NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
तिरछी नज़र: शराब भली चीज है, जी भर के पीजिए!
शराब जब वोट डालने से एक दो दिन पहले पिलाई जाये तो वह वोटर पटाने के लिए होती है पर जब उसका बंदोबस्त पूरे पांच साल के लिए किया जाये तो वह शराब और शराबियों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए ही होता है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
30 Jan 2022
liquor
प्रतीकात्मक तस्वीर

शराब भली चीज है, जी भर के पीजिए। लगता है मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार की यही सोच है। मध्यप्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति पेश की है जिसमें सरकार शराब से टैक्स कम कर उसकी कीमत कम करेगी। सरकार का बहुमत है। सरकार जो मरजी कर सकती है।

शराब का देश पर बहुत ही बड़ा अहसान है। पीछे क्या जाना, अभी कोरोना काल में भी शराब ने मनुष्य जाति पर, मानव सभ्यता पर बहुत बड़ा उपकार किया है। पूरे विश्व में कोरोना वायरस से लड़ने-बचने के लिए एल्कोहल यानी शराब को बचाव के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। और वह भी ऐसी वैसी शराब नहीं, सत्तर प्रतिशत शराब को। सारे के सारे सेनेटाइजरों में कम से कम सत्तर प्रतिशत शराब यानी एल्कोहल होना जरूरी है। इतनी मात्रा में एल्कोहल तो पीने वाली शराब के किसी भी ब्रांड में नहीं होती है। मतलब कोरोना-वायरस को मारने के लिए शराब की अधिक मात्रा की जरूरत होती है। आदमी तो बीस तीस प्रतिशत से ही टुन्न हो जाता है।

कोरोना से लड़ाई में शराब का योगदान हमारे देश में तो शेष विश्व से और अधिक रहा है। जब पहले लॉकडाउन में देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी तो वह शराब ही थी जिसने इसे सम्हाला था। लॉकडाउन खुलने में, अनलॉक की प्रक्रिया में, शराब के ठेकों को ही सबसे पहले खोला गया था। इससे राज्यों का खाली खजाना भरा था और भरपूर भरा था। कोई माने या न माने, पर बीजेपी और उसकी सरकारें शराब का यह अहसान ज़रूर मानती हैं।

इसी क्रम में पहले आंध्रप्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष जी ने वायदा किया था कि यदि राज्य के अगले विधानसभा चुनाव में, जो कि अभी दो वर्ष से भी अधिक दूर हैं, उनकी पार्टी जीती और उनकी सरकार बनी तो शराब से कर कम कर के उसकी कीमत घटायेंगे। और अब मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार ने भी ऐसी ही घोषणा की है। जो लोग इसे वोटर पटाने की नीति बता रहे हैं, वे भोले हैं। यह तो बीजेपी द्वारा शराब ने कोरोना काल में जो अहसान किए हैं, उनको उतारने के लिए उठाया जा रहा कदम है। शराब जब वोट डालने से एक दो दिन पहले पिलाई जाये तो वह वोटर पटाने के लिए होती है पर जब उसका बंदोबस्त पूरे पांच साल के लिए किया जाये तो वह शराब और शराबियों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए ही होता है।

बीजेपी गांधी जी के सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है। शराबबंदी के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध। यह शराब की कीमत कम करना बीजेपी की उसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शराब के दाम कम करना शराबबंदी की ओर उठाया गया एक कदम ही है। लोग शराब पीते हैं, स्टेटस के लिए। आदमी जितना अमीर होगा, उतनी ही महंगी शराब पीयेगा। और अमीर आदमी तो महंगी शराब में भी महंगा सोडा मिला कर ही पीता है। और गरीब मिलाता है, मुफ्त का पानी। सोडा वह अफोर्ड नहीं कर पाता है। मान लो, शराब की कीमत कम होते-होते इतनी कम हो जाये कि महंगी शराब भी पानी के दाम में ही मिलने लगे तो उसे पीयेगा कौन? तो शराब जब पानी के दाम की हो जायेगी तो लोग अपने आप ही शराब पीना छोड़ देंगे। पानी में पानी मिला कर क्या पीना। अमीर लोग भी नीट पीयेंगे, मतलब नीट सोडा। है ना नशाबंदी का नायाब नुस्खा।

शराब बहुत ही भली चीज है। इतनी भली कि पीने वाले को भी भला बना कर ही छोड़ती है। इतनी भली कि कभी भी माफी न मांगने वाला आदमी भी जब शराब के नशे में हो तो टक्कर लगने पर खंबे से भी माफी मांगता दिख जाता है। शराब सभी को जमीन से जोड़ देती है, इतना अधिक कि सूटेड-बूटेड आदमी भी जमीन पर लम्बलेट दिखता है। शराब जमीन आसमान का फर्क मिटा देती है। जो जमीन पर होता है उसे पल में आसमान पर और जो आसमान पर होता है उसे पल में जमीन पर पहुंचाने का काम सिर्फ और सिर्फ शराब ही कर सकती है। 

शराब के गुण तो अनेक है। शराब के गुणों को गिनाना तो सूरज को दीया दिखाना है। शराब का एक गुण है उसका दर्द निवारक होना। शराब किसी भी दर्द को चुटकी में गायब कर देती है। शराब दर्दे दिल को गायब करने में कितनी माहिर है, इस पर तो शायरों ने सैकड़ों रचनाएं लिख डाली हैं। शराब शायरों का इश्क और हुस्न के बाद सबसे लोकप्रिय विषय रहा है। शराब की कीमत कम होने से इसकी लोकप्रियता में और भी चार चांद लग जायेंगे। हो सकता है थीरे धीरे लुप्त होती उर्दू शायरी भी दोबारा जिंदा हो जाये। वैसे बीजेपी की ऐसी मंशा बिल्कुल भी नहीं है।

ऐसा नहीं है कि शराब सिर्फ दर्दे दिल को ही राहत देती है, यह घुटने के दर्द में भी बहुत ही फायदेमंद है। अगर शादी ब्याह या किसी अन्य फैमली फंक्शन में नाचते गाते घुटने में दर्द हो जाए तो शराब एक अच्छा दर्द निवारक है। ऐसा मैं डाक्टर होने के नाते नहीं कह रहा हूं, ऐसा तो हाल में ही एक टीवी एंकर ने जनरल रावत को श्रद्धांजलि देने के बाद बताया था।‌ अब इतनी गुणी शराब गरीब जनता की पहुंच से बाहर रहे, यह पार्टी और सरकार को गवारा नहीं है। तो इसीलिए पार्टी और सरकार चाहती है कि शराब की कीमत घटाई जाए।

शराब के गुण कहां तक गिनाएं। गुण गिनाते गिनाते पेज पर पेज भर जायेंगे पर गुण समाप्त नहीं होंगे। बस हम एक और गुण की बात कर अपनी बात खत्म करेंगे। शराब के इसी गुण की वजह से जनता के हित में काम करने वाली भारतीय जनता पार्टी पेट्रोल डीजल, रसोई गैस, खाने के तेल और सब्जियों की महंगाई से परेशान नहीं है, उनकी महंगाई कम करने की बात नहीं कर रही है। उसे परेशानी हो रही है शराब की कीमतों से। क्योंकि शराब पी कर रंक भी राजा बन जाता है और अपनी गरीबी भूल जाता है। बेरोजगार भी किसी जिले का डीएम बन औरों को रोजगार दिलाने लगता है। शराब महंगाई के गम को गलत करने का काम भी करती है। मतलब शराब की कीमत कम करने से महंगाई, बेरोज़गारी, गरीबी, सब खत्म। इतनी अच्छी चीज की कीमत कम न की जाए तो क्यों न की जाए। 

शराब इतनी महिमामयी है कि दिन रात गाय के गुण गाने वाली पार्टी को भी, गाय के नाम पर वोट मांगने वाले दल को भी, शराब के दाम कम करने की सोचनी पड़ रही है। क्या आपने कभी सुना है कि बीजेपी, पार्टी या सरकार ने कभी भी गाय के दूध की कीमत कम करने के बारे में सोचा है। चलो, शराब के दाम कम करने के बारे में तो सोचा। महंगी शराब की महंगाई के बारे में तो सोचा। सोचा तो सही। महंगाई के बारे में सोचा, चाहे शराब के बहाने ही सोचा। इसीलिए तो शराब भली चीज है।

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं)

Satire
Votebank Politics
Illegal liquor

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं


बाकी खबरें

  • UP
    सरोजिनी बिष्ट
    'यूपी मांगे रोज़गार अभियान' के तहत लखनऊ पहुंचे युवाओं पर योगी की पुलिस का टूटा क़हर, हुई गिरफ़्तारियां
    03 Dec 2021
    हाथों में बैनर, तख्तियां लिए युवाओं ने मार्च तो निकाला लेकिन विधानसभा पहुंचने से पहले ही पुलिस ने इनकी गिरफ्तारियां करनी शुरू कर दी। आरोप है कि इन युवाओं की पुलिस ने बर्बर तरीके से पिटाई की।
  • bihar
    राहुल कुमार गौरव
    ग्राउंड रिपोर्ट : किडनी और कैंसर जैसे रोगों का जरिया बनता बिहार का पानी
    03 Dec 2021
    इस रिसर्च के मुताबिक बिहार के 6 जिलों(पटना, नालंदा, नवादा, सारण, सिवान एवं गोपालगंज) के पानी में यूरेनियम की मात्रा मानक से दोगुने से ज्यादा मिली है। पहले भी इस जिले के पानी में आर्सेनिक की मात्रा हद…
  • US
    जुआन ग्रैबोइस
    अर्जेंटीना कांग्रेस में अमेरिकन एक्सप्रेस की बेशुमार ख़रीदारी
    03 Dec 2021
    जैसे ही अमेरिकन चेम्बर ऑफ कॉमर्स (एमचैम) ने महसूस किया कि पैकेजिंग कानून अर्जेंटीना में उनका प्रतिनिधित्व करने वाली कंपनियों के मुनाफे के लिए खतरा पैदा कर सकता है, उन्होंने कानून को कमजोर करने के लिए…
  •  Aligarh
    मोहम्मद सज्जाद
    अलीगढ़ के एमएओ कॉलेज में औपनिवेशिक ज़माने की सत्ता का खेल
    03 Dec 2021
    अलीगढ़ आंदोलन और औपनिवेशिक उत्तर भारतीय मुस्लिम अभिजात वर्ग के इतिहास पर मौजूदा साहित्य में इफ़्तिख़ार आलम ख़ान का अहम योगदान।
  • parliament
    एम श्रीधर आचार्युलु
    भारतीय संसदीय लोकतंत्र का 'क़ानून' और 'व्यवस्था'
    03 Dec 2021
    बिना चर्चा या बहस के संसद से वॉकआउट, टॉक-आउट, व्यवधान और शासन ने 100 करोड़ से अधिक भारतीय नागरिकों की आकांक्षाओं को चोट पहुंचाई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License