NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शर्तों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने दी पटाखे जलाने की मंजूरी
दिवाली पर रात को 8 से 10 बजे के बीच ही पटाखे जलाने की अनुमति दी गई है। साथ ही कम प्रदूषण वाले पटाखों की ही इजाज़त है। यह नियम नए साल के जश्न और शादी-समारोहों में भी लागू रहेंगे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Oct 2018
सांकेतिक तस्वीर

सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाते हुए पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाले पटाखों के उत्पादन एवं बिक्री की अनुमति दी, जिनसे कम उत्सर्जन/प्रदूषण हो। दिवाली के दिन रात आठ से रात 10 बजे तक ही पटाखे जलाने की मंजूरी है। 

जस्टिस ए.के. सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने हरित नियमों पर खरा नहीं उतरने वाले पटाखों को जलाने पर प्रतिबंध लगाया है, जो पूरे साल लागू रहेगा। 

यह नियम नए साल के जश्न और शादी-समारोहों में भी लागू रहेगा।

अदालत ने कहा कि प्रशासन ऐसे इलाकों की पहचान करेंगे जहां सामूहिक रूप से पटाखे जलाए जा सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोगों को इस बारे में जानकारी हो।

अदालत ने कहा कि पुलिस थाना प्रभारी इस आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करवाने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। 

अदालत ने कहा कि पटाखों की ऑनलाइन बिक्री नहीं होगी और ऐसा करता पाया जाने पर किसी भी वेबसाइट को अदालत के फैसले की अवमानना समझा जाएगा।

अदालत ने लड़ी वाले पटाखों पर भी प्रतिबंध लगाया है।

आपको बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसे लेकर उस समय दो तरह की राय सामने आई थी। एक वर्ग ने इसका स्वागत किया था जबकि एक वर्ग ने इसे धर्म में हस्तक्षेप और दिवाली पर ही बैन की तरह प्रदर्शित करते हुए आपत्ति जताई थी। एक पक्ष व्यापारियों का भी था, इसमें छोटे-बड़े सभी व्यापारी शामिल थे, उनका कहना था कि दिवाली के बिल्कुल नजदीक आने पर पटाखों की बिक्री पर बैन लगाया गया है जिससे उन्हें भारी नुकसान हो गया है। बहुत लोगों का मानना था कि अगर इस तरह के प्रतिबंध लगाए जाने हैं तो समय रहते लगाए जाने चाहिए। हालांकि उस समय प्रतिबंध लगाते हुए कोर्ट ने कहा था कि यह एक टेस्ट के तौर पर है और कोर्ट देखेगा कि पटाखों पर प्रतिबंध से पर्यावरण को कोई फायदा हुआ या नहीं। उस समय जो रिपोर्ट आईं थी उनके मुताबिक दिवाली की अगली सुबह पिछले सालों की मुकाबलें कम प्रदूषित थी। हालांकि उस दिवाली पर भी काफी पटाखे छोड़े गए थे, लेकिन पिछले सालों की तुलना में कम थे।

आंकड़ों की बात की जाए तो 2017 में दिवाली पर वायु सूचकांक 326 रहा, जबकि 2016 की दिवाली पर यह 426 रहा। 2016 में दिवाली पर जहां पीएम10 का स्तर 448 से 939 के बीच था वहीं 2017 में 331 से 951 के बीच रहा। इस तरह 2016 में दिवाली पर प्रदूषण का स्तर सर्वोच्च रहा।

इन सब बातों पर गौर करते हुए इस बार सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के लिए सशर्त मंज़री दे दी है। आपको बता दें कि वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए देशभर में पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 28 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि प्रतिबंध से जुड़ी याचिका पर विचार करते समय पटाखा उत्पादकों की आजीविका के मौलिक अधिकार और देश के 1.3 अरब लोगों के स्वास्थ्य अधिकार समेत विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखना होगा।

वैसे पर्यावरणविद् कह रहे हैं कि इस बार तो दिवाली पर होने वाला प्रदूषण दशहरा पर ही हो गया है। आपको मालूम है कि दशहरा पर देशभर में बड़ी संख्या में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के बड़े-बड़े पुतले जलाए जाते हैं, जिनमें भारी मात्रा में पटाखें भरे जाते हैं। इस बार भी दिल्ली समेत देशभर में ऐसे हजारों पुतलें जलाए गए, जिनसे प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ी है।

हालांकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दशहरा से पहले ही दिल्ली सरकार पर प्रदूषण को रोकने में विफल रहने पर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया है। इस फैसले को सही करार देते हुए पर्यावरणविद् व वैश्विक संगठनों का कहना है कि प्रदूषण को रोकने में विफल रहने पर केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) पर कार्ययोजना नहीं तैयार करने वाले 102 में से 66 शहरों पर भी इस तरह का जुर्माना लगाकर कार्रवाई की जानी चाहिए। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीबीसीबी) के वकील विजय पंजवानी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संतुलित बताया। 

वहीं, पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध का दबाव बना रहे वकीलों ने कहा कि स्पष्ट व्यावहारिक कारणों से अदालत के आदेश को लागू करना मुश्किल होगा।

(इनपुट आईएएनएस)

Supreme Court Verdict on Crackers
Supreme Court Allows Sale Crackers
Pollution in India
Pollution in Delhi
Deepawali
Diwali

Related Stories

वायु प्रदूषण: दिल्ली में स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय 29 नवंबर से फिर खुलेंगे

दिल्ली: प्रदूषण हो या कोरोना, पहली मार निर्माण मज़दूरों पर ही क्यों?

इतवार की कविता: इस साल भी !

पटाख़ों से ज्यादा ज़हर तो दिमाग़ों में है!

दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा हुई ज़हरीली, गले और आंखों में जलन की शिकायतें

दिवाली, पटाख़े और हमारी हवा

12 लाख दीयों की दीवाली और 32 उपचुनावों के नतीजे के संदेश

तिरछी नज़र: 'सरकार जी' ने भक्तों के साथ की वर्चुअल मीटिंग

लक्ष्मी जी और ईडी का छापा

…इस बार भी लोगों ने प्रदूषण चुना


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    यूपी: सत्ता के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाली महिलाओं का संघर्ष हार-जीत से कहीं आगे है
    12 Mar 2022
    इन महिला उम्मीदवारों की पहचान हार-जीत से अलग इनका संघर्ष है, जो हमेशा याद रखा जाएगा। बीते पांच सालों में सीएम योगी आदित्यनाथ की छवि में भले ही कोई खासा बदलाव नहीं आया हो, लेकिन उनके ख़िलाफ़ आवाज़…
  •  Ukraine Crisis
    प्रभात पटनायक
    यूक्रेन के संकट का आईएमएफ कनेक्शन
    12 Mar 2022
    जिस आईएमएफ ने नियंत्रणात्मक व्यवस्था के लिए सुगमताकारक के रूप में अपनी शुरूआत की थी, वह उसी नियंत्रणात्मक व्यवस्था का विनाशक बन गया है और नवउदारवादी व्यवस्था को लाने का हथियार बन गया है।
  • एजाज़ अशरफ़
    धांधली जब लोगों के दिमाग़ के साथ हो जाती है, तभी उत्तर प्रदेश के नतीजे इस तरह आते हैं
    12 Mar 2022
    विपक्ष साल के सातों दिन और चौबीसो घंटे के लिए वैचारिक लड़ाई में लगे संघ को भारत के दिमाग़ी हेरफेर करने से रोक पाने में नाकाम रहा है। धांधली कभी उत्तर प्रदेश के किसी ईवीएम में नहीं हुई है,बल्कि धांधली…
  • covid
    दित्सा भट्टाचार्य
    भारत में 4 नहीं 40 लाख से अधिक कोविड मौतें हुईं हैं- लैंसेट स्टडी
    12 Mar 2022
    अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि भारत में दुनिया भर में कोविड के कारण सबसे अधिक मौतें हुई हैं, जो वैश्विक मौतों का 22 प्रतिशत है। 
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,614 नए मामले, 89 मरीज़ों की मौत
    12 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.09 फ़ीसदी यानी 40 हज़ार 559 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License