NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सेना के नाम पर राजनीति! सभी विश्वविद्यालयों में 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक दिवस मनाने का आदेश
यूजीसी ने सैन्य बलों के प्रति संवेदना पैदा करने के नाम पर सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें 29 सितम्बर को
सर्जिकल स्ट्राइक दिवस के तौर पर मनाते हुए कार्यक्रम करने का आदेश दिया गया है।
अजय कुमार
21 Sep 2018
यूजीसी का सर्कुलर

हिन्दुस्तान एक ऐसे दौर में चल रहा है, जहां नफरत के जरिये राष्ट्रभक्ति पैदा करने का धंधा चलाया जा रहा है। इस धंधे में सबसे अधिक दुखद बात यह है कि इसके लिए विश्वविद्यालयों को माध्यम बनाया जा रहा है। जिनका मकसद चाहे कुछ भी हो लेकिन नफरत पैदा करना नहीं हो सकता। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने सैन्य बलों के प्रति संवेदना पैदा करने के नाम पर सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर की विषयवस्तु है कि भारत सरकार ने सितम्बर 29 को सर्जिकल स्ट्राइक दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया है। इस फैसले को उचित मानते हुए सारे विश्वविद्यालयों में सर्जिकल स्ट्राइक को उत्सव के तौर पर मनाने के लिए कुछ कार्यक्रम का आयोजन करना चाहिए।

साल 2016 में लाइन ऑफ़ कंट्रोल को पार कर पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ की गयी भारतीय सैन्य बलों की कार्यवाही को सर्जिकल स्ट्राइक कहा जाता है। सैन्य रणनीतिक गलियारे में इस तरह की कार्रवाई को लेकर एक मत नहीं हैं। कुछ कहते हैं कि ऐसी कार्रवाई जरूरी हैं तो कुछ का कहना होता है कि ऐसी कार्रवाइयां जरूरी हो सकती हैं लेकिन उनका हो हल्ला नहीं होना चाहिए। भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के सम्बन्ध में तो ऐसी कार्रवाइयों का  प्रचार बिलकुल नहीं होना चाहिए। भविष्य में इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। दोनों देशों के बिगड़े हुए रिश्ते और बिगड़ते हैं,नफरत और मतान्धता से संचालित होकर शान्ति की कब्र खोदने में लग जाते हैं।

0726695_UGC-Letter-Surgical-Strike-29-09-18-page-001-910x1024.jpg

यूजीसी का सर्कुलर (फोटो : साभार)

 

यूजीसी का सर्कुलर कहता है कि ‘सभी विश्वविद्यालयों की एनसीसी की इकाइयों को 29 सितंबर को विशेष परेड का आयोजन करना चाहिए जिसके बाद एनसीसी के कमांडर सरहद की रक्षा के तौर-तरीकों के बारे में उन्हें संबोधित करें। विश्वविद्यालय सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में छात्रों को संवेदनशील करने के लिए पूर्व सैनिकों को शामिल करके संवाद सत्र का आयोजन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय के छात्र सैन्य बलों की हिम्मत बढ़ाने के लिए पत्र और कार्ड लिखेंगे और शपथ लेंगे। इन पत्रों और कार्डों को देश के सैन्य बलों तक पहुंचा जाएगा और सोशल मीडिया के सहारे इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। और यह सारी कार्रवाइयां इसलिए ताकि विश्वविद्यालय में  सैन्य बलों के प्रति संवेदनशीलता पैदा की जाए। 

यहां यह जानना जरूरी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक दो बड़े युद्ध (1965 और 1971) और एक तीसरा करगिल युद्ध (1999) में हो चुका है, जिसमें भारत को बड़ी जीत भी मिली। 1971 के युद्ध  के परिणाम स्वरूप तो पाकिस्तान के दो टुकड़े भी हो गए और बांग्लादेश का एक नये राष्ट्र के रूप में उदय हुआ। लेकिन इन युद्धों और जीत का भी उत्सव इस तरह कभी स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालयों में नहीं मनाया जाता।  जबकि सर्जिकल स्ट्राइक तो इनके मुकाबले एक बहुत ही छोटी कार्रवाई है। उसके लिए भी ऐसा उत्सव, इस पूरी मंशा पर ही सवाल खड़े कर देता है।

वैचारिक तौर पर ऐसे सर्कुलर विश्वविद्यालय के आधारभूत अर्थ पर ही प्रहार करते हैं। एक विश्वविद्यालय आख़िरकार क्या होता है? कुछ विद्यार्थियों, प्रोफेसरों और किताबों का जमावड़ा या जमघट। ऐसा बिल्कुल नहीं है। एक विश्वविद्यालय की मूल भावना आलोचना और सृजन होती है। जहां दुनिया में मौजूद हर जवाब पर सवाल खड़ा किया जाता है और सवाल-जवाब की अनोखी शैली से सृजन की तरफ बढ़ना सीखा जाता है। इस तरह से सृजन के हर अंश में भावुकता से अधिक तार्किकता का अंश होता है और नफ़रत से अधिक प्रेम का हिस्सा होता है। इसलिए सैन्य बलों के प्रति संवेदनशील बनने की जरूरत इन्हें नहीं होती यह स्वभाविक तौर पर सैन्य बलों के प्रति संवेदनशील होते हैं। इन्हें पता होता है कि मानवीय समाज की सीमाएं हैं। इन सीमाओं से अलगाव करने वाले ढांचे पैदा होते हैं। समूह से लेकर समुदाय और सीमा से लेकर राष्ट्र तक इन्हीं अलगावों की ही उपज होते हैं। जब इन ढांचों के अंदर परेशानियां आती है तो अलगाव के सीमाओं को संभालने के लिए किसी भी तरह बल जैसे कि पुलिस से लेकर सैनिकों की जरूरत होती है और इस जरूरत के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता स्वभाविक तौर पर पनपती है। आसान शब्दों में इसे ऐसे समझिये कि जिन समुदाय के भीतर गरीबी और तंगहाली अधिक होती है,उन समुदायों के हर तरह की ढाँचे पर तनाव पूर्ण हकीकतें हमेशा मौजूद रहती हैं। इसलिए असल सवाल और संवेदना की ऊर्जा तनावपूर्ण हकीकतों को कम करने में होनी चाहिए न कि इस बढ़ाने में। सैन्य बलों के लिए सम्मान स्वभाविक तौर पर जन्मता है और असली हकीकत यही होती है कि किसी एक सैनिक के मरने पर हम खुद को भी दोष देते हैं कि आखिरकार हमने कैसा समाज बनाया है, जिसे नियंत्रित करने के लिए  किसी को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। ऐसे में सैन्य बल और सैन्य बलों द्वारा की गयी कार्रवाइयां दो अलग-अलग चीजें हो जाती है। सैन्य बलों के लिए जाहिर की गयी संवेदना हमें हमारे कामों के लिए समाज में जिम्म्मेदार बनाती है लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक जैसी सैन्य कार्रवाइयों के लिए उत्सव मनाया जाना हमारे भीतर नफरती मतान्धता पैदा करता है। जिसकी हर परिणीति सर्जिकल स्ट्राइक  से लेकर न्यूक्लियर स्ट्राइक में बदल सकने की सम्भावना में मौजूद रहती है। इसलिए विश्वविद्यायलय में देश भी एक सवाल है और देश के सीमा पर देश के सैन्य बलों द्वारा की गयी कार्रवाई भी।

रही बात सर्जिकल स्ट्राइक से राष्ट्रवाद पैदा करने की तो इस आधार पर मौजूदा सरकार की यह राष्ट्रवादी नहीं राष्ट्रविरोधी सोच है। भारत के राष्ट्रवाद का आधार नफरत नहीं है बल्कि प्रेम और अपनापन है। अगर भारत का राष्ट्रवाद नफरत पर टिका होता तो भारत की विविधता अब तक भारत की एकता का नाश कर  चुकी होती। इस सरकार में लिए जा रहे ऐसे फैसलों की वजह से भारत के बुद्धिजीवियों का यह कहना सही लगता है कि इस सरकार के दौर में भारत के सोच विचार की हत्या की जा रही है।

इस सर्कुलर पर मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेड़कर का कहना है कि यह फैसला लाखों छात्रों के सुझाव पर लिया गया है और यह सेना का गौरव बढ़ाने का काम है। उन्होंने सफाई दी कि ये किसी के लिए भी अनिवार्य नहीं किया गया है।

वैसे मंत्री जी से पूछना चाहिए कि लाखों छात्रों का सुझाव सस्ती और गुणवत्तापूर्ण  शिक्षा का भी होता है। लाखों छात्रों का सुझाव शिक्षा के बाद रोजगार का होता है। लाखों छात्रों का सुझाव विश्वविद्यालयों में की जाने वाले गुंडागर्दी को कम किए जाने का भी  होता है। इस सुझाव पर अभी तक बात क्यों नहीं हुई। सेना  में निचले दर्जों के सैनिकों के साथ अमानवीय व्यवहार की खबरें कई बार मीडिया में आ चुकी हैं।  इससे पनपी संवेदना का क्या? क्या इसे सर्जिकल स्ट्राइक के चादर  तले छिपाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है।

UGC
Surgical Strike Day
University
Circular

Related Stories

कॉमन एंट्रेंस टेस्ट से जितने लाभ नहीं, उतनी उसमें ख़ामियाँ हैं  

नेट परीक्षा: सरकार ने दिसंबर-20 और जून-21 चक्र की परीक्षा कराई एक साथ, फ़ेलोशिप दीं सिर्फ़ एक के बराबर 

यूजीसी का फ़रमान, हमें मंज़ूर नहीं, बोले DU के छात्र, शिक्षक

नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 

45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए होगी प्रवेश परीक्षा, 12वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर प्रवेश खत्म

शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी का मसौदा ढांचा अनुसंधान के लिए विनाशकारी साबित होगा

नगालैंड में AFSPA 6 महीने बढ़ा, नफ़रती कालीचरण गिरफ़्तार और अन्य ख़बरें

उत्तराखंड: असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती की शर्तों का विरोध, इंटरव्यू के 100 नंबर पर न हो जाए खेल!

बिहारः विश्वविद्यालयों-कॉलेजों के 25 हज़ार कर्मियों को चार माह से नहीं मिला वेतन, करेंगे आंदोलन

रचनात्मकता और कल्पनाशीलता बनाम ‘बहुविकल्पीय प्रश्न’ आधारित परीक्षा 


बाकी खबरें

  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा
    20 May 2022
    एक तरफ भारत की बहुसंख्यक आबादी बेरोजगारी, महंगाई , पढाई, दवाई और जीवन के बुनियादी जरूरतों से हर रोज जूझ रही है और तभी अचनाक मंदिर मस्जिद का मसला सामने आकर खड़ा हो जाता है। जैसे कि ज्ञानवापी मस्जिद से…
  • अजय सिंह
    ‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार
    20 May 2022
    मौजूदा निज़ामशाही में असहमति और विरोध के लिए जगह लगातार कम, और कम, होती जा रही है। ‘धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना’—यह ऐसा हथियार बन गया है, जिससे कभी भी किसी पर भी वार किया जा सकता है।
  • India ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेता
    20 May 2022
    India Ki Baat के दूसरे एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, भाषा सिंह और अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे हैं ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेताओं की। एक तरफ ज्ञानवापी के नाम…
  • gyanvapi
    न्यूज़क्लिक टीम
    पूजा स्थल कानून होने के बावजूद भी ज्ञानवापी विवाद कैसे?
    20 May 2022
    अचानक मंदिर - मस्जिद विवाद कैसे पैदा हो जाता है? ज्ञानवापी विवाद क्या है?पक्षकारों की मांग क्या है? कानून से लेकर अदालत का इस पर रुख क्या है? पूजा स्थल कानून क्या है? इस कानून के अपवाद क्या है?…
  • भाषा
    उच्चतम न्यायालय ने ज्ञानवापी दिवानी वाद वाराणसी जिला न्यायालय को स्थानांतरित किया
    20 May 2022
    सर्वोच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीश को सीपीसी के आदेश 7 के नियम 11 के तहत, मस्जिद समिति द्वारा दायर आवेदन पर पहले फैसला करने का निर्देश दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License