NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मणिपुर विश्वविद्यालय में मध्यरात्रि को हुई छापेमारी, 89 छात्र और 6 शिक्षक गिरफ़्तार
विश्वविद्यालय परिसर में भारी संख्या में अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। वीसी के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे विश्वविद्यालय के मुख्य पदाधिकारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Sep 2018
manipur university protest

20 और 21 सितंबर के बीच की रात में सैकड़ों पुलिसकर्मी और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के अधिकारियों ने राज्य की राजधानी इम्फाल में मणिपुर विश्वविद्यालय के एक छात्रावास पर छापा मारा। पुलिसकर्मियों ने रात में छापे मारकर छह संकाय सदस्यों सहित 89 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। ज्ञात हो कि हिरासत में लिए गए पदाधिकारियों सहित छात्र और मणिपुर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (एमयूएसयू) के अध्यक्ष कुलपति ए पी पांडे के ख़िलाफ़ कुप्रबंधन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच की मांग के लिए एक अभियान चला रहे हैं।

स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक़ इम्फाल वेस्ट के पुलिस अधीक्षक जोगेशचंद्र हाओबाम ने पुष्टि की है कि विभिन्न पुलिस थानों में 89 छात्रों और छह प्रोफेसरों को हिरासत में लिया गया।

सूत्रों के मुताबिक़ आधी रात को हुई छापेमारी के दौरान कई छात्र घायल हो गए थे। इस कार्यवाही में देखा गया कि सीआरपीएफ के जवान पुलिस के साथ थे और छापेमारी के दौरान परिसर के अंदर आंसू गैस और मौक बम का इस्तेमाल किया था।

'उनके पास एक सूची थी'

नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर एक प्रत्यक्षदर्शी ने इस घटना के बारे में न्यूज़क्लिक को बताया। "क़रीब रात 12 बजे मैंने लड़कों के छात्रावास के सामने लॉन से आ रही तेज़ आवाज़ सुनी और इसके बाद इसे देखने के लिए मैं अपने कमरे से बाहर निकल गया। सीआरपीएफ और पुलिस ने विश्वविद्यालय के मुख्य दरवाज़े को बंद कर दिया था और [उन्होंने] छात्रों और वार्डन के साथ बहस शुरू कर दी थी। क़रीब 400 पुलिसकर्मियों ने लड़कों के छात्रावास के कमरे में आंसू गैस के गोले और मौक बम फेंकना शुरू कर दिया। उन्होंने छात्रों को मारना भी शुरू कर दिया। यह सब सुबह 3 बजे तक चला और फिर उन्होंने 86 छात्रों और छह शिक्षकों को गिरफ़्तार कर लिया और चले गए।"

उक्त स्रोत ने दावा किया कि सुरक्षा कर्मियों के पास छात्रों की "सूचि" थी और वे इस सूचि के आधार पर छापे मार रहे थे।

मुख्य एमयूएसयू पदाधिकारी गिरफ़्तार

नाम न उजागर करने की शर्त पर एक अन्य स्रोत ने न्यूज़क्लिक को बताया कि एमयूएसयू के सभी पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। सिर्फ महासचिव लैशराम केंडी को छोड़करI इन्होंने फेसबुक पर एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें कहा गया है कि उनकी जान को ख़तरा है और वह एक अज्ञात स्थान पर हैं। इसी वीडियो में वह ये भी आरोप लगाते हैं कि, "यह कहना गलत नहीं होगा कि राज्य सरकार एपी पांडे को बचा रही है और आंदोलन करने वाले छात्रों और शिक्षकों को गिरफ्तार कर वे अकादमिक ब्लॉक के अंदर मौजूद पांडे के खिलाफ़ जिन फाइलों में सुबूत हैं उनमें हेरफेर करने की कोशिश कर रहे हैं।"

एक एमए के छात्र ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यह मानवाधिकारों पर संगीन हमला था। "यह अलोकतांत्रिक और अमानवीय है। ऐसा केवल हमारे विश्वविद्यालय में ही हुआ है, देश या पूरी दुनिया में किसी अन्य विश्वविद्यालय में नहीं होता है कि इतने सारे छात्रों को गिरफ्तार किया जाता है और पीटा जाता है, जैसे कि हम आतंकवादी हों!"

स्थानीय समाचारपत्रों के मुताबिक़ यह घटना कुलपति एपी पांडे द्वारा प्रो कुलपति वाई युगींद्र सिंह की नियुक्ति के बाद हुई थी। एपी पांडे फिलहाल छुट्टी पर हैं। युगींद्र सिंह गुरुवार दोपहर को वीसी के रूप में प्रभार सँभालने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में आए थे। हालांकि, इन दो घटनाओं कोई सह-संबंधित है या नहीं यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता, क्योंकि छात्रों का दावा है कि दूसरे सेमेस्टर परीक्षा चल रही है इसलिए कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहा था।

विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच यही धारणा बन रही है कि मध्यरात्रि में हुई यह छापेमारी पूर्व-नियोजित थीI छात्रों ने पुलिस से सवाल किया कि वे बेवक्त छात्रों को तलाश क्यों कर रहे हैं जबकि उन्हें पता था कि परीक्षाएं चल रही हैं। सूत्रों को शक है कि समाचारपत्र प्रेस में छपने के लिए चले गये थे इसलिए मध्यरात्रि में छापेमारी की गई।

शुक्रवार को कांग्रेस द्वारा की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री ओकरम इबोबी सिंह ने इस घटना को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मूक दर्शक बनी नहीं खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि, "स्थिति को सामान्य बनाने के लिए, सरकार को गुरुवार की रात उठाए गए छात्रों और शिक्षकों को छोड़ देना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार, विश्वविद्यालय प्राधिकरणों और छात्रों तथा शिक्षकों के बीच बातचीत का रास्ता खोजना शुरू किया जाना चाहिए।

फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में अर्धसैनिक बल भारी संख्या में मौजूद हैं और किसी भी छात्र को परिसर और उनको अपने कमरे से निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उधर परीक्षा स्थगित कर दी गई है। सरकार ने अगले पाँच दिनों तक के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दिया है और गिरफ्तार लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। न ही कोई आरोपपत्र दायर किया गया है और न ही सरकार ने कोई बयान जारी किया है।

Manipur university
Manipur University protest
students' movement

Related Stories

नागरिक सत्याग्रह पदयात्रियों से डरी पुलिस, गाजीपुर जिले से गिरफ्तार कर जेल में डाला

हरियाणा: छात्रसंघ के प्रत्यक्ष चुनाव को लेकर छात्रों का संघर्ष जारी

पिंजरा तोड़ आंदोलन जारी : डीयू हॉस्टल में लड़कियों ने ‘कर्फ्यू’ तोड़ा

मौजूदा सरकार एक डरपोक सरकार है: छात्र नेता, पूजा शुक्ला

क्या इंटरनेट बैन है मणिपुर विश्वविद्यालय की समस्या का हल?


बाकी खबरें

  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    धर्म के नाम पर काशी-मथुरा का शुद्ध सियासी-प्रपंच और कानून का कोण
    19 May 2022
    ज्ञानवापी विवाद के बाद मथुरा को भी गरमाने की कोशिश शुरू हो गयी है. क्या यह धर्म भावना है? क्या यह धार्मिक मांग है या शुद्ध राजनीतिक अभियान है? सन् 1991 के धर्मस्थल विशेष प्रोविजन कानून के रहते क्या…
  • hemant soren
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार
    18 May 2022
    एक ओर, राज्यपाल द्वारा हेमंत सोरेन सरकार के कई अहम फैसलों पर मुहर नहीं लगाई गई है, वहीं दूसरी ओर, हेमंत सोरेन सरकार ने पिछली भाजपा सरकार में हुए कथित भ्रष्टाचार-घोटाला मामलों की न्यायिक जांच के आदेश…
  • सोनिया यादव
    असम में बाढ़ का कहर जारी, नियति बनती आपदा की क्या है वजह?
    18 May 2022
    असम में हर साल बाढ़ के कारण भारी तबाही होती है। प्रशासन बाढ़ की रोकथाम के लिए मौजूद सरकारी योजनाओं को समय पर लागू तक नहीं कर पाता, जिससे आम जन को ख़ासी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है।
  • mundka
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुंडका अग्निकांड : क्या मज़दूरों की जान की कोई क़ीमत नहीं?
    18 May 2022
    मुंडका, अनाज मंडी, करोल बाग़ और दिल्ली के तमाम इलाकों में बनी ग़ैरकानूनी फ़ैक्टरियों में काम कर रहे मज़दूर एक दिन अचानक लगी आग का शिकार हो जाते हैं और उनकी जान चली जाती है। न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में…
  • inflation
    न्यूज़क्लिक टीम
    जब 'ज्ञानवापी' पर हो चर्चा, तब महंगाई की किसको परवाह?
    18 May 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार शर्मा सवाल उठा रहे हैं कि क्या सरकार के पास महंगाई रोकने का कोई ज़रिया नहीं है जो देश को धार्मिक बटवारे की तरफ धकेला जा रहा है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License