NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सोशल मीडिया की अफवाह से बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा
क्या रवीश कुमार के कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ के सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार को फेसबुक जानबूझ कर रोकता है?
सिरिल सैम, परंजॉय गुहा ठाकुरता
04 Feb 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: google

एनडीटीवी इंडिया भारत का एक प्रमुख हिंदी समाचार चैनल है। इस चैनल पर जाने-माने पत्रकार रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ काफी लोकप्रिय है। इस चैनल के एक सूत्र में अपनी पहचान नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक बड़ी अजीब सी बात बताई। 

इन्होंने बताया कि हम लोगों को एक बात बड़ी अजीब सी लगने लगी कि हमारे बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ को लेकर फेसबुक पर होने वाली हलचल तब बहुत धीमी हो जाती थी जब कार्यक्रम के किसी संस्करण में सरकार की आलोचना करने वाली खबरें चलाई जाती थीं। कार्यक्रम में एक दिन पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया को नरेंद्र मोदी की उन प्रतिक्रियाओं के मुकाबले दिखाया गया जो वे गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए दिया करते थे।

इसे भी पढ़ें : #सोशल_मीडिया : क्या फेसबुक सत्ताधारियों के साथ है?

ये सूत्र कहते हैं, ‘हम इस बात से हैरान हो गए कि हमारे फेसबुक पेज के लाइक और शेयर अपेक्षित ढंग से एक स्तर तक बढ़ने के बाद स्थिर हो गए। हम यह पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि ऐसा जानबूझकर किया गया लेकिन इतना पक्का है कि यह सामान्य नहीं था। हमने इस बात को लेकर आंतरिक स्तर पर चर्चा की कि क्या हमें इस बारे में फेसबुक को औपचारिक शिकायत भेजनी चाहिए। हमने फिर यह तय किया कि शिकायत नहीं करनी चाहिए क्योंकि हमें यह नहीं लग रहा था कि हम इस बात को साबित कर पाएंगे।’

फेसबुक की ओर से यह दावा अक्सर किया जाता है कि यह राजनीतिक तौर पर निरपेक्ष वेबसाइट है। लेकिन फेसबुक की ओर से यह नहीं बताया जाता कि उसका संबंध किन राजनीतिक पार्टियों से है। 

इसे भी पढ़ें : #सोशल_मीडिया : क्या व्हाट्सऐप राजनीतिक लाभ के लिए अफवाह फैलाने का माध्यम बन रहा है?

इस बारे में जब हमने फेसबुक से जानना चाहा तो इसके प्रवक्ता ने ईमेल से भेजे जवाब में बताया, ‘फेसबुक की नीतिगत मामलों की टीम बहुत तरह के लोगों को हमारी नीतियों, कार्यक्रमों और उत्पादों को समझाने में मदद करती है। इनमें शिक्षाविद, हमारे समाज के लोग, गैर सरकारी संगठन और सरकारें शामिल हैं। हमारी कोशिश यह होती है कि हमारे उत्पादों से फेसबुक इस्तेमाल करने वालों को सकारात्मक अनुभव मिले। वैश्विक स्तर पर हम इंटरनेट गवर्नेंस और नीतिगत विकास में शामिल हैं। सुरक्षा, छोटे कारोबारियों के विकास, इंटरनेट तक पहुंच बढ़ाने और लोगों को आवाज देने की कोशिश करते हैं। हम उन सभी लोगों के साथ काम करते हैं जो प्रशिक्षण के लिए हमसे संपर्क करते हैं।’

2012 से 2018 के बीच भाजपा के समर्थकों ने फेसबुक और इसके अन्य प्लेटफॉर्म के जरिये ऐसी आपत्तिजनक सामग्रियों का प्रसार किया जिनके जरिये मोदी को हिंदुओं के ‘मसीहा’ के तौर पर पेश किया जाता है। इससे हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ और कई जगह भीड़ वाली हिंसा देखी गई। देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी घटनाओं में अक्टूबर, 2018 तक 30 लोगों की जान गई।

इसे भी पढ़ें : #सोशल_मीडिया : क्या नरेंद्र मोदी की आलोचना से फेसबुक को डर लगता है?

इनमें से कई हत्याएं व्हाट्सऐप पर फैलाई अफवाह के आधार पर हुईं। इनमें गौ हत्या, पशुओं की चोरी, बच्चों के अपहरण और दूसरे धर्म के व्यक्ति के साथ संबंध रखने संबंधित अफवाहें फैलाई गईं। इंडिया स्पेंड ने सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर यह बताया है कि 2014 से 2017 के बीच सांप्रदायिक हिंसा में 28 फीसदी बढ़ोतरी हुई। इनमें से आधी घटनाएं भाजपा शासित प्रदेशों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में हुईं।

इनमें से अधिकांश घटनाएं कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति से जुड़ी रहीं। लेकिन क्या इन घटनाओं को फेसबुक और व्हाट्सऐप के जरिए सूचनाओं और फर्जी खबरों के दुष्प्रचार से बिल्कुल अलग करके देखा जा सकता है?

 

Social Media
#socialmedia
Facebook
Facebook India
Real Face of Facebook in India
WhatsApp

Related Stories

विज्ञापन में फ़ायदा पहुंचाने का एल्गोरिदम : फ़ेसबुक ने विपक्षियों की तुलना में "बीजेपी से लिए कम पैसे"  

बीजेपी के चुनावी अभियान में नियमों को अनदेखा कर जमकर हुआ फेसबुक का इस्तेमाल

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

कानून का उल्लंघन कर फेसबुक ने चुनावी प्रचार में भाजपा की मदद की?

रामदेव विरोधी लिंक हटाने के आदेश के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया की याचिका पर सुनवाई से न्यायाधीश ने खुद को अलग किया

यूपी चुनावः कॉरपोरेट मीडिया के वर्चस्व को तोड़ रहा है न्यू मीडिया!

डेटा निजता विधेयक: हमारे डेटा के बाजारीकरण और निजता के अधिकार को कमज़ोर करने का खेल

मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!

फ़ेसबुक/मेटा के भीतर गहरी सड़न: क्या कुछ किया जा सकता है?

आज तक, APN न्यूज़ ने श्रीनगर में WC में पाकिस्तान की जीत का जश्न बताकर 2017 का वीडियो चलाया


बाकी खबरें

  • Hijab Verdict
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुसलमानों को अलग थलग करता है Hijab Verdict
    17 Mar 2022
  • fb
    न्यूज़क्लिक टीम
    बीजेपी के चुनावी अभियान में नियमों को अनदेखा कर जमकर हुआ फेसबुक का इस्तेमाल
    17 Mar 2022
    गैर लाभकारी मीडिया संगठन टीआरसी के कुमार संभव, श्रीगिरीश जलिहाल और एड.वॉच की नयनतारा रंगनाथन ने यह जांच की है कि फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल होने दिया। मामला यह है किसी भी राजनीतिक…
  • Russia-Ukraine war
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या है रूस-यूक्रेन जंग की असली वजह?
    17 Mar 2022
    रूस का आक्रमण यूक्रेन पर जारी है, मगर हमें इस जंग की एक व्यापक तस्वीर देखने की ज़रूरत है। न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में हमने आपको बताया है कि रूस और यूक्रेन का क्या इतिहास रहा है, नाटो और अमेरिका का…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    झारखंड में चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीज़ों का बढ़ता बोझ : रिपोर्ट
    17 Mar 2022
    कैग की ओर से विधानसभा में पेश हुई रिपोर्ट में राज्य के जिला अस्पतालों में जरूरत के मुकाबले स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी का खुलासा हुआ है।
  • अनिल जैन
    हिटलर से प्रेरित है 'कश्मीर फाइल्स’ की सरकारी मार्केटिंग, प्रधानमंत्री से लेकर कार्यकर्ता तक
    17 Mar 2022
    एक वह समय था जब भारत के प्रधानमंत्री अपने समय के फिल्मकारों को 'हकीकत’, 'प्यासा’, 'नया दौर’ जैसी फिल्में बनाने के लिए प्रोत्साहित किया करते थे और आज वह समय आ गया है जब मौजूदा प्रधानमंत्री एक खास वर्ग…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License