NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पेट्रोल-डीजल की कीमतें : मोदी सरकार के झूठ के पीछे की सच्चाई
मोदी के शासन के दौरान, भारत द्वारा आयातित तेल की कीमत 32 प्रतिशत गिर गई, फिर भी केंद्रीय करों में 129 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सुबोध वर्मा
12 Sep 2018
Translated by महेश कुमार
gas

केंद्र की बीजेपी सरकार, जिसके मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो अपने आपको प्रधान सेवक कहना पसंद करते हैं,वही सेवक आज बड़ी ही बेशर्मी से पेट्रोल और डीजल की कीमतों के मुद्दे पर देश की जनता को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 10 सितंबर के भारत बंद जिसे 21 विपक्षी दलों ने समर्थन दिया था, को देश भर में व्यापक समर्थन मिला, इससे दुखी होकर, एक केंद्रीय मंत्री ने फर्ज़ी तर्क दिया कि भारत में ईंधन की कीमतें इसलिए बढ़ रही हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।

लेकिन सच कुछ और ही है। मई 2014 में मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद से तीन साल तक,  भारतीय सरकार के लिए कच्चे तेल की कीमत जून 2014 में 109.05 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर जून 2017 में 46.56 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी। इसके बाद, यह जून में 2018 में 73.83 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण सेल (पीपीएसी) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक है। इसलिए,चार साल में, मोदी सरकार के दौरान इन कीमतों में लगभग 32 प्रतिशत की कमी आई।

भारत के आयात में दो प्रकार के कच्चे तेल का मिश्रण है। लेकिन कुछ और भी है। मोदी सरकार के स्पिन-मास्टर्स जो धोखा देने की कोशिश कर रहे और कह रहे हैं कि भारतीय उपभोक्ता के भुगतान के साथ अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से कुछ भी लेना देना नहीं है। यह टैक्स ही हैं जो लोगों को मार रहे हैं।

सामान्य उपभोक्ता के द्वारा पेट्रोल के लिए भुगतान करने वाले टैक्स का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा, केंद्र के साथ ही साथ राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स से बना है।

graph

जैसा कि चार्ट में दिखाया गया है, 2014-15 में, मोदी सरकार ने टैक्स से करीब 1,22,200 करोड़ रुपये उगाहे, उस टैक्स के जरिये जो उन्होंने तेल पर लगाए थे। 2017-18 तक, यह टैक्स 2,80,000 करोड़ रुपये तक बढ़ गया है! यह एक चौंकाने वाली 129 प्रतिशत की वृद्धि है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इस अवधि में 11 लाख करोड़ रुपये के टैक्स को एकत्रित किया है।

राज्यों के टैक्स का मिथक

सत्तारूढ़ बीजेपी झूठा प्रचार कर रही है कि यह राज्य सरकारें हैं जो वास्तव में तेल की बढ़ती कीमतों के लिए ज़िम्मेदार हैं। पिछले चार वर्षों के दौरान राज्यों के टैक्स में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लेकिन सभी राज्यों ने केंद्र सरकार के 2,80,000 करोड़ रुपये के टैक्स की तुलना में ईंधन पर टैक्स में कुल 1,86,000 करोड़ रुपये ही जमा किए हैं। और, जबकि, बीजेपी 21 राज्यों में शासन कर रही है, लेकिन उनके नेता कभी हमें याद दिलाने के लिए थकते नहीं हैं। राजस्थान में हाल ही में, जो इनकी राज्य सरकारों में से एक है - राज्य कर में कमी की है, क्योंकि कुछ महीनों में यहाँ विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

एक और धोखाधड़ी कि केंद्रीय बीजेपी सरकार प्रचार करने का प्रयास कर रही है कि अधिक कर राजस्व राज्यों और लोगों के लिए अच्छा है, क्योंकि टैक्स में एकत्रित सभी पैसे लोगों के लाभ के लिए खर्च किए जाते हैं। यह भी तर्क दिया जाता है कि केंद्रीय कर संग्रह राज्यों के साथ साझा किए जाएंगे और इसलिए, अधिक कर से कमाई राज्य सरकारों को लाभान्वित करेगी।

यह सच होना चाहिए था अगर बीजेपी सरकार वास्तव में लोगों के लाभ के लिए पैसे खर्च कर रही होती लेकिन,वास्तव में, मोदी शासन के वर्षों में लगभग सभी केन्द्रीय कल्याणकारी योजनाओं में कटौती की गई है, जिसका सबसे बड़ा कारण संसाधनों की कमी बताया गया है। इसलिए, केंद्र सरकार तेल करों से अर्जित धन को किसी भी सार्वजनिक अच्छे काम पर पुनर्निर्देशित नहीं कर रही है।

दूसरी तरफ, कॉरपोरेट घरानों को अनिश्चित रूप से ऋण दिए गए हैं जिन्हें वे वापस लौटाने से इंकार कर रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार, करों के माध्यम से एकत्रित सार्वजनिक धन से दिए गए इस तरह के खराब या डूबत ऋण - 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गए हैं। कॉरपोरेट घरानों और सरकार / सत्तारूढ़ दल के गठजोड़ को ऐसे कई मामले में सार्वजनिक खजाने से भारी राशि दी जा रही हैं। दरअसल, सरकार निजी संस्थाओं को सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों जैसी राष्ट्रीय संपत्तियां को बेच रही है। कहा जा सकता है कि मोदी सरकार शायद किसी भी निष्पक्ष या समावेशी तरीके से लोगों के लिए कर राजस्व का उपयोग नहीं कर पाई है।

तेल की कीमतों की ये गाथा क्या दिखाती है कि मोदी सरकार वास्तव में देश के किसानों, श्रमिकों और देश के अन्य आम लोगों से धन की उगाही कर रही है ताकि कॉरपोरेट घरानों और बड़े भू-मालिकों के लालच और भूख को पूरा किया जा सके। तेल और उसके उत्पादों (पेट्रोल, डीजल, केरोसिन आदि) का उपयोग केवल अमीरों या मध्यम वर्गों द्वारा नहीं किया जाता है। ये सिंचाई के लिए, कृषि वस्तुओं के परिवहन और तैयार माल और खाना पकाने के लिए आवश्यक है। बढ़ती कीमतें सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से (अन्य वस्तुओं के मूल्य वृद्धि के माध्यम से) लोगों से उनकी कड़ी मेहनत वाली कमाई को लूट रहीं हैं। इस बारे में बीजेपी कितना भी झूठा प्रचार करे लेकिन लोगों से दिन-दहाडे लूट से पैदा हुए गुस्से को दबा नहीं पाएगी।

gas prices
kolkata
West Bengal
fuel prices

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

प. बंगाल : अब राज्यपाल नहीं मुख्यमंत्री होंगे विश्वविद्यालयों के कुलपति

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

मछली पालन करने वालों के सामने पश्चिम बंगाल में आजीविका छिनने का डर - AIFFWF

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान

कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च

महानगरों में बढ़ती ईंधन की क़ीमतों के ख़िलाफ़ ऑटो और कैब चालक दूसरे दिन भी हड़ताल पर

बढ़ती हिंसा और सीबीआई के हस्तक्षेप के चलते मुश्किल में ममता और तृणमूल कांग्रेस

बलात्कार को लेकर राजनेताओं में संवेदनशीलता कब नज़र आएगी?


बाकी खबरें

  • एम. के. भद्रकुमार
    पुतिन की अमेरिका को यूक्रेन से पीछे हटने की चेतावनी
    29 Apr 2022
    बाइडेन प्रशासन का भू-राजनीतिक एजेंडा सैन्य संघर्ष को लम्बा खींचना, रूस को सैन्य और कूटनीतिक लिहाज़ से कमज़ोर करना और यूरोप को अमेरिकी नेतृत्व पर बहुत ज़्यादा निर्भर बना देना है।
  • अजय गुदावर्ती
    भारत में धर्म और नवउदारवादी व्यक्तिवाद का संयुक्त प्रभाव
    28 Apr 2022
    नवउदारवादी हिंदुत्व धर्म और बाजार के प्रति उन्मुख है, जो व्यक्तिवादी आत्मानुभूति पर जोर दे रहा है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन
    28 Apr 2022
    वाम दलों ने धरने में सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ व जनता की एकता, जीवन और जीविका की रक्षा में संघर्ष को तेज़ करने के संकल्प को भी दोहराया।
  • protest
    न्यूज़क्लिक टीम
    दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन
    28 Apr 2022
    वाम दलों ने आरएसएस-भाजपा पर लगातार विभाजनकारी सांप्रदायिक राजनीति का आरोप लगाया है और इसके खिलाफ़ आज(गुरुवार) जंतर मंतर पर संयुक्त रूप से धरना- प्रदर्शन किया। जिसमे मे दिल्ली भर से सैकड़ों…
  • ज़ाकिर अली त्यागी
    मेरठ : जागरण की अनुमति ना मिलने पर BJP नेताओं ने इंस्पेक्टर को दी चुनौती, कहा बिना अनुमति करेंगे जागरण
    28 Apr 2022
    1987 में नरसंहार का दंश झेल चुके हाशिमपुरा का  माहौल ख़राब करने की कोशिश कर रहे बीजेपी नेताओं-कार्यकर्ताओं के सामने प्रशासन सख़्त नज़र आया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License