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भारत
राजनीति
#सोशल_मीडिया : क्या व्हाट्सऐप राजनीतिक लाभ के लिए अफवाह फैलाने का माध्यम बन रहा है?
क्या सोशल मीडिया आपको जागरूक बना रहा है? क्या फेसबुक सत्ताधारियों के साथ है? क्या व्हाट्सऐप राजनीतिक लाभ के लिए अफवाह फैलाने का माध्यम बन रहा है? इन सब सवालों पर ही वरिष्ठ लेखक पत्रकार सिरिल सैम और परंजॉय गुहा ठाकुरता ने संयुक्त रूप से अंग्रेजी में कुछ लेख लिखे हैं। हम न्यूज़क्लिक हिन्दी के पाठकों के लिए इनका अनुवाद एक सीरीज के तौर पर पेश कर रहे हैं। आज पढ़िए पहली कड़ी।
सिरिल सैम, परंजॉय गुहा ठाकुरता
30 Jan 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: India Today

22 सितंबर, 2018 को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजस्थान के कोटा में अपनी पार्टी के सोशल मीडिया वॉलिंटियर्स से संवाद कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान कहा, ‘हम जनता तक हर संदेश पहुंचा पाने में सक्षम हैं। चाहे वह अच्छा हो या बुरा। चाहे वह सच्चा हो या फर्जी।’

अमित शाह के इस बयान के मायनों को समझना के लिए यह याद करना होगा कि सबसे पहले उन्होंने ऐसी बातें 2017 के फरवरी-मार्च में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के पहले कही थीं। उन्होंने कहा था कि भाजपा के समर्थकों ने बहुत बड़े व्हाट्सऐप समूह बना रखे हैं। इन समूहों से 32 लाख लोग जुड़े हुए हैं। 

हर दिन सुबह आठ बजे इन समूहों में ‘जानिए सच’ के नाम से एक संदेश भेजा जाता था। इन संदेशों के जरिये यह बताया जाता था कि विभिन्न अखबारों और वेबसाइट में भाजपा के बारे में क्या ‘फर्जी’ बातें प्रकाशित हुई हैं। 

भाजपा के एक ‘स्मार्ट’ कार्यकर्ता ने एक दिन इन व्हाट्सऐप समूहों पर एक फर्जी जानकारी यह डाल दी कि उस समय के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव को थप्पड़ मारा है। इसके बाद यह संदेश वायरल हो गया और इसकी जानकारी अमित शाह तक पहुंची।

अमित शाह ने कहा कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था। इसके बावजूद इस फर्जी सूचना से एक खास तरह का वातावरण बन गया। अमित शाह से संवाद के दौरान श्रोताओं ने इसका उल्लेख किया तो शाह ने उन्हें बड़े प्यार से फटकारते हुए कहा, ‘ऐसा करना तो चाहिए कि लेकिन ऐसा मत करिए! आप समझ रहे हैं न कि मैं क्या कह रहा हूं?’

इसके बाद अमित शाह ने कहा, ‘हम ऐसा कर सकते हैं क्योंकि हमारे व्हाट्सऐप ग्रुप में 32 लाख लोग हैं। यही वजह है कि हम ऐसी चीजों को वायरल कर पाते हैं।’ हिंदी में दिए गए अमित शाह का वह भाषण ज्यों का त्यों कई मीडिया वेबसाइट पर उपलब्ध है। जो आंकड़ा उन्होंने बताया था, वह हैरान करने वाला है। 

कुछ समय पहले व्हाट्सऐप के वैश्विक प्रमुख क्रिस डेनियल्स ने इकनोमिक टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में यह दावा किया यह प्लेटफॉर्म ऐंड टू ऐंड इन्क्रिप्टेड है और भारत के तकरीबन 20 करोड़ लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐंड टू ऐंड इन्क्रिप्शन का मतलब यह होता है कि जो संदेश भेज रहा है और जिसे भेज रहा है, उसके अलावा बीच में कोई तीसरा व्यक्ति या यहां तक की व्हाट्सऐप कंपनी भी इन संदेशों को नहीं पढ़ सकती। डेनियल्स ने यह भी कहा, ‘लोगों को कई बार इस बात से हैरानी भी होती है कि व्हाट्सऐप पर 90 फीसदी संदेशों का आदान-प्रदान दो लोगों के बीच ही होता है। अधिकांश समूहों में दस से भी कम लोग हैं।’

अगर डेनियल्स द्वारा दिए गए आंकड़ों पर यकीन करें तो इतना तय लगता है कि अमित शाह और भाजपा के समर्थकों, शुभचिंतकों और कार्यकर्ताओं ने व्हाट्सऐप का जितनी सफलता से इस्तेमाल किया है उतनी सफलता से दुनिया में किसी और ने नहीं किया। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि भाजपा दुनिया का सबसे बड़ा और प्रभावी राजनीतिक अभियान चलाने का काम कर रही है।

पिछले कुछ समय से फेसबुक के डिजिटल एकाधिकार को लेकर पूरी दुनिया में बहस छिड़ी हुई है। व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल प्लैटफॉर्म का स्वामित्व भी फेसबुक कंपनी के पास ही है। ऐसे में आज विश्व में फेसबुक के कामकाज की निगरानी की बात चल रही है। कहा जा रहा है कि फेसबुक का एकाधिकार नेट निरपेक्षता की धारणा के विपरीत है। 

फेसबुक इस्तेमाल करने वाले जिन लोगों ने अपनी जानकारियां इस प्लेटफॉर्म पर डाली हैं उनके दुरुपयोग का मामला भी सामने आया है। कैंब्रिज एनालिटिका और ऐसी दूसरी कंपनियों ने इन जानकारियों का दुरुपयोग किया। इसके बाद से भारत में भी फेसबुक की गतिविधियों पर लगातार सवाल उठाया जा रहा है। 

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