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संगरूर : रोज़गार मांगों तो पुलिस की लाठी मिलती है!
जेएनयू छात्रों और यूपी किसानों के बाद अब ताजा मामला पंजाब के संगरूर से सामने आया है। यहां रोज़गार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे बीएड और ईटीटी टीईटी पास बेरोजगार अध्यापकों पर रविवार 24 नवंबर को पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाईं, पानी की बौछारें व आंसू गैस के गोले भी छोड़े।
सोनिया यादव
25 Nov 2019
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Image courtesy: Dainik Bhaskar

पुलिस का लाठीचार्ज इन दिनों खासा सुर्खियों में है। अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे जेएनयू छात्रों और यूपी किसानों के बाद अब ताजा मामला पंजाब के संगरूर से सामने आया है। यहां रोज़गार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे बीएड और ईटीटी टीईटी पास बेरोजगार अध्यापकों पर रविवार 24 नवंबर को पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाईं, पानी की बौछारें व आंसू गैस के गोले भी छोड़े।

मीडिया खबरों के अनुसार इस दौरान कई महिलाओं समेत लगभग दर्जन भर लोग घायल हो गए। सभी घायलों को सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि अपनी मांगों को लेकर पिछले ढाई महीने से शहर में बेरोजगार अध्यापक प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे हैं। रविवार को इस प्रदर्शन में करीब 24 किसान, मजदूर और छात्र संगठन भी शामिल हो गए और शहर में एक विशाल रोष मार्च निकाला गया। जैसे ही बेरोजगार अध्यापकों का जत्था शिक्षा मंत्री विजय इन्दर सिंगला की कोठी के पास पहुंचा तो पुलिस प्रशासन और अध्यापकों के बीच टकराव हो गया और पुलिस द्वारा लाठी चार्ज किया गया।

पुलिस कार्रवाई से नाराज प्रदर्शनकारियों ने मेन सड़क जाम कर दी और वहीं धरने पर बैठ गए। जिसके बाद देर शाम साढ़े 5 बजे प्रशासन ने एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों को कैबिनेट में हल करवाने का आश्वासन दिलवाया। इसके बाद अध्यापकों का गुस्सा शांत हुआ।

हालांकि इस संबंध में पुलिस मुख्यालय से एसपी शेरजीत सिंह ने लाठीचार्ज की खबरों से इंकार किया है। उनका कहना है कि जब  प्रदर्शनकारी पुलिस पर पत्थर फेंकने लगे, तब पुलिस द्वारा केवल आंसूगैस के गोले का इस्तेमाल किया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठियों से हमला भी किया, जिसमें चार महिला और दो पुरुष पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं।

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बता दें कि इससे पहले भी 22 सितंबर को प्रदर्शन के दौरान ईटीटी टेट पास बेरोजगार अध्यापकों और 17 नवंबर को बीएड टेट पास बेरोजगार अध्यापकों पर शिक्षा मंत्री निवास के समक्ष ही प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज हो चुका है।

प्रदर्शनकारी बेरोज़गार अध्यापकों ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, 'सरकार से हमारी मांग है कि अध्यापक योग्यता परीक्षा पास अध्यापकों को रोज़गार दिया जाए साथ ही सरकार भर्ती के लिए 15 हजार पदों का विज्ञापन भी जारी करे। इसके अलावा स्कूलों में शिक्षकों से सिर्फ सबंधित विषयों का ही काम लिया जाए।'

बेरोजगार अध्यापक यूनियन की मांग है कि सरकार चुनावों के दौरान किए गए वायदे को पूरा करे, सभी बेरोजगारों को 2500 रुपए बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। इसके अलावा भर्ती की आयु सीमा 37 साल से बढ़ाकर 42 साल की जाए। यूनियन का कहना है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित दिनों में पूरा करे और निजीकरण की नीति को बंद करे।

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ईटीटी और टीईटी पास यूनियन के अध्यक्ष दीपक काम्बोज का कहना है, 'हमें अयोग्य बनाने के लिए, सरकार ने मापदंड बदल दिए हैं। हमने बारहवीं कक्षा के बाद ईटीटी पास किया है, लेकिन अब सरकार ने स्नातक होना अनिवार्य कर दिया है। इसी तरह, बी.एड पास के लिए पहले कोई न्यूनतम अंक की कसौटी नहीं थी, लेकिन अब सरकार ने स्नातक में 55 प्रतिशत अनिवार्य कर दिया है। ये सही नहीं है, अगर सरकार जल्दी कोई कार्यवाही नहीं करती तो हम अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।'

प्रदर्शन में शामिल प्रदीप सिंह ने न्यूज़क्लिक से कहा, 'हम रोज़गार मांग रहे हैं और हमें पुलिस की लाठियां मिल रही हैं। अगर हमारी मांगों पर 8 दिसंबर तक कोई कार्रवाई नहीं होती हो हम बड़ा आंदोलन करेंगे।’

इस मामले में बेरोजगार अध्यापिका दिव्यांग रितु बल्ला का कहना है कि हम अपनी नौकरी के अधिकार के लिए पिछले ढाई महीने से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। जब हमने रविवार को शिक्षा मंत्री से मिलने की कोशिश की, तो पुलिस ने हम पर लाठीचार्ज किया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। हमारे बीच कई विकलांग व्यक्ति थे जिन पर पुलिस ने बेशर्मी लाठियां चलाईं।

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किसान कार्यकर्ता मंजीत धनगर इस संबंध में कहते हैं, 'राज्य सरकार विरोध को कुचलने की कोशिश कर रही है। बेरोज़गार अध्यापक केवल अपना अधिकार मांग रहे हैं। इस आंदोलन में और अधिक संगठन और लोग शामिल होंगे और अपना अधिकार सरकार से लेकर रहेंगे।'

इस पूरे मामले पर शिक्षा मंत्री विजय इन्दर सिंगला ने कहा, 'मैंने पहले ही संघ के प्रतिनिधियों और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें की हैं। बेरोजगार युवाओं को पता है कि उनका एजेंडा अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा और इन लोगों को कुछ समय तक इंतजार करना चाहिए।
वहीं इस मामले पर राजनीति भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के राज्य संयोजक भगवंत मान और विपक्ष के नेता हरपाल चीमा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रही है और अब, यह उनकी आवाज को दबाने के लिए बल का उपयोग कर रहा है।

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