NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
बच्चे मिड-डे मील से और रसोइये मेहनताने से वंचित
देश का अन्न भंडार कहलाए जाने वाले राज्य पंजाब में गरीब वर्गों के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही महत्वपूर्ण स्कीम का बंद होने की कगार पर पहुंचना दुर्भाग्यपूर्ण है।
शिव इंदर सिंह
15 Jul 2020
बच्चे मिड-डे मील से और रसोइये मेहनताने से वंचित
Image courtesy: India Today

केन्द्र सरकार की सहायता से स्कूलों में चल रही मिड-डे मील स्कीम पंजाब में संकट से घिरी हुई दिख रही है। केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा इसके लिए आवश्यक फंड जारी नहीं किए जा रहा है। तालाबंदी यानी लॉकडाउन के चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पंजाब शिक्षा विभाग ने स्कूलों में मिड-डे मील खाने वाले विद्यार्थियों के लिए घरों में राशन पहुंचाने व खाना पकाने पर आने वाली लागत का पैसा विद्यार्थियों के खातों में डालने का फैसला लिया था। बच्चों को राशन के पैकट व पैसे पहुंचाने के लिए अध्यापकों व दोपहर का खाना बनाने का काम करने वाली मिड-डे मिल कुक (रसोइयों) की 24 दिनों के लिए जिम्मेदारी लगाई गई थी लेकिन अब बच्चों को राशन पहुंचाया जाना भी बंद है और सरकार ने कुक को वेतन भी नहीं दिया है।

तालाबंदी के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान तो कर दिया लेकिन राशन व मेहनताना दोनों ही ज़रूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंचे। पंजाब के शिक्षा विभाग ने 23 मार्च से 15 अप्रैल तक जो राशन के पैकेट विद्यार्थियों के घरों तक भेजने के आदेश दिए थे उसके तहत पहली कक्षा से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए रोजाना 1.2 किलोग्राम चावल या गेहूं, छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए रोजाना 1.8 किलोग्राम चावल या गेहूं के पैकेट भेजने के आदेश दिए गए थे। इसके साथ ही 24 दिनों की खाना पकाने की प्रतिदिन की प्रति विद्यार्थी लागत प्राइमरी की 4.48 रुपये, छठी से आठवीं तक की 6.71 रुपये बनती थी।

केन्द्र सरकार ने मई से कुकिंग लागत बढ़ाकर प्राइमरी के लिए प्रति विद्यार्थी 4.97 रुपये, अपर प्राइमरी के लिए 7.45 रुपये कर दी। तालाबंदी खुल जाने  के बावजूद स्कूल बंद हैं। केन्द्र सरकार ने तालाबंदी के दौरान पंजाब में पहली से आठवीं कक्षा तक सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में मिड-डे मील ले रहे लगभग 13 लाख बच्चों के लिए पैसा जारी किया। इस स्कीम के लिए अनाज केन्द्र सरकार की एजेंसी फूड कॉरपोरेशन द्वारा मुहैया करवाया जाता है जबकि प्रबंधकीय खर्चों के लिए फंड राज्य सरकार को मुहैया करवाने होते हैं। इस स्कीम में 60 फीसदी पैसा केन्द्र व 40 फीसदी राज्य सरकार को डालना होता है। पंजाब सरकार ने 15 अप्रैल के बाद न तो राशन दिया और न ही कुकिंग लागत बच्चों तक पहुंची। मिड-डे मील योजना लम्बी जद्दोजहद के बाद इसलिए लागू की गई थी कि गरीब परिवारों के बच्चों को पौष्टिक भोजन मिले।

राज्य सरकार द्वारा स्कीम के लिए आवश्यक फंड जारी न किए जाने के कारण अध्यापकों द्वारा इसे चलाया जाना मुश्किल हो गया क्योंकि उनके द्वारा खर्च किए गए लाखों रुपयों के बिलों की अदायगी नहीं हो रही। स्कीम के तहत खाना बनाने वाली औरतों के मासिक भत्ते का भुगतान भी पिछले पांच महीनों से नहीं हो रहा। किराना दुकानों के भी लाखों रुपयों के बिल बकाया पड़े हैं। बीते वित्तीय वर्ष के लिए पंजाब सरकार ने बेशक इस स्कीम के लिए 238 करोड़ रुपये का बजट रखा था लेकिन इसमें से बड़ा हिस्सा वित्तीय संकट के चलते जारी नहीं हुआ। सरकारी अधिकारी फंड जारी न हो सकने का कारण दफ्तरी कार्यवाही में रुकावट व अधिकारियों की अदला-बदली अथवा सेवानिवृत्ति बता रहे हैं।

पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इंद्र सिंगला का कहना है कि जितना राशन केन्द्र की तरफ से आया था वह बांटा जा चुका है, और आएगा तो वह भी बांट दिया जाएगा, राज्य सरकार की तरफ से कोई देरी नहीं हो रही। उनका आरोप है कि मिड-डे मील कुकों का जो रुपया नहीं दिया गया उसके लिए भी केन्द्र सरकार जिम्मेदार है।

प्राप्त जानकारी अनुसार अध्यापकों को शिक्षा विभाग ने पत्र जारी करके पूछा है कि कुकिंग लागत बच्चों के खातों में जमा क्यों नहीं करवायी गई? ज्यादातर अध्यापकों ने 107 रुपये जैसी मामूली राशि बैंकों में जमा करवाने की बजाय बच्चों के घर पहुंचा दी है। पहले ही 500 रुपये जन-धन के खातों में डालने के ऐलान से बैंकों के सामने भीड़ लगती है जो कोविड-19 के शारीरिक दूरी के नियम को भंग करती है। इस हालात में मात्र 100 रुपये लेने के लिए बैंक जाना भी बच्चों व उनके मां-बाप के लिए आसान नहीं है।

मिड-डे मिल कुक सरकारी तंत्र में शायद सबसे कम मेहनताना पाने वाला वर्ग है। पंजाब में इनकी गिनती 43,000 है। इन्हें 1700 रुपये महीना मिलता है, वह भी छुट्टियों वाले दो महीनों का मेहनताना काट लिया जाता है।

डैमोक्रेटिक मिड-डे मिल कुक फ्रंट की प्रधान हरजिन्द्र कौर लोपो का कहना है कि छुट्टियों के दौरान जब सरकारी कर्मचारियों को वेतन मिलता है तो कुकों को भी मिलना चाहिए। तालाबंदी के दौरान कुकों को अप्रैल व मई की तनख्वाह भी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि तालाबंदी में बड़े रोष-प्रदर्शन भी नहीं हो सके हालांकि मांग-पत्र ज़रूर भेजे गए लेकिन सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगी।

मिड-डे मील स्कीम गरीब विद्यार्थियों के लिए बहुत लाभदायक है। पंजाब राज्य के 15,335 सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के 21 लाख से अधिक विद्यार्थियों को इस स्कीम के तहत दोपहर का भोजन दिया जाता है। स्कीम का लाभ मूल रूप में गरीब व पिछड़े वर्ग के लोगों को ही मिल रहा है। सरकारी सर्वेक्षण अनुसार इस स्कीम के लाभार्थियों में 51 प्रतिशत बच्चे अनुसूचित जातियों से व 46 प्रतिशत बच्चे पिछडे़ वर्ग से हैं। अन्य वर्गों के 3 प्रतिशत बच्चे ही इस स्कीम से लाभ उठा रहे हैं। अध्ययन से यह तथ्य भी सामने आता है कि मिड-डे मील से फायदा उठाने वाले 70 प्रतिशत बच्चों के मां-बाप मज़दूर हैं व इनमें से 50 प्रतिशत से भी अधिक अनपढ़ हैं, 23.74 फीसदी पांचवीं पास हैं, केवल 15.68 फीसदी ही मिडल पास हैं। देश का अन्न भंडार कहलाया जाने वाले राज्य पंजाब में गरीब वर्गों के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही महत्वपूर्ण स्कीम का बंद होने की कगार पर पहुंचना दुर्भाग्य है।

पंजाब के नामवर शिक्षाशास्त्री प्रोफेसर बावा सिंह का कहना है, “यह केवल गरीब वर्ग के विद्यार्थियों को खाने से महरूम रखने का मामला नहीं है बल्कि उनकी पढ़ाई में भी विघ्न डालने का मुद्दा भी है क्योंकि पढ़ाई का सीधा संबंध तंदरूस्ती के साथ है। कई गरीब लोग बच्चों को स्कूलों में दोपहर का खाना मिलने के लालच में ही भेजते हैं। सरकार को यह जान लेना चाहिए कि यदि विद्यार्थी भूखे रहेंगे तो पढ़ाई के लिए किए जाने वाले प्रयत्न भी असफल रहेंगे। मिड-डे मील स्कीम का जारी रहना गरीब वर्गों की भलाई के साथ-साथ शिक्षा व सेहत के मामले में राष्ट्रीय हितों के लिए भी महत्वपूर्ण है।”

(शिव इंदर सिंह वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

mid-day meal scheme
panjab
COVID-19

Related Stories

यूपी चुनाव: बग़ैर किसी सरकारी मदद के अपने वजूद के लिए लड़तीं कोविड विधवाएं

यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!

लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा

पश्चिम बंगाल में मनरेगा का क्रियान्वयन खराब, केंद्र के रवैये पर भी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल

यूपी: शाहजहांपुर में प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, यूनियन ने दी टीकाकरण अभियान के बहिष्कार की धमकी

दिल्ली: बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ मज़दूर, महिला, छात्र, नौजवान, शिक्षक, रंगकर्मी एंव प्रोफेशनल ने निकाली साईकिल रैली

पश्चिम बंगाल: ईंट-भट्ठा उद्योग के बंद होने से संकट का सामना कर रहे एक लाख से ज़्यादा श्रमिक

मध्य प्रदेश: महामारी से श्रमिक नौकरी और मज़दूरी के नुकसान से गंभीर संकट में

खाद्य सुरक्षा से कहीं ज़्यादा कुछ पाने के हक़दार हैं भारतीय कामगार


बाकी खबरें

  • Omprakash
    राज वाल्मीकि
    ओमप्रकाश वाल्मीकि सिर्फ़ दलित लेखक नहीं, राष्ट्रीय हिंदी साहित्यकार हैं: डॉ. एन. सिंह
    18 Nov 2021
    ओमप्रकाश वाल्मीकि ने ‘दलित साहित्य का सौन्दर्य शास्त्र’ लिखकर उन सवर्ण आलोचकों को जवाब दिया था, जो दलित साहित्य में शिल्पकला की कमी बताते थे।  उनकी कहानियों में ‘अम्मा’, ‘बिरम की बहू’, ‘सलाम', '…
  • israel
    पीपल्स डिस्पैच
    फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ़ नई बसाहटों वाले इज़रायलियों द्वारा 451 हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया गया
    18 Nov 2021
    यह आंकड़े शुरूआती 2020 के बाद के हैं, मानवाधिकार समूह बी सेलेम का कहना है कि नई बसाहटों वाले इज़रायलियों द्वारा किए जाने वाले हमलों को इज़रायल द्वारा एक उपकरण के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, ताकि…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    स्टैंड अप कॉमेडियन वीर दास पर एक बार फिर भड़के दक्षिणपंथी संगठन
    18 Nov 2021
    वीरों की भूमि हिंदुस्तान में दो “वीर” आजकल काफ़ी चर्चे में चल रहे हैं। एक आज़ादी से पहले के वीर, एक आज़ादी के बाद के वीर। ये दो वीर हैं “वीर सावरकर” और “वीर दास”।
  • chennai floods
    नीलाबंरन ए
    चेन्नई की बाढ़ : इस अव्यवस्था के लिए कौन ज़िम्मेदार है?
    18 Nov 2021
    विशेषज्ञों का मानना है कि भारी जल निकासी के डिज़ाइन में तकनीकी ख़ामियों, शहरीकरण के कारण प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था के ख़ात्मे और जल निकायों पर अतिक्रमण की वजह से चेन्नई में हर तरफ जलभराव की स्थिति…
  • COP 26
    एम. के. भद्रकुमार
    COP 26: भारत आख़िर बलि का बकरा बन ही गया
    18 Nov 2021
    विकसित देशों का सारा गेम प्लान भारत और चीन पर कोयले के उपयोग में कमी लाने पर फिर से रजामंद करने और इसके जरिए अगले साल संयुक्त राष्ट्र की आगामी बैठक तक कार्बन उत्सर्जन में कटौती लाने के लिए उन पर दबाव…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License