NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
सिर्फ़ कश्मीर नहीं, यह समूचा देश तुम्हारा हो...
आज कश्मीर के मसले पर और सरहद के तनाव पर हम आपके बीच दो महत्वपूर्ण कवितायें साझा कर रहे हैं।
न्यूज़क्लिक टीम
07 Aug 2019
कश्मीर

कश्मीर के हालात ख़राब हैं, यूँ ख़राब हैं कि उनकी किसी को ख़बर ही नहीं है। देश भर में अनुच्छेद 370 को हटा देने के "साहसिक" क़दम का जश्न तो मनाया जा रहा है, लेकिन जिस कश्मीरी अवाम के नाम पर ये सब हो रहा है, उसकी किसी को सुध नहीं है।

कविता के बारे में कहा जाता है कि जब सारी तदबीरें उल्टी हो जाती हैं, तब कविता ही दवा का काम करती है। आज, कश्मीर के मसले पर और सरहद के तनाव पर हम आपके बीच युवा कवि पराग पावन और विहाग वैभव की कवितायें साझा कर रहे हैं :

सिर्फ़ कश्मीर नहीं

सिर्फ़ कश्मीर नहीं
यह समूचा देश तुम्हारा हो
लेकिन क्या क़यामत है दोस्त!
तुम्हारी देह इतनी छोटी है
कि मात्र एक बिस्तर भर सो पाओगे
तुम्हारी थकान अदद एक पेड़ की छाया में सिमट जाएगी
तुम्हारी भूख दो आलू के मुक़ाबले भी बौनी है
और सारी ज़िन्दगी चलकर भी
तुम्हारी प्यास अपना ही कुँआ लाँघ नहीं पाएगी

क्या आख़िरी आदमी के क़त्ल होने के बाद ही
तुम समझ पाओगे
कि तुम्हारे पास भी एक गर्दन है
क्या आख़िरी आदमी के क़त्ल होने के बाद ही
तुम महसूस कर पाओगे
कि निर्जन धरती पर अकेले चीखते व्यक्ति की
वह प्रार्थना भी अनसुनी रह जायेगी
जिसमें मृत्यु की भीख माँगी जाती है

जो धरती को जीतने निकले थे
धरती उन्हें भी जीतकर चुपचाप सो रही है
जहाँ तुम खड़े हो
वहीं दबी किसी सिकन्दर की राख से
मेरे कहे की तसदीक़ करो

ये सरहदों के उलझे मसअले उनकी तलब हैं
जो झरते हुए कनेर के उत्सव से
बहुत दूर चले गए हैं
और जिनके दिल के शब्दकोश से
प्रेम और करुणा जैसे शब्द
कब का विदा ले चुके हैं

सिर्फ़ कश्मीर नहीं
समूचे देश को अपनी जेब में रखकर घूमने वाले दोस्त!
सरकारी जश्न से फ़ुर्सत मिले तब सोचकर बताना
कि मामूली इंजेक्शन के अभाव में
मर गए पिता की याद को
किस ख़लीते में छुपाओगे?

- पराग पावन
(पराग जेएनयू के शोध छात्र हैं।) 

चाय पर शत्रु-सैनिक

उस शाम हमारे बीच किसी युद्ध का रिश्ता नहीं था

मैंने उसे पुकार दिया-
आओ भीतर चले आओ बेधड़क
अपनी बंदूक और असलहे वहीं बाहर रख दो
आस-पड़ोस के बच्चे खेलेंगें उससे
यह बंदूकों के भविष्य के लिए अच्छा होगा

वह एक बहादुर सैनिक की तरह
मेरे सामने की कुर्सी पर आ बैठा
और मेरे आग्रह पर होंठों को चाय का स्वाद भेंट किया

मैंनें कहा-
कहो कहाँ से शुरुआत करें?

उसने एक गहरी साँस ली, जैसे वह बेहद थका हुआ हो
और बोला- उसके बारे में कुछ बताओ

मैंनें उसके चेहरे पर एक भय लटका हुआ पाया
पर नज़रअंदाज़ किया और बोला-

उसका नाम समसारा है
उसकी बातें मज़बूत इरादों से भरी होती हैं
उसकी आँखों में महान करुणा का अथाह जल छलकता रहता है
जब भी मैं उसे देखता हूँ
मुझे अपने पेशे से घृणा होने लगती है

वह ज़िंदगी के हर लम्हे में इतनी मुलायम होती है कि
जब भी धूप भरे छत पर वह निकल जाती है नंगे पाँव
तो सूरज को गुदगुदी होने लगती है
धूप खिलखिलाने लगता है
वह दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत पत्नियों में से एक है

मैंनें उससे पलट पूछा
और तुम्हारी अपनी के बारे में कुछ बताओ...
वह अचकचा सा गया और उदास भी हुआ
उसने कुछ शब्दों को जोड़ने की कोशिश की-

मैं उसका नाम नहीं लेना चाहता
वह बेहद बेहूदा औरत है और बदचलन भी
जीवन का दूसरा युद्ध जीतकर जब मैं घर लौटा था
तब मैंनें पाया कि मैं उसे हार गया हूँ
वह किसी अनजाने मर्द की बाहों में थी
यह दृश्य देखकर मेरे जंग के घाव में अचानक दर्द उठने लगा
मैं हारा हुआ और हताश महसूस करने लगा
मेरी आत्मा किसी अदृश्य आग में झुलसने लगी
युद्ध अचानक मुझे अच्छा लगने लगा था

मैंनें उसके कंधे पर हाथ रखा और और बोला -
नहीं मेरे दुश्मन, ऐसे तो ठीक नहीं है
ऐसे तो वह बदचलन नहीं हो जाती
जैसे तुम्हारे सैनिक होने के लिए युद्ध ज़रूरी है
वैसे ही उसके स्त्री होने के लिए वह अनजाना लड़का

उसने मेरे तर्क के आगे समर्पण कर दिया
और किसी भारी दुख से सिर झुका लिया

मैंनें विषय बदल दिया ताकि उसके सीने में
जो एक ज़हरीली गोली अभी घुसी है
उसका कोई काट मिले-

मैं तो विकल्पहीनता की राह चलते यहाँ पहुँचा
पर तुम सैनिक कैसे बने?
क्या तुम बचपन से देशभक्त थे?

वह इस मुलाक़ात में पहली बार हँसा
मेरे इस देशभक्त वाले प्रश्न पर
और स्मृतियों को टटोलते हुए बोला-

मैं एक रोज़ भूख से बेहाल अपने शहर में भटक रहा था
तभी उधर से कुछ सिपाही गुज़रे
उन्होंने मुझे कुछ अच्छे खाने और पहनने का लालच दिया
और अपने साथ उठा ले गए

उन्होंने मुझे हत्या करने का प्रशिक्षण दिया
हत्यारा बनाया
हमला करने का प्रशिक्षण दिया
आततायी बनाया
उन्होनें बताया कि कैसे मैं तुम्हारे जैसे दुश्मनों का सिर
उनके धड़ से उतार लूँ
पर मेरा मन दया और करुणा से न भरने पाए

उन्होंने मेरे चेहरे पर ख़ून पोत दिया
कहा कि यही तुम्हारी आत्मा का रंग है
मेरे कानों में हृदयविदारक चीख़ भर दी
कहा कि यही तुम्हारे कर्तव्यों की आवाज़ है
मेरी पुतलियों पर टाँग दिया लाशों से पटी युद्ध-भूमि
और कहा कि यही तुम्हारी आँखों का आदर्श दृश्य है
उन्होंने मुझे क्रूर होने में ही मेरे अस्तित्व की जानकारी दी

यह सब कहते हुए वह लगभग रो रहा था
आवाज़ में संयम लाते हुए उसने मुझसे पूछा-
और तुम किसके लिए लड़ते हो?

मैं इस प्रश्न के लिए तैयार नहीं था
पर ख़ुद को स्थिर और मज़बूत करते हुए कहा-

हम दोनों अपने राजा की हवश के लिए लड़ते हैं
हम लड़ते हैं क्यों कि हमें लड़ना ही सिखाया गया है
हम लड़ते हैं कि लड़ना हमारा रोज़गार है

उसने हल्की मुस्कान के साथ मेरी बात को पूरा किया-
दुनिया का हर सैनिक इसी लिए लड़ता है मेरे भाई

वह चाय के लिए शुक्रिया कहते हुए उठा
और दरवाज़े का रुख किया
उसे अपनी बंदूक का ख़याल न रहा
या शायद वह जानबूझकर वहाँ छोड़ गया
बच्चों के खिलौनों के लिए
बंदूकों के भविष्य के लिए

उसने आख़िरी बार मुड़कर देखा तब मैंनें कहा-
मैं तुम्हें कल युद्ध में मार दूँगा
वह मुस्कुराया और जवाब दिया-
यही तो हमें सिखाया गया है।

- विहाग वैभव
(विहाग वैभव भी शोध छात्र हैं। उन्हें इसी कविता के लिए इस साल का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।)

Article 370
KASHMIR ISSUE
Indian govt
Article 370 Scrapped
poems on kashmir
poems on soldiers
kashmiri awaam
kashmir citizens

Related Stories

ख़ास रिपोर्ट: घाटी से लौटे बिहारी कामगारों की कश्मीरियों पर क्या राय है?

'कश्मीरियों की आवाज़ किसी को भी सुनाई नहीं दे रही है'

क्या 'ए' मुझे इस स्वतंत्रता दिवस की शुभकामना देगा?

वनाधिकार क़ानून : अगली सुनवाई 12 सितम्बर को

आशंकाएं, अफवाहें और अलर्ट : यहां से किधर जाएगा कश्मीर?


बाकी खबरें

  • make in india
    बी. सिवरामन
    मोदी का मेक-इन-इंडिया बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा श्रमिकों के शोषण का दूसरा नाम
    07 Jan 2022
    बहुराष्ट्रीय कंपनियों के गिग कार्यकर्ता नई पीढ़ी के श्रमिक कहे जा सकते  हैं, लेकिन वे सीधे संघर्ष में उतरने के मामले में ऑटो व अन्य उच्च तकनीक वाले एमएनसी श्रमिकों से अब टक्कर लेने लगे हैं। 
  • municipal elections
    फर्राह साकिब
    बिहारः नगर निकाय चुनावों में अब राजनीतिक पार्टियां भी होंगी शामिल!
    07 Jan 2022
    ये नई व्यवस्था प्रक्रिया के लगभग अंतिम चरण में है। बिहार सरकार इस प्रस्ताव को विधि विभाग से मंज़ूरी मिलने के पश्चात राज्य मंत्रिपरिषद में लाने की तैयारी में है। सरकार की कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इस…
  • Tigray
    एम. के. भद्रकुमार
    नवउपनिवेशवाद को हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका की याद सता रही है 
    07 Jan 2022
    हिंद महासागर को स्वेज नहर से जोड़ने वाले रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर पर अपने नियंत्रण को स्थापित करने की अमेरिकी रणनीति की पृष्ठभूमि में चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अफ्रीकी यात्रा काफी…
  • Supreme Court
    अजय कुमार
    EWS कोटे की ₹8 लाख की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट को किस तरह के तर्कों का सामना करना पड़ा?
    07 Jan 2022
    आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग को आरक्षण देने के लिए ₹8 लाख की सीमा केवल इस साल की परीक्षा के लिए लागू होगी। मार्च 2022 के तीसरे हफ्ते में आर्थिक तौर पर कमजोर सीमा के लिए निर्धारित क्राइटेरिया की वैधता पर…
  • bulli bai aap
    सना सुल्तान
    विचार: शाहीन बाग़ से डरकर रचा गया सुल्लीडील... बुल्लीडील
    07 Jan 2022
    "इन साज़िशों से मुस्लिम औरतें ख़ासतौर से हम जैसी नौजवान लड़कियां ख़ौफ़ज़दा नहीं हुईं हैं, बल्कि हमारी आवाज़ और बुलंद हुई है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License