NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
भारत
राजनीति
फिल्मकारों के बाद लेखकों की अपील : नफ़रत की राजनीति के ख़िलाफ़ वोट करें
"हम लोगों को बांटने के ख़िलाफ़ वोट करें; असमानता के ख़िलाफ़ वोट करें; हिंसा, डर और सेंसरशिप के ख़िलाफ़ वोट करें। सिर्फ़ यही एक रास्ता है जिससे हम एक ऐसा भारत बना सकते हैं जो संविधान में किये वायदों के लिए प्रतिबद्ध हो।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Apr 2019
हमारे लेखक
Image Courtesy: Outlook Hindi

100 से ज़्यादा फिल्मकारों द्वारा एनडीए सरकार के खिलाफ वोट देने की अपील के बाद विभिन्न भाषाओं के 200 से ज़्यादा लेखकों ने देश की जनता से नफ़रत की राजनीति के ख़िलाफ़ और समानता और विविधता वाले भारत के लिए वोट करने की अपील की है।

भारतीय लेखकों के संगठन “इंडियन राइटर्स फोरम” की ओर से जारी इस अपील में कहा गया है कि आने वाले चुनावों में हमारा देश एक दोराहे पर खड़ा है। हमारा संविधान यह सुनिश्चित करता है कि देश के सभी नागरिकों को सामान अधिकार, अपनी मर्ज़ी से खाने-पीने, पूजा-अर्चना करने की आज़ादी मिले, अभिव्यक्ति की आज़ादी और असहमति जताने का अधिकार मिले। लेकिन पिछले कुछ सालों से हम देख रहे हैं कि कई नागरिक भीड़ की हिंसा में मारे गए, घायल हुए या उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा और यह सब सिर्फ़ इसलिए कि वे किसी विशेष समुदाय, जाति, लिंग या क्षेत्र से ताल्लुक़ रखते हैं। नफ़रत की राजनीति का इस्तेमाल कर देश को बांटा जा रहा है; डर फैलाया जा रहा है; और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को पूर्ण नागरिक के तौर पर जीने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। लेखकों, कलाकारों, फिल्म-निर्माताओं, संगीतकारों और अन्य संस्कृतिकर्मियों को धमकाया, डराया और सेंसर किया जा रहा है। जो भी सत्ता पर सवाल उठा रहा है, वह उत्पीड़न या झूठे व बेहूदा आरोपों पर गिरफ़्तारी के ख़तरे को झेल रहा है।

हम चाहते हैं कि यह स्थिति बदले। हम नहीं चाहते कि तर्कवादियों, लेखकों और कलाकारों को सताया जाए या मार दिया जाए। हम चाहते हैं कि महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ मौखिक या शारीरिक हिंसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। हम चाहते हैं कि सबको आगे बढ़ने के सामान अवसर दिए जाएँ और रोज़गार, शिक्षा, शोध तथा स्वास्थ्य के क्षेत्रों की बेहतरी के लिए संसाधन व क़दम उठाये जाएँ। और इन सबसे ज़्यादा, हम अपनी विविधता को बचाना और लोकतंत्र को फलते-फूलते देखना चाहते हैं।

हम यह सब कैसे कर सकते हैं? हम कैसे वे बदलाव ला सकते हैं जिनकी हमें सख्त ज़रूरत है? ऐसे बहुत से क़दम हैं जो हम उठा सकते हैं और हमें उठाने चाहिए। लेकिन एक महत्वपूर्ण क़दम है जो हमें सबसे पहले उठाना है।

यह पहला क़दम है कि हम नफ़रत की राजनीति के ख़िलाफ़ वोट करें और ऐसा करने का मौक़ा हमें बहुत जल्द ही मिल रहा है। हम लोगों को बांटने के ख़िलाफ़ वोट करें; असमानता के ख़िलाफ़ वोट करें; हिंसा, डर और सेंसरशिप के ख़िलाफ़ वोट करें। सिर्फ़ यही एक रास्ता है जिससे हम एक ऐसा भारत बना सकते हैं जो संविधान में किये वायदों के लिए प्रतिबद्ध हो। इसलिए हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे एक विविधतापूर्ण और सामान भारत के लिए वोट करें।

यह अपील हिन्दी और अंग्रेजी के अलावा कई भारतीय भाषाओं में जारी की गई है। इस पर हस्ताक्षर करने वाले लेखकों में गिरीश कर्नाड, अरुंधती रॉय, अमिताव घोष, नयनतारा सहगल, टीएम कृष्णा, विवेक शानभाग, के सच्चिदानंदन और रोमिला थापर जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

इसे भी पढ़ें : 100 से ज़्यादा फिल्मकारों की भाजपा को वोट न देने की अपील

writer
progressive writer
Indian Writers Forum
General elections2019
2019 Lok Sabha Polls
2019 आम चुनाव

Related Stories

नहीं रहे अली जावेद: तरक़्क़ीपसंद-जम्हूरियतपसंद तहरीक के लिए बड़ा सदमा

मंगलेश डबराल नहीं रहे

नए भारत का जटिल जनादेश

दुराचार कर सोशल मीडिया पर वायरल किया वीडियो : मुकदमा दर्ज

झारखंड : लोकसभा चुनाव : प्रवासी मजदूरों का दर्द नहीं बन सका मुद्दा

क्या ये एक चुनाव का मामला है? न...आप ग़लतफ़हमी में हैं

“देश की विविधता और बहुवचनीयता की रक्षा करना ज़रूरी है”

अम्बेडकर जयंती विशेष : हिंदुत्व के ख़तरे!

भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियां और जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 साल

फेसबुक क्या आपकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है?


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 12,514 नए मामले, 251 मरीज़ों की मौत
    01 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.46 फ़ीसदी यानी 1 लाख 58 हज़ार 817 हो गयी है।
  • economic crisis
    अजय कुमार
    भारतीय अर्थव्यवस्था : हर सर्वे, हर आकंड़ा सुना रहा है बदहाली की कहानी
    01 Nov 2021
    NCRB के आत्महत्या के आंकड़े, आरबीआई के कंज्यूमर कॉन्फिडेंट सर्वे के आंकड़े और मनरेगा फंड के खात्मे के आंकड़े को मिलाकर पढ़िए तो अर्थव्यवस्था की बदहाली में बदलाव के आसार नहीं दिखते हैं।
  • Itihas ke panne
    न्यूज़क्लिक टीम
    गाँधी के 1946 में नोआखाली जाने से क्या हुआ था?
    31 Oct 2021
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन बात करते हैं वरिष्ठ इतिहासकार मृदुला मुख़र्जी से. वे 1946 में नोआखाली में हुए दंगों की चर्चा करते हैं और आज का समाज गाँधी जी के…
  • amit shah
    असद रिज़वी
    सियासत: गृह मंत्री के दावे और ज़मीनी हक़ीक़त का फ़र्क़
    31 Oct 2021
    अमित शाह ने प्रदेश की योगी सरकार की कानून-व्यवस्था की जमकर प्रशंसा की। हालाँकि उनकी मौजूदगी में ही शुक्रवार की रात राजधानी में हुई दो हत्याओं ने उनके दावे को धराशायी कर दिया।
  • panchayat
    अनिल अंशुमन
    बिहार पंचायत चुनाव : सत्ता विरोधी प्रत्याशियों पर चल रहा पुलिस प्रशासन का डंडा!
    31 Oct 2021
    बिहार में जारी पंचायत चुनाव में विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी दल समर्थित उम्मीदवारों को जिताने में पुलिस प्रशासन लगा रहा एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License