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संत रविदास मंदिर पर बवाल का ज़िम्मेदार कौन?
मंदिर को फिर से उसी जगह बनाए जाने की मांग के साथ भीम आर्मी फिर से एक बार प्रदर्शन की तैयारी में है। भीम आर्मी के सदस्य नीतू गौतम ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा कि गिरफ़्तारी का पूरा मामला साज़िश पूर्ण था। पुलिस ने पहले हमें गुमराह किया फिर खुद लाठीचार्ज कर लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। जिसके बाद चंद्रशेखर आजाद समेत 96 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया।
सोनिया यादव
03 Sep 2019
ravidas temple
Image courtesy: National Herald

एक ओर जहां अयोध्या राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है,तो वहीं संत रविदास मंदिर का मुद्दा सड़कों पर दिन-प्रतिदिन गर्माता जा रहा है। दलित समाज का आरोप है कि सरकार उनके साथ भेेद-भाव कर रही है। मंदिर को फिर से उसी जगह बनाए जाने की मांग के साथ भीम आर्मी फिर से एक बार प्रदर्शन की तैयारी में है। इस महीने की 15 तारीख़ को होने वाले इस प्रदर्शन की खास बात ये है कि इसे मुस्लिम समाज का प्रतिनिधित्व करने वालों का भी समर्थन प्राप्त है।

सोमवार 2 सितंबर को दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न मुस्लिम धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने इस मंदिर और भीम आर्मी को अपना समर्थन देने का एलान किया। इस मामले में मंदिर फिर बनाए जाने वालों का पक्ष कोर्ट में रख रहे वकील महमूद पार्चा ने कहा, ‘रविदास मंदिर गिराए जाने से मुस्लिम समुदाय बहुत दुखी है और दलित समुदाय के हमारे भाईयों को इससे जो चोट पहुंची है उसके दर्द को समझता है।’

उन्होंने कहा कि मंदिर उसी जगह पर बनाए जाने को लेकर 22 अगस्त को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आज़ाद को फर्जी आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें ही नहीं, बल्कि प्रदर्शन में शामिल अन्य 95 लोगों को भी फर्जी आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया। पार्चा के अलावा वहां मौजूद अन्य मुस्लिम नेताओं ने भीम आर्मी के मुखिया आज़ाद समेत बाकियों की बिना शर्त रिहाई की मांग की। ऐसा नहीं होने पर 15 सितंबर को जनांदोलन करने की भी बात कही।

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वहीं दूसरी ओर संत रविदास का मंदिर तुगलकाबाद में फिर से बनवाने की मांग को लेकर रविदास समुदाय के लोग 30 अगस्त से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। धरनारत लोगों ने सरकार को चेतावनी दी है कि पांच सितंबर तक मंदिर की जमीन न सौंपी गई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

इस संबंध में गुरु रविदास मंदिर ट्रस्ट दिल्ली के महामंत्री गोपालकृष्ण ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए ये सवाल किया कि संत रविदास का मंदिर आखिर क्यों गिराया गया। वे पूछते हैं कि क्या, ‘राम मंदिर को कोई शिफ्ट करना चाहेगा क्या? यूपी सरकार के पास ज़मीन की कमी है क्या? वो जहां मर्ज़ी चाहे मंदिर बनवा सकते हैं लेकिन वहीं क्यों बनवा रहे हैं?

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली विकास प्राधिकरण ने 10 अगस्त को तुगलकाबाद स्थित संत रविदास का मंदिर ढाह दिया था। इस मामले को लेकर रविदास समाज का विरोध दिल्ली, पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश तक देखने को मिला। 21 अगस्त को दिल्ली में हुए विशाल विरोध प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद समेत96 लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जिसके बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों पर दंगा फैलाने, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी करने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप हैं।

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इस पूरे प्रकरण पर भीम आर्मी के सदस्य नीतू गौतम ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा कि गिरफ्तारी का पूरा मामला साज़िश पूर्ण था। पुलिस ने पहले हमें गुमराह किया फिर खुद लाठीचार्ज कर लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। जिसके बाद चंद्रशेखर आजाद समेत 96 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया।

उन्होंने आगे बताया, ‘हमारा प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। चंद्रशेखर आजाद समेत जो रविदास अनुयायी थे वे बस मंदिर स्थल पर माथा टेकना चाहते थे, जिसके लिए पुलिस प्रशासन ने दिल्ली से रूट डाइवर्ट कर हमें 30 किलोमीटर पैदल चलाया। पूरे रास्ते में कोई बवाल नहीं हुआ, कोई अनुशासनहिनता नहीं हुई। इसके बाद वहां पहुंचते ही लोगों का घेराव कर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। जिसके बाद लोगों के बीच भगदड़ मच गई।ये सब पुलिस की सोची समझी साजिश थी'।

हालांकि पुलिस का दावा है कि अशांत भीड़ ने बार-बार दी गई चेतावनियों पर कोई ध्यान नहीं दिया और बिना उकसावे के ही उन पर हमला कर दिया। जिसके चलते पुलिस ने लोगों को हिरासत में लिया।

दलित समाज का ये भी कहना है कि देश में कई अवैध मंदिर हैं लेकिन उन्हें नहीं ढहाया गया है। ये मंदिर तो वहां आज़ादी के पहले से था और 1959 में बाबू जगजीवन राम ने इसका फिर से उद्घाटन किया था। संत रविदास के नाम पर वहां मार्ग और बस स्टॉप भी मौजूद हैं। ऐसे में मंदिर के अस्तित्व को कोई कैसे खत्म कर सकता है।

जाहिर है आस्था हमारे देश में सबसे बड़ा मुद्दा है। संत रविदास का मंदिर दलित समाज की आस्था का सवाल बना हुआ है। ऐसे में ये देखना होगा कि राम मंदिर की पक्षकार केंद्र सरकार रविदास मंदिर पर क्या रूख अपनाती है। क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जाकर रविदास समुदाय के 5 करोड़ लोगों की जनभावना के साथ खड़ी होगी, या ये एक बार फिर एक मंदिर के मुद्दे को दूसरे से अलग कर के देखेगी।

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