NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नारद के बाद, हनुमान का हुआ छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता विश्वविद्यालय में प्रवेश

रायपुर की राज्य संचालित कुशाभाऊ ठाकरे जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में वैश्विक संस्कृति में हनुमान और आध्यात्मिक संचार: इतिहास,परंपरा और मतभेद पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित कर रहा है।
काशिफ़ काकवी
07 Sep 2018
मध्यप्रदेश

नारद के बाद, पौराणिक कथाओं के देवता 'हनुमान' ने छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में अपनी जगह बना ली है। भोपाल स्थित मखनलाल चतुर्वेदी नेशनल जर्नलिज्म यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में 'नारद' के विषय में पहले से ही पढ़ाया जा रहा है, जिसमें उसे खबरें एकत्रित करने की कला में महारत हासिल करने वाला 'पहला पत्रकार' बताया गया है।

अब रायपुर के राज्य संचालित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन विश्वविद्यालय में ' वैश्विक संस्कृति में हनुमान और आध्यात्मिक संचार: इतिहास,परंपरा और मतभेद' विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी आयोजित करने जा रही है। बैठक 7-8 सितंबर के लिए निर्धारित है।

विश्वविद्यालय ने हनुमान के जीवन प्रबंधन समेत 19 विषयों पर पूरी दुनिया के विद्वानों से शोधपत्र आमंत्रित किए हैं; हनुमान के आधुनिक और प्राचीन रूप; विभिन्न रामायणों में राम और हनुमान; लोक साहित्य और कहानियों में हनुमान; लोक परंपरा में राम और रामायण; सबार मंत्रों में हनुमान और इसी तरह के अन्य कई विषयों पर शोधपत्र आमंत्रित किए।

दिलचस्प बात यह है कि विश्वविद्यालय के एक सहायक प्रोफेसर, डॉ आशुतोष मांडवी, जो संगोष्ठी के प्रभारी हैं, उनके द्वारा पुष्टि की गई है कि विश्वविद्यालय को पूरे देश से 50-60 शोधपत्र प्राप्त हुए हैं।

मांडवी ने कहा कि, "भारत के लिए, हनुमान का चरित्र महत्वपूर्ण है। वह एक प्रबंधन गुरु और उत्कृष्ट आध्यात्मिक अध्यापक थे"। हनुमान पर दो दिवसीय सेमिनार आयोजित करने की आवश्यकता पर सवाल उठाने पर उन्होंने कहा कि, "उनके गुण अपनाने के योग्य हैं जिन्हें आज तक उपेक्षित किया गया है।"

विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के प्रमुख शाहिद अली ने मंडवी की टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा कि, "हम हनुमान की आचरण और उनके मूल्यों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। उनका समय प्रबंधन उत्कृष्ट था। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक बार अपने भाषण में हनुमान की प्रशंसा की है।

इस बीच, मध्य प्रदेश के सीपीआई (एम) सचिव, बादल सरोज ने सेमिनार को 'कुटिलता की ऊंचाई' कहा। सरोज ने कहा कि, “हनुमान भगवा शिक्षाविदों के लिए आदर्श है”।

उन्होंने कहा कि, "नरेंद्र मोदी ने एक बार टिप्पणी की थी कि हम सभी को हनुमान से सीखना चाहिए क्योंकि उन्होंने कभी सवाल नहीं पूछा। उन्होंने केवल वही किया जो उन्हें करने के लिए कहा गया था और वे एक अकादमिक को ऐसा ही बनाना चाहते हैं- ऐसे लोगों का एक समूह जो कभी संदेह न करे, जो कभी सवाल न करे।"

इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए, कांग्रेस प्रवक्ता के. के. मिश्रा ने कहा कि शिक्षा का भगवाकरण करना भाजपा के लिए भारी पड़ेगी। उन्होंने कहा, "देश में शिक्षा का भगवाकरण निरंतर जारी है। माखानलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के बाद कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी भी इस क्लब में शामिल हो गया है।"

उन्होंने आगे कहा कि, "छात्रों को और अधिक पेशेवर बनाने के लिए आगे बढ़ने और पाठ्यक्रम में आधुनिक विषयों को जोड़ने की बजाय वे प्राचीन काल में भेज रहे हैं।"

कई प्रयासों के बावजूद, विश्वविद्यालय के कुलपति एम.एस. परमार की टिप्पणी नहीं मिलीI

नारद- पहले 'आदि पत्रकार है'

इस संबंध में, भोपाल में स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय अपने रायपुर के मुकाबले बहुत आगे रहा।नारद पहले पत्रकार
विश्वविद्यालय पहले ही अपने पाठ्यक्रम में नारद को शामिल कर चुका हैI वहाँ पढ़ाया जा रहा है कि वह 'आदि-पत्रकार’ था, उसने खबरें एकत्रित करने की कला में महारत हासिल की थी। छात्रों को उससे खोजी पत्रकारिता सीखनी चाहिए। इसी तरह, विश्वविद्यालय यह भी मानता है कि संजय पहला टीवी रिपोर्टर और एक युद्ध संवाददाता था, जिसने 'महाभारत' को कवर किया और युद्ध की एक लाइव रिपोर्ट दी थी।

यह उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में बीजेपी 15 वर्षों से सत्ता में है और दोनों राज्यों में साल के अंत तक चुनाव होने वाले हैं।

 

 

Makhanlal Chaturvedi National Journalism University
Kushabhau Thakre Journalism and Mass Communication University
रायपुर
भाजपा सरकार

Related Stories

पीएमएफबीवाई: मोदी की एक और योजना जो धूल चाट रही है

उत्तर प्रदेश में बलत्कार की घटनाओं में वृद्धि लगतार ज़ारी

नाम में क्या रखा है? बहुत कुछ

नमो ऐप: आपका डाटा अब बीजेपी का चुनावी हथियार है

तमिलनाडु क्यों कावेरी प्रबंधन बोर्ड चाहता है

धर्मनिर्पेक्ष भारत पर सांप्रदायिकता के काले बादल

पूंजीपतियों के लिए: पूंजीपतियों की सरकार

नरेगा बचाओ, गरीब बचाओ

छत्तीसगढ़ नसबंदी हादसा: लापरवाह सरकार और लचर स्वास्थय प्रणाली


बाकी खबरें

  • bihar
    एम.ओबैद
    नीति आयोग की रेटिंग ने नीतीश कुमार के दावों की खोली पोल: अरुण मिश्रा
    09 Oct 2021
    नीति आयोग की रेटिंग में बिहार को सबसे निचले पायदान पर दिखाया गया है। इसको लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नाराजगी जताई है और कहा है कि अगली बार जब बैठक होगी तो हम अपनी बात आयोग के सामने…
  • Pandora Papers
    बी. सिवरामन
    क्या पनामा, पैराडाइज़ व पैंडोरा पेपर्स लीक से ग्लोबल पूंजीवाद को कोई फ़र्क़ पड़ा है?
    09 Oct 2021
    साल-दर-साल ऐसे लीक सामने आते हैं लेकिन ऐसे भारी स्कैंडल पर भी सरकारों की क्या प्रतिक्रिया रही है? ज़्यादा कुछ नहीं।
  •  Lakhimpur Kheri: A turning point in the journey of farmers' movement
    लाल बहादुर सिंह
    लखीमपुर खीरी : किसान-आंदोलन की यात्रा का अहम मोड़
    09 Oct 2021
    26-28 जनवरी के घटनाक्रम की तरह ही लखीमपुर हत्याकांड किसान-आंदोलन की यात्रा का एक major turning point है, जिसकी चुनौती का सफलतापूर्वक मुकाबला आंदोलन को प्रतिरोध और राजनीतिक प्रभाव के उच्चतर चरण में…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 19,740 नए मामले, 248 मरीज़ों की मौत
    09 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.70 फ़ीसदी यानी 2 लाख 36 हज़ार 643 हो गयी है।
  • DU Students
    रौनक छाबड़ा
    डीयू के छात्रों का केरल के अंडरग्रेजुएट के ख़िलाफ़ प्रोफ़ेसर की टिप्पणी पर विरोध
    09 Oct 2021
    एसएफ़आई का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के दरवाज़े सभी छात्रों के लिए खुले हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License