NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीतिक सहायता के लिए सेना प्रमुख को इनाम?
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) पद की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसे जल्द ही अमली जामा पहना दिया जाएगा। इसने भय, अनिश्चितता और संदेह पैदा कर दिया है।
अली अहमद
19 Aug 2019
modi

कश्मीरियों द्वारा विद्रोह के दमन की सीमा को देखते हुए ऐसा लगता है कि जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाने का अध्याय बिल्कुल बंद नहीं हुआ है। पांचवां भारत-पाक युद्ध भी हो सकता है और परमाणु स्थिति को लेकर पहले से ही तनातनी है जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की नो फर्स्ट यूज (एनएफयू) नीति पर टिप्पणी को लेकर जाहिर है। अगर युद्ध हुआ तो पहले परमाणु इस्तेमाल की संभावना बढ़ेगी।

संक्षेप में, कोई गारंटी नहीं है। इस महीने की शुरूआत में संविधान में संशोधन करने से पहले लगभग 45,000 अर्द्धसैनिक बलों को जल्दबाजी में कश्मीर में तैनात कर दिया गया। इन सैनिकों का कश्मीरियों के साथ किसी प्रकार के संबंध या जुड़ाव की संभावना नहीं है। वास्तव में वे तैनाती के दौरान अपनी असुविधाओं को लेकर कश्मीरियों को दोषी मानेंगे।

मीडिया की बंदिशों के बावजूद कई रिपोर्ट आईं जिसमें पैलेट गन से युवाओं की आंखों की रोशनी जाने और मनमाने प्रतिबंधों को लेकर ख़बरे प्रकाशित हुई। भीड़ को तितर बितर किए जाने की एक वीडियो क्लिप वायरल हुई है जिसमें ऑटोमेटिक हथियारों से गोली चलने की आवाज़ सुनाई दे रही है। इन बातों की संभावना की पुष्टि इससे होती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल कश्मीर में डेरा डाले हुए थे।

आख़िरकार, कश्मीर में उठाए गए आपातकालीन क़दम को पीछे खींचना होगा। फोन लाइनों को फिर से खोलने की बात चल रही है (कुछ लैंडलाइन खोले गए थे)। इसके बाद सुरक्षा विश्लेषण जो इस कठोर नीति से पहले हुआ था उसे इसके वास्तविक परीक्षण के लिए रखा जाएगा। इस विश्लेषण ने निष्कर्ष निकाला कि भारत संविधान में संशोधन के बाद की स्थिति को संभाल सकता है। यह सलाह है कि सेना जो सुरक्षा की प्रभारी है उसे राजनीतिक संस्थान दिए जाने की उम्मीद की जा सकती है। इसी ने जम्मू-कश्मीर को राजनीतिक रूप से समाप्त करने के लिए राजनीतिक तंत्र को अपनाया है।

अपने जम्मू-कश्मीर अभियान के तुरंत बाद, लगता है सेना को इस राज्य के संबंध में इसके राजनीतिक रूप से उपयोगी इनपुट के लिए 'उचित' इनाम मिल रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सेना प्रमुख चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) पद की दौड़ में सबसे आगे हैं। सीडीएस को लेकर प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में लाल किले के प्राचीर से से इस पद के बारे में कहा था। उन्होंने कहा जल्द ही इस पद के लिए प्रक्रिया शुरु हो जाएगी।

यह इस क्षेत्र में पाकिस्तान द्वारा शुरु किए गए चल रहे छद्म युद्ध से निपटेगा और संभावना है कि यह गति देगा। लेकिन, ज़्यादा अहम यह है कि पाकिस्तान की तरफ से भारत के ख़िलाफ़ सैन्य प्रतिक्रिया की किसी भी आशंका को दूर करना होगा। इन सभी घटनाओं में यह जम्मू-कश्मीर में सरकार द्वारा लिए गए निर्णय और जिस तरह से इसे अंजाम-घाटी में दमन का खाका- दिया गया था उससे स्पष्ट है कि सेना के इनपुट ने संकेत दिया कि यह स्थिति से निपटने में सक्षम महसूस करता है।

यह मूल प्रश्न की ओर लौट जाता है कि क्या सेना ने इनपुट दिया था जिसे राजनीतिक स्तर ने सुना; और सीडीएस का पद वास्तव में इसके लिए एक तरह का इनाम है। दूसरा सवाल यह है कि क्या इस तरह का पद अंतिम रूप से तैयार किए जाने की संभावना अंततः ख़तरे की समझ को लेकर सेना की स्थिति को प्रभावित करता है जो अनुच्छेद370 पर किसी भी निर्णय लेने को स्वाभाविक रूप से सूचित करेगा।

न ही कोई व्यर्थ प्रश्न है। सीडीएस का पद अंततः अतीत की सभी बाधाओं को दूर करता है जो इन सवालों को अपरिहार्य बनाता है। आने वाले हफ्तों और महीनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या सेना अपने आकलन में सही था कि सुरक्षा बल - अपने परिचालन नियंत्रण के अधीन- युद्ध के ख़तरे के साथ-साथ परमाणु इस्तेमाल के साथ नए सिरे से विद्रोह और छद्म युद्ध को संभालने के कार्यों के लिए है।

फिलहाल, चीजें नियंत्रण में हैं। लेकिन अपनी पीठ थपथपाने का यह कोई कारण नहीं है। इसी समय पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर घटना का दावा किया है। भले ही इस तरह का दावा कश्मीर पर एक बंद कमरे की बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को प्रभावित करने के लिए किया जाता है जैसा कि पाकिस्तान द्वारा अनुरोध किया गया और चीन द्वारा समर्थन किया गया तो यह सैन्य मार्ग को अपना सकता है। यदि पाकिस्तान के राजनयिक आक्रामकता को समर्थन नहीं मिलता है तो यह उस मार्ग को खोलने पर विचार करेगा।

छद्म युद्ध को नए सिरे से बढ़ावा देने के लिए अपने योग्य आतंकवादियों को उकसाने के लिए पाकिस्तान एलओसी पर भड़कने के अवसर का इस्तेमाल करेगा। हाल में पाकिस्तान अपेक्षाकृत मौन रहा है। इसने भारतीय सेना को अप्रत्यक्ष रूप से शक्ति दी है। अब, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद बदली हुई राजनीतिक स्थिति में पाकिस्तान को छद्म युद्ध रोकने के बारे में विचार करना चाहिए।

कोई शक नहीं कि भारत की सेना पाकिस्तान द्वारा विद्रोह, छद्म युद्ध और सैन्य कार्रवाई को नियंत्रित कर सकती है। यह किसी भी मामले को लेकर अलर्ट है और यह एक पारंपरिक खतरे का सामना करने को लेकर घाटी में पहले से ही अर्द्धसैनिक बल मोर्चे पर हैं। पुलवामा का बदला बालाकोट से लेने के साथ भारत के पास इस मौके पर निवारक उपाय हैं।

फिर भी, सैन्य क्षमता विचार के लायक एकमात्र मानदंड नहीं है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले कुछ वर्षों तक क्या एलओसी के साथ जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर भी विचार किया जाना चाहिए।2016 में हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में बनी स्थिति कुछ स्थिर हो गई थी। करगिल युद्ध के बाद आतंकियों का सफाया करने में लगभग चार वर्ष लग गए। युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने फिदायीन हमलों की नई रणनीति के तहत आतंकवादियों को प्रशिक्षित किया था। इसमें ऑपरेशन पराक्रम के बाद निरंतर ऑपरेशनल तैनाती शामिल थी। अब, कोई आश्चर्यचकित होगा कि क्या सेना ने जम्मू-कश्मीर में अपने कदमों से उत्पन्न सुरक्षा खतरे को लेकर सरकार को सचेत किया था?

अब जबकि सरकार ने इस क्षेत्र में बेहतर प्रशासन और अधिक विकास के वादे करके जम्मू-कश्मीर में अपने कार्यों को वैध बनाने और तर्कसंगत बनाने का प्रयास किया है, तो ऐसा प्रतीत होगा कि यह मामला नहीं था। यह समझने के लिए सैन्य विशेषज्ञता की आवश्यकता नहीं है कि सुशासन और विकास एक आक्रामक सुरक्षा स्थिति में असंभव है। नब्बे के दशक की शुरुआत भारत की मिसाल है। यहां तक कि इस समय की बड़ी अवधि में इस क्षेत्र पर केंद्रीय नियंत्रण रहा जिसने कश्मीर की प्रगति में बहुत कम योगदान दिया।

यहां तक कि पाकिस्तान द्वारा उत्पन्न सैन्य खतरे के नियंत्रण की संभावना भी महत्वाकांक्षी सोच साबित हो सकती है। अब तक, पाकिस्तानी सामरिक परमाणु हथियारों से उत्पन्न समस्या का उत्तर सैद्धांतिक रूप से नहीं दिया गया है। एकीकृत युद्ध समूहों के इस साल परीक्षण अभ्यास हुए हैं जो संभवतः छोटे लेकिन घातक हैं। ये परमाणु सीमा के अधीन संचालित करने में सक्षम होंगे। हालांकि, अब तक इनका संचालन नहीं किया गया है। वर्ष के अंत तक केवल दो रवैये जारी रहेंगे; एक रक्षात्मक और दूसरा आक्रामक और केवल सियालकोट उभार को कवर करना।

इस कारण से, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि पाकिस्तान के साथ परमाणु युद्ध नहीं होगा। पाकिस्तान के पास अपनी पारंपरिक हीनता को ढंकने और बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप को पारदर्शी करने के क्रम में अपनी परमाणु शक्ति को बढ़ाने का हर एक कारण है। यह कारण है कि रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को एनएफयू नीति में अपना हस्तक्षेप किया।

इन स्व-स्पष्ट कारकों पर विचार करते हुए जो निश्चित रूप से किसी भी ख़तरे के विश्लेषण में शामिल होना चाहिए, सेना के इनपुट ने इसकी सलाह को कैसे अनदेखा किया? यदि यह सलाह दी जाती है कि कश्मीर की स्थिति के राजनीतिक री-इंजीनियरिंग के साथ आगे बढ़ना नहीं है तो किसी ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया है? नतीजतन, सवाल खड़ा होता है कि सरकार उनके राजनीतिक सहायता के लिए सेना प्रमुख को सीडीएस के लिए पदोन्नत करने पर विचार कर रही है।

सेना को सभी तरह के सहायता की आवश्यकता होती है क्योंकि घटनाओं की एक चुनौतीपूर्ण श्रृंखला दूरस्थ स्थानों में होती है। यह संभवतः दुर्ग के रूप में काम करेगा जैसा कि हमेशा होता है। हालांकि, एक बार शांत हो जाने के बाद भविष्य में किया गया कोई भी पोस्टमार्टम इन सवालों को सामने रखेगा। बुनियादी बिंदु यह होनी चाहिए कि किसी नागरिक की मौत की ज़िम्मेदारी कौन उठाएगा जो घाटी में होती है।

(लेखक अली अहमद नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कंफ्लिक्ट रिजोल्यूशन, जामिया मिलिया इस्लामिया में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। लेख में व्यक्त विचार निजी हैं।)

Nuclear Arms
indo-pak
Fifth Indo-Pak war
Kashmir
military
defence minister
Defence strategy
No First Use

बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव: जनता गुस्से में है सरकार की विफलताओं पर
    01 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश के चुनावों में इस बात जनता बेहद गुस्से में है सरकार की विफलताओं को लेकर। चाहे फिर वो कोरोना काल में हुई मौत हो या फिर महंगाई और बेरोज़गारी, सरकार हर मोर्चे पर नाकाम ही नज़र आयी है , ऐसा…
  • Gujara
    दमयन्ती धर
    गुजरात दंगों के 20 साल: विस्थापित मुस्लिम परिवार आज भी अस्थाई शिविरों में रहने के लिए मजबूर
    01 Mar 2022
    20 वर्षों के बाद भी बुनियादी सुविधाओं के बिना ये शिविर हिंसा प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी आवास बन चुके हैं, जो एक बार फिर से विस्थापित कर दिए जाने की आशंका के बीच रहने के लिए मजबूर हैं।
  • BHU hospital
    सोनिया यादव
    यूपी: बीएचयू अस्पताल में फिर महंगा हुआ इलाज, स्वास्थ्य सुविधाओं से और दूर हुए ग्रामीण मरीज़
    01 Mar 2022
    बीते साल नवंबर में ही ओपीडी की फीस बढ़ोत्तरी के बाद अब एक बार फिर सभी जांच सुविधाओं की दर में दो से तीन गुना की बढ़ोत्तरी की गई है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य मानकों में…
  • Naveen
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन के खारकीव में गोलाबारी में भारतीय छात्र की मौत
    01 Mar 2022
    छात्र का नाम नाम नवीन शेखरप्पा है। वह कर्नाटक के रहने वाले थे।
  • ukraine
    एपी
    ब्रिटेन ने यूक्रेन को उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र बनाने के आह्वान को ख़ारिज किया
    01 Mar 2022
    ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम यह (उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित) नहीं करने वाले हैं, क्योंकि हम ऐसी स्थिति में आ जाएंगे, जब हमें रूसी विमानों को मार गिराना हेागा।’’
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License