NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अर्थव्यवस्था
सोने की बढ़ती क़ीमत और केंद्रीय बैंकों की अधिक ख़रीदारी!
दुनिया की अर्थव्यवस्था का सीधा सरोकार सोने की क़ीमत से है। जब भी आर्थिक हालात थोड़ा सुस्त होते हैं तो लोगों का रुख बाकी निवेशों से हटकर सोने की ख़रीद की ओर हो जाता है।
सोनिया यादव
18 Aug 2019
gold
image courtesy: Moneycontrol

भारत में सोने का आकर्षण पुराना है। हमारी संस्कृति में सोने को इज़्ज़त और स्टेट्स सिम्बल के तौर पर देखा जाता है। त्योहारों से लेकर शादी-ब्याह में अक्सर ही इसकी मांग बढ़ जाती है। अगर बाज़ार में इस वक्त सोने की कीमतों पर नज़र डालें तो निश्चित ही आग लगी हुई है। भारतीय बाजार में सोने की कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर (38,470 प्रति दस ग्राम) पहुंच चुकी हैं। लेकिन इस समय सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया में भी सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें बीते छह सालों के सर्वोच्च स्तर पर हैं।

ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि दुनिया में सोने की मांग अचानक क्यों बढ़ गई है? यूं तो सोना हमेशा से एक सुरक्षित निवेश रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालों में निवेशकों ने सोने में निवेश के मुकाबले इक्विटी और अन्य चीजों में निवेश को ज्यादा महत्व दिया है। इसका एक कारण इन निवेशों में ज्यादा रिटर्न मिलना है। अगर विश्व की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था को देखें तो ये बात काफी हद तक सही भी लगती है, आज का निवेशक ज्यादा जोखिम लेने से हिचकता नहीं है। लेकिन इस सबके बावजूद दुनिया की अर्थव्यवस्था का सीधा सरोकार सोने की कीमत से है। ऐसे में जब भी आर्थिक हालात थोड़ा सुस्त होते हैं तो लोगों का रुख बाकी निवेशों से हटकर सोने की खरीद की ओर हो जाता है।

आज के मौजूदा हालात में यदि सोने की बढ़ती कीमतों को देखें तो इसकी मुख्य वजह दुनिया के आर्थिक हालात ही हैं। इस समय चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव ने भी आर्थिक अनिश्चिताओं को बढ़ा दिया है। ईरान को लेकर अमेरिका आक्रामक रुख अख्तियार करने के मूड में नज़र आ रहा है, जिसके चलते रूस भी अपने कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है। उधर, आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) ने अपने हालिया आकलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को पहले से कम कर दिया है। जिसके चलते दुनिया भर के शेयर बाजारों में निवेशकों का मुनाफा कम हुआ है।

अगर भारत की बात करें, तो यहां पिछले एक साल से शेयर बाजार और म्यूचअल फंड जैसे निवेशों में रिटर्न बेहद कम रहा है। कर्ज़ बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में निवेशक सुरक्षित निवेश यानी सोने की ओर लौट रहे हैं। मांग और पूर्ति पर आधारित सोने की कीमत बढ़ती मांग के साथ बाजार में बढ़ रही है।

वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार शिशर सिन्हा ने न्यूज़क्लिक को बताया कि वैश्विक स्तर पर शेयर बाज़ार में मंदी के हालात हैं, भारत सहित दुनिया के कई बड़े देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में कटौती की है और सोने के सुरक्षित निवेश की ओर रूख किया है। जब भी निवेशक अन्य निवेशों में सुस्ती या मंदी के हालात देखता है तो वो सोने में निवेश शुरू कर देता है। उन्होंने आगे बताया कि भारत में अभी त्योहारों का माहौल है, अभी सोने की कीमतों में और इज़ाफ़ा देखने को मिल सकता है।

पंजाब विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे श्रीनाथ जैन ने न्यू़ज़क्लिक को जानकारी दी कि सोने के भाव ने कई सालों बाद उछाल पकड़ा है और फिलहाल इसके घटने के कोई आसार नहीं है। चीन-अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध के चलते अमेरिका ने चीन के उत्पादों पर भारी टैक्स लगा दिया है। ऐसे में चीन क्या कदम उठाता है, इस पर भी दुनिया की नज़रें टिकी हुई हैं। यानी हम आसान भाषा में अगर इसे समझें तो जैसे-जैसे दुनिया की अर्थव्यवस्था में नरमी के संकेत बढ़ेंगे, दुनिया के केंद्रीय बैंकों अपना स्वर्ण भंडार बढ़ाना शुरू कर देंगे।

उन्होंने आगे कहा कि, सुरक्षित निवेश और अमेरिकन डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए आम निवेशकों के साथ दुनिया के कई सेंट्रल बैंक भी सोने की अपनी खरीद को लगातार बढ़ा रहे हैं। ज्यादातर देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को अमेरिकी डॉलर में रखते हैं। कोई देश अपनी मुद्रा खर्च कर डॉलर लेता है, ऐसे में अगर डॉलर मजबूत होता है या उस देश की मुद्रा कमजोर(अवमूल्यन) होती है तो उसे डॉलर की खरीद करने में या अन्य देनदारियां डॉलर में चुकाना खासा महंगा पड़ता है। इसके बदले सोने के पर्याप्त भंडारण की स्थिति में केंद्रीय बैंक सोने को मुद्रा में बदलकर अपनी देनदारियां चुका सकता है। इससे डॉलर पर आत्मनिर्भरता भी घटती है और सोने के दामों में अपेक्षाकृत स्थायित्व के कारण नुकसान भी कम होता है।

गोल्ड कॉउंसिल के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में कई केंद्रीय बैंक बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। पूरी दुनिया के सेंट्रल बैंक2019 की पहली छमाही तक 374.1 टन सोना खरीद चुके हैं। केंद्रीय बैंकों ने इस साल अब तक जो 374.1 टन सोना खरीदा है उसमें से 224.4 टन साल की दूसरी तिमाही में खरीदा गया है।

अगर मौजूदा हालात को देखा जाए तो अमेरिका से व्यापारिक तनाव के चलते चीन पिछले काफी दिनों से अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता और उसके दबदबे को कम करने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि चीन ने 2019 के पहले सात महीनों में करीब 85 टन सोने की खरीद की है।

वर्ल्ड गोल्ड कॉउंसिल के मुताबिक, 2019 में सोने की जो कुल मांग रही है, उसमें से 16 फीसदी केंद्रीय बैंकों की ओर से रही है। तुर्की, कज़ाकिस्तान, चीन और रूस के सेंट्रल बैंक सोने के चार सबसे बड़े खरीददार हैं। जहां चीन तात्कालिक आर्थिक वजहों से और रूस सामरिक वजहों से सोने की खरीद कर रहा है, तो वहीं तुर्की और कज़ाकिस्तान जैसे देश डॉलर के मुकाबले अपनी मुद्रा को गिरने से रोकना चाहते हैं। भारत के रिजर्व बैंक ने भी 2019 के वित्तीय वर्ष में सोने की खरीद बढ़ाई है और अब आरबीआई का स्वर्ण भंडार दुनिया के सेंट्रल बैंकों में दसवें नंबर पर आ चुका है।

आंकड़ों के अनुसार दुनिया के शेयर बाजारों में फिलहाल आर्थिक मंदी के हाल हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में सोने की खरीद बढ़ने के साथ ही इसकी कीमतों में गिरावट के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे हैं।

International Bullion Market
Gold Prices Hike
Global Stock Market
central bank
Reserve Bank of India
World Gold Council
Investment

Related Stories

गतिरोध से जूझ रही अर्थव्यवस्था: आपूर्ति में सुधार और मांग को बनाये रखने की ज़रूरत

RBI, वित्तीय नीतियों ने अनियंत्रित मुद्रास्फीति से असमानता को बढ़ाया

रिपोर्टर्स कलेक्टिव का खुलासा: कैसे उद्योगपतियों के फ़ायदे के लिए RBI के काम में हस्तक्षेप करती रही सरकार, बढ़ती गई महंगाई 

आज़ादी के बाद पहली बार RBI पर लगा दूसरे देशों को फायदा पहुंचाने का आरोप: रिपोर्टर्स कलेक्टिव

कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी से कहां तक गिरेगा रुपया ?

महंगाई "वास्तविक" है और इसका समाधान भी वास्तविक होना चाहिए

क्रिप्टोकरेंसी पर मोदी सरकार का नया बिल निवेशकों को राहत देगा या नुकसान?

बंगाल में प्रस्तावित वित्तीय केंद्र को राजनीति ने ख़त्म कर दिया

आरबीआई तो सरकार को बचा रहा है लेकिन क्या सरकार भी आरबीआई को बचा रही है?

क्या नाबार्ड अधिनियम की धारा 56(1) के वैधीकरण करने से व्यवसाय को बढ़ाने में मदद मिल सकती है या यह नई मुश्किलें खड़ी करेगा?


बाकी खबरें

  • MGNREGA
    सरोजिनी बिष्ट
    ग्राउंड रिपोर्ट: जल के अभाव में खुद प्यासे दिखे- ‘आदर्श तालाब’
    27 Apr 2022
    मनरेगा में बनाये गए तलाबों की स्थिति का जायजा लेने के लिए जब हम लखनऊ से सटे कुछ गाँवों में पहुँचे तो ‘आदर्श’ के नाम पर तालाबों की स्थिति कुछ और ही बयाँ कर रही थी।
  • kashmir
    सुहैल भट्ट
    कश्मीर में ज़मीनी स्तर पर राजनीतिक कार्यकर्ता सुरक्षा और मानदेय के लिए संघर्ष कर रहे हैं
    27 Apr 2022
    सरपंचों का आरोप है कि उग्रवादी हमलों ने पंचायती सिस्टम को अपंग कर दिया है क्योंकि वे ग्राम सभाएं करने में लाचार हो गए हैं, जो कि जमीनी स्तर पर लोगों की लोकतंत्र में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए…
  • THUMBNAIL
    विजय विनीत
    बीएचयू: अंबेडकर जयंती मनाने वाले छात्रों पर लगातार हमले, लेकिन पुलिस और कुलपति ख़ामोश!
    27 Apr 2022
    "जाति-पात तोड़ने का नारा दे रहे जनवादी प्रगतिशील छात्रों पर मनुवादियों का हमला इस बात की पुष्टि कर रहा है कि समाज को विशेष ध्यान देने और मज़बूती के साथ लामबंद होने की ज़रूरत है।"
  • सातवें साल भी लगातार बढ़ा वैश्विक सैन्य ख़र्च: SIPRI रिपोर्ट
    पीपल्स डिस्पैच
    सातवें साल भी लगातार बढ़ा वैश्विक सैन्य ख़र्च: SIPRI रिपोर्ट
    27 Apr 2022
    रक्षा पर सबसे ज़्यादा ख़र्च करने वाले 10 देशों में से 4 नाटो के सदस्य हैं। 2021 में उन्होंने कुल वैश्विक खर्च का लगभग आधा हिस्सा खर्च किया।
  • picture
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अर्जेंटीना ने लिया 45 अरब डॉलर का कर्ज
    27 Apr 2022
    अर्जेंटीना की सरकार ने अपने देश की डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के साथ 45 अरब डॉलर की डील पर समझौता किया। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License