NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
नोटबंदी सबसे बड़ा मनी लांड्री घोटाला - अरुण शोरी
यशवंत सिन्हा का लेख और अरुण शोरी के बयान उसी बात की पुष्टि करते हैं जो पहले से ही आरबीआई और अर्थशास्त्री स्थापित कर चुके हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 Oct 2017
आर्थिक मंदी

यशवंत सिन्हा के बाद सरकार पूर्व वित्त मंत्री अरुण शोरी ने भी सरकार पर तीखे प्रहार किये हैं . NDTV से बात करते हुए अरुण शोरी ने कहा कि नोटबंदी अब तक का सबसे बड़ा मनी लांड्री घोटाला था .शोरी ने आगे कहा कि नोट बंदी की वजह से लोगों के द्वारा काला धन सफ़ेद में बदल दिया गया है. RBI के मुताबिक 99% प्रतिबंधित मुद्रा वापस बैंकों में आ गई ,यानी काले धन को ख़तम नहीं किया गया. शौरी ने करीब एक साल पहले नवंबर में एक हजार और पांच सौ रुपये के नोटों को अमान्य करार दिए जाने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि उसी के कारण आज अर्थव्यवस्था में सुस्ती देखी जा रही है.


शोरी ने आगे GST की भी आलोचना करते हुए कहा कि भले ही वो एक ज़रूरी कदम था , पर उसे बहुत ख़राब तरीके से लागू किया गया है. इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि “ तीन महीनें में सात बार नियम बदले गए" साथ ही  उन्होंने GST की तुलना आज़ादी से किये जाने पर आश्चर्य जताया. अरुण शोरी के अनुसार सरकार को ढाई लोग चला रहे हैं , जिसमें नरेन्द्र मोदी और अमित शाह शामिल हैं . आधे व्यक्ति के तौर पर उन्होंने अरुण जेटली की ओर इशारा किया . इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे यशवंत सिन्हा की हालिया टिप्पणी से सहमत हैं और बीजेपी में बहुत से लोग हैं जो इन आर्थिक नीतियों  से चिंतित है लेकिन वो अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं.


गौरतलब है कि अरुण शोरी भी यशवंत सिन्हा कि तरह ही बीजेपी सरकार में वित्त मंत्री रह चुके हैं और आर्थिक मामलों के जानकार माने जाते हैं . इससे पहले यशवंत सिन्हा ने भी हाल में सरकार की आर्थिक नीतियों की काफी आलोचना की थी . यशवंत सिन्हा का कहना था कि नोट बंदी ने आर्थिक गिरावट में आग में घी का काम किया है . जीडीपी के बारे में उन्होंने कहा था कि ये दर गिरकर  5.7% हो चुकी है जो पिछले साल के मुकाबले 2.2% कम है . इसके साथ ही उनका कहना था कि जीडीपी को नापने के तरीकों में भी बदलाव किया गया है यानी ये दर फिलहाल 3.7% होनी चाहिए . यशवंत सिन्हा ने अरुण शोरी की तरह ही GST के गलत क्रियान्वन की भी बात करी थी .उनका कहना था कि जीसटी के गलत क्रियान्वन की वजह से लाखों लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है और व्यापारियों को भी काफी नुकसान झेलना पड़ा है .


यशवंत सिन्हा का लेख और अरुण शोरी के बयान उसी बात की पुष्टि करते हैं जो पहले से ही आरबीआई और अर्थशास्त्री स्थापित कर चुके हैं। हाल में आरबीआई  ने नोटबंदी पर अपने डेटा में  बताया कि नोटबंदी में प्रतिबंधित नोटों में से 99% नोट वापस सिस्टम में आ गये हैं।इसका ये  मतलब है कि नोटबंदी से काला धन मिटा देने के दावे पूरी तरह खोखले थे।  साथ ही इससे लघु उद्योगों और असंगठित क्षेत्र को काफी नुकसान भी झेलना पड़ा है , जो कि नोटों के लेन  देन पर ही निर्भर रहे हैं  ।  बताया  गया  है कि "कॅश क्रंच" की  वजह  से लाखों लोगों  को अपनी नौकरी गवानी पड़ी थी।  साथ ही नोटबंदी  से आतंकवाद और नक्सलवाद ख़तम करने  देने के सरकारी दावे तो मज़ाक से लगते हैं।  इसका  सबूत ये है कि नोटबंदी  के बाद इन समस्याओं में वृद्धि ही हुई है। अर्थव्यवस्था के जानकार ये कहते हैं कि नोटों के रूप में सिर्फ 6% काला धन था उसके अलावा काला धन  पहले से ही  तो अर्थव्यवस्था में निवेश किया जाता रहा है।  इसका मतलब ये है कि काला धन पहले से ही व्यवस्था में मौजूद है। इसीलिए इस पूरे प्रकरण से नुकसान होना तय  माना जा रहा था।  कृषि  और असंगठित क्षेत्र  जहाँ  लेन देन नोटों  के रूप में ही होता है , इससे बहुत ज्यादा मुसीबत में पड़  गया था और उनका उभार अब तक नहीं हो पाया है।इसी तरह  GST  से भी लघु उद्योगों के ख़तम होने और संघीय ढांचे के चरमरा जाने की समस्या सामने आयी है।  इन दोनों ही आर्थिक निर्णयों से जीडीपी की दर में लगातार  गिरावट  हुई है।


अरुण शोरी और यशवंत सिन्हा के इन बयानों ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है . इन लोगों के बयान इसिलिये  भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि ये दोनों ही बीजेपी सरकारों में अहम भूमिका निभा चुके हैं . ज़ाहिर है इन दोनों नेताओं ने जो कहा उसमें कुछ नया नहीं हैं, पर पार्टी के भीतर से ये आवाजें उठना सरकार की मुश्किलें और बढ़ा सकता है . 
                                                            

आर्थिक मंदी
अरुण शौरी
यशवंत सिन्हा
बीजेपी
नोटबंदी

Related Stories

झारखंड चुनाव: 20 सीटों पर मतदान, सिसई में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में एक ग्रामीण की मौत, दो घायल

झारखंड की 'वीआईपी' सीट जमशेदपुर पूर्वी : रघुवर को सरयू की चुनौती, गौरव तीसरा कोण

हमें ‘लिंचिस्तान’ बनने से सिर्फ जन-आन्दोलन ही बचा सकता है

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष

असमः नागरिकता छीन जाने के डर लोग कर रहे आत्महत्या, एनआरसी की सूची 30 जुलाई तक होगी जारी

नोटबंदी: वायू सेना ने सौंपा 29.41 करोड़ का बिल

अहमदाबाद के एक बैंक और अमित शाह का दिलचस्प मामला

आरएसएस के लिए यह "सत्य का दर्पण” नहीं हो सकता है

उत्तरपूर्व में हिंदुत्वा का दोगुला खेल

अशोक धावले : मोदी सरकार आज़ाद भारत के इतिहास में सबसे किसान विरोधी सरकार है


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या
    19 Mar 2022
    कुछ दिनों में यूपी की सत्ता पर बीजेपी की योगी सरकार दूसरी बार काबिज़ होगी। ऐसे में बीते कार्यकाल में 'बेहतर कानून व्यवस्था' के नाम पर सबसे ज्यादा नाकामी का आरोप झेल चुकी बीजेपी के लिए इसे लेकर एक बार…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 
    19 Mar 2022
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी ट्रेड यूनियन जुट गए हैं। देश भर में इन संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठकों का सिलसिला जारी है।
  • रवि कौशल
    पंजाब: शपथ के बाद की वे चुनौतियाँ जिनसे लड़ना नए मुख्यमंत्री के लिए मुश्किल भी और ज़रूरी भी
    19 Mar 2022
    आप के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने बढ़ते क़र्ज़ से लेकर राजस्व-रिसाव को रोकने, रेत खनन माफ़िया पर लगाम कसने और मादक पदार्थो के ख़तरे से निबटने जैसी कई विकट चुनौतियां हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    अल्ज़ाइमर बीमारी : कॉग्निटिव डिक्लाइन लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी का प्रमुख संकेतक है
    19 Mar 2022
    आम तौर पर अल्ज़ाइमर बीमारी के मरीज़ों की लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी 3-12 सालों तक रहती है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    स्लोवेनिया : स्वास्थ्य कर्मचारी वेतन वृद्धि और समान अधिकारों के लिए कर रहे संघर्ष
    19 Mar 2022
    16 फ़रवरी को स्लोवेनिया के क़रीब 50,000 स्वास्थ्य कर्मचारी काम करने की ख़राब स्थिति, कम वेतन, पुराने नियम और समझौते के उल्लंघन के ख़िलाफ़ हड़ताल पर चले गए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License