NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शिक्षा के भगवाकरण की तरफ भाजपा का एक और कदम
बीजेपी की हिंदुत्व के प्रचार में जारी मुहिम में सोमवार को एक और कड़ी जुड़ गयी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 Aug 2017
शिक्षा के भगवाकरण की तरफ भाजपा का एक और कदम

बीजेपी  की हिंदुत्व के प्रचार में जारी मुहिम में सोमवार को एक और कड़ी जुड़ गयी है।  १ अगस्त को बीजेपी ने यूपी में  "सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता २०१७" आयोजित करने का ऐलान किया है जो कि अगस्त में आयोजित होगी। साथ ही उसकी तैयारी के लिए एक बुकलेट भी जारी की गई है । इस बुकलेट को ध्यान से पढ़नें से ये साफ़ नज़र आता है, इसे इतिहास को तोड़ मरोड़कर के पेश करने और हिंदुत्व के प्रचार के लिए लिखा गया है। अगर इस बुकलेट में लिखे कुछ प्रश्न और उत्तर इस प्रकार हैं –

प्रश्न - भारत को हिन्दू राष्ट्र  किसने कहा ? उत्तर  - डॉक्टर केशव  हेडगेवार
प्रश्न - राम जन्म भूमि कहाँ स्थित है?  उत्तर - अयोध्या
प्रचन -  स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में किस धर्म का प्रतिनिधित्व किया ?- उत्तर - हिंदुत्व
प्रश्न -  महाराज सुहेलदेव ने किस मुस्लिम आक्रांटा को गाजर मूली की तरह काट दिया था?  उत्तर - सैय्यद सालार मसूद गाज़ी

अगर सिर्फ इन प्रश्नों और उत्तरों की ही  बात की जाये तो इसमें हिन्दुत्व के प्रचार के साथ,  इतिहास को तोड़ने मरोड़ने की कोशिश भी की गयी है। मसलन विवेकानंद को हिंदुत्व का प्रचारक दिखाना साफ़ तौर पर गलत है, क्योंकि उन्होंने शिकागो  में हिंदुत्व का नहीं बल्कि हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। इसके अलावा इतिहास के  साम्प्रदायीकरण की  कोशिश भी इस बुकलेट में  साफ़ तौर पर की गयी है। इस ७० पेज की बुकलेट मे हेडगेवार, वी डी सावरकर , दीन  दयाल उपाध्याय और बाकी आरएसएस से जुड़े लोगों को नायकों की तरह प्रस्तुत किया गया है।  साथ ही मोदी सरकार की नीतियों  और योगी सरकार की नीतियों के बारे में भी  उल्लेख किया गया है । गौर करने वाली बात ये है की इसमें "फर्स्ट इन इंडिया " के नाम से एक  लिस्ट है , जिसमें भारत के पहले राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति , पहली महिला सीएम  और बाकी लोगों का नाम तो है, पर पहले प्रधानमंत्री का नाम नहीं है। 

यह प्रतियोगिता  26 अगस्त को दीनदयाल उपाध्याय के सौंवे  जन्म दिवस पर यूपी में आयोजित की जाएगी और बीजेपी के स्टेट सेक्रेटरी सुभाष यदुवंश  के अनुसार इसमें करीबन 90,0000 बच्चे हिस्सा लेंगे । मीडिया से बात करते हुए सुभाष यदुवंश नें  कहा  "नयी पीढ़ियों को   इतिहास के उन नायकों और महापुरुषों के बारे में जानना ज़रूरी है , जिनके बारे में उन्हें अब तक बताया नहीं गया है। " उन्होंने ये भी कहा कि " ये तथ्य है कि  आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक संस्थान है।  इस बुकलेट में लिखी गयी सारी बातें  सत्य हैं”.                                                                

इन बातों के ठीक उलट इतिहासकार  ये कहते  रहें हैं, कि 1942  के भारत छोड़ो आंदोलन और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ संघर्ष  में आरएसएस का कोई योगदान नहीं था। वी डी सावरकर के बारे में भी इतिहास बताता है कि उन्होंने 1906 से 1910  के बीच अंग्रेज़ों की खिलाफत तो की पर पकडे जाने और सजा सुनाये जाने के बाद  1911  से 1920 के बीच कई  क्षमा याचिकाओं के अलावा, ब्रिटिश सरकार की तारीफ और उनका साथ देने की बातें तक लिखीं।   उन्हें 1921 में बरी कर दिया गया, जिसके बाद  उन्होंने कभी भी ब्रिटिश हुकूमत की खिलाफत नहीं की । 
 

इस बुकलेट से पहले भी बीजेपी सरकार इतिहास से छेड़ छाड़ की कोशिशें लगातार कर रही है। हल ही में राजस्थान बोर्ड की किताबों में सावरकर को गाँधी से बड़ा नायक दर्शाया गया। इस ही तरह  राजस्थान यूनिवर्सिटी की किताबों में  तथ्यों के विपरीत महाराणा प्रताप को हल्दी घाटी की लड़ाई का विजेता बताया गया है। 
 

इन बातों के साथ ये जोड़ना भी ज़रूरी है, कि कांग्रेस  के शासनकाल में भी कांग्रेस पर इतिहास के कुछ नायकों को ज़्यादा और कुछ को कम दर्शाने के आरोप लगते रहे हैं।  कांग्रेस पर नेहरू गाँधी के परिवार का महिमा मंडन और मज़दूर किसानों के आंदोलनों जैसे , तेहभागा मूवमेंट , तेलंगाना संगर्ष और रॉयल नेवी म्युटिनी को  कमतर दर्शाने के आरोप भी लगें  हैं।  इसमें भगत सिंह के  मार्क्सवादी विचारों को भी इतिहास के पन्नों में उतनी जगह न मिलने के आरोप भी शामिल हैं। इस पूरी स्थिति को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि सत्ता में काबिज़ सरकारें अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए इतिहास से छेड़छाड़ करती रहीं  हैं। पर हाल की सरकार द्वारा की  जा रही इतिहास के साम्प्रदायीकरण की ये कोशिशें, पहले की कोशिशों से ज़्यादा खतरनाक साबित हो सकतीं  है। इसके खिलाफ प्रचार करने की तो ज़रूरत है साथ ही साथ इतिहास को देखने के वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास की भी बहुत ज़रुरत है।

 

भाजपा
प्राथमिक शिक्षा
शिक्षा के भगवाकरण

Related Stories

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी

क्या भाजपा शासित असम में भारतीय नागरिकों से छीनी जा रही है उनकी नागरिकता?

बिहार: सामूहिक बलत्कार के मामले में पुलिस के रैवये पर गंभीर सवाल उठे!


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License