NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
नेपाल
नेपाल में भारत के नये नोट बंद : "हमारे लिए तो फांसी लगाने की नौबत आ गयी है"
नेपाल की वर्तमान सरकार ने 100 रुपये से अधिक के भारतीय नोटों के चलन पर रोक लगा दी है। इससे नेपाल और नेपाल से जुड़े भारत के लोगों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
नवीन कुमार वर्मा
14 Dec 2018
सांकेतिक तस्वीर

"हमारे लिए तो फांसी लगाने की नौबत आ गयी है।" यह कहना है नेपाल में कपड़ों का व्यापार करने वाले लोकनाथ आचार्य का। उनकी काठमांडू में कपड़े की दुकान है। वह दिल्ली के गांधीनगर और करोल बाग से कपड़ों को लेकर नेपाल में बेचते हैं।

नेपाल की वर्तमान सरकार ने 100 रुपये से अधिक के भारतीय नोटों के चलन पर रोक लगा दी है। नेपाल की कैबिनेट ने भारत के 2000, 500 और 200 के नये नोट पर रोक लगाते हुए इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया है। जिससे नेपाल के व्यापारी वर्ग से लेकर दिहाड़ी मज़दूर और किसान सभी परेशान हैं। इससे नेपाल से जुड़े भारत के लोगों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

8 नवंबर 2016, को भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की। परिणामस्वरूप 500 और 1000 के पुराने नोट ग़ैरकानूनी हो गए थे। नोटबंदी के दिनों को याद करें तो आपको याद आएगा कि हर तरफ़ हाहाकार था। एक ही पल में 500 और 1000 के नोट कागज़ के टुकड़े हो गए थे। एटीएम के सामने लंबी कतारें लगीं थीं। लोग अपने पुराने नोट बदलने के लिए दिन-रात परेशान थे। इस दौरान कई लोगों की मौत भी हुई। इस नोटबंदी से भारत में हर वर्ग प्रभावित हुआ। नोटबंदी की चपेट में भारत के निवासी ही नहीं बल्कि रोजगार के लिए पड़ोसी देशों से आने वाले प्रवासी भी थे।

नोटबंदी के कारण भारत के पड़ोसी नेपाल में भी लोग बेहद तकलीफ़ में रहे। भारत में जब नोटबंदी हुई थी, तब नेपाल के बैंकों में बड़ी मात्रा में 500 और 1000 के पुराने नोट जमा हो गए थे। इन पुराने नोटों के मुद्दे पर नेपाल में भारत से थोड़ी अनबन चल रही थी। नेपाल के केंद्रीय बैंक ने एक बार कहा था कि उनके पास भारत के करीब 68 अरब रुपये मूल्य के पुराने नोट हैं। अब नेपाल ने 100 रुपये से अधिक के भारतीय नोटों के चलन पर रोक लगा दी है। नेपाल की कैबिनेट ने तत्काल प्रभाव से इस आदेश को लागू करने का आदेश दिया है।

नेपाल की कैबिनेट में पत्रकारों को इस फैसले की जानकारी गुरुवार दी गई है। सरकारी प्रवक्ता गोकुल बास्कोटा ने बताया कि "दो हज़ार, पांच सौ और दो सौ रुपए के भारतीय नोट को रखना, उनके बदले किसी सामान को लेना या भारत से उन्हें नेपाल में लाना ग़ैरकानूनी हो गया है।'' 

नेपाल द्वारा इस तरह के कठोर फैसले को समझने के लिए आपको कुछ घटनाओं को समझने की जरूरत है।

नोटबंदी के बाद भारत में तो लोगों को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बदलने का मौका मिला लेकिन नेपाल में भारतीय मुद्रा रखे लोगों को इसका मौका नहीं मिला जिसकी वजह से नेपाली बैंकों में भारत के पुराने 500-1000 के नोटों की संख्या में इजाफ़ा हो गया। नोटबंदी से पहले लोग 25,000 रुपये तक नेपाल ला सकते थे। आपको बता दें नेपाल के कुल व्यापार का 70 फीसदी भारत से है इसलिए लोग अपने पास भारतीय नोट रखते थे। नोटबंदी की घोषणा से 500 और 1000 रुपये के भारतीय नोट रखने वाले नेपाली लोगों को झटका लगा था। 

भारत के पुराने नोटों को बदलने के लिए नेपाल भारत सरकार से कई बार बात कर चुका है मगर भारत सरकार पुराने नोटों को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखती जिस कारण दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आनी शुरू हुई। नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अप्रैल में भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से इस विषय पर बातचीत की मगर आश्वासन से ज्यादा नेपाल को भारत से कुछ हासिल नहीं हुआ। जिसे लेकर नेपाल में नाराज़गी बनी हुई थी और शायद इसी वजह से नेपाल सरकार ने भारत के नए नोटों को अवैध घोषित करने का फ़ैसला लिया है। दोनों देशों की सरकारों के फैसले से आम जनता को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

न्यूज़क्लिक से बातचीत में नेपाली मूल की भारतीय पत्रकार सविता शर्मा ने बताया कि "नेपाल की वर्तमान सरकार का यह फैसला नेपाल के लोगों के हित में नहीं है। भविष्य में नेपाली अर्थव्यवस्था को इससे बहुत नुकसान होगा।" बातचीत में पत्रकार सविता शर्मा जी ने कहा कि "नेपाल एक ऐसा देश है जहां औद्योगिक विकास बहुत कम हुआ है इसलिए वह रोज़मर्रा तक की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने पड़ोसी देशों पर निर्भर रहता है। नेपाल का 70 फीसदी व्यापार भारत के साथ ही होता है। नेपाल भारत पर इतना निर्भर है कि कैरोसीन से लेकर खेती किसानी में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक तक सभी भारत से आयात किया जाता है। इस फैसले से नेपाल के लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।"

दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद कॉलेज में नेपाली मूल के हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले छात्र विशाल जोशी ने न्यूज़क्लिक को बताया कि "नेपाल सरकार के इस फैसले से नेपाल के मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के लोगों के लिए परेशानियां बढ़ गयी हैं। भारत में नोटबंदी के बाद से ही नेपाल में भारत के बड़े नोट कुछ समय तक चलन से बाहर थे मगर आम लोगों के बीच बड़े नोटों का आदान प्रदान चल रहा था। पीएम मोदी की मई 2018 में, नेपाल के जनकपुर जाने के बाद से भारत के बड़े नोटों का चलन औपचारिक तौर पर शुरू हो गया। परंतु इस बार सरकार द्वारा भारतीय नोटों पर लगाए प्रतिबंध से स्थिति बिगड़ने की संभावनाएं ज्यादा हैं और आम जनता को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।"

नेपाल की वर्तमान सरकार द्वारा भारत के बड़े नोटों पर लगाए प्रतिबंध से भारत को शायद उतना फर्क न पड़ता हो मगर भारत में काम करने वाले नेपाली नागरिकों के लिए यह फैसला किसी बुरे सपने से कम नहीं है। इससे अब भारत से नेपाल जाने वाले पर्यटकों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। इसे भारत सरकार की विदेश नीति की विफलता ही कहेंगे की भारत नेपाल जैसे अपने वर्षों पुराने मित्रों को खोता जा रहा है।

Nepal
India
demonetization
notebandi
Indian currency
Indian currency ban

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

UN में भारत: देश में 30 करोड़ लोग आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर, सरकार उनके अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध

वर्ष 2030 तक हार्ट अटैक से सबसे ज़्यादा मौत भारत में होगी

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

वित्त मंत्री जी आप बिल्कुल गलत हैं! महंगाई की मार ग़रीबों पर पड़ती है, अमीरों पर नहीं

कार्टून क्लिक: चीन हां जी….चीन ना जी

रूस की नए बाज़ारों की तलाश, भारत और चीन को दे सकती  है सबसे अधिक लाभ

प्रेस फ्रीडम सूचकांक में भारत 150वे स्थान पर क्यों पहुंचा


बाकी खबरें

  • yogi
    एम.ओबैद
    सीएम योगी अपने कार्यकाल में हुई हिंसा की घटनाओं को भूल गए!
    05 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखपुर में एक बार फिर कहा कि पिछली सरकारों ने राज्य में दंगा और पलायन कराया है। लेकिन वे अपने कार्यकाल में हुए हिंसा को भूल जाते हैं।
  • Goa election
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोवा चुनाव: राज्य में क्या है खनन का मुद्दा और ये क्यों महत्वपूर्ण है?
    05 Feb 2022
    गोवा में खनन एक प्रमुख मुद्दा है। सभी पार्टियां कह रही हैं कि अगर वो सत्ता में आती हैं तो माइनिंग शुरु कराएंगे। लेकिन कैसे कराएंगे, इसका ब्लू प्रिंट किसी के पास नहीं है। क्योंकि, खनन सुप्रीम कोर्ट के…
  • ajay mishra teni
    भाषा
    लखीमपुर घटना में मारे गए किसान के बेटे ने टेनी के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़ने का इरादा जताया
    05 Feb 2022
    जगदीप सिंह ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने उन्हें लखीमपुर खीरी की धौरहरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वे 2024 के लोकसभा…
  • up elections
    भाषा
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पहला चरण: 15 निरक्षर, 125 उम्मीदवार आठवीं तक पढ़े
    05 Feb 2022
    239 उम्मीदवारों (39 प्रतिशत) ने अपनी शैक्षणिक योग्यता कक्षा पांच और 12वीं के बीच घोषित की है, जबकि 304 उम्मीदवारों (49 प्रतिशत) ने स्नातक या उससे ऊपर की शैक्षणिक योग्यता घोषित की है।
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    "चुनाव से पहले की अंदरूनी लड़ाई से कांग्रेस को नुकसान" - राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह
    05 Feb 2022
    पंजाब में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा करना राहुल गाँधी का गलत राजनीतिक निर्णय था। न्यूज़क्लिक के साथ एक खास बातचीत में राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह ने कहा कि अब तक जो मुकाबला…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License