NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
संसद सत्रः बीजेपी सरकार कई विवादित बिल पेश करेगी
राज्यसभा में लंबित 55 में से 22 विधेयकों की वैधता 16वीं लोकसभा के भंग होने के साथ समाप्त हो गई है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Jun 2019
संसद सत्रः बीजेपी सरकार कई विवादित बिल पेश करेगी

17वीं लोकसभा के गठन के बाद चल रहे संसद के पहले सत्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार के पास कई ऐसे विवादास्पद बिल हैं जिन्हें पेश करना है, चर्चा करनी है और पारित कराना है।

ज्ञात हो कि केंद्रीय बजट 5 जुलाई को पेश किया जाना है और ये सत्र 26 जुलाई तक चलेगा।

विपक्षी दलों द्वारा किए गए विरोध के बीच केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मुस्लिम महिला (विवाह के संबंध में अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2019 पेश किया जिसमें लिखित या इलेक्ट्रॉनिक रूप में दिए गए ट्रिपल तलाक़ को अवैध घोषित किया गया। ये विधेयक अध्यादेश का स्थान लेगा।

इस सत्र में वेतन विधेयक, 2019 पेश किया जाएगा जिसमें न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948, मज़दूरी भुगतान अधिनियम, 1936, बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 तथा समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 शामिल होंगे। वेतन विधेयक पारित होने के बाद ये सभी अधिनियम एक क़ानून के दायरे में आ जाएंगे। ट्रेड यूनियनों ने वेतन विधेयक का विरोध किया है क्योंकि यह मज़दूर-विरोधी और उद्योगपतियों का समर्थक है। यूनियनों ने इसे श्रमिकों के हितों में सबसे ज़्यादा हानि पहुँचाने वाला कहा है।

निचले सदन अर्थात लोकसभा में केंद्र सरकार का बहुमत (543 में से 353 सदस्य) है लेकिन राज्यसभा में समर्थन के लिए विपक्ष पर निर्भर रहना पड़ेगा। राज्य सभा में लंबित 55 विधेयकों में से 22 विधेयक 16 वीं लोकसभा के भंग होने के साथ अवैध हो गए हैं।

लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2019 को फिर से पेश किए जाने की संभावना है। सरकार का दावा है कि ये विधेयक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करता है और उनका कल्याण करता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रस्तावित क़ानून हिंसा, रोज़गार, शिक्षा और आरक्षण जैसे प्रमुख मुद्दों पर मौन है।

लोकसभा और राज्यसभा के बुलेटिनों के अनुसार इस सत्र में राज्यसभा में चर्चा करने तथा पारित करने के लिए सूचीबद्ध दो बिल हैं। इनमें द अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफ़ेशन्स बिल, 2018, जिसमें अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स की शिक्षा तथा कार्य को विनियमित और मानकीकृत करने का प्रावधान है तथा सिनेमैटोग्राफ़ (संशोधन) बिल, 2019 जिसमें फ़िल्म की अनधिकृत रिकॉर्डिंग को अवैध करने का प्रावधान है, शामिल हैं। इस सत्र के दौरान 40 नए बिल संसद में पेश करने, चर्चा करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध हैं।

लोकसभा में पेश किए गए अन्य विधेयक (या पेश किया जाना है) जो अध्यादेशों का स्थान लेगा उनमें आधार तथा अन्य क़ानून (संशोधन) विधेयक, 2019, जम्मू तथा कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019, नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक, 2019 शामिल हैं। इन विधेयकों में होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2019, भारतीय चिकित्सा परिषद (संशोधन) विधेयक, 2019 और केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (शिक्षक संवर्ग में आरक्षण) विधेयक, 2019 शामिल हैं।

21 जून को राज्यसभा सांसदों ने कई निजी बिल पेश किए हैं जिसमें विज़ुअली इम्पेयर्ड पर्सन्स (अधिकारों का संरक्षण) बिल, 2019 , द होली सिटी ऑफ़ काशी (सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण) विधेयक, 2019; जनप्रतिनिधि (संशोधन) विधेयक, 2019; संविधान (संशोधन) विधेयक, 2018 (अनुच्छेद 85 का संशोधन); संविधान (संशोधन) विधेयक, 2018 (अनुच्छेद 15 का संशोधन); और फ़ॉरेन इन्वेस्टमेंट इन फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़, क्रिटिकल इंफ़्रास्ट्रक्चर एंड टेक्नोलॉजी अफ़ेक्टिंग नेशनल सिक्योरिटी (रेगुलेशन) बिल, 2018 शामिल हैं।

(पीआरएस विधायी शोध से इनपुट के साथ।)

Parliament session
17th Lok Sabha
Aadhar
Labour Code
triple talaq
transgender
budget

Related Stories

कार्टून क्लिक: भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ...

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

केरल में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत लगभग सभी संस्थान बंद रहे

"जनता और देश को बचाने" के संकल्प के साथ मज़दूर-वर्ग का यह लड़ाकू तेवर हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ है

राजस्थान ने किया शहरी रोज़गार गारंटी योजना का ऐलान- क्या केंद्र सुन रहा है?

महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  

5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल

मोदी जी, क्या आपने मुस्लिम महिलाओं से इसी सुरक्षा का वादा किया था?


बाकी खबरें

  • sudan
    पीपल्स डिस्पैच
    सूडान: सैन्य तख़्तापलट के ख़िलाफ़ 18वें देश्वयापी आंदोलन में 2 की मौत, 172 घायल
    17 Feb 2022
    इजिप्ट इस तख़्तापलट में सैन्य शासन का समर्थन कर रहा है। ऐसे में नागरिक प्रतिरोधक समितियों ने दोनों देशों की सीमाओं पर कम से कम 15 जगह बैरिकेडिंग की है, ताकि व्यापार रोका जा सके।
  • muslim
    नीलांजन मुखोपाध्याय
    मोदी जी, क्या आपने मुस्लिम महिलाओं से इसी सुरक्षा का वादा किया था?
    17 Feb 2022
    तीन तलाक के बारे में ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना, तब, जब मुस्लिम महिलाओं को उनकी पारंपरिक पोशाक के एक हिस्से को सार्वजनिक चकाचौंध में उतारने पर मजबूर किया जा रहा है, यह न केवल लिंग, बल्कि धार्मिक पहचान पर भी…
  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब चुनाव में दलित-फैक्टर, सबको याद आये रैदास
    16 Feb 2022
    पंजाब के चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी सहित सभी पार्टियों के शीर्ष नेता बुधवार को संत रैदास के स्मृति स्थलों पर देखे गये. रैदास को चुनावी माहौल में याद करना जरूरी लगा क्योंकि पंजाब में 32 फीसदी…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: मोदी की ‘आएंगे तो योगी ही’ से अलग नितिन गडकरी की लाइन
    16 Feb 2022
    अभी तय नहीं कौन आएंगे और कौन जाएंगे लेकिन ‘आएंगे तो योगी ही’ के नारों से लबरेज़ योगी और यूपी बीजेपी के समर्थकों को कहीं निराश न होना पड़ा जाए, क्योंकि नितिन गडकरी के बयान ने कई कयासों को जन्म दे दिया…
  • press freedom
    कृष्ण सिंह
    ‘दिशा-निर्देश 2022’: पत्रकारों की स्वतंत्र आवाज़ को दबाने का नया हथियार!
    16 Feb 2022
    दरअसल जो शर्तें पीआईबी मान्यता के लिए जोड़ी गई हैं वे भारतीय मीडिया पर दूरगामी असर डालने वाली हैं। यह सिर्फ किसी पत्रकार की मान्यता स्थगित और रद्द होने तक ही सीमित नहीं रहने वाला, यह मीडिया में हर उस…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License