana

Related Stories

विचारों की लड़ाई: पीतल से बना अंबेडकर सिक्का बनाम लोहे से बना स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी

अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की

'नर्मदा बचाओ आंदोलन' की धरती पर पहुंचे किसान

बिजली कर्मचारियों ने किया चार दिवसीय सत्याग्रह शुरू

'भारत बचाओ' : सीटू, किसान सभा और एआईएडबल्यूयू 25 जुलाई से शुरू करेंगे 15 दिन का अभियान

'किसान और किसानी को बर्बाद करने के लिए लाए गए हैं कृषि विधेयक'

देश में एक साथ उठ खड़े हुए 500 से ज़्यादा महिला, LGBTQIA, छात्र-शिक्षक, किसान-मज़दूर संगठन

'हम अगर उट्ठे नहीं तो...': देशभर में 5 सिंतबर को 400 से अधिक महिला संगठनों का प्रदर्शन

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में लोगों को विरोध प्रदर्शन का अधिकार नहीं?

सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों की मांगों को लेकर मेधा का अनिश्चितकालीन धरना


बाकी खबरें

  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में सात चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद अब नतीजों का इंतज़ार है, देखना दिलचस्प होगा कि ईवीएम से क्या रिजल्ट निकलता है।
  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License