NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
मज़दूर-किसान
शिक्षा
समाज
स्वास्थ्य
भारत
मिड-डे मील के चावल का 'दुरुपयोग'? इस्कॉन, विशाखापत्तनम में मारे गए छापे में मिले 1,200 चावल के बोरे
सतर्कता अधिकारी ने ज़िला कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें संदेह व्यक्त किया गया है कि चावल के बोरों को काकीनाड़ा की एक निजी फ़र्म में भेजा जा रहा था, क्योंकि यह निजी फ़र्म अफ़्रीका के बाज़ार में भी निर्यात करती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Jun 2019
Mid Day Meal
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो साभार: The New Indian Express

सोमवार को गुप्त सूचना मिलने के बाद की गई छापेमारी में विशाखापट्टनम में सतर्कता और नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने इस्कॉन मंदिर के परिसर से सरकार की मिड-डे मील योजना के लिए रखे गए 1,200 किलोग्राम से अधिक चावल के बोरे ज़ब्त किए, जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया है। कथित तौर पर चावल की बोरियों को आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा में एक निजी फ़र्म को दिया गया था, और इन्हें अफ़्रीकी देशों में सप्लाई किया जाना था।

सरकार द्वारा इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फ़ॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) को इसलिए चावल मुहैया कराया जाता है कि वह मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में एक भागीदार है, जिसे अक्षय पात्र फ़ाउंडेशन द्वारा संचालित किया जाता है, जो सरकारी स्कूल के बच्चों को मिड-डे भोजन की आपूर्ति करता है।

गुरुवार को द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि इस्कॉन ने इन आरोपों का खंडन यह कह कर दिया है कि चावल के बोरे उसके भक्तों द्वारा दान किए गए थे, लेकिन विशाखापत्तनम नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने ज़िला कलेक्टर वी विनय चंद को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारी इस घोटाले में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए कलेक्टर के आदेश का इंतज़ार कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नागरिक आपूर्ति अधिकारियों ने लॉरी के साथ-साथ नागरिक आपूर्ति वाले बोरों में चावल के 396 बोरे और प्लास्टिक के बोरों के 888 बोरे ज़ब्त किए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार विजाग सतर्कता अधिकारियों को यह भी संदेह है कि चावल को निर्यात बाज़ार में ले जाया जा रहा था।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है, "…काकीनाडा में वी एंड ई के अधिकारियों ने पाया है कि चावल को एक निजी निर्यात कंपनी के माध्यम से अफ़्रीकी देशों को निर्यात किया जा रहा था। पत्र में चावल की क़िस्म को ‘सेलोनी’, 'लॉन्ग ग्रेन रिज़ ब्लैंक इंडियन’ के रूप में लिखा गया था जोकि कुछ अफ़्रीकी देशों में इस्तेमाल की जाने वाली फ़्रेंच भाषा की एक क़िस्म है।" 

इसी रपट ने इस्कॉन मंदिर के एक एकाउंटेंट का हवाला देते हुए कहा कि वे हमेशा नक़द में दान स्वीकार करते हैं।

“जबकि इस्कॉन के अधिकारियों का दावा है कि छापे में पकड़े गए चावल दानकर्ताओं से आए थे, इस्कॉन के लेखाकार ने कहा कि वे दान केवल नक़दी में लेते हैं न कि चावल के रूप में। यह भी कहा जा रहा है कि जिन बोरों को पूरण बाज़ार से लाया गया था, वे काकीनाडा में पाए गए थे; उन्होंने यह भी कहा कि इन्हें काकीनाडा में निर्मित किया गया था।" वी एंड ई अधिकारी ने बताया।

वास्तव में, सतर्कता अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि उन्हें मंदिर के परिसर में 300 से अधिक ख़ाली चावल के बोरे भी मिले हैं।

डीएसपी और प्रभारी क्षेत्रीय सतर्कता और विशाखापत्तनम जिले के प्रवर्तन अधिकारी के. श्रावणी ने टीएनआईई से बात करते हुए कहा, "बोरे के पत्र पर 'श्री सीतारमनजनेय, काकीनाडा को निर्यात के लिए' लिखा है, जिससे पता चलता है कि यह काकीनाडा में स्थित एक निर्यात कंपनी है। इसी नाम से एक कंपनी भी है, जो निर्यात के कारोबार में है। हालांकि, हमें अपनी जांच के दौरान अधिक विवरण प्राप्त हासिल करने बाक़ी हैं।" 

एक पूर्व रिपोर्ट में विजाग सतर्कता विभाग के अधिकारियों ने यह भी पाया कि मंदिर ने इस साल मार्च के बाद से स्टॉक रजिस्टर को पूरी जानकारी नहीं भरी है।

नेशनल हेराल्ड की रिपोर्ट में सतर्कता निरीक्षक मल्लिकार्जुन राव के हवाले से कहा गया है कि "इस्कॉन के सागर नगर कार्यालय के पास लॉरी नंबर AP 31TT0457 पर छापेमारी की और उसे ज़ब्त किया, उस लॉरी पर चावल की बोरियाँ भरी हुई थीं।" 

लॉरी के मालिक गावर इस्वर राव और उनके सहयोगी संन्यासी राव से पूछताछ करने पर यह पाया गया कि मिड-डे मील के चावल पैक किए जा रहे थे और स्टॉक को काकीनाडा स्थानांतरित किया जाना था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत मामला दर्ज हुआ है।

mid day meal workers
mid day meal
rice
misuse of rice
education

Related Stories


बाकी खबरें

  • china
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    चीन ने अमेरिका से ही सीखा अमेरिकी पूंजीवाद को मात देना
    22 Nov 2021
    चीन में औसत वास्तविक मजदूरी भी हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है, जो देश की अपनी आर्थिक प्रणाली की एक और सफलता का संकेतक है। इसके विपरीत, अमेरिकी वास्तविक मजदूरी हाल ही में स्थिर हुई है। संयुक्त…
  • kisan andolan
    असद रिज़वी
    लखनऊ में किसान महापंचायत: किसानों को पीएम की बातों पर भरोसा नहीं, एमएसपी की गारंटी की मांग
    22 Nov 2021
    संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हुई “किसान महापंचयत” में जमा किसानों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन विवादास्पद कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा पर विश्वास की कमी दिखी। किसानों का कहना…
  • farmers movement
    सुबोध वर्मा
    यूपी: कृषि कानूनों को रद्दी की टोकरी में फेंक देने से यह मामला शांत नहीं होगा 
    22 Nov 2021
    ऐसी एक नहीं, बल्कि ढेर सारी वजहें हैं जिसके चलते लोग, खासकर किसान, योगी-मोदी की ‘डबल इंजन’ वाली सरकार से ख़फ़ा हैं।
  • Abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    ज़ी न्यूज़ के संपादक को UAE ने अपने देश में आने से रोका
    22 Nov 2021
    बोल' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा, देश के मेनस्ट्रीम मीडिया और सरकार का अमूमन बचाव करने वाले जी न्यूज़ के संपादक 'सुधीर चौधरी' की चर्चा कर रहे हैंI ज़ी न्यूज़ के संपादक 'सुधीर चौधरी'…
  • modi
    अनिल जैन
    प्रधानमंत्री ने अपनी किस 'तपस्या’ में कमी रह जाने की बात कही?
    22 Nov 2021
    प्रधानमंत्री कहते हैं कि यह समय किसी को भी दोष देने का नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि यह समय नहीं है दोष देने का तो फिर सरकार के दोषों पर कब चर्चा होनी चाहिए और क्यों नहीं होनी चाहिए?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License