NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
राजस्थान सरकार द्वारा शिक्षा की नीलामी , बढ़ता जन आक्रोश
"अगर सरकार स्कूलों को बेचने में कामयाब हो गयी तो तकरीबन 15,000 शिक्षक, कर्मचारी, मिड डे मील कर्मचारियों की नौकरी ख़तम हो जाएगी तथा लाखों छात्रों का भविष्य दाव पर लग जाएगा"
ऋतांश आज़ाद
03 Jan 2018
rajasthan privatization

राजस्थान सरकार लगातार शिक्षा के बाज़ारीकरण की ओर कदम बढ़ा रही है , पर इसके खिलाफ प्रतिरोध के स्वर भी मुखर होते जा हैं I पछले साल सितम्बर में वसुंधरा राजे की नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार ने ये एलान किया था कि वह 300 सरकारी स्कूलों को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के अंतर्गत लाने वाली है , सरकार का ये कहना है कि इन स्कूलों का काफी समय से प्रदर्शन ख़राब रहा हैI सरकार का ये प्रस्ताव है कि सरकारी स्कूलों को सिर्फ 75 लाख की राशि पर निजी हाथों में दे दिया जायेगा और सरकार 12% ब्याज जोड़कर उन्हें 7 साल बाद 1.35 करोड़ की राशि वापस देगी I

राजस्थान के सभी ज़िलों में इस कदम का विरोध विभिन्न जन संगठन कर रहे हैं इसमें AISF , SFI , AIKS, राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील ) शामिल हैं I

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया राजस्थान के सचिव मंडल सदस्य पवन बेनीवाल का कहना है “सरकार स्कूलों की ज़मीन और संपत्ति को कौड़ियों के दाम परनिजी हाथों में कैसे दे सकती है , इससे शिक्षा मंहगी हो जाएगी और गरीब और पिछड़े तबके से आने वाले बच्चों की पहुँच से बाहर भी” I साथ ही उन्होंने कहा कि “जहाँ तक बात है सरकारी स्कूलों के ख़राब प्रदर्शन की तो कांग्रेस के समय से ही सरकारें जानबूझकर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर रही हैं, जिसके कारण करीब 1 लाख 56 हज़ार पद खाली पड़े हैं और साथ ही ठेके पर काम कर रहे 24 हज़ार शिक्षा मित्रों को भी हटा दिया गया है, इन हालातों में स्कूलों की दुर्गति तो निश्चित हैI ये दुर्गति सरकार ने सुनियोजित तरीके से करी है जिससे स्कूलों के ख़राब प्रदर्शन के बहाने स्कूलों को निजी हाथों में दे दिया जा सके और शिक्षा का व्यापारीकारण किया जाए”I

गौरतलब है कि जिन सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में देने का कदम उठाया जा रहा है उनके भवन सरकार को आम लोगों द्वारा दान में मिली थीं I इन स्कूलों की संपत्ति की कीमत अरबों की है और ये सार्वजनिक सम्पदा है I आरएसएस का शिक्षक संघ भी इस फैसले के खिलाफ खड़ा हुआ दिखाई पड़ रहा है और उसका कहना है कि वह 5 जनवरी को इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगा I राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने 27 दिसंबर को इस कदम के खिलाफ राजस्थान की हर तहसील में प्रदर्शन किया , शिक्षकों ने एक आवाज़ में कहा कि अगर बीजेपी सरकार ये कदम उठती है तो शिक्षक बीजेपी के खिलाफ वोट करेंगे I शिक्षकों की नाराज़गी इस बात से भी है कि जो भी कंपनियाँ या समितियाँ ये स्कूल चलाएंगी उन्हें अपने हिसाब से शिक्षक रखने, हटाने और उनका वेतन कम करने की आज़ादी होगी I इससे सरकार की जवाबदेही ख़तम हो जाएगी , ये निजी कंपनियाँ स्कूल की फीस और पाठ्य पुस्तकों की कीमत भी अपने हिसाब से निर्धारित कर सकेंगी I

शिक्षकों और बाकी जन संगठनों ने 27 दिसंबर को दिए प्रेस स्टेटमेंट में कहा “अगर सरकार स्कूलों को बेचने में कामयाब हो गयी तो तकरीबन 15,000 शिक्षक, कर्मचारी, मिड डे मील कर्मचारियों की नौकरी ख़तम हो जाएगी तथा लाखों छात्रों का भविष्य दाव पर लग जाएगा यह भारत के संविधान की प्रस्तावना का उल्लंघन है”I वहीँ अंबेडकर चेतना मंच के सुरेश महावर का कहना था कि “सरकार एक तरफ पैसे की कमी की बात कर रही है वहीँ दूसरी तरफ निजी कंपनियों को 12% ब्याज सहित रूपया वापस देगी I”  

इससे पहले भी एकीकरण के नाम पर राजस्थान सरकार ने सत्ता में आते ही 17,000 सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया था I जिससे सरकारी स्कूलों की ड्रापआउट रेट में बढ़ोतरी हुई और स्कूली दाखिले में भारी कमी आयी थी I 2012-13 में जहाँ 72 लाख बच्चों ने स्कूलों में दाखिला लिया वहीँ 2013 -14  में ये संख्या 68 लाख हो गयी I

गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने इन पी पी पी  मॉडल के तहत इन स्कूलों की नीलामी 2 जनवरी को शुरू कर दी है I जन संगठनों का कहना है कि वो इस योजना के खिलाफ 7 से 20 तक राजस्थान के विभिन्न जिलों में प्रचार करेंगे और जन आक्रोश को आन्दोलन का रूप देंगे I

Rajasthan sarkar
privatization of education
PPP model
पपप मॉडल
बीजेपी

Related Stories

चुनावी राज्यों में क्रमवार दंगे... संयोग या प्रयोग!

जोधपुर की घटना पर माकपा ने जताई चिंता, गहलोत सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग

नई शिक्षा नीति से सधेगा काॅरपोरेट हित

बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे

शिक्षा बजट: डिजिटल डिवाइड से शिक्षा तक पहुँच, उसकी गुणवत्ता दूभर

राजस्थान: REET अभ्यर्थियों को जयपुर में किया गया गिरफ़्तार, बड़े पैमाने पर हुए विरोध के बाद छोड़ा

राजस्थान: एक सप्ताह के भीतर दुष्कर्म के आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज, गहलोत सरकार की क़ानून व्यवस्था फेल!

कोविड-19: दिल्ली में एक सप्ताह का कर्फ़्यू, राजस्थान में 3 मई तक कड़ी पाबंदियां

दिशाहीन और हताश करने वाला बजट: असीम दासगुप्ता

दल-बदल विरोधी कानून: क्या कहता है इतिहास?


बाकी खबरें

  • राज वाल्मीकि
    सीवर में मौतों (हत्याओं) का अंतहीन सिलसिला
    01 Apr 2022
    क्यों कोई नहीं ठहराया जाता इन हत्याओं का जिम्मेदार? दोषियों के खिलाफ दर्ज होना चाहिए आपराधिक मामला, लेकिन...
  • अजय कुमार
    अगर हिंदू अल्पसंख्यक हैं, मतलब मुस्लिमों को मिला अल्पसंख्यक दर्जा तुष्टिकरण की राजनीति नहीं
    01 Apr 2022
    भाजपा कहती थी कि मुस्लिमों को अल्पसंख्यक कहना तुष्टिकरण की राजनीति है लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे ने इस आरोप को खुद ख़ारिज कर दिया।  
  • एजाज़ अशरफ़
    केजरीवाल का पाखंड: अनुच्छेद 370 हटाए जाने का समर्थन किया, अब एमसीडी चुनाव पर हायतौबा मचा रहे हैं
    01 Apr 2022
    जब आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी कहती हैं कि लोकतंत्र ख़तरे में है, तब भी इसमें पाखंड की बू आती है।
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: क्या कुछ चर्चा महंगाई और बेरोज़गारी पर भी हो जाए
    01 Apr 2022
    सच तो ये है कि परीक्षा पर चर्चा अध्यापकों का काम होना चाहिए। ख़ैर हमारे प्रधानमंत्री जी ने सबकी भूमिका खुद ही ले रखी है। रक्षा मंत्री की भी, विदेश मंत्री की और राज्यों के चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    श्रीलंका में भी संकट गहराया, स्टालिन ने श्रीलंकाई तमिलों की मानवीय सहायता के लिए केंद्र की अनुमति मांगी
    01 Apr 2022
    पाकिस्तान के अलावा भारत के एक और पड़ोसी मुल्क श्रीलंका में भारी उथल-पुथल। आर्थिक संकट के ख़िलाफ़ जनता सड़कों पर उतरी। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे का इस्तीफ़ा मांगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License