NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
पिछले 25 सालों में मोदी काल में हुई कामगारों की संख्या में भारी गिरावट
देश में कुल कामगारों की संख्या में भारी गिरावट हुई है, देश में महिला कामगारों की संख्या में गिरावट तो लगातार जारी थी परन्तु पिछले 25 सालों में पुरुष कामगारों की संख्या में भी भारी गिरावट हुई है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) के 2017-18 के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) रिपोर्ट में बताया है कि देश में 2011-12 में पुरुष कामगारों की संख्या 30.4 करोड़ थी जो 2017-18 में घटकर 28.6 करोड़ हो गयी है।
पीयूष शर्मा
20 Mar 2019
beriojgaari

वर्तमान में गहराते कृषि संकट और अर्थव्यवस्था की वजह से देश में बेरोज़गारी उफ़ान पर है। 2014 से पहले भाजपा ने हर साल युवाओं को दो करोड़ रोज़गार देने का वायदा किया था यानी इन पांच वर्षो में मोदी सरकार को 10 करोड़ रोज़गार मुहैया करवाने थे परन्तु सत्ता में आने के बाद से सरकार अपना वादा पूरा करने में नाकाम रही है। 

पुरुष कामगारों  की संख्या में गिरावट 

देश में कुल कामगारों  की संख्या में भारी गिरावट हुई है, देश में महिला कामगरों की संख्या में गिरावट तो लगातार जारी थी परन्तु पिछले 25 सालों में पुरुष  की संख्या में भी भारी गिरावट हुई है।  द इंडियन एक्सप्रेस ने नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) के 2017-18 के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) रिपोर्ट पर आधारित अपने लेख में बताया है कि देश में 2011-12 में पुरुष कामगारों  की संख्या 30.4 करोड़ थी जो 2017-18 में घटकर 28.6 करोड़ हो गयी है। 

NSSO JOB DATA MALE WORKFORCE (HINDI)
Infogram

अभी हाल ही में बिज़नेस स्टैंडर्ड ने NSSO की इसी रिपोर्ट से बेरोज़गारी दर से जुड़े आंकड़े जारी किये थे जिनमें बताया गया था कि बेरोज़गारी 2017-18 में 45 साल के उच्च स्तर 6.1 प्रतिशत पर पहुँच गयी थी। इस रिपोर्ट को सरकार द्वारा अधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार 1993-94 से 2017-18 तक यानी 25 सालों में पहली बार पुरुष कामगारों  की संख्या में गिरावट हुई है। 2011-12 की तुलना में ग्रामीण व शहरी दोनों में पुरुष कामगारों की संख्या में क्रमश: 6.4 और 4.7 प्रतिशत की कमी आई है।

आंकड़े साफ़तौर पर बताते हैं कि पिछले वर्षों के दौरान देश में रोज़गार के बेहद ही कम मौक़े पैदा हुए हैं जिसके कारण नौकरियाँ घटी हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोज़गारी उच्चतम स्तर पर 

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि 2011-12 और 2017-18 के बीच देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 4.3 करोड़ तथा शहरी इलाक़ों में 40 लाख नौकरियाँ कम हुई हैं। यानी इस अवधि में देश में कुल 4.7 करोड़ नौकरियों में कमी आई है। इसके साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला के कामगारों रोज़गार में 68 प्रतिशत व शहरों में पुरुष कामगारों के रोजगार में 96 प्रतिशत की कमी आई है।

NSSO RURAL DATA (HINDI)
Infogram

रिपोर्ट के अनुसार, 15-59 आयुवर्ग में वोकेशनल/तकनीकी शिक्षा पाने वाले कामगारों  के प्रतिशत में कमी आई है, यह संख्या 2011-12 में 2.2 प्रतिशत थी जो 2017-18 में घटकर 2 प्रतिशत हो गयी है। जिसका सीधा असर रोज़गार पर पड़ता है। इसके साथ ही 15-29 आयुवर्ग में 0.1 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई है। यह आंकड़े मोदी सरकार के स्किल इंडिया के दावों की हक़ीक़त बयां करते हैं और धरातल की वास्तविक सच्चाई पेश करते हैं कि स्किल इण्डिया ने रोज़गार में कोई योगदान नही दिया है। 

इसके अलावा सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार, 11 मार्च तक बेरोज़गारी 6.9 प्रतिशत थी। मानसून के अंत तक यह इसी रेंज में रही, और 10 फ़रवरी को समाप्त हुए सप्ताह में उच्च दर 8.6 प्रतिशत तक पहुँच गयी थी। रबी की फसल ने इसे थोड़ा कम कर दिया है, लेकिन इस पैमाने पर बेरोज़गारी बरक़रार है और यह 1970 के दशक की शुरुआत में पनपे आर्थिक संकट की याद दिलाती है।

लोकसभा चुनाव सामने हैं, और सरकार नहीं चाहती है कि उनके झूठे दावों की पोल खुले इसलिए NSSO की बेरोज़गारी से जुड़ी रिपोर्ट सरकार जारी नहीं कर रही है। मोदी सरकार का रोज़गार देने का वायदा जुमला ही साबित हुआ है क्योंकि बेरोज़गारी लगातार बढ़ी है। रोज़गार के लिए माहौल बनाना मोदी सरकार की प्राथमिकता में नहीं रहा है। 

देश 7 फ़ीसदी की विकास दर से वृधि कर रहा है परन्तु इसके बावजूद देश में शिक्षित युवाओं के लिए रोज़गार के पर्याप्त अवसर नही हैं। लोकसभा चुनाव में बेरोज़गारी का मुद्दा हावी है जिसके कारण आने वाले महीनों में निश्चित तौर पर राजनितिक बदलाव संभव है लेकिन यह बात ज़रूरी है कि बेरोज़गारी के मसले से निपटा जाए।

इन्फोग्राफिक्स - ग्लेनिसा परेरा  
 

BEROJGARI
Unemployment in Modi era
unemployment after liberlisation
unemployemnet after new
decreasing number of male emloyer in modi era
indian employement
unemployment
UNEMPLOYMENT IN INDIA
Unemployment under Modi govt in India
RURAL Unemployment
female workers
male workers

Related Stories

कश्मीर: कम मांग और युवा पीढ़ी में कम रूचि के चलते लकड़ी पर नक्काशी के काम में गिरावट

ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना

मई दिवस: मज़दूर—किसान एकता का संदेश

मनरेगा: ग्रामीण विकास मंत्रालय की उदासीनता का दंश झेलते मज़दूर, रुकी 4060 करोड़ की मज़दूरी

पिछले तीन सालों में दिहाड़ी 50 रुपये नहीं बढ़ी, जबकि महंगाई आसमान छू गयी    

राजस्थान ने किया शहरी रोज़गार गारंटी योजना का ऐलान- क्या केंद्र सुन रहा है?

विशेषज्ञों के हिसाब से मनरेगा के लिए बजट का आवंटन पर्याप्त नहीं

बजट के नाम पर पेश किए गए सरकारी भंवर जाल में किसानों और बेरोज़गारों के लिए कुछ भी नहीं!

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण तनाव और कोविड संकट में सरकार से छूटा मौका, कमज़ोर रही मनरेगा की प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल में मनरेगा का क्रियान्वयन खराब, केंद्र के रवैये पर भी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल


बाकी खबरें

  • MGNREGA
    सरोजिनी बिष्ट
    ग्राउंड रिपोर्ट: जल के अभाव में खुद प्यासे दिखे- ‘आदर्श तालाब’
    27 Apr 2022
    मनरेगा में बनाये गए तलाबों की स्थिति का जायजा लेने के लिए जब हम लखनऊ से सटे कुछ गाँवों में पहुँचे तो ‘आदर्श’ के नाम पर तालाबों की स्थिति कुछ और ही बयाँ कर रही थी।
  • kashmir
    सुहैल भट्ट
    कश्मीर में ज़मीनी स्तर पर राजनीतिक कार्यकर्ता सुरक्षा और मानदेय के लिए संघर्ष कर रहे हैं
    27 Apr 2022
    सरपंचों का आरोप है कि उग्रवादी हमलों ने पंचायती सिस्टम को अपंग कर दिया है क्योंकि वे ग्राम सभाएं करने में लाचार हो गए हैं, जो कि जमीनी स्तर पर लोगों की लोकतंत्र में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए…
  • THUMBNAIL
    विजय विनीत
    बीएचयू: अंबेडकर जयंती मनाने वाले छात्रों पर लगातार हमले, लेकिन पुलिस और कुलपति ख़ामोश!
    27 Apr 2022
    "जाति-पात तोड़ने का नारा दे रहे जनवादी प्रगतिशील छात्रों पर मनुवादियों का हमला इस बात की पुष्टि कर रहा है कि समाज को विशेष ध्यान देने और मज़बूती के साथ लामबंद होने की ज़रूरत है।"
  • सातवें साल भी लगातार बढ़ा वैश्विक सैन्य ख़र्च: SIPRI रिपोर्ट
    पीपल्स डिस्पैच
    सातवें साल भी लगातार बढ़ा वैश्विक सैन्य ख़र्च: SIPRI रिपोर्ट
    27 Apr 2022
    रक्षा पर सबसे ज़्यादा ख़र्च करने वाले 10 देशों में से 4 नाटो के सदस्य हैं। 2021 में उन्होंने कुल वैश्विक खर्च का लगभग आधा हिस्सा खर्च किया।
  • picture
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अर्जेंटीना ने लिया 45 अरब डॉलर का कर्ज
    27 Apr 2022
    अर्जेंटीना की सरकार ने अपने देश की डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के साथ 45 अरब डॉलर की डील पर समझौता किया। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License