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भारत
राजनीति
संसद: सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध जारी, दोनों सदन दिनभर के लिये स्थगित
देश की संसद में सरकार और विपक्ष के बीच बना गतिरोध खत्म नहीं हो रहा है।  विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्यों के विरोध के कारण दोनों सदन की बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Jul 2021
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देश की संसद में सरकार और विपक्ष के बीच बना गतिरोध बृहस्पतिवार को भी जारी रहा और विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्यों के विरोध  के कारण  दोनों सदन की बैठकका कई  बार स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इस सत्र में संसदीय कार्यवाही पूरी तरह बाधित रही है ,विपक्ष पेगासस जासूसी मामले एवं कुछ अन्य मुद्दों को लेकर बहस चाहता है।  जबकि सरकार कह रही है विपक्ष बेवजह हंगाम करके सदन का समय बर्बाद कर रहा है।

विपक्षी दलों के सदस्य पेगासस जासूसी मामले और केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर मौजूदा सत्र के पहले दिन से सदन में नारेबाजी कर रहे हैं। इस कारण से सदन में अब तक कामकाज बाधित रहा है और कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है। एक बार नज़र डाल लेते है दोनों सदनों क्या हुआ?

 लोकसभा :सदन की कार्यवाही तीन बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिये स्थगित
 
पेगासस जासूसी मामले एवं कुछ अन्य मुद्दों पर लोकसभा में विपक्षी सदस्यों का विरोध प्रदर्शन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा। विपक्षी दलों के सदस्यों की नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही तीन बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बजकर लगभग 25 मिनट पर दिनभर के लिये स्थगित कर दी गई।

हंमागे के बीच ही आधे घंटे तक प्रश्नकाल की कार्यवाही चली तथा सदन ने दो विधेयकों को मंजूरी भी प्रदान की। इन विधेयकों में ‘भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2021’ तथा ‘अंतर्देशीय जलयान विधेयक, 2021’ शामिल है।

इस दौरान कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों का शोर-शराबा जारी रहा। विपक्षी सदस्यों ने हाथों में तख्तियां ली हुई थीं, जिन पर पेगासस जासूसी मामला और तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को समाप्त करने से जुड़ी मांगें लिखी हुई थीं।

इससे पूर्व, आज सुबह बैठक शुरू होने पर कांग्रेस के कुछ सदस्यों द्वारा एक दिन पहले सदन में कागज उछालने की घटना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने के कारण सदन की कार्यवाही आरंभ होने के करीब पांच मिनट बाद ही 11:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार की घटना को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त की और सदस्यों को चेतावनी दी कि अगर भविष्य में संसद की गरिमा के प्रतिकूल घटनाओं की पुनरावृत्ति की गई तो वह कार्रवाई करेंगे।

उन्होंने कहा कि 28 जुलाई को सदन में घटी घटना से उन्हें अत्यंत पीड़ा हुई है। आसन की ओर पर्चे और कागज फेंकना हमारी संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

बिरला ने कहा, ‘‘हम संसद की गरिमा का ध्यान नहीं रखेंगे तब संसदीय लोकतंत्र कैसे बचेगा।’’

उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहता है कि सदस्यों को बात रखने का पर्याप्त समय और अवसर दें तथा उनका सम्मान हो।

लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से पूछा, ‘‘क्या आप कल की घटना को संसद की गरिमा के अनुरूप मानते हैं, क्या आप इसे न्यायोचित मानते हैं?’’

बिरला ने कहा कि संसद की गरिमा को बनाये रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है क्योंकि आप (सांसद) एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था हैं और लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उन्होंने कहा कि आसन के प्रति कल कुछ सदस्यों का आचरण अनुचित था। सदस्य अपने आचरण एवं मर्यादाओं का ध्यान रखें।

इस दौरान लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी जिद पर अड़ी है और विपक्ष को अपनी बात नहीं रखने दे रही है।

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि आसन और सत्ता पक्ष एवं मीडिया की ओर कागज फेंके गये। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही तरीका है और विपक्ष के सदस्य इस पर माफी मांगने की जरूरत भी नहीं समझ रहे हैं।

इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक झोंक शुरू हो गई। अध्यक्ष ओम बिरला ने 11 बजकर करीब पांच मिनट पर सदन की कार्यवाही 11:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सदन की कार्यवाही 11:30 बजे पुन: शुरू होने पर पीठासीन सभापति राजेन्द्र अग्रवाल ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच प्रश्नकाल चलाया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सदस्यों के पूरक प्रश्नों के उत्तर भी दिये।

इसके बाद पीठासीन सभापति ने आवश्यक कागजात सभापटल पर रखवाये। उन्होंने सदस्यों से अपने स्थान पर लौटने की अपील की लेकिन शोर-शराबा जारी रहा। विपक्षी दलों के सदस्य ‘हम चर्चा चाहते हैं’ के नारे भी लगा रहे थे।

इसी दौरान भाजपा के निशिकांत दुबे ने शून्यकाल में आरोप लगाया कि बुधवार को सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय समिति की बैठक में तृणमूल कांग्रेस की एक सदस्य ने उनके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।

शोर-शराबा थमता नहीं देख पीठासीन सभापति ने सदन की कार्यवाही 12 बजकर करीब 5 मिनट पर 12:30 बजे तक के लिये स्थगित कर दी।

साढ़े 12 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही। व्यवस्था बनते हुए नहीं देख पीठासीन सभापति राजेन्द्र अग्रवाल ने सदन की कार्यवाही कुछ ही मिनट बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

दो बजे कार्यवाही शुरू होने पर नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ‘भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2021’ को चर्चा एवं पारित करने के लिए रखा। सदन ने हंगामे के दौरान ही विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

इसके बाद पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने अंतर्देशीय जलयान विधेयक चर्चा एवं पारित होने के लिये रखा। सदन ने बिना चर्चा के ही विधेयक को शोर-शराबे के बीच ही ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

इसके बाद पीठासीन सभापति किरीट सोलंकी ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिये स्थगित कर दी।
 

राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा जारी, कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित
 
 राज्यसभा में सरकार और विपक्ष के बीच बना गतिरोध बृहस्पतिवार को भी जारी रहा और विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्यों के विरोध के कारण उच्च सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

हालांकि भारी विरोध  के बीच ही संक्षिप्त चर्चा के बाद फेक्टर विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2021 पारित किया गया और नारियल विकास बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया गया।

दूसरी बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही आरंभ हुई, उपसभापति हरिवंश ने फेक्टर विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का नाम पुकारा।

वित्त मंत्री ने अभी उन्होंने विधेयक को चर्चा के लिए पेश किया भी नहीं था कि एक बार फिर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों सहित अन्य विपक्षी दलों के सदस्य सभापति के आसन के निकट पहुंच गए और नारेबाजी आरंभ कर दी।

हंगामे के बीच ही विधेयक पेश करते हुए सीतारमन ने कहा कि यह विधेयक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को लाभ मिलेगा। उन्होंने सदस्यों से इस विधेयक को पारित करने का आग्रह किया।

सदन में शोर होने  की वजह से चर्चा में हिस्सा लेने वाले कुछ सदस्यों ने विधेयक पर अपने वक्तव्य को सदन के पटल पर रख दिया।

भारतीय जनता पार्टी के शिवप्रताप शुक्ल, तेलंगाना राष्ट्र समिति के के आर सुरेश रेड्डी, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के एम थंबी दुरई और वाईएसआर कांग्रेस के सदस्य के रवींद्र कुमार ने विधेयक का समर्थन किया।

हंगामे के बीच ही सीतारमन ने इस संक्षिप्त चर्चा का जवाब दिया और महज 14 मिनट के भीतर विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया गया।

इस विधेयक के पारित होने के तत्काल बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने नारियल विकास बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया।

हालांकि इस दौरान सदन मेंविरोध जारी रहा, उपसभापति ने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले, जब दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो उपसभापति हरिवंश ने प्रश्नकाल आरंभ किया। इसी बीचनारेबाज़ी करते हुए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों सहित अन्य विपक्षी दलों के सदस्य सभापति के आसन के निकट पहुंच गए और नारेबाजी आरंभ कर दी।

इन सबके बीच ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर सदस्यों की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब दिए। इस दौरान कुछ सदस्यों ने अफगानिस्तान में चीन की भूमिका और दक्षिण चीन सागर को लेकर भी सवाल किए।

 विपक्षी सदस्य ‘‘किसान विरोधी काले कानून वापस लो’’ और ‘‘जासूसी करना बंद करो’’ के नारे लगाते सुने गए।

उपसभापति ने विरोध कर रहे विपक्षी सदस्यों को अपने स्थानों की ओर लौटने और प्रश्न काल सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया लेकिन उनके आग्रह का कोई प्रभाव देखने को नहीं मिला।

उपसभापति ने कांग्रेस के सदस्य दीपेंद्र हुड़ा को एक बार चेतावनी भी दी और कहा कि वह सदन के वरिष्ठ सदस्य हैं इसलिए मर्यादाओं का पालन करें।

इसी बीच ही कपड़ा राज्य मंत्री दर्शना जरदोश और महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी से सदस्यों के सवालों के जवाब दिए।

ईरानी जब सवालों के जवाब दे रही थी तब विपक्षी सदस्यों ने हंगामा ओर तेज कर दिया और ‘‘2024 में खेला होबे’’ का नारा लगाना आरंभ कर दिया। ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ‘‘खेला होबे’’ का नारा बहुत लोकप्रिय हुआ था और वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की शानदार जीत के लिए इस नारे को भी एक कारण बताया था।

हंगामा कर रहे सदस्यों को उपसभापति ने बार-बार प्रश्नकाल सुचारू रूप से चलने देने का अनुरोध किया। दो बार उन्होंने सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी लेकिन विपक्षी सदस्यों पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

उपसभापति ने आजादी की स्वर्णजयंती पर राज्यसभा में पारित एक प्रस्ताव का उल्लेख किया और कहा, ‘‘यह आजादी की स्वर्ण जयंती पर पारित प्रस्ताव है लेकिन इसका भी सम्मान नहीं किया जा रहा है...किसी भी नियम का पालन नहीं हो रहा है...यहां तक कोविड-19 के दिशानिर्देशों का भी अनुपालन नहीं हो रहा है।’’

इसके बाद भी जब विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा तक उपसभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

पेगासस जासूसी विवाद, नए कृषि कानूनों सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी सदस्यों का हंगामा मौजूदा मानसून सत्र की शुरूआत से ही जारी है।

इससे पहले, आज सुबह जब सदन की बैठक शुरू हुई तो सभापति एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखवाए। इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर रॉय, कांग्रेस के रिपुन बोरा, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव और विश्वंभर प्रसाद निषाद, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा, वाम सदस्य इलामारम करीम और विनय विश्वम सहित विभिन्न सदस्यों की ओर से नियम 267 के तहत नोटिस मिले हैं।

सभापति ने कहा कि उन्होंने इन नोटिस पर गौर किया और उन्हें स्वीकार करने योग्य नहीं पाया। इस के बाद सदन में विपक्षी सदस्यों का हंगामा शुरू हो गया।

सभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपने स्थानों पर जाने की अपील की और कहा कि सदस्यों ने उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी पर गौर किया होगा।

सदन में व्यवस्था बनते नहीं देख उन्होंने बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

मौजूदा मानसून सत्र में अब तक राज्यसभा में एक भी दिन शून्यकाल नहीं हो पाया है।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट  के साथ )
 

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