NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
स्टीवन हॉकिंग्स: ब्रह्माण्ड का व्याख्याता
‘मैं दिमाग को एक कंप्यूटर की तरह मानता हूँ, जो अपने विभिन्न अवयवों के ख़राब होने के साथ ही काम करना बंद कर देता हैI ख़राब कंप्यूटरों के लिए कोई स्वर्ग या जीवन के बाद की दुनिया नहीं है; यह सिर्फ ऐसे लोगों के दिमाग की उपज है जो अँधेरे से डरते हैंI’
सुबोध वर्मा
15 Mar 2018
स्टीवन हॉकिंग्स

‘मैं दिमाग को एक कंप्यूटर की तरह मानता हूँ, जो अपने विभिन्न अवयवों के ख़राब होने के साथ ही काम करना बंद कर देता हैI ख़राब कंप्यूटरों के लिए कोई स्वर्ग या जीवन के बाद की दुनिया नहीं है; यह सिर्फ ऐसे लोगों के दिमाग की उपज है जो अँधेरे से डरते हैंI’ यह साल 2011 में स्टीवन हॉकिंग्स ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा थाI इससे न सिर्फ हमें उनके विचारों की झलक मिलती है बल्कि उनकी स्पष्टवादी रवैये और तीखी व्यंग्यात्मक शैली का भी पता लगता हैI

14 मार्च 2018 की सुबह, इस कंप्यूटर ने काम करना बंद कर दियाI ब्रह्माण्ड की पड़ताल करने और इस मुश्किल विज्ञान को लोकप्रिय बनाने वाले हमारे समय की महान शख्सियत हॉकिंग्स 76 साल की उम्र में चल बसेI 21 साल की उम्र में उन्हें मालूम हुआ कि उन्हें मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी है, डॉक्टरों ने उन्हें जीने के लिए सिर्फ दो और साल दिए थेI वे इसके बाद न सिर्फ और 55 साल ज़िन्दा रहे, बल्कि अपनी ज़िन्दगी को ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति से जुड़े सैद्धांतिक शोध और साथ ही ब्लैक होल के जन्म और अंत, इन्फ्लेशन ऑफ़ यूनिवर्स और समय तथा स्पेस की शुरुआत जैसी अविश्वसनीय गुत्थियों की जाँच कीI

उनकी उपलब्धियाँ अपने आप में ही मंत्रमुग्ध करने वाली हैं, लेकिन दुनिया में उनकी शारीरिक छवि भी काफी जानी गयीI लोग व्हीलचेयर तक सीमित और अभिव्यक्ति के लिए कंप्यूटर पर निर्भर उनके बीमार शरीर को भी उनकी पहचान के एक हिस्से के रूप में जानते थेI यह असीम संभावनाओं से लैस उस मानव मस्तिष्क का एक प्रतीक-सा बन गया था जो खुद को अथाह ब्रह्माण्ड की पेचीदगियों को समझने के प्रयास में होI   

हॉकिंग्स अपने साथी रॉजर पेनरोज सहित 1970 में दुनिया के सामने आये जब उन्होनें यह दिखाने की कोशिश की कि जहाँ से ब्रह्माण्ड की शुरुआत हुई वो एक ख़ास जगह थीI सारी ऊर्जा और मैटर इस बिन्दू पर नष्ट होते थेI इनकी जोड़ी ने इस निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए ब्लैक होल के गणित को पूरे ब्रह्माण्ड पर लागू कियाI

साल 1947 में क्वांटम सिद्धांत के आधार पर हॉकिंग्स ने यह तर्क रखा कि ब्लैक होल रेडिएशन छोड़ते हैं और वे अंततः मर जायेंगेI इसका परिणाम यह होगा कि जो भी ज्ञान ब्लैक होल के भीतर गिरेगी, वह भी नष्ट हो जाएगीI वैज्ञानिक जगत में इससे काफी हंगामा हुआ क्योंकि तब तक यह एक दृढ़ विश्वास था कि कोई भी ज्ञान हमेशा के लिए गुम नहीं हो सकतीI बाद में, हॉकिंग्स ने (एक पब में) अपनी कंप्यूटरी आवाज़ में अपने ही इस सिद्धांत का खंडन करते हुए घोषणा की कि ‘शायद जानकारी का नष्ट न हो’I

1982 में हॉकिंग्स ने यह सिद्धांत दिया कि बिग बैंग के तुरंत बाद मैटर में टाइनी रिप्प्लस (क्वांटम फ्लक्चुएशन्स) ने ब्रह्माण्ड के विस्तार को शुरूआती दौर में उछाल दिया होगाI

हॉकिंग्स के कई विचारों, खासतौर से क्वांटम ग्रेविटी से जुड़े विचार जिनपर वे ताउम्र काम करते रहे, को वैज्ञानिक समुदाय में हमेशा ही स्वीकृति नहीं मिलीI लेकिन विज्ञान दरअसल ऐसा ही है, जहाँ विचार विकसित होते हैं, उन्हें नकारा जाता है या साबित किया जाता है, और फिर दूसरे विचार पैदा होते हैंI

हॉकिंग्स के अन्य महत्वपूर्ण योगदानों में से एक हैं उनकी बड़ी-ही लगन और शिद्दत लिखीं किताबों की श्रंखला जो काफी पसंद की गयींI इनके ज़रिए उन्होंने विज्ञान को लोकप्रिय बनाने का सफल प्रयास कियाI उन्हें प्रसिद्धि उनकी साल 1988 में आई किताब ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम (A Brief History of Time) से मिली, इस किताब का 40 भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है और इसकी 25 मिलियन से ज़्यादा प्रतियाँ बिक चुकी हैंI इसके बाद साल 1996 में द इलस्ट्रेटेड ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम (The Illustrated Brief History of Time) और साल 2011 में द यूनिवर्स इन अ नटशैल (The Universe in a Nutshell) किताबें आयींI दोनों ही किताबों में बेहतरीन छवियाँ और चित्र हैं जिन्हें हॉकिंग्स के निर्देशन में बड़ी बारीक़ियों के साथ तैयार किया गयाI साल 2007 में उन्होंने अपनी बेटी लूसी के साथ मिलकर बच्चों के लिए एक विज्ञान की किताब लिखी जिसका नाम जॉर्ज’ज़ सीक्रेट के टू द यूनिवर्स (George’s Secret Key to the Universe) हैI साल 2010 में उनकी आखिरी किताब द ग्रैंड डिज़ाइन (The Grand Design) में उन्होंने इसकी पड़ताल की कि कैसे मानवजाति का ब्रह्माण्ड सम्बन्धी ज्ञान समय के साथ किस तरह विकसित होते हुए अपने मौजूदा स्वरुप तक पहुँचा हैI      

हॉकिंग्स को सामाजिक मुद्दों पर सोचने और बोलने में ख़ास दिलचस्पी थी जो अपने आप में विशिष्ट बात है क्योंकि वैज्ञानिक आमतौर पर ऐसे मुद्दों से बेज़ार ही रहते हैंI साल 1968 में वे वियतनाम युद्ध के विरोध में हज़ारों युवाओं के साथ रैली का हिस्सा बने I फिलीस्तीन के पक्ष में उन्हें जब राज़ी किया गया तो उन्होंने इज़रायल में होने वाले एक सम्मलेन में हिस्सेदारी से पीछे हट गयेI वे स्वास्थ सुविधाओं के सामाजिककीकरण के मुखर पक्षधर थे और ब्रिटिश एनएचएस (स्वास्थ कार्यक्रम) में कटौती का विरोध करते हुए उन्होंने कहा, ‘व्यवस्था से जितना मुनाफ़ा कमाया जाता है, उतनी ही निजी मोनोपॉली बढ़ती हैं और स्वास्थ सेवाएँ भी उतनी ही महँगी होती जा रही हैंI एनएचएस को व्यावसायिक स्वार्थ से बचाया जाना चाहिएI’ उन्होंने यूएस-यूके द्वारा साल 2014 इराक़ पर हमले की यह कहकर घोर निंदा की कि यह युद्ध अपराध है और झूठ पर आधारित हैI उन्होंने बार-बार समाज को चेताया कि हम जलवायु परिवर्तन को गंभीरता से नहीं समझ रहे हैंI और तो और पूँजीवाद का भी उनकी अपनी एक ख़ास आलोचना थी क्योंकि यह व्यवस्था सामाजिक ग़ैर-बराबरी को जन्म देती हैI इस बारे में उनका कहना था कि, ‘अगर मशीन-मालिक संपत्ति के [सामाजिक] वितरण के खिलाफ़ माहौल बनाते रहे तो ज़्यादातर लोग बेहद गरीब हो जायेंगे’I  

स्टीवन हॉकिंग्स की ज़िन्दगी और विचारों का सार उनके ही शब्दों में किया जा सकता है: ‘किसी ने ब्रह्माण्ड नहीं रचा और न ही कोई हमारी किस्मत निर्धारित करता हैI इस तथ्य से मैं एक विशिष्ट अनुभूति तक पहुँचा हूँI शायद कोई स्वर्ग नहीं है और न ही मौत के बाद कोई ज़िन्दगीI ब्रह्माण्ड के बृहत् डिज़ाइन को सराहने के लिए हमारे पास एक ही ज़िन्दगी है- और मैं इस अवसर के लिए बेहद शुक्रगुज़ार हूँ’I

स्टीवन हॉकिंग्स
ब्रह्माण्ड
ब्लैक होल

Related Stories


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License