NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सरकार के प्रचार पर विचार
वीरेन्द्र जैन
27 Oct 2015
‘जन सम्पर्क अधिकारी’ जिन्हें अंग्रेजी में पी आर ओ कहा जाता है, किसी संस्थान के कार्य से सम्बन्धित व्यक्तियों के साथ मधुर रिश्ते बनाने, गलतफहमियां दूर करने और अपने संस्थानों के उत्पादों के प्रचार हेतु बनाया गया पद है। क्रमशः यह पद संस्थान की कमियां छुपाने, विरोधी प्रचार का स्पष्टीकरण देने का काम भी करने लगा।  उद्योग व्यापार जगत से चल कर यह पद सरकारों में भी चला आया। लोकतांत्रिक व्यवस्था आने के बाद शासक दलों को आवश्यक लगा कि वे अपने प्रशासनिक कार्यों, विकास योजनाओं, और सामाजिक जागरूकता के लिए जनता से सम्पर्क रखें क्योंकि उन्हें एक निश्चित अवधि के बाद उससे पुनः समर्थन पाने की जरूरत होती है।
 
जब किसी संस्थान को अपने उत्पाद की गुणवत्ता से अधिक गुणवान बताने की जरूरत होती है तब उसे उतने ही अधिक और प्रभावी जन सम्पर्क अधिकारियों की जरूरत भी होती है। हमारे देश की अधिकांश सरकारें अपनी कमतर उपलब्धियों को अधिक दर्शाने के लिए इस विभाग का उपयोग करती रही हैं। जो लाभ जनता को जीवन में महसूस होना चाहिए, वे केवल सूचना माध्यमों के विज्ञापनों आदि में देखने को मिलते हैं। सरकारी विज्ञापनों का काम सत्तारूढ नेताओं की छवि को निखार कर प्रचारित करना होकर रह गया है, यही कारण है कि इन विज्ञापनों में नीतियों की कम और नेताओं की छवि अधिक होती है। पिछले साठ सालों में इन विज्ञापनों से सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और नई योजनाओं को प्रचारित करने में किये गये व्यय के अनुपात में मदद नहीं मिली। यही कारण रहा कि सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि सरकारी विज्ञापनों का आडिट होना चाहिए और अनावश्यक रूप से नेताओं के चित्रों को प्रकाशित, प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए। खेद की बात यह भी है कि सरकार के जिन जनसम्पर्क विभागों को अभिव्यक्ति के अवसरों में वृद्धि के लिए काम करना चाहिए था वही विभाग सरकार की स्वस्थ समीक्षा को रोकने और उचित विरोध को दबाने के लिए मुँह बन्द कराने के कार्यालयों में बदल गये। ये विभाग लोकतांत्रिक मूल्यों को भटकाने, भ्रष्टाचार, अनियमितताओं, और नाकारापन पर परदा डालने के कार्य ही प्रमुख रूप से कर रहे हैं। जो राशि सूचना माध्यमों के चारणों के हित में लगायी जा रही है यदि वही राशि सुपात्रों को वांछित सुविधाएं देने में लगायी जाती तो हितग्राहियों के संतुष्ट चेहरे स्वयं ही सरकारों के प्रचार माडल नजर आने लगते।
 
सरकारी जनसम्पर्क विभागों के प्रचार का प्रमुख कार्य लक्ष्य विमुख हो गया है इसलिए उनमें गुणवत्ता भी देखने को नहीं मिलती, इसीलिए प्रभाव भी देखने को नहीं मिलता। घर घर शौचालय बनवाने के एक विज्ञापन में प्रसिद्ध अभिनेत्री विद्या बालन एक ग्रामीण महिला को औषधि देते हुए कहती हैं कि वह स्कूल जाने वाली अपनी मुन्नी को बाहर शौच जाने के लिए कह रही है जिस पर मक्खियां भिनभिनाएंगीं, जो बाद में मुन्नी के खाने पर बैठ कर उसे बीमार करेंगी। अब मक्खियां इतनी पालतू  कैसे हो गयीं जो मुन्नी के शौच पर बैठने के बाद मुन्नी के खाने पर ही बैठेंगी, और उसी को बीमार करेंगीं। यदि वह महिला अपने घर में शौचालय भी बनवा लेती है तो भी अगर गाँव के दूसरे लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं तो भी मक्खियां मुन्नी के खाने पर बैठ सकती हैं, या मुन्नी के खुले में शौच जाने पर उस पर बैठी मक्खियां पड़ोस के खाने पर भी बैठ सकती हैं। सच तो यह है कि हमारे विज्ञापन औपचारिक होते जा रहे हैं| जहाँ समस्या सामूहिकता में है वहाँ भी हमने हल को व्यक्ति केन्द्रित कर दिया है। भोपाल में डेंगू फैलने के बाद इस राजधानी के सबसे विशिष्ट स्थान चार इमली, जिसमें मंत्री और आईपीएस जैसे लोगों के बंगले हैं, तीस जगह डेंगू का लारवा पाया गया। किंतु अस्पतालों में डेंगू के इलाज के लिए भरती मरीजों में चार इमली के विशिष्ट लोगों में कोई नहीं था। रिपोर्ट सामने आने के दूसरे दिन जब मैं वहाँ से गुजरा तो देखा कि जगह जगह सफाई हो रही है, धुआँ किया जा रहा है, दवा छिड़की जा रही है। क्या हमारे विशिष्ट लोग कभी आम लोगों की बस्ती और बाज़ारों, पार्कों, सिनेमा हालों की ओर नहीं जाते। जब उन्हें इसी देश की इसी जगह रहना है तो अपना अलग ‘देश’ बना कर कब तक रह सकते हैं? अगर शहर में डेंगू वाले मच्छर होंगे तो उन्हें व्यक्तियों के विशिष्ट होने का शायद ही पता हो, और वे भारतीय नागरिकों की तरह भेद कर पाते हों। केन्द्रीय मंत्री कुमार मंगलम की मृत्यु मलेरिया से हुयी थी और तत्कलीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दो निकट के रिश्तेदारों को डेंगू पाया गया था।
 
परिवार नियोजन का प्रचार यदि लक्षित समूह के लिए नीति बना कर किया जाता तो उसी बजट में सार्थक परिणाम निकल सकते थे। किंतु यह बच्चों, वृद्धों, अविवाहित युवक-युवतियों, आदि तक एक साथ झौंक दिया गया, जिसे देख कर कुछ ने शर्म के मारे और कुछ ने पुरानी नैतिकता के मारे इसे कोसा। सबसे ज्यादा प्रचार बढती आबादी के कारण संसाधनो व सुविधाओं के कम होते जाने के सम्बन्ध को आधार बना कर किया गया तो लोगों में यह सन्देश भी गया कि जब तक पूरा समाज बड़े स्तर पर इस सन्देश को ग्रहण नहीं करता तब तक अपने परिवार को नियोजित करके भी संसाधन नहीं बढाये जा सकते। यहीं से लोगों ने समाज में जातियों सम्प्रदायों के रूप में देखना शुरू किया और दूसरों के प्रयासों को अधिक गिनने लगे। शातिर राजनेताओं ने भी उस जानकारी का दुरुपयोग शुरू कर दिया। उल्लेखनीय है कि इसे जब और जहां चयनित नव दम्पत्तियों के समूह तक पहुँचाया गया वहाँ यह प्रभावी साबित हुआ।
 
हमारी बहुत सारी कमियां उचित जनसम्पर्क की समझ के कारण भी हैं। इसी कमी के कारण पिछली सरकार अपने अच्छे कार्यों और नीतियों को जनता तक नहीं पहुँचा सकी जबकि विपक्ष ने उसकी कमजोरियों को जनता तक पहुँचा दिया था। वर्तमान सरकार के नेताओं ने जिस कुशल प्रचार प्रतिभा से पिछली सरकार के कार्यों का भी श्रेय ले लिया वही प्रतिभा अगर सरकारी सामाजिक सुधार कार्यों में दिखे तो समाज का कुछ भला हो। जनसम्पर्क के लिए निरंतर परिणाम परीक्षण से गुजरती हुई कोई ठोस नीति होनी चाहिए और इसे तैयार करने के लिए स्तरीय समाजशास्त्रियों, मनोवैज्ञानिकों, समेत क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं और सक्रिय पत्रकारों का सहयोग प्राप्त करना चाहिए। इस महत्वपूर्ण विभाग को चापलूसों, चारणों, मुफ्तखोरों, की चारागाह बनने से रोकना भी जरूरी है।  
 
डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख में वक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारों को नहीं दर्शाते ।
जनसम्पर्क
व्यवस्था
समाज
भाजपा
नरेन्द्र मोदी

Related Stories

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों 10 सितम्बर को भारत बंद

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी

क्या भाजपा शासित असम में भारतीय नागरिकों से छीनी जा रही है उनकी नागरिकता?


बाकी खबरें

  • Modi yogi
    अजय कुमार
    आर्थिक मोर्चे पर फ़ेल भाजपा को बार-बार क्यों मिल रहे हैं वोट? 
    14 Mar 2022
    आख़िर किस तरह के झूठ का जाल भाजपा 24 घंटे लोगों के बीच फेंकने काम करती है? जिससे आर्थिक रूप से कमजोर होते जा रहे राज्यों में भी उसकी सरकार बार बार आ रही है। 
  • रवि शंकर दुबे
    पांचों राज्य में मुंह के बल गिरी कांग्रेस अब कैसे उठेगी?
    14 Mar 2022
    मैदान से लेकर पहाड़ तक करारी शिकस्त झेलने के बाद कांग्रेस पार्टी में लगातार मंथन चल रहा है, ऐसे में देखना होगा कि बुरी तरह से लड़खड़ा चुकी कांग्रेस गुजरात, हिमाचल और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए…
  • अजय गुदावर्ती
    गुजरात और हिंदुत्व की राजनीतिक अर्थव्यवस्था
    14 Mar 2022
    एक नई किताब औद्योगिक गुजरात में सांप्रदायिकता की राजनीतिक अर्थव्यवस्था की परख करती है। इससे मिली अंतर्दृष्टि से यह समझने में मदद मिलती है कि हिंदुत्व गुजरात की अपेक्षा अविकसित उत्तर प्रदेश में कैसे…
  • abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    कानून का उल्लंघन कर फेसबुक ने चुनावी प्रचार में भाजपा की मदद की?
    14 Mar 2022
    न्यूज़चक्र के इस एपिसोड में आज वरिष्ठ पत्रकार बात कर रहे हैं एक न्यूज़ एजेंसी के द्वारा की गयी पड़ताल से ये सामने आया है की Facebook ने हमेशा चुनाव के दौरान BJP के पक्ष में ही प्रचार किया है। देखें…
  • misbehaved with tribal girls
    सोनिया यादव
    मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
    14 Mar 2022
    मध्य प्रदेश बाल अपराध और आदिवासियों के साथ होने वाले अत्याचार के मामले में नंबर एक पर है। वहीं महिला अपराधों के आंकड़ों को देखें तो यहां हर रोज़ 6 महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License