NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
रिलायंस जियो ने क़रीब 5000 कर्मचारियों को काम से हटाया
देखा गया है कि अन्य निजी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के सेवा प्रदाता भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के विपरीत, जियो को केंद्र की तरफ़ से काफ़ी मदद मिलती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 May 2019
रिलायंस जियो ने क़रीब 5000 कर्मचारियों को काम से हटाया
सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य: Deccan Herald

निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो ने लागत को कम करने के नाम पर कुछ स्थायी कर्मचारियों के साथ कई कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को काम से निकाल दिया है। 

इकनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ जनवरी-मार्च तिमाही में जियो के ऑपरेटिंग मार्जिन में आई गिरावट के बाद 500-600 स्थायी कर्मचारियों सहित लगभग 5,000 कर्मचारी इस क़दम से प्रभावित हुए हैं।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमुख अतिरेक उपभोक्ता-पक्ष पर हैं, जबकि अन्य प्रभावित क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला, मानव संसाधन, वित्त, प्रशासन और नेटवर्क शामिल हैं।

“हम अपने उपभोक्ता व्यवसायों का विस्तार कर रहे हैं और जियो उद्योग में नई भर्ती जारी है। हम उन ठेकेदारों के साथ भी काम करते हैं जो हमारी विभिन्न परियोजना निर्माण गतिविधियों के लिए निश्चित समय के अनुबंध पर कर्मचारियों को काम पर रख सकते हैं। यह देखते हुए कि हम सक्रिय रूप से भर्ती करना चाहते हैं, लागत दबाव के नेतृत्व वाली कार्रवाई का सवाल प्रासंगिक नहीं है।” एक जियो प्रवक्ता ने कहा।
 
जियो के भुगतान रजिस्टर पर 15,000-20,000 कर्मचारी हैं। लेकिन जियो के लिए काम करने वाले कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और भी ज़्यादा हो सकती है। लेकिन ये कर्मचारी थर्ड-पार्टी कर्मचारी हैं जो जियो के नेतृत्व में चलने वाले स्टाफ़िंग फ़र्म से लिए जाते हैं।
 
रिपोर्ट में लिखा है, “जनवरी-मार्च तिमाही के लिए ब्याज़, कर, विमूल्यन और परिशोधन (एबिट्डा) मार्जिन से पहले जियो की आय तिमाही के आधार पर 5 आधार अंक गिरकर 39% हो गई, जिससे कुल ख़र्च तिमाही में लगभग 8% बढ़ गया, मुख्य रूप से उच्चतर परिचालन, लागत, वित्त व्यय और विमूल्यन और परिशोधन शुल्क की वजह से।” 

आमतौर पर टेलीकॉम ऑपरेटरों के बीच कर्मचारी की लागत पाँच से छह प्रतिशत होती है और लागत को नियंत्रित करने के लिए काम करने वाली कंपनियाँ सेवाओं में सुधार के बजाय पहले कार्यबल पर ज़ोर देती हैं।
 
हालांकि भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में संकट हैं, लेकिन रिलायंस जियो एकमात्र कंपनी है जो बाज़ार में आने के बाद मुनाफ़ा कमा रही है। देखा गया है कि अन्य निजी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के सेवा प्रदाता भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के विपरीत, जियो को केंद्र की तरफ़ से काफ़ी मदद मिलती है। जैसे कि जियो पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का क़र्ज़ है। जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के सेवा प्रदाता बीएसएनएल के पास सबसे कम क़र्ज़ है, लेकिन वे कंपनी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए लोन लेने के हक़दार नहीं हैं।
 
मुकेश अंबानी की कंपनी जियो की $50 बिलियन के टेलीकॉम मार्केट में धमाकेदार एंट्री सितंबर 2016 में हुई थी। अंबानी, जो फ़ाइनेंस के क्षेत्र में काफ़ी मज़बूत हैं, काफ़ी कम दरों के साथ विभिन्न नेटवर्क सेवाएँ दे रहे थे और इसने अन्य टेलीकॉम फ़र्मों को प्रतिस्पर्धी बाज़ार में टिकने के लिए अपनी क़ीमतों में कटौती करने के लिए मजबूर कर दिया था।
 
रिलायंस जियो की आक्रामक रणनीतियों का पूरे दूरसंचार उद्योग पर व्यापक प्रभाव पड़ा। उद्योग में बने रहने के लिए, कुछ दूरसंचार कंपनियों का विलय हो गया था और इसके परिणामस्वरूप श्रमिकों की सामूहिक वापसी हुई। अकेले 2017 में कंपनियों में वित्तीय तनाव के कारण निजी दूरसंचार क्षेत्र में 75,000 नौकरियाँ ख़त्म हो गयी थी। इस संकट के कारण आने वाले वर्षों में दूरसंचार क्षेत्र में काफ़ी अधिक कर्मचारियों ने अपनी नौकरियाँ खो दी हैं।
 
अगर हम पहले की बात करें, तो रिलायंस जियो के लॉन्च होने के बाद, 2008-09 के वित्तीय वर्ष के बाद पहली बार, भारतीय दूरसंचार कंपनियों का वार्षिक राजस्व 2015-16 में 1.93 ट्रिलियन रुपये से घटकर 2016-17 में 1.88 ट्रिलियन रुपये हो गया। और आशंका यह भी है कि ये 2017-18 में घटकर 1.84 ट्रिलियन रूपये हो सकता है।  
 
बीएसएनएल इंप्लाइज़ यूनियन के पी.अभिमन्यु ने कहा, ''इन नुक़सानों को दूर करने के लिए दूरसंचार कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है।'' 

इसने दूरसंचार उद्योग में श्रमिकों के एक वर्ग को प्रभावित किया जो लगभग 2.2 मिलियन लोगों को रोज़गार देता था। और आख़िरकार यही क़दम जियो ने भी उठाया है। 

Indian telecom sector
Telecom Services in India
Private Telecom Companies
Reliance Jio
Jio and Ambani
Mukesh Ambani and Modi
BSNL
disinvestment
Public Sector Undertakings

Related Stories

भारत की राष्ट्रीय संपत्तियों का अधिग्रहण कौन कर रहा है?

क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?

28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?

सरकार ने CEL को बेचने की कोशिशों पर लगाया ब्रेक, लेकिन कर्मचारियों का संघर्ष जारी

सीईएल कर्मचारियों का निजीकरण के ख़िलाफ़ संघर्ष जारी, सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल!

बैंक निजीकरण, नोटबंदी से भी बड़ी मूर्खता होगी

क्यों कर रहे हैं बैंक, LIC कर्मचारी हड़ताल?

बैंक और बीमा उद्योग के निजीकरण के ख़िलाफ़ कर्मचारियों का हड़ताल का ऐलान

बजट-2021-22: संकट के बीच लंबी-लंबी डींगे

बजट 2021 : विनिवेश पर ज़ोर से नाराज़ हुए सरकारी कर्मचारी; आंदोलन तीव्र होगा


बाकी खबरें

  • Job
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सरकार जी का बर्थ-डे और एक और नया ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’
    19 Sep 2021
    वैसे सरकार जी रिकॉर्ड बनाते ही रहते हैं। इतने बनाते हैं कि उसकी, रिकॉर्ड बनाने की गिनती भी मुश्किल है। सरकार जी द्वारा रिकॉर्ड बनाने का भी कोई रिकॉर्ड बन ही गया होगा।
  • jammu and kashmir
    अब्बास रतहर
    जम्मू-कश्मीर : जहाँ जम्हूरियत का मतलब डीडीसी सदस्यों को 'क़ैद' करना है
    19 Sep 2021
    जम्मू-कश्मीर की जनता ने हिम्मत दिखा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया था, मगर चुने हुए सदस्यों की आवाजाही पर रोक लगने की वजह से उनके लिए काम करना मुश्किल हो रहा है।
  • Nature
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 3 भोजपुरी ग़ज़लें
    19 Sep 2021
    भोजपुरी में बेहद उम्दा कलाम लिखा जा रहा है। इस बात की तस्दीक़ करने का ज़िम्मा हम पाठकों पर छोड़ते हैं। इतवार की कविता में आज पढ़िये शायर इरशाद ख़ान सिकंदर की 3 भोजपुरी ग़ज़लें।
  • Sarcasm
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: जन्मदिन हो तो मोदी जी जैसा, वर्ना ना हो...
    18 Sep 2021
    टीका तो अब लगा है। टीका लगना वह है, जो मोदी जी के बर्थडे पर सारी दुनिया ने देखा और इंडिया ने दिखाया। बिना बर्थ डे वाले दिनों से पूरे तीन गुने ज्यादा टीके, बर्थडे पर लगे।
  • Winning was Difficult Under Captain
    न्यूज़क्लिक टीम
    कैप्टन के रहते जीतना कठिन था पर अब कांग्रेस को जितायेगा कौन?
    18 Sep 2021
    बीते कुछ समय से कांग्रेस के 'प्रथम परिवार' में अमरिन्दर सिंह को लेकर गहरे मतभेद थे. बताते हैं कि राहुल और प्रियंका गांधी ने विधायकों की नाराजगी के चलते अमरिन्दर सिंह को पद से हटाने के विचार का समर्थन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License