NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
सीरिया के पूर्वी घौटा में क्या हो रहा है?
पूर्वी घौटा से आ रही हवाई हमले की तस्वीर को तार्किक रूप से समझने की ज़रूरत है क्योंकि इसी तरह का अभियान साल 2016 में 'अलेप्पो बचाओ’ के दौरान विदेशी सैन्य हस्तक्षेप करने को लेकर चलाया गया I
वी. अरुण कुमार
02 Mar 2018
सीरिया

तस्वीरों में भावनाओं को फौरन आकर्षित करने की क्षमता होती है और जब संघर्ष के दौरान बमबारी की तस्वीर सामने आती है तो यह दिल को छू जाता है। इसी तरह सीएनएन जैसे 24 घंटे वाले समाचार चैनलों का प्रभाव 'हवाई हमले की तस्वीर' एक विशेष तरीके से सामान्य राजनीतिक राय को प्रभावित कर सकता है। हमने देखा है कि कैसे इस तरह के बयानों का इस्तेमाल सोमालिया से लेकर बाल्कन और इराक तक पश्चिम देशों और पश्चिमी मीडिया द्वारा सैन्य हस्तक्षेप के लिए किया गया था। यूएस के टावरों पर 9/11 के हमले की क्रूर तस्वीरों का इस्तेमाल 2001 में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान पर आक्रमण को सही साबित करने लिए किया गया था। लिबियाई गृहयुद्ध की तस्वीरों ने अमेरिका और नाटो सैनिकों द्वारा 'नो-फ्लाई जोन' के बहाने सत्ता में बदलाव के लिए मार्ग प्रशस्त किया।

पिछले कुछ दिनों से युद्धग्रस्त क्षेत्र सीरिया के पूर्वी घौटा की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया और कई मीडिया समूहों में चलाए जा रहे हैं। मलबे में दबे बच्चे,बच्चों के जिस्म से निकल रहे खून, हवाई हमले में ज़मीनदोज़ हुए घरों से निकल रही महिलाएं और बच्चों की तस्वीर मीडिया और सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं। कई तस्वीरों को बार-बार पोस्ट किया जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्ररवाई के लिए कहा जा रहा है।

पूर्वी घौटा में बच्चों और नागरिकों पर हमले के वायरल की गई कई तस्वीर और वीडियो वास्तव में गाजा में इज़रायल की बमबारी, मोसूल में अमेरिकी के नेतृत्व में आईएसआईएस-विरोधी अभियान या यमन में सऊदी के नेतृत्व में बमबारी की तस्वीर है। ऐसी ही एक वायरल तस्वीर जिसमें एक पिता और उसके बच्चे दोनों ही मलबे से बाहर निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर को पूर्वी घौटा की तस्वीर के रूप में पोस्ट किया गया है। यह तस्वीर वास्तव में मोसूल में हुए 2017 के युद्ध की है।

रूस द्वारा समर्थित सीरियाई सरकार और अमेरिका तथा सऊदी समर्थित विपक्ष के सशस्त्र अभियान दोनों ही के चलते बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत हुई, और अमेरिका के नेतृत्व वाली हवाई हमलों ने मौत की संख्या को और अधिक बढ़ा दिया है।

शुरूआत से ही यह स्पष्ट है कि नागरिकों को ही किसी भी लड़ाई के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। लड़ाई में नागरिकों पर हमला नहीं किया जा सकता है और यह युद्ध के क़ानूनों का भी उल्लंघन है। नागरिकों पर हमला रोकने के लिए युद्ध को रोकने की जरूरत है। और युद्ध रोकने के लिए दुनिया भर के साम्राज्यवादी पश्चिमी हस्तक्षेप को रोकना होगा।

सीरिया पर मीडिया के व्याख्या की बात करें तो सच और झूठ के बीच की जो रेखा है वह बिल्कुल बारीक है। सीरिया में जटिल युद्ध में हर पक्ष के अपने स्वयं के प्रचार तंत्र होते हैं- लेकिन इनमें सबसे ताकतवर वह है जो सीरिया में शासन परिवर्तन पर विचार कर रहा है। 'हमले की तस्वीर' से अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब तथा अन्य देश 'इन हत्याओं को रोकने के लिए निर्णायक कार्रवाई' की मांग कर रहे हैं जिससे एक अन्य हस्तक्षेप की मंशा दिखाई देती है।

पूर्वी घौटा के 'हवाई हमले की तस्वीर' को बारिकी से देखने की ज़रूरत है क्योंकि इसी तरह का अभियान साल 2016 में 'अलेप्पो बचाओ' के दौरान देखा गया था और विदेशी सैन्य हस्तक्षेप की मांग की गई थी।

यद्यपि संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता के बाद सीरिया में 30 दिन का संघर्ष विराम लगाया गया है, पूर्वी घौटा के इन तस्वीरों की प्रामाणिकता के बारे में कई सवाल अनुत्तरित हैं, और व्हाइट हेलमेट- 'सीरियन सिविल डिफेंस' के बारे में भी ऐसा ही है। देश में स्थिति की जटिलता को समझने के लिए ये महत्वपूर्ण है।

पूर्वी घौटा

पूर्वी घौटा दमिश्क के पास एक उपनगरीय इलाक़ा है जो वर्तमान समय में विभिन्न युद्धक, सशस्त्र विपक्षी समूहों के नियंत्रण में है। यह क्षेत्र दमिश्क शहर पर मोर्टार और मिसाइल हमलों को बढ़ाने का केंद्र रहा था, जिसके चलते भारी संख्या में नागरिकों की मौत हुई। क़रीब एक लाख से ज्यादा की आबादी के बीच विभिन्न इस्लामी समूहों से जुड़े हजारों हथियारबंद विद्रोही सीरियाई सरकार से लड़ रहे हैं।

एक सल्फी अनुयायी ज़हरान अल्लाउश की मौत को बाद पूर्वी घौटा में तीन प्रमुख सशस्त्र समूह अपनी ताक़त को मज़बूत करने का प्रयास कर रहा है। जहरान पूर्वी घौटा में "इस्लामी स्वर्ग" स्थापित करना चाहता था। जब कुवैत और सऊदी अरब के सल्फी प्रचारकों ने पूर्वी घौटा में पैसा झोंकना शुरू किया तो वह 2013 में प्रमुख बन गया, सीरियाई विपक्ष के लिए लाखों डॉलर लाए गए। इस क्षेत्र में शक्ति संघर्ष को झोंकते हुए वह 2015 में एक सीरियाई हवाई हमले में मारा गया।

वह जैश अल-इस्लाम (इस्लाम की सेना) का नेता था जो सऊदी अरब और कुवैत द्वारा समर्थित था और इसने सीरियाई सरकार के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी। इस उपनगर में अल-क़ायदा और इससे संबद्ध समूह फयलाक अल रहमा की मौजूदगी है।

जैश अल-इस्लाम और अन्य के अधीन पूर्वी घौटा में अलवाइत मतावलंबियों को संगठित किया जाता रहा और विशेष रूप से उन्हें सीरियाई हवाई हमलों के विरूद्ध मानव ढाल के रूप पिंजरों में ले जाया गया। सशस्त्र समूह का कहना है कि उसने सरकारी हवाई हमलों द्वारा लक्षित क्षेत्रों में लगभग 1,000 पिंजरों को रखा था।

वर्ष 2015 में एक वीडियो सामने आया जिसमें देखा गया कि पूर्वी घौटा में विद्रोही दमिश्क एयरोपोर्ट पर उतर रहे नागरिक विमान पर गोली बरसा कर गिराने का प्रयास कर रहा था।

अगस्त 2013 में पूर्वी घौटा में नर्व गैस की घटनाओं की श्रृंखला ने यूएन की अगुवाई वाली ऑर्गनाइजेशन फॉर प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल विपन (ओपीसीडब्ल्यू) को जांच के लिए प्रेरित किया। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि हमले के लिए कौन ज़िम्मेदार है। सीरियाई विपक्ष और अमेरिका ने सीरिया को हमले के लिए दोषी ठहराया, और सीरियाई सरकार, रूस और सीरिया ने दावा किया कि यह घटना सशस्त्र विपक्ष के रासायनिक भंडारों में विस्फोट के वजह से हुई थी।

पूर्वी घौटा में हाल ही में सीरियाई आक्रमणकारी ने दमिश्क के नज़दीक उग्रवादियों के क़ब्जे वाले इलाके पर कब्जा कर लिया। यहां से मोर्टार और मिसाइल से हमला लगातार किया जा रहा था। रूस से चेतावनी मिलने के कुछ दिन बाद ही कि ये सशस्त्र समूह रासायनिक हमले की तैयारी कर रहे हैं, पूर्वी घौटा से खबर आने लगी कि लोग क्लोरिन गैस के लगातार संपर्क में आने से बीमार हो रहे हैं। फिर से, विश्वसनीय प्रमाण की कमी के बावजूद इस देश में रासायनिक हमले के बहाने पश्चिमी देश द्वारा हस्तक्षेप किया जा चुका है।

व्हाइट हेलमेट – प्रोपगैंडा आर्म?

व्हाइट हेलमेट्स, जिसे सीरियन सिविल डिफेंस के रूप में भी जाना जाता है, 'हवाई हमले की तस्वीर' का केंद्र है, जो पूर्वी घौटा से सैकड़ों तस्वीर और वीडियो भेज रहा है। पश्चिमी दुनिया में एक बहादुर के रूप में बुलाया जाता है, इस संगठन का नाम इसकी पृष्ठभूमि और उद्देश्य से अस्पष्ट है- कई लोग इस्लामी विपक्षी समूहों के एक सैन्य और प्रोपगैंडा आर्म के रूप में इसका दावा करते हैं।

सीरिया और बहरीन में यूके के पूर्व राजदूत पीटर फोर्ड ने विवादित व्हाइट हेलमेट का ज़िक्र करते हुए कहा "एक सामान्य दर्शक यह सोच सकता है कि असद नरक बनाने के लिए सिर्फ नागरिकों पर बमबारी कर रहा था क्योंकि जिहादी तस्वीर से पूरी तरह से ग़ायब है। हक़ीकत में इन तस्वीरों को जिहादियों द्वारा मुहैया कराया गया है।"

व्हाईट हेलमेट का गठन वर्ष 2013 में एक पूर्व ब्रिटिश सेना अधिकारी जेम्स ले मेसुरियर द्वारा किया गया था। इस अधिकारी ने नाटो के हस्तक्षेप के तुरंत बाद कोसोवो में प्रिसटिना सिटी के ख़ुफिया समन्वयक के रूप में काम किया था। आरोप है कि नाटो के हस्तक्षेप के दौरान कोसोव में हज़ारो नागरिकों के ख़िलाफ युद्ध नियमों का उल्लंघन हुआ। मेसुरियर दुबई स्थित एक कंपनी के साथ वर्तमान में एक निजी ठेकेदार है। वह पहले ओलिव ग्रुप में विशेष परियोजनाओं के वाइस प्रेसिडेंट थे। वर्तमान के कोंसटेल्लिस होल्डिंग्स के गठन के लिए ओलिव ग्रुप का ब्लैकवाटर-एकेडमी के साथ विलय हो गया। साल 2014 में मेसुरियर ने अपनी खुद की कंपनी बनाई, मे डे रेस्क्यू व्हाइट हेलमेट्स अभियान के विस्तार के लिए अमेरिका और यूके से उपलब्ध धन का इस्तेमाल करते रहे।

इस व्हाइट हेलमेट ने अमेरिका और अन्य देशों से लाखों डॉलर की भारी राशि प्राप्त की जो सीरियाई संघर्ष में शामिल है और सीरियाई सरकार के ख़िलाफ़ विपक्षी सशस्त्र समूहों का समर्थन करता है। इस संगठन को यूएस स्टेट डिपार्टमेंट की शाखा यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) से कम से कम 23मिलियन डॉलर मिले, यूके सरकार से 29 मिलियन डॉलर (19.7 मिलियन ब्रिटिश पाउंड) और डच सरकार 4.5 मिलियन डॉलर (4 मिलियन यूरो) मिले। फ़्रांस सैन्य उपकरणों की आपूर्ति के साथ ब्रिटेन के बोरिस जॉनसन ने इस संगठन के लिए और 32 मिलियन राशि देने की घोषणा की।

इस संगठन को ब्रिटिश जनसंपर्क कंपनी द्वारा समर्थन दिया जाता है जिसे सीरिया कैंपेन (जो कि लंदन स्थित जन संपर्क कंपनी द्वारा समर्थन किया जाता है जिसे पर्पस कहा जाता है) कहा जाता है। यह समर्थन एक प्रभावशाली ब्रिटिश-सीरियन अरबपति अयमन असफ़री द्वारा किया जाता है।

सशस्त्र विपक्षी समूहों से घिरे क्षेत्रों के भीतर ये व्हाइट हेलमेट विशेष रूप से कार्य करते हैं। सशस्त्र विपक्षी समूह अलकायदा से संबद्ध स्थानीय संगठन जबहात-अल-नुसररा और अन्य चरमपंथी समूहों के साथ मिलकर काम करता है।

पिछले साल मार्च में सीरिया में अल-कायदा के नेतृत्व वाले विद्रोही संगठन के नेता हयात तहरीर अल-शाम को एक विशेष वीडियो संदेश में "क्रांति के छिपे हुए सैनिक" के रूप मेंव्हाइट हेलमेट में दिखाया गया।

एक चौंकाने वाले खुलासे में इस व्हाइट हेलमेट के सदस्यों को 2015 में उत्तरी अलेप्पो के हरेतिन में अल नुसरा द्वारा नागरिकों को मारे जाने में मदद करते हुए देखा गया था।

इस संगठन ने बाद में कहा कि जांच चल रहा है और वे 'दफन' करने में मदद करते हैं। इसके अलावा स्वीडिश की गैर सरकारी संगठन डॉक्टर्स फॉर ह्यूमन राइट्स(एसडब्ल्यूईडीएचआर) ने सीरिया में उसके 'मानवीय कार्य’ के बार में फ़र्जी सूचना को लेकर व्हाइट हेलमेट के सदस्यों को दोषी ठहराया था।

एक अन्य संगठन सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स (एसओएचआर) है जहां से वैश्विक मुख्यधारा की मीडिया सीरिया के बारे में अपने समाचारों का स्रोत बताते हैं। एसओएचआर लंदन स्थित सीरिया से आने वाली सूचनाओं को स्पष्ट करने का केंद्र है जो सत्ता-विरोधी सदस्यों और सशस्त्र विपक्षी समूहों के श्रोत का ज़्यादातर इस्तेमाल कर रहे हैं।

सीरियाई विपक्ष द्वारा 2016 का अलेप्पो बचाओ अभियान

सीरियाई सशस्त्र समूहों ने 2016 के दौरान इसी तरह का मीडिया अभियान चलाया था जो सीरियाई सरकार द्वारा अलेप्पो सैन्य अभियान पर ध्यान केंद्रित कर रहा। तत्कालीन 'अलेप्पो मीडिया सेंटर' मुख्य रूप से फ्रांसीसी सरकार द्वारा वित्त पोषित था। इसने "व्हाईट हेलमेट्स" और सशस्त्र समूहों के साथ मिलकर हवाई हमले की तस्वीर बनाई। अलेप्पो मीडिया सेंटर नो फ्लाई ज़ोन और 'सीरियाई अत्याचारों को रोकने' के लिए अंतरराष्ट्रीय ताक़तों से हस्तक्षेप की मांग करते हुए इस अभियान की अगुवाई कर रहा था।

इस अभियान का चेहरा सात वर्षीय लड़की बाना अल-अबेद थी जो घिरे शहर से रोज़ाना ट्वीट कर रही थी। जो संगठन जिसने अलेप्पो मीडिया सेंटर चलाया था वह अब घौटा मीडिया सेंटर(जीएमसी) चला रहा है और पूर्वी घौटा पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। और इसी तरह नई बाना को पूर्वी घौटा में तैयार किया जा चुका है।

सुरक्षा विश्लेषक और यूके आर्मी के अधिकारी चार्ल्स शोएब्रिज का कहना है कि "हमने अलेप्पो के बारे में ये सब काफी देखा। हमने पश्चिमी मीडिया में भी इसी तरह का कवरेज देखा। अत्याचारों की भविष्यवाणी की जा रही है और इसकी सूचना दी जा रही है और यह पता चला है कि उनमें से ज्यादातर, यदि वे सभी नहीं हैं, तो वास्तव में दुष्प्रचार के दावे हैं। और हम इस स्थिति को फिर से दोबारा देख रहे हैं।"

इन मीडिया अभियानों के बीच पश्चिमी मीडिया का बयान हावी रहा, कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं। अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबंधन के बमबारी में ज़मीनदोज हुए रक्का और मोसुल की तस्वीर आखिर क्यों नहीं थी। और सशस्त्र विपक्षी समूह कहां हैं जिसने बमबारी को लेकर नागरिकों को पिंजरे में रखा था? क्या पूर्वीघौटा के आसपास के वर्तमान अभियान और हवाई हमले की तस्वीर 'मानवतावादी हस्तक्षेप' के तर्क को लेकर दर्शकों को अपनी तरफ खींच रहे है जैसा कि उन्होंने सोमालिया,इराक और लीबिया जैसी जगहों पर किया था?

सीरिया
अमेरिका
वाइट हेल्मेट्स
East Ghouta

Related Stories

तुम हमें हमारे जीवन के साथ समझौता करने के लिए क्यों कह रहे हो?

क्या बंदूक़धारी हमारे ग्रह को साँस लेने देंगे

क्लाइमेट फाइनेंस: कहीं खोखला ना रह जाए जलवायु सम्मेलन का सारा तामझाम!

COP26 के एलानों पर ताली बजाने से पहले जलवायु संकट की कहानी जान लीजिए!

अमेरिका और सऊदी अरब के खिलाफ यमन में हज़ारों लोग सडकों पर उतरे

अयोध्या विवाद पर श्री श्री रविशंकर के बयान के निहितार्थ

राष्ट्रीय वार्ता की सीरियाई कांग्रेस संवैधानिक समिति के गठन के लिए सहमत हैं

इज़रायल का ख़ूनी और अमानवीय अतीत

उत्तर कोरिया और अमेरिका : परमाणु युद्ध का बढ़ता खतरा ?

क्रांतिकारी चे ग्वेरा को याद करते हुए


बाकी खबरें

  • tikoniya
    लाल बहादुर सिंह
    मोदी भारी राजनीतिक कीमत चुका कर ही अब अजय मिश्रा टेनी को मंत्री बनाये रख सकते हैं
    12 Oct 2021
    आज अंतिम अरदास के मौके पर पूरा देश लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों को श्रद्धांजलि दे रहा है तथा घटनास्थल तिकोनिया में पूरे देश से आये किसानों का विराट संगम हो रहा है।
  • New Service Rules in Jammu and Kashmir
    डॉ राधा कुमार
    ज़ुल्म के दरवाज़े खोलते जम्मू-कश्मीर के नये सेवा नियम
    12 Oct 2021
    बर्ख़ास्त किये गये ज़्यादातर लोगों के ख़िलाफ़ जो आरोप क़ायम किये गये हैं, वे गंभीर हैं, लेकिन चूंकि आम लोगों के सामने इसे लेकर कोई सबूत नहीं रखा गया है, इसलिए यह साफ़ नहीं है कि इन आरोपों में दम है…
  • facebook
    प्रबीर पुरकायस्थ
    एक व्हिसलब्लोअर की जुबानी: फेसबुक का एल्गोरिद्म कैसे नफ़रती और ज़हरीली सामग्री को बढ़ावा देता है
    12 Oct 2021
    बेशक, यह सवाल पूछा जा सकता है कि जब फेसबुक के सिलसिले में ये सभी सवाल पहले भी उठाए जाते रहे हैं, तो इसमें नया क्या है। इस सब में बड़ी खबर यह है कि अब हमारे पास इसके सबूत हैं कि फेसबुक को इसकी पूरी…
  • Fb
    सोनाली कोल्हटकर
    समझिए कैसे फ़ेसबुक का मुनाफ़ा झूठ और नफ़रत पर आधारित है
    12 Oct 2021
    फ़ेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ़्रांसेस हौगेन द्वारा किए गए खुलासों से पता चलता है कि दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अच्छी तरह जानता है कि उसके प्लेटफॉर्म का समाज पर किस तरह नकारात्मक प्रभाव…
  • attack on dalit
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या, तमिलनाडु में चाकू से हमला कर ली जान
    12 Oct 2021
    दलित समाज के लोगों पर हमलों की घटना लगातार सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां राजस्थान के हुनुमानगढ़ जिले में दलित युवक जगदीश की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वहीं तमिलनाडु के तंजावुर में दलित युवक प्रभाकरण की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License