NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
#महाराष्ट्र_सूखा : उस्मानाबाद में खाली पड़े बाज़ार
मराठवाड़ा में सूखे ने कृषि उपज मंडी में कारोबार की कमर तोड़ दी है, जिससे कमीशन एजेंट और मजदूर दोनों प्रभावित हुए हैं।
अमय तिरोदकर
06 Mar 2019
Translated by महेश कुमार
उस्मानाबाद बाज़ार यार्ड
उस्मानाबाद बाज़ार यार्ड

[महाराष्ट्र 1972 के बाद से आज सबसे गंभीर सूखों में से एक का सामना कर रहा है। राज्य सरकार ने 350 में से 180 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। संपूर्ण मराठवाड़ा (दक्षिणी और पूर्वी महाराष्ट्र में फैला हुआ हिस्सा) क्षेत्र अब बहुत बुरी स्थिति में है। न्यूज़क्लिक की ग्राउंड रिपोर्ट श्रृंखला का भाग-2 ]

उस्मानाबाद : महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। कृषि आधारित व्यवसाय, विशेष रूप से कृषि उपज के लिए बने बाजार, लगभग आधे राज्य में बंद हो गए हैं। इसके असर को जानने के लिए, न्यूज़क्लिक ने उस्मानाबाद के जिला मुख्यालय में स्थित उस्मानाबाद के छत्रपति शिवाजी कृषि उत्पन्ना बाज़ार समिति (एग्री प्रोड्यूस मार्केट कमेटी) की खोज़-खबर ली।

Maharashtra Drought3_0.jpg

नितिन गांधी (62) उस्मानाबाद के कृषि बाजार के सबसे पुराने आढ़ती (कमीशन एजेंट) में से एक हैं। वह इस व्यवसाय में आने वाली अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी है। “मैं लगभग 40 वर्षों से आढ़ती (कमीशन एजेंट) के पेशे में हूँ। लेकिन इस पूरी अर्थव्यवस्था की श्रृंखला में किसानों, मजदूरों से लेकर छोटे कमीशन एजेंटों और यहां तक कि बड़े लोगों की मौजूदा हताशा पूरी तरह से नई बात है” नितिन ने कहा।

वे कई किस्म के अनाजों का सौदा करते है। नितिन ने कहा “अब, सोयाबीन का उदाहरण लें। पिछले साल, मैंने हर महीने लगभग 50 हजार किलोग्राम सोयाबीन बेची। ऐसा चार महीने तक चलता रहा। आज, मैं 100 हज़ार किलो सोयाबीन खरीदने में भी नाकाम रहा हूँ।” इस संदर्भ में कहें, तो महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और पश्चिमी विदर्भ के सूखा प्रभावित क्षेत्र में सोयाबीन एक बहुप्रतीक्षित फसल है। यह फसल तुअर, हरभरा या ज्वार की तुलना में इसमें न्यूनतम श्रम और निवेश लगता है लेकिन मुनाफा सबसे अधिक होता है। इससे, सोयाबीन की तुलना में अन्य अनाज की स्थिति का भी अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।

“पिछले साल, हमने फरवरी अंत तक लगभग 500 क्विंटल हरभरा बेचा था। उस समय न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,400 रुपये था। लेकिन कई एजेंटों ने इसे 4,000 रुपये में खरीदा था। इस साल, हालांकि, स्थिति बहुत अलग है। हम अब तक सिर्फ 50 क्विंटल हरभरा बेच पाए हैं” नाम न छापने की शर्त पर उसी बाजार में कमीशन एजेंटों में से एक ने कहा।

मराठावाड़ा क्षेत्र पिछले कुछ समय से सूखे की चपेट में है। राज्य में स्थित लातूर देश में सोयाबीन के लिए सबसे बड़े बाजार यार्ड में से एक है। नांदेड़, जालौन, औरंगाबाद, बीड, हिंगोली और परभणी जिलों में कई और मार्केट यार्ड हैं, जिनमें करोड़ों का कारोबार होता है। उस्मानाबाद बाजार तुलनात्मक रूप से छोटा है, लेकिन अत्यधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र से कृषि उपज का एक बड़ा हिस्सा इस यार्ड में आता है।

Nitin Gandhi in his shop in Osmanabad..jpg

(नितिन गांधी उस्मानाबाद की अपनी दुकान में।)

उस्मानाबाद बाजार यार्ड में कमीशन एजेंटों के कुल बारह प्रतिष्ठान हैं। हर कोई सूखे के कारण इस साल वित्तीय संकट में है धंस गया है। इसी मण्डी से एक और कमीशन एजेंट श्रीधर काकड़े ने कहा, “हम प्रति वर्ष न्यूनतम 1,000 क्विंटल ज्वार बेचते थे। लेकिन मुझे नहीं लगता कि इस साल मात्रा समान होगी। सबसे पहले, खेत में ज्वार की मात्रा पहले से ही कम है क्योंकि किसानों ने बहुत बड़ी मात्रा में बीज नहीं बोया था। साथ ही, ऐसी खबरें भी हैं कि किसान अपने दुधारू पशुओं को घास खिलाने के लिए अपनी फसल काट रहे हैं। यह निश्चित रूप से व्यापार को प्रभावित करेगा।”

कृषि उपज में कमी होने की वजह ने भी बाजार यार्ड की श्रम शक्ति को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। एक युवा मजदूर कृष्णा ने कहा कि उन्हें अब बाजार में शायद ही काम मिले। “पहले हम प्रति दिन न्यूनतम दो ट्रकों को लोड या अनलोड करते थे, लेकिन अब यह तीन-चार दिनों में सिर्फ एक ट्रक ही रह गया है। यही कारण है कि हम काम की तलाश में शहर के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी जाने को मजबूर हैं। नितिन ने मजदूरों की समस्याओं पर भी बात की। उन्होंने कहा, “पहले, मजदूरों के लिए पर्याप्त लोडिंग और अनलोडिंग का काम था। लेकिन अब, 20 से अधिक लोग सिर्फ 5 व्यक्तियों के काम को करने के लिए उप्लब्ध रहते हैं। ”

नितिन ने कहा कि बाजार में सुस्ती पिछले दो वर्षों से बनी हुई है, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा के बाद। "इस सूखे ने पहले से ही जर्जर बाजार को और धवस्त कर दिया है," उन्होंने कहा। उनके और कुछ अन्य कमीशन एजेंटों के अनुसार, नोटबंदी के बाद जमीनी अर्थव्यवस्था के पहिये अचानक धीमे हो गए हैं। “कमीशन एजेंट के साथ पैसा लगाने वाले लोगों को अचानक इस तरह के फैसले से भारी नुकसान हुआ था। हम 2013 और 2015 के दो बड़े सूखे से उबर रहे थे। लेकिन यह फैसला एक बड़ा झटका था। इसने छोटे कमीशन एजेंटों के साथ-साथ लगभग सभी गांवों के छोटे विक्रेताओं से पैसे के प्रवाह को रोक दिया था। उन्होंने मज़बूरी में अन्य व्यवसायों या यहां तक कि मज़दूरी के काम की ओर रुख किया। इसने धीरे-धीरे हम सभी को प्रभावित किया है” नितिन ने अपने जैसे कई कमीशन एजेंटों की चिंताओं को व्यक्त करते हुए कहा।

 “कृषि आधारित समाज में, कृषि बाजार इतने सारे वर्गों के लिए एक उम्मीद का स्थान है। लेकिन यहां, इसे चलाने वाले लोग निराश और थके हुए हैं। आप क्षेत्र के किसानों की स्थिति को समझ सकते हैं।”

कमिशन एजेंटों के शब्दों में निराशा हमारे सामने जमीनी सच्चाई को सामने लाती है।

 इसे भी पढ़ें : मराठवाड़ा में 1972 के बाद सबसे बड़ा सूखा, किसान और मवेशी दोनों संकट में

Maharashtra drought
Drought hit Marathwada
marathwada
Osmanabad
Market Yards
Agri Produce Market Committees
demonetisation
agricultural crises
farmer crises
Commission Agents

Related Stories

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

बिहार: कोल्ड स्टोरेज के अभाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर आलू किसान

यूपी चुनाव: छुट्टा पशुओं की बड़ी समस्या, किसानों के साथ-साथ अब भाजपा भी हैरान-परेशान

उत्तराखंड चुनाव : जंगली जानवरों से मुश्किल में किसान, सरकार से भारी नाराज़गी

ग्राउंड  रिपोर्टः रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के गृह क्षेत्र के किसान यूरिया के लिए आधी रात से ही लगा रहे लाइन, योगी सरकार की इमेज तार-तार

किसानों और सरकारी बैंकों की लूट के लिए नया सौदा तैयार

मोदी जी की नोटबंदी को ग़लत साबित करती है पीयूष जैन के घर से मिली बक्सा भर रक़म!

पूर्वांचल से MSP के साथ उठी नई मांग, किसानों को कृषि वैज्ञानिक घोषित करे भारत सरकार!

ग्राउंड रिपोर्ट: पूर्वांचल में 'धान का कटोरा' कहलाने वाले इलाके में MSP से नीचे अपनी उपज बेचने को मजबूर किसान


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश
    06 May 2022
    तीन वर्षीय जीएनएम डिप्लोमा कोर्स में वर्तमान में 198 छात्राएं हैं। उनका कहना है कि पीएमसीएच कैंपस में विभिन्न विभागों में और वार्डों में बड़े पैमाने पर क्लिनिकल प्रशिक्षण की सुविधा है।
  • विजय विनीत
    अब विवाद और तनाव का नया केंद्र ज्ञानवापी: कोर्ट कमिश्नर के नेतृत्व में मस्जिद का सर्वे और वीडियोग्राफी शुरू, आरएएफ तैनात
    06 May 2022
    सर्वे का काम तीन दिन चल सकता है। शाम पांच बजे के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के एक किमी के दायरे को कानून व्यवस्था के लिहाज से खाली करा लिया गया। मौके पर दंगा नियंत्रक उपकरणों के साथ…
  • Press Freedom Index
    न्यूज़क्लिक टीम
    Press Freedom Index में 150वें नंबर पर भारत,अब तक का सबसे निचला स्तर
    06 May 2022
    World Press Freedom Index को किस तरह से पढ़ा जाना चाहिए? डिजिटल की दुनिया में अभिव्यक्ति की स्वत्नत्रता के प्लेटफॉर्म बढे है तो क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी बढ़ी है? आबादी के लिहाज़ से दुनिया के…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!
    06 May 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार बात कर रहे हैं तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के गिरफ़्तारी और पूरे मामले की।
  • भाषा
    चुनावी वादे पूरे नहीं करने की नाकामी को छिपाने के लिए शाह सीएए का मुद्दा उठा रहे हैं: माकपा
    06 May 2022
    माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि शाह का यह कहना कि सीएए को पश्चिम बंगाल में लागू किया जाएगा, इस तथ्य को छिपाने का एक प्रयास है कि 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License