NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
मोदी का चुनाव अभियान, शिवनाथ ठुकराल और फेसबुक इंडिया
मोदी के चुनाव अभियान में शामिल रहे शिवनाथ ठुकराल का फेसबुक इंडिया में रहना क्या कुछ सवाल खड़े करता है? और कांग्रेस को क्यों इस बात का संदेह है कि 2019 के चुनावों में फेसबुक पक्षपात कर सकती है।
सिरिल सैम, परंजॉय गुहा ठाकुरता
01 Apr 2019
शिवनाथ ठुकराल। (फाइल फोटो)
Image Courtesy: Exchange4media

एनडीटीवी में एंकर के तौर पर काम कर रहे शिवनाथ ठुकराल ने अक्टूबर, 2009 में चैनल की नौकरी छोड़कर एस्सार समूह में काम करना शुरू किया। एस्सार समूह तहलका पत्रिका द्वारा गोवा में आयोजित ‘थिंक फेस्ट’ के प्रायोजकों में से एक था। बाद में इस पत्रिका ने ठुकराल की पत्नी शैली चोपड़ा को नौकरी दी। अब उनकी पत्नी ‘शी दि पीपल’ के नाम से एक अभियान चलाती हैं।

तेल, गैस, स्टील और बिजली के क्षेत्र में काम करने वाला एस्सार समूह कई बार विवादों में घिरा है। इसके बाद ठुकराल कार्नेगी फाउंडेशन में काम करने लगे। इस फाउंडेशन में काम करने के बाद वे फेसबुक इंडिया की टीम में वरिष्ठ पद पर शामिल हो गए। अन्खी दास के साथ मिलकर चुनावों के तैयार की जारी फेसबुक की टीम से जुड़े। ठुकराल अपने बैंकर मित्र अनुज गुप्ता के साथ मिलकर हीरेन जोशी को ‘मेरा भरोसा’ और दूसरे ऐसे वेब पेज बनाने में 2013 में मददगार रहे। वे भाजपा की सोशल मीडिया टीम के अनाधिकारिक सदस्य बन गए।

2014 के चुनावों के पहले के ‘मेरा भरोसा’ पेज को देख पाना हमारे लिए मुश्किल था। इसमें हमारी मदद निशांत सक्सेना ने की। हमें पता चला कि इस पेज पर कांग्रेस की अध्यक्ष रही सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के खिलाफ खबरें प्रकाशित होती थीं। इसके जरिये मोदी के विरोधियों की छवि खराब करने की कोशिश हुई और मोदी की छवि मजबूत करने की। 

इसकी कुछ ख़बरों के शीर्षक के उदाहरण से इसे समझा जा सकता है। एक खबर का शीर्षक था- “कैसे सोनिया गांधी ने प्याज की कीमतों को बढ़वाया।” दूसरे का शीर्षक था- “सोनिया गांधी ने भारत को अफ्रीका से भी बुरा बना दिया।” उसी साल नवंबर में अनुज गुप्ता ने ‘मेरा भरोसा’ के अपने एक लेख में लिखा कि मोदी के सत्ता में आते ही लाइसेंस राज से मुक्ति मिलेगी। उस वक्त गुप्ता हांगकांग और मुंबई में काम करने वाले स्ट्रैटजिक डिसिजन ग्रुप के साथ जुड़े हुए थे।

‘मेरा भरोसा’ में नौकरी मांगने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि वे मुंबई में जून, 2013 में गुप्ता से दक्षिणपंथी संगठन ‘सुबोधिनी’ के वेबसाइट लॉन्च के अवसर पर मिले थे। बाद में इस व्यक्ति का साक्षात्कार गुप्ता और ठुकराल ने लिया।

प्रोद्युत बोरा कहते हैं कि अर्द्ध-राजनीतिक कार्यकर्ता का स्वतंत्र प्लेटफॉर्म में शामिल होना गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस के एक नेता ठुकराल के मोदी के अभियानों और हीरेन जोशी से संबंधों का हवाला देते हुए कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि 2019 के चुनावों में फेसबुक जैसा प्लेटफॉर्म बगैर किसी का पक्ष लिए काम कर पाएगा। एक दूसरे आईटी पेशेवर ने कहा कि ठुकराल उन्हें राजनीतिक तौर पर किसी पार्टी के लिए प्रतिबद्ध नहीं दिखते, वे सिर्फ अपने नियोक्ता के लिए काम करते हैं।

फेसबुक में आने से पहले ठुकराल के कामों के बारे में जब हमने फेसबुक के प्रवक्ता से सवाल पूछा तो हमें सीधा जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य बेहतर लोगों को नियुक्त करने का रहता है। यह भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में किया जाता है। शिवनाथ की नियुक्ति में भी इस प्रक्रिया का पालन किया गया था।’

2014 के चुनावों के पहले ‘मेरा भरोसा’ के अलावा और भी कई प्रयोग चल रहे थे। कमल संदेश और मेरे सपनों का भारत जैसे प्रयोग भी भाजपा के पक्ष में चल रहे थे। स्वराज्य पत्रिका चलाने वाले प्रसन्ना विश्वनाथन उस वक्त सेंटर राइट चला रहे थे।

हमारे सोशल मीडिया सीरीज़ के अन्य आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :-

कैसे फेसबुक और भाजपा ने एक-दूसरे की मदद की?

2014 में मोदी का चुनाव अभियान गढ़ने वाले राजेश जैन आज विरोधी क्यों हो गए हैं?

चार टीमों ने मिलकर गढ़ी नरेंद्र मोदी की बड़ी छवि!

सोशल मीडिया पर मोदी के पक्ष में माहौल बनाने वाले अहम किरदार कौन-कौन हैं?

#सोशल_मीडिया : लोकसभा चुनावों पर फेसबुक का असर?

किसने गढ़ी मोदी की छवि?

क्यों फेसबुक कंपनी को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की मांग उठ रही है?

मुफ्त इंटरनेट के जरिये कब्ज़ा जमाने की फेसबुक की नाकाम कोशिश?

#सोशल_मीडिया : लोकसभा चुनावों पर फेसबुक का असर?

क्या सोशल मीडिया पर सबसे अधिक झूठ भारत से फैलाया जा रहा है?

#सोशल_मीडिया : सत्ताधारियों से पूरी दुनिया में है फेसबुक की नजदीकी

जब मोदी का समर्थन करने वाले सुषमा स्वराज को देने लगे गालियां!

फेसबुक पर फर्जी खबरें देने वालों को फॉलो करते हैं प्रधानमंत्री मोदी!

फर्जी सूचनाओं को रोकने के लिए फेसबुक कुछ नहीं करना चाहता!

#सोशल_मीडिया : क्या सुरक्षा उपायों को लेकर व्हाट्सऐप ने अपना पल्ला झाड़ लिया है?

#सोशल_मीडिया : क्या व्हाट्सऐप राजनीतिक लाभ के लिए अफवाह फैलाने का माध्यम बन रहा है?

#सोशल_मीडिया : क्या फेसबुक सत्ताधारियों के साथ है?

#सोशल_मीडिया : क्या नरेंद्र मोदी की आलोचना से फेसबुक को डर लगता है?

#सोशल_मीडिया : कई देशों की सरकारें फेसबुक से क्यों खफा हैं?

सोशल मीडिया की अफवाह से बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा

#socialmedia
#Facebook
Facebook India
Real Face of Facebook in India
mera bharosa
Shivnath Thukral
BJP Advertisement
Narendra modi
General elections2019
2019 Lok Sabha elections

Related Stories

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

‘बुल्ली बाई’: महिलाओं ने ‘ट्रोल’ करने के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा

विश्लेषण : मोदी सरकार और सोशल मीडिया कॉरपोरेट्स के बीच ‘जंग’ के मायने

नए आईटी कानून: सरकार की नीयत और नीति में फ़र्क़ क्यों लगता है?

फेसबुक ने घंटो तक बाधित रखा मोदी के इस्तीफे संबंधी हैशटैग, बाद में कहा गलती से हुआ बाधित

फेसबुक के 53.3 करोड़ प्रयोगकर्ताओं का डेटा ऑनलाइन लीक, भारत के 61 लाख यूजर्स इसमें शामिल

ट्वीट-रूपी सैलाब के साथ छात्रों का हल्ला बोल!

फेसबुक ने ऑस्ट्रेलिया में भले अपनी दुकान बंद कर ली मगर दुनिया के सामने बहुत गहरे सवाल खोल दिए!

छात्रों की हुंकार, डिजिटल आंदोलन की तैयारी!

बिहार चुनावः सांकेतिक तस्वीरों की आड़ में बीजेपी का फ़र्ज़ीवाड़ा!


बाकी खबरें

  • yogi bulldozer
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: भाजपा को अब 'बाबा के बुलडोज़र' का ही सहारा!
    26 Feb 2022
    “इस मशीन का ज़िक्र जिस तरह से उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियानों में हो रहा है उसे देखकर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे स्टार प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
  • Nagaland
    अजय सिंह
    नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”
    26 Feb 2022
    आफ़्सपा और कोरोना टीकाकरण को नगालैंड के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ लोगों में गहरा आक्रोश है।
  • women in politics
    नाइश हसन
    पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन
    26 Feb 2022
    चुनावी राजनीति में झोंका जा रहा अकूत पैसा हर तरह की वंचना से पीड़ित समुदायों के प्रतिनिधित्व को कम कर देता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व नामुमकिन बन जाता है।
  • Volodymyr Zelensky
    एम. के. भद्रकुमार
    रंग बदलती रूस-यूक्रेन की हाइब्रिड जंग
    26 Feb 2022
    दिलचस्प पहलू यह है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ख़ुद भी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से सीधे पुतिन को संदेश देने का अनुरोध किया है।
  • UNI
    रवि कौशल
    UNI कर्मचारियों का प्रदर्शन: “लंबित वेतन का भुगतान कर आप कई 'कुमारों' को बचा सकते हैं”
    26 Feb 2022
    यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया ने अपने फोटोग्राफर टी कुमार को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के कर्मचारी भी मौजूद थे। कुमार ने चेन्नई में अपने दफ्तर में ही वर्षों से वेतन न मिलने से तंग आकर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License