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भारत
नववर्ष पर तेलंगाना, आंध्र को अलग-अलग उच्च न्यायालय
आंध्र प्रदेश के विभाजन के साढ़े चार साल बाद दोनों तेलुगू राज्यों को अलग-अलग उच्च न्यायालय मिला है, जिसकी लंबे समय से मांग की जा रही थी।
आईएएनएस
01 Jan 2019
फाइल फोटो

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को नववर्ष पर अलग-अलग उच्च न्यायालय मिले हैं, और मंगलवार को दोनों न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों ने शपथ भी ले ली। पिछले सप्ताह राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा अधिसूचना जारी करने के बाद तेलंगाना के हैदराबाद और आंध्र प्रदेश के अमरावती में मंगलवार को इन राज्यों के उच्च न्यायालय कार्यशील हो गए। 

आंध्र प्रदेश के विभाजन के साढ़े चार साल बाद दोनों तेलुगू राज्यों को अलग-अलग उच्च न्यायालय मिला है, जिसकी लंबे समय से मांग की जा रही थी। 

न्यायाधीश चागरी प्रवीण कुमार ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

दोनों राज्यों के राज्यपाल ई.एस.एल नरसिम्हन ने इंदिरा गांधी म्यूनिसिपल स्टेडियम में आयोजित एक समारोह में न्यायाधीश प्रवीण कुमार और 14 अन्य न्यायाधीशों को शपथ दिलाई।

समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एन.वी. रमण, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, कई वकील और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। 

न्यायाधीश रमण ने बाद में मुख्यमंत्री के पुराने शिविर कार्यालय में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के अस्थायी भवन का उद्घाटन किया।

इस महीने के अंत में, अदालत को सिटी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जहां यह तबतक काम करेगा जबतक कि अमरावती में स्थायी इमारत के निर्माण का काम पूरा नहीं हो जाता। 

अनंतपुर जिले के रहने वाले न्यायाधीश प्रवीण कुमार, वरिष्ठ वकील सी. पद्मनाभ रेड्डी के बेटे हैं। साल 2012 में वह तत्कालीन आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने थे। 

विजयवाड़ा पहुंचने से पहले राज्यपाल ने हैदराबाद के राजभवन में न्यायमूर्ति टी. भास्करन नायर राधाकृष्णन को तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई।

न्यायमूर्ति राधाकृष्णन ने बाद में तेलंगाना उच्च न्यायालय के 12 न्यायाधीशों को शपथ दिलाई। 

59
वर्षीय न्यायमूर्ति राधाकृष्णन ने कर्नाटक में कानून की पढ़ाई की है और पिछले साल जुलाई से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों के लिए हैदराबाद में न्यायपालिका के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवा दे रहे थे।

दोनों राज्यों के संयुक्त उच्च न्यायालय में 3.4 लाख मामले लंबित रहे हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत आंध्र प्रदेश से संबंधित हैं।

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