NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
मेरे प्यारो, मुझे सौ बरस के बूढ़ों में मत ढूंढो...
वे तेईस बरस/ आज भी मिल जाएं कहीं, किसी हालत में/ किन्हीं नौजवानों में/ तो उन्हें मेरा सलाम कहना/ और उनका साथ देना…
न्यूज़क्लिक डेस्क
28 Sep 2019
bhagat singh

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष रहे कवि, आलोचक और जनसंस्कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार ने यह कविता भगत सिंह के जन्म के सौवें वर्ष 2007 में लिखी थी। जिसे जन्मशताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर जारी एक स्मारिका में प्रकाशित किया गया था। यह कविता आज भी प्रासंगिक है। आप चाहें तो वर्ष 2019 के हिसाब से 100 की बजाय 112 बरस पढ़ और समझ सकते हैं : संपादक  

 

सौ बरस के बूढ़े के रूप में याद किए जाने के विरुद्ध
 

मैं फिर कहता हूं
फांसी के तख़्ते पर चढ़ाए जाने के 75 बरस बाद भी
"क्रांति की तलवार की धार
विचारों की सान पर तेज़ होती है"

वह बम
जो मैंने असेंबली में फेंका था
उसका धमाका सुनने वालों में तो
अब शायद ही कोई बचा हो
लेकिन वह सिर्फ़ बम नहीं, एक विचार था
और, विचार सिर्फ़ सुने जाने के लिए नहीं होते

माना कि यह
मेरे जनम का सौवां बरस है
लेकिन मेरे प्यारो,
मुझे सौ बरस के बूढ़ों में मत ढूंढो

वे तेईस बरस कुछ महीने
जो मैंने एक विचार बनने की प्रक्रिया में जिए
वे इन सौ बरसों में कहां खो गए
खोज सको तो खोजो

वे तेईस बरस
आज भी मिल जाएं कहीं, किसी हालत में
किन्हीं नौजवानों में
तो उन्हें मेरा सलाम कहना
और उनका साथ देना…

और अपनी उम्र पर गर्व करनेवाले बूढ़ों से कहना
अपने बुढ़ापे का गौरव उनपर न्यौछावर कर दें


-  राजेंद्र कुमार

इसे भी पढ़ें : विशेष : भगत सिंह की पसंदीदा शायरी और उसका सच

 विशेष : भगत सिंह 1928 में 2019 का सच लिख गए! आप भी पढ़िए...

Bhagat Singh
Bhagat singh Birthday
Bhagat singh Idea's
hindi poetry
Allahabad University
Dr. Rajendra Kumar

Related Stories

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

जाति के सवाल पर भगत सिंह के विचार

इतवार की कविता : 'टीवी में भी हम जीते हैं, दुश्मन हारा...'

हमें यह शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है : भगत सिंह की पसंदीदा शायरी

भारत में ओ'डायरवाद: गांधी और प्रशांत भूषण के साहस और 'अवमानना'

विशेष : भगत सिंह 1928 में 2019 का सच लिख गए! आप भी पढ़िए...

विशेष : भगत सिंह की पसंदीदा शायरी और उसका सच


बाकी खबरें

  • Ambedkar
    राज वाल्मीकि
    वर्तमान संदर्भ में डॉ. अंबेडकर की प्रासंगिकता
    06 Dec 2021
    बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की आज पुण्यतिथि है। 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में उनका निधन हुआ। उन्होंने हमें सफलता के तीन मंत्र दिए थे – ‘शिक्षित हो,  संगठित हो, संघर्ष करो।’ हाल ही में हमें किसान आंदोलन…
  • Alphons
    द लीफ़लेट
    संविधान की प्रस्तावना में संशोधन के लिहाज़ से प्राइवेट मेंबर बिल: एक व्याख्या
    06 Dec 2021
    झा के मुताबिक़, संविधान के बुनियादी ढांचे का एक हिस्सा होने के नाते प्रस्तावना में संशोधन नहीं किया जा सकता।
  •  Indian constitution
    डॉ. राजू पाण्डेय
    भारतीय संविधान पर चल रहे अलग-अलग विमर्शों के मायने!
    06 Dec 2021
    क्या संविधान से हमें कुछ भी हासिल नहीं हुआ? जब हमारे साथ स्वतंत्र हुए देशों में लोकतंत्र असफल एवं अल्पस्थायी सिद्ध हुआ और हमारे लोकतंत्र ने सात दशकों की सफल यात्रा पूरी कर ली है तो इस कामयाबी के पीछे…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 8,306 नए मामले, 211 मरीज़ों की मौत
    06 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.28 फ़ीसदी यानी 98 हज़ार 416 हो गयी है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में तनाव व अव्यवस्था की आंखमिचौली, नगालैंड में गोलीकांड और विनोद दुआ को श्रद्धांजलि
    06 Dec 2021
    यूपी के पश्चिमी हिस्से में किसान आंदोलन के सामाजिक राजनीतिक असर की काट के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की पुरजोर कोशिश हो रही है. क्या मथुरा में तनाव पैदा करने की मुहिम चला रहे कुछ हिन्दुत्ववादी संगठनों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License