NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
फिलिस्तीन
इज़राइल : प्रशासनिक नज़रबंदी के ख़िलाफ़ जारी है भूख हड़ताल
फ़िलिस्तीनी क़ैदियों के लिए बनाए गए जाँच आयोग (फ़िलिस्तीनी प्रिज़नर्स कमीशन) के अनुसार, तीन फ़िलिस्तीनी क़ैदी इज़रायली प्रशासन के द्वारा उन्हें मनमाने ढंग से गिरफ़्तार किए जाने के ख़िलाफ़, पिछले कई हफ़्तों से भूख हड़ताल पर हैं।
पीपल्स डिस्पैच
13 Nov 2019
इज़राइल
बग़ैर किसी आरोप या मुक़दमे के वर्तमान में इज़रायल की जेलों में बंद 500 से अधिक फ़िलिस्तीनियों को प्रशासनिक नज़रबंदी में रखा गया है।

फ़िलिस्तीनी प्रिज़नर्स कमीशन (पीपीसी) ने शनिवार, 9 नवंबर को अपनी रिपोर्ट में बताया है कि तीन फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक बंदियों ने बिना किसी आरोप या मुक़दमे के हुई उनकी ग़ैरक़ानूनी प्रशासनिक नज़रबंदी के ख़िलाफ़ इज़रायली जेलों में अपनी भूख हड़ताल जारी रखी हुई है। इन तीनों बंदियों की पहचान इस्माइल अली, मुसाब अल-हिंदी और अहमद ज़हरान के रूप में हुई है, जो सोमवार, 11 नवंबर के दिन तक, क्रमशः पिछले 112, 49 और 51 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।

इस्माइल अली, जो जेरूसलेम के पूर्व में स्थित अबू दिस शहर के बाशिंदे हैं, का पिछले 112 दिनों की भूख हड़ताल के चलते वज़न काफ़ी घट गया है, आँखों की रौशनी कम हो गई है और वे चलने-फिरने में नाकाम हैं।

जनवरी में उन्हें हिरासत में लिया गया था, और उसके बाद 6 महीने की अवधि के लिए उन्हें प्रशासनिक नज़रबंदी में रखा गया था। जून में नज़रबंदी की अवधि को फिर से बढ़ा दिया गया, जिसके चलते उन्होंने भूख हड़ताल पर जाने का फ़ैसला लिया। अली कई सालों से इज़रायल की जेलों के अंदर और बाहर होने की प्रक्रिया से गुज़र चुके हैं और पहले से ही विभिन्न इज़राइली जेलों में कुल मिलकर सात साल की सज़ा काट चुके हैं।

29 वर्षीय मुसाहिब अल-हिंदी पिछले 49 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। नबलुस के उत्तरी वेस्ट बैंक शहर के पास ताल क़स्बे के रहने वाले मुसाब को सितंबर 2019 में गिरफ़्तार किया गया था, और प्रशासनिक नज़रबंदी में रखा गया था। हाल ही में जब उनकी तबीयत अधिक बिगड़ने लगी तो उन्हें अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है।

अहमद ज़हरान की हालत भी काफ़ी गंभीर है। ज़हरान को मार्च 2019 में इज़रायली बलों द्वारा हिरासत में लिया गया था। अक्टूबर में, जब वह अपनी भूख हड़ताल के 39वें दिन में थे, तब इज़रायली जेल अधिकारियों ने उन्हें रिहा करने के लिए अपनी रज़ामंदी दे दी थी। हालाँकि, बाद में वे इस समझौते से मुकर गए और प्रशासनिक हिरासत की अवधि को जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप ज़हरान ने अपनी भूख हड़ताल को दोबारा शुरू कर दिया है। ज़हरान की नज़रबंदी को बाद में चार महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था।

पिछले हफ़्ते, जॉर्डन और इज़रायल के विदेश मंत्रालयों के बयानों के अनुसार, जॉर्डन के दो नागरिकों, हेबा अल-लबाडी और अब्दुलरहमान मारई को भी इज़राइल में प्रशासनिक हिरासत के तहत गिरफ़्तार किया गया था, और लगभग दो महीने जेल में बंद रखने के बाद रिहा किया गया है। इन दो जॉर्डन नागरिकों की रिहाई की मांग को लेकर, जिन्हें बिना किसी आरोप या ट्रायल के इज़रायल में गिरफ़्तार रखा गया था, कार्यकर्ताओं द्वारा सारे क्षेत्रों में वृहद पैमाने पर अभियान चलाया गया।

इससे पहले अक्टूबर में, एक और प्रशासनिक बंदी अहमद ग़न्नाम की 102 दिनों से चलने वाली लगातार भूख हड़ताल तब जाकर ख़त्म हुई, जब इज़रायली उच्च न्यायालय ने उनकी वर्तमान हिरासत की अवधि पूरी होने पर उनकी रिहाई के आदेश जारी किये।

वर्तमान में 500 से अधिक फ़िलिस्तीनी बंदियों को बिना किसी आरोपों के या मुक़दमे के अनिश्चित काल के लिए इज़रायल की जेलों में बंदी बनाकर रखा गया है। ये लोग इज़राइल में क़ैद कुल 5,700 फ़िलिस्तीनियों का एक हिस्सा हैं, जिनमें से 200 बंदियों की उम्र 18 साल से कम की है, और उनमें से 48 महिलाएं हैं।

Courtesy: Peoples Dispatch
Administrative Detention
Ahmed Ghannam
Ismail Ali
israeli apartheid
Israeli Occupation
Palestinian detainees' hunger strike
Palestinian prisoners commission

Related Stories

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

इज़रायल को फिलिस्तीनी पत्रकारों और लोगों पर जानलेवा हमले बंद करने होंगे

अल-जज़ीरा की वरिष्ठ पत्रकार शिरीन अबु अकलेह की क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में इज़रायली सुरक्षाबलों ने हत्या की

लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया

141 दिनों की भूख हड़ताल के बाद हिशाम अबू हव्वाश की रिहाई के लिए इज़रायली अधिकारी तैयार

इज़रायली अदालत ने 126 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे फिलिस्तीनी बंदी की रिहाई की अपील ख़ारिज की

गाज़ा मत्स्य क्षेत्र का इस्तेमाल इज़रायल फ़िलिस्तीनीयों को सामूहिक सज़ा देने के लिए कर रहा है

गाज़ा के स्थानीय लोगों का सवाल, ‘हम कहां जाएं?’

गाज़ा पर इज़रायल के हमले में 36 लोगों की मौत

अगले महीने होने वाला फ़िलिस्तीनी चुनाव हो सकता है स्थगित


बाकी खबरें

  • up elections
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!
    22 Jan 2022
    कोविड-19 की तीन लहरें और उसके बाद के लॉकडाउन, डेंगू का प्रकोप, कच्चे माल और गैस की क़ीमतों में इज़ाफ़ा, कच्चे माल पर  GST के चलते फ़िरोज़ाबाद के पारंपरिक कांच उद्योग को भारी मंदी का सामना करना पड़ा…
  • Mumbai
    भाषा
    मुंबई में बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 7 लोगों की मौत, 16 अन्य घायल
    22 Jan 2022
    ''18वीं मंजिल पर आग लगने के तुरंत बाद, निवासी अपने परिवार के सदस्यों के साथ बाहर की ओर भागने लगे। प्रत्येक मंजिल पर कम से कम छह फ्लैट हैं। आग ने 18वीं और 19वीं मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ…
  • LIC
    थॉमस फ्रंकों
    एलआइसी को बेचना क्यों परिवार की चांदी बेचने से भी बदतर है?
    22 Jan 2022
    एलआइसी की सीमित बिकवाली के वादे पहले भी किए और तोड़े जा चुके हैं। भारत को अपनी एकमात्र सामाजिक सुरक्षा के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए; ऐसा करना असंवैधानिक और लोगों के साथ अन्याय होगा।
  • Hum Bharat Ke Log
    मुकुल सरल
    हम भारत के लोग:  एक नई विचार श्रृंखला
    22 Jan 2022
    “हम भारत के लोग” हमारे संविधान की प्रस्तावना (preamble) का पहला ध्येय वाक्य है। जिसके आधार पर हमारे संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य की स्थापना हुई है। इसी को…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज लगातार तीसरे दिन भी कोरोना के 3 लाख से ज़्यादा नए मामले
    22 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,37,704 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 89 लाख 3 हज़ार 731 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License