NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
समाज
भारत
राजनीति
सामाजिक विकास के 'गुजरात मॉडल' में दलित कहां हैं?
गुजरात के मेहसाणा जिले के एक गांव में दलित व्यक्ति के अपनी शादी में घोड़ी पर बैठने का खामियाजा पूरे समुदाय को भुगतना पड़ा है। पूरे गांव ने अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के लोगों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है।
अमित सिंह
10 May 2019
dalit atrocity

देश में जब 17वीं लोकसभा के चुनाव पूरे जोर शोर से चल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के आर्थिक मॉडल से लेकर अंतरिक्ष में भारत के सुपर पावर बनने की कहानी दुनिया और देश की जनता को सुना रहे हैं। उनके वादों, नारों, रैलियों, भाषणों और न्यू इंडिया के बखान देश भर के अखबारों में सुर्खियां बन रहे हैं तो उसी वक्त उनके अपने गृहराज्य गुजरात में कुछ और हो रहा है। उसी गुजरात में जहां की तमाम कथाएं गढ़कर मोदी ने दिल्ली की सीढ़ियां चढ़ीं थी। वहां दलितों का सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है। क्योंकि एक दलित युवक अपनी शादी में घोड़े पर सवार होकर गया था। 

 पुलिस के अनुसार गुजरात के मेहसाणा जिले के कडी तालुका के लोर गांव के अगड़ी जाति के लोग दलित दूल्हे के घोड़ी चढ़ने के कदम से कथित रूप से नाखुश थे। घटना मंगलवार की है। गांव के सरपंच विनूजी ठाकोर ने गांव के अन्य नेताओं के साथ फरमान जारी कर गांववालों को दलित समुदाय के लोगों का बहिष्कार करने को कहा। 

 पुलिस उपाधीक्षक मंजीत वंजारा ने बताया, 'गांव के कुछ प्रमुख ग्रामीणों ने दलितों के सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की। इसके अलावा समुदाय के लोगों से बात करने या उनके साथ किसी तरह का मेलजोल रखने वालों पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाए जाने की भी घोषणा की गई थी।' 

 हालांकि मामले के बाहर आने के बाद पुलिस ने गांव के सरपंच विनूजी ठाकोर को गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा चार अन्य के खिलाफ भी अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार रोकथाम अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किया गया है।

 वैसे यह गुजरात में दलितों पर हो रहे अत्याचार का इकलौता उदाहरण नहीं है। हम यह कह सकते हैं कि राज्य में उनके साथ हो रहे भेदभाव में एक और किस्सा जुड़ गया है। अमूमन हर कुछ दिन पर गुजरात से दलितों के साथ होने वाले अत्याचारों की ऐसी अमानवीय कहानी सामने आती रहती है।

 इसी साल मार्च में गुजरात के पाटन जिले की चाणस्मा तालुका में एक 17 वर्षीय दलित युवक को पेड़ से बांधकर पीटने का मामला सामने आया था। इससे पहले पिछले साल गांधीनगर के मनसा तालुका के परसा गांव में घोड़ी पर सवार दलित दूल्हे की बारात को रोक दिया गया था। 

 इससे पहले गुजरात के अहमदाबाद जिले के एक पंचायत के दफ्तर में कुर्सी पर बैठने को लेकर भीड़ ने एक दलित महिला पर कथित रूप से हमला किया था। इससे पहले साबरकांठा ज़िले में मूंछ रखने पर दलित युवक की पिटाई कर दी गई थी।  

 गुजरात में दलितों की स्थिति

 दलितों पर अत्याचार के मामलों में गुजरात पांच सबसे बुरे राज्यों में से एक है। इसी साल मार्च में गुजरात विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में सरकार की ओर से बताया गया है कि साल 2013 और 2017 के बीच अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराधों में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं अनुसूचित जनजातियों के ख़िलाफ़ अपराधों में 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

 गुजरात सरकार की ओर से बताया गया है कि साल 2013 से 2017 के बीच एससी व एसटी एक्ट के तहत कुल 6,185 मामले दर्ज हुए। दी गई जानकारी के अनुसार साल 2013 में 1,147 मामले दर्ज किए गए थे जो 33 फीसदी बढ़कर साल 2017 में 1,515 हो गए।

 पिछले साल मार्च महीने तक दलितों के खिलाफ अपराध के 414 मामले सामने आए जिनमें से सबसे अधिक मामले अहमदाबाद में थे। अहमदाबाद में 49 मामले दर्ज होने के बाद जूनागढ़ में 34 और भावनगर में 25 मामले दर्ज हुए हैं।

 रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराधों में भी तेजी आई है। साल 2013 से 2017 के बीच पांच सालों के दौरान अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराध के मामलों की संख्या 55 फीसदी बढ़कर 1,310 पहुंच गई है। साल 2018 के शुरुआती तीन महीनों में भी एसटी समुदाय के खिलाफ अपराध के 89 मामले दर्ज हुए हैं। इसमें से सबसे अधिक मामले भरूच (14)में दर्ज हुए। भरूच के बाद वडोदरा में 11 व पंचमहल में 10 मामले दर्ज हुए है।

 सरकार का रवैया 

 इन सारी अमानवीय घटनाओं में सरकार का रवैया असंवेदनशील नजर आता है। आखिर कथित बड़े बांधों, फ्लाईओवरों और विदेशी निवेश की बिना पर गुजरात को देश का सबसे उन्नत राज्य और उसके आर्थिक मॉडल को सर्वश्रेष्ठ बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामाजिक असमानता व अमानवीयता का पता देने वाली ऐसी घटनाओं पर शर्मिंदा क्यों नहीं होते हैं? 

 चुनाव के इस शोर शराबे के बीच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात की सरकार से सवाल और भी हैं। आखिर गुजरात में क्यों लगातार ऐसी परिस्थितियां निर्मित की जाती रही, जिनके चलते दलितों पर हाथ उठाना ‘सबसे आसान’ बना रहे? 

 हालांकि पूरे देश से दलित उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़े हैं, लेकिन उसके प्रति भी मोदी सरकार ही जवाबदेह है। अभी उत्तराखंड केटिहरी के जौनपुर विकास खंड के बसाण गांव के 23 साल के जितेंद्र दास की हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि एक शादी समारोह में वह सवर्णों के सामने कुर्सी पर बैठकर खाना खा रहा था। यहां भी डबल इंजन यानी बीजेपी की सरकार है। इसलिए ये पूछना ज़रूरी है ख़ासकर गुजरात के संदर्भ में कि लंबे समय से राज्य की सत्ता पर काबिज बीजेपी सरकार आखिर क्यों लोकतांत्रिक मूल्यों को सामाजिक चेतना का हिस्सा नहीं बनाती? असंवैधानिक करार दिये जाने के बावजूद छुआछूत के प्रति सिस्टम आज तक ‘सहिष्णु’ क्यों बना हुआ है?

 अब यह तो कोई बताने की बात ही नहीं कि इतनी बड़ी आबादी को हर तरह के भेदभाव, अपमान और अमानवीयता के हवाले किए रखकर देश न विकास के लक्ष्य प्राप्त कर सकता है और न ही सभ्यता व संस्कृति के। लेकिन शायद गुजरात के नेताओं को ये बात समझ में नहीं आती है। इस पर सवाल यही है कि सामाजिक विकास के 'गुजरात मॉडल' में दलित कहां हैं?

 

Dalit atrocities
dalit atrocities in gujrat
Dalit movement
mesana dalit atrocity
Gujrat model
gujraat model
una
genral election 2019

Related Stories

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

न्याय के लिए दलित महिलाओं ने खटखटाया राजधानी का दरवाज़ा

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

यूपी: बेहतर कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर उठते सवाल!, दलित-नाबालिग बहनों का शव तालाब में मिला

सिर्फ बलरामपुर ही नहीं, हाथरस के बाद कई और दुष्कर्म, NHRC ने योगी सरकार को भेजा नोटिस

हाथरस की दलित बेटी को क्या न्याय मिल सकेगा?

राजस्थान : दलित युवको के साथ अमानवीय हिंसा, पांच गिरफ्तार

जंतर-मंतर: दलित बच्चों की हत्या के विरोध में प्रदर्शन

दो दलित बच्चों की हत्या के बाद सन्नाटे में भावखेड़ी,  कई अनसुलझे सवाल

डॉ. पायल तड़वी का सुसाइड नोट मिला, हुआ था जातिगत उत्पीड़न  


बाकी खबरें

  • Banaras
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव : बनारस में कौन हैं मोदी को चुनौती देने वाले महंत?
    28 Feb 2022
    बनारस के संकटमोचन मंदिर के महंत पंडित विश्वम्भर नाथ मिश्र बीएचयू IIT के सीनियर प्रोफेसर और गंगा निर्मलीकरण के सबसे पुराने योद्धा हैं। प्रो. मिश्र उस मंदिर के महंत हैं जिसकी स्थापना खुद तुलसीदास ने…
  • Abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    दबंग राजा भैया के खिलाफ FIR ! सपा कार्यकर्ताओं के तेवर सख्त !
    28 Feb 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार Abhisar Sharma Ukraine में फसे '15,000 भारतीय मेडिकल छात्रों को वापस लाने की सियासत में जुटे प्रधानमंत्री' के विषय पर चर्चा कर रहे है। उसके साथ ही वह…
  • रवि शंकर दुबे
    यूपी वोटिंग पैटर्न: ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा और शहरों में कम वोटिंग के क्या हैं मायने?
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में अब तक के वोटिंग प्रतिशत ने राजनीतिक विश्लेषकों को उलझा कर रख दिया है, शहरों में कम तो ग्रामीण इलाकों में अधिक वोटिंग ने पेच फंसा दिया है, जबकि पिछले दो चुनावों का वोटिंग ट्रेंड एक…
  • banaras
    सतीश भारतीय
    यूपी चुनाव: कैसा है बनारस का माहौल?
    28 Feb 2022
    बनारस का रुझान कमल खिलाने की तरफ है या साइकिल की रफ्तार तेज करने की तरफ?
  • एस एन साहू 
    उत्तरप्रदेश में चुनाव पूरब की ओर बढ़ने के साथ भाजपा की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं 
    28 Feb 2022
    क्या भाजपा को देर से इस बात का अहसास हो रहा है कि उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहीं अधिक पिछड़े वर्ग के समर्थन की जरूरत है, जिन्होंने अपनी जातिगत पहचान का दांव खेला था?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License