NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मोदी की विफलता : औसत मुद्रा क़र्ज़ केवल 47, 249 रूपए है
इतने कम पैसे में कैसे कोई अपने लिए स्व-रोज़गार सृजन कर सकता है I
सुबोध वर्मा
24 May 2018
Translated by महेश कुमार
मुद्रा

प्रधानमंत्री मोदी का पसंदीदा कार्यक्रम लोगों को मुद्रा ऋण का वितरण है इस उम्मीद में कि बेरोजगार लोग अपने लिए कुछ छोटे व्यवसाय स्थापित कर सकें। मोदी और उनके सहयोगियों ने सरकार में ऋण के आंकड़े की सफलता की  की अंतहीन है बयानबाजी की है और उल्लेखित किया गया है कि इससे बड़े पैमाने पर स्व रोजगार के अवसर पैदा करने में सफलता मिली है ..

 

लेकिन वास्तविकता कुछ और है। चूंकि कार्यक्रम 2015-16 में शुरू किया गया था, इसलिए कुल 9.9 करोड़ ऋण मंजूर किए गया और विशाल 4.88 लाख करोड़ रुपये का वितरण किया गया है। ये प्रभावशाली आंकड़े प्रतीत होते हैं। लेकिन इसका मतलब है कि प्रति व्यक्ति औसत ऋण मात्र 47,249 रूपए ही है!

 

figures

क्या कोई व्यक्ति आज के समय में 50,000 रुपये से कम ऋण पर एक नया उद्यम शुरू कर सकता है और इसे सफलतापूर्वक चला सकता है? यह राशि साथ शायद एक मौजूदा उद्यम को कार्यशील पूंजी के रूप में काम कर सकती है। या हो सकता है कि कोई अन्य स्रोतों से कार्यशील पूंजी की व्यवस्था के साथ अपने छोटे उद्यम को अधतन कर सके। लेकिन एक नया उद्धम शुरू करने और इसे सफलतापूर्वक चलाने के लिए, बहुत मुश्किल है - जब तक कि आप फुटपाथ पर पकोडा बेचना नहीं चाहते हैं।

इसलिए, यह दावा करन कि वितरित किए गए ऋणों की संख्या से व्यापर एक शानदार उड़ान भरेगी, सत्य से परे की बात है। लेकिन फिर मोदी सरकार इन प्रशंसनीय उड़ानों के साथ अपनी पीठ थपथपा रही है।

लेकिन इस धोखे की इस गहरी कहानी में कुछ और भी शामिल है।

एक छोटी सी खबर से पता चला कि इस साल 21 फरवरी को सीबीआई ने बाड़मेर (राजस्थान) शाखा के एक वरिष्ठ पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जिसमें मुद्रा योजना के तहत 6 लाख रुपये के 26 ऋण दिए गए थे। अपनी शिकायत में, सीबीआई ने कहा कि आधिकारिक स्वीकृत ऋण "व्यापारिक या निवास स्थान के सार्थक पूर्व-निरीक्षण या शारीरिक सत्यापन के बिना और ऋण राशि से परिसंपत्तियों के निर्माण या ऋण राशि के अंतिम उपयोग के बिना" जारी किये।

लेकिन यह कि मुद्रा कार्यक्रम क्या था! प्रधान मंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) - जैसा कि इसे आधिकारिक तौर पर कहा जाता है - विशेष रूप से इस तरह की धोखाधड़ी होने के लिए इसमें निहित है क्योंकि यह छोटे उद्यमों को बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखने के लिए आम तौर पर लागू होने वाली सभी कठिन परिस्थितियों का में 10 लाख रुपये तक ऋण देने के लिए अधिकृत है। आम लोगों द्वारा ऐसे छोटे ऋणों पर, बेशक, भौतिक सत्यापन इत्यादि अभी भी जरूरी है - यही वह जगह है जहां बाड़मेर बैंक अधिकारी ने ठोकर खाई।

मुद्रा एक पुनर्वित्त योजना है, अर्थात, इसमें सरकार से प्रत्यक्ष उधार शामिल नहीं है जिसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, एनबीएफसी और एमएफआई द्वारा ऋण दिए जाते हैं। सरकार के तहत इन ऋणों को बांटने का दबाव, इन सभी संस्थान द्वारा मुद्रा ऋण को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा हैं। यह वापस आएगा और उन्हें बाद के समय मों परेशान करेगा - लेकिन इसकी कौन परवाह करता है!

बिना तस्दीक की जाने वाली अफवाहें हैं - और कुछ बैंक अधिकारी भी ऑफ़ द रिकॉर्ड कह रहे हैं कि कई मुद्रा ऋण लेने वालों को स्थानीय बीजेपी नेताओं और समर्थकों द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है। यदि यह सच है, तो बीजेपी को सार्वजनिक निधियों द्वारा अपने समर्थकों को वित्त पोषित करने का एक तरीका मिला गया है! भविष्य में केवल आगे की जांच बताएगी कि यह सच है या नहीं। जो भी हो, मुद्रा योजना निश्चित रूप से उत्साही मोदी समर्थकों द्वारा निर्धारित पैमाने पर आत्म-रोजगार नहीं बना पा रही है। वास्तव में, अन्य सभी रोजगार से संबंधित योजनाओं की तरह, यह भी एक बड़ी विफलता की शिकार हो गयी है।

नरेंद्र मोदी
मुद्रा लोन
बीजेपी

Related Stories

झारखंड चुनाव: 20 सीटों पर मतदान, सिसई में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में एक ग्रामीण की मौत, दो घायल

झारखंड की 'वीआईपी' सीट जमशेदपुर पूर्वी : रघुवर को सरयू की चुनौती, गौरव तीसरा कोण

रोज़गार में तेज़ गिरावट जारी है

हमें ‘लिंचिस्तान’ बनने से सिर्फ जन-आन्दोलन ही बचा सकता है

अविश्वास प्रस्ताव: विपक्षी दलों ने उजागर कीं बीजेपी की असफलताएँ

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष

चुनाव से पहले उद्घाटनों की होड़

अमेरिकी सरकार हर रोज़ 121 बम गिराती हैः रिपोर्ट

असमः नागरिकता छीन जाने के डर लोग कर रहे आत्महत्या, एनआरसी की सूची 30 जुलाई तक होगी जारी

जीएसटी ने छोटे व्यवसाय को बर्बाद कर दिया


बाकी खबरें

  • Ukraine Russia
    पार्थ एस घोष
    यूक्रेन युद्ध: क्या हमारी सामूहिक चेतना लकवाग्रस्त हो चुकी है?
    14 Mar 2022
    राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न उस पवित्र गाय के समान हो गया है जिसमें हर सही-गलत को जायज ठहरा दिया जाता है। बड़ी शक्तियों के पास के छोटे राष्ट्रों को अवश्य ही इस बात को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि बड़े…
  • Para Badminton International Competition
    भाषा
    मानसी और भगत चमके, भारत ने स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 21 पदक जीते
    14 Mar 2022
    भारत ने हाल में स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय (लेवल दो) प्रतियोगिता में 11 स्वर्ण, सात रजत और 16 कांस्य से कुल 34 पदक जीते थे।
  • भाषा
    बाफ्टा 2022: ‘द पावर ऑफ द डॉग’ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म
    14 Mar 2022
    मंच पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार देने आए ‘द बैटमैन’ के अभिनेता एंडी सर्किस ने विजेता की घोषणा करने से पहले अफगानिस्तान और यूक्रेन के शरणार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के लिए सरकार पर निशाना…
  • उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: दक्षिण अमेरिका में वाम के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे बोरिक
    14 Mar 2022
    बोरिक का सत्ता संभालना सितंबर 1973 की सैन्य बगावत के बाद से—यानी पिछले तकरीबन 48-49 सालों में—चिली की राजनीतिक धारा में आया सबसे बड़ा बदलाव है।
  • indian railway
    बी. सिवरामन
    भारतीय रेल के निजीकरण का तमाशा
    14 Mar 2022
    यह लेख रेलवे के निजीकरण की दिवालिया नीति और उनकी हठधर्मिता के बारे में है, हालांकि यह अपने पहले प्रयास में ही फ्लॉप-शो बन गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License