NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
अंतरराष्ट्रीय
सन्नाटा बरस रहा है देश में...
“सन्नाटा शोर मचाता/ मेरे भीतर धंस रहा है/ घाव देते दृश्य/ दर्द के जलते-सुलगते, बिलखते बिंब…।” ‘इतवार की कविता’ में आज पढ़ते हैं इस ‘कोरोना समय’ की सच्चाई को उकेरती वरिष्ठ कवि और संस्कृतिकर्मी शोभा सिंह की लंबी कविता के कुछ अंश।
न्यूज़क्लिक डेस्क
26 Apr 2020
सन्नाटा
प्रतीकात्मक तस्वीर

शहर ही नहीं

पूरा देश बंद है

यह कोरोना वायरस का सन्नाटा

कोरोना संक्रमण का ख़ौफ़

आतंक की गिरफ़्त

दिनों दिन कसती हुई

फंसी अमीर की जान भी

वही तो इसके वाहक थे

रातों रात

बिना मुकम्मल तैयारी के

लॉकडाउन घोषित किया गया

चक्के जाम, कोई धंधा-रोज़गार नहीं

घरों में सिमटी हलचल

अधिकांश लोग एक-दूसरे से डरे हुए

उनकी संवेदनहीनता

संबंधों में दरार डालती

धर्म से आस्था डिगे नहीं

प्रशासन धार्मिक सीरियलों का

पुनः प्रसारण करवाता

ताली और थाली बजवाकर

समर्थन मूल्य आंकता

हुक्म के फ़रमाबरदार

सांप्रदायिकता का वायरस फैलाते

हुक्मरान का

एजेंडा आगे बढ़ाते

 

ग़रीब मज़दूर, स्वरोज़गारी, मेहनतकश

ग़लत सरकारी नीतियों का शिकार

होते बदहाल

काम नहीं, घर नहीं, रोटी नहीं

जाएं कहां

श्रम की लूट करने वाले

मालिक ने फ़रमाया

प्रवासी तू आज़ाद है

असहायता के भंवर से

परिवार को निकालने की जद्दोजेहद

चुनी हुई सरकार से सवाल नहीं

पूछ सकते

सरकारी गोदाम अनाज से भरे हैं

और वे भूख की आग में जल रहे हैं

क्यों, कोई जवाब देने वाला नहीं

सुनने वाला नहीं

बाहर पुलिस है लाठी है दंड है

सत्ता की प्राथमिकता तय है

साधनहीन भूखे अपने बच्चों के साथ

शहर के कामगारों के क़ाफ़िले

लौट रहे

अपनी जड़ों की ओर

भूख के विरुद्ध

अपनी माटी की ओर

जीवन की आशा लिए

हर क़दम अड़चन

दुत्कार

देह पर केमिकल की गलन

झेलते

अपने मुल्क में ही

बे-वतन होने का एहसास

वैसे ही बढ़ता जाता

जैसे जाने वालों की कतारें

सन्नाटा शोर मचाता

मेरे भीतर धंस रहा है

घाव देते दृश्य

दर्द के जलते-सुलगते, बिलखते बिंब

बातें दिल पर नक़्श

मज़दूर के आत्मसम्मान -गरिमा को

नष्ट किया जा रहा है

उन्हें मंगतों की कतार में खड़ा किया गया

कोरोना से मरने से पहले

भूख से मर जाएंगे

हम...

सत्ता की संवेदनहीनता से

जड़ ख़ामोशी से

उम्मीद के पत्ते

झरते जाते हैं

निःशब्द

फिर नये पत्ते फूट पड़ते हैं

स्मृति में

सर्वहारा का अद्म्य साहस

जिजिविषा

विराट रूप में स्थिर है

वे जो सोचते हैं सब कुछ

सहज सुंदर बनाते हैं हमारा संसार

वे लौटेंगे

तोड़ते जड़ सन्नाटे को

...

-    शोभा सिंह

इसे भी पढ़े : मुंह को ढक लो मगर ज़ेहन को खोल लो...

इसे भी पढ़े : अब आप यहाँ से जा सकते हैं, यह मत पूछिए कि कहाँ जाएँ...

Coronavirus
Lockdown
Sunday Poem
Hindi poem

Related Stories

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

...हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!

इतवार की कविता: जश्न-ए-नौरोज़ भी है…जश्न-ए-बहाराँ भी है

इतवार की कविता: के मारल हमरा गांधी के गोली हो

इतवार की कविता: सभी से पूछता हूं मैं… मुहब्बत काम आएगी कि झगड़े काम आएंगे

कटाक्ष: नये साल के लक्षण अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं...


बाकी खबरें

  • बी. सिवरामन
    खाद्य मुद्रास्फीति संकट को और बढ़ाएगा रूस-यूक्रेन युद्ध
    04 Apr 2022
    सिर्फ़ भारत में ही नहीं, खाद्य मुद्रास्फीति अब वैश्विक मुद्दा है। यह बीजिंग रिव्यू के ताजा अंक की कवर स्टोरी है। संयोग से वह कुछ दिन पहले न्यूयॉर्क टाइम्स की भी एक प्रमुख कहानी बन गई।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: सांप्रदायिकता का विकास क्या विकास नहीं है!
    04 Apr 2022
    वो नेहरू-गांधियों वाला पुराना इंडिया था, जिसमें सांप्रदायिकता को तरक्की का और खासतौर पर आधुनिक उद्योग-धंधों की तरक्की का, दुश्मन माना जाता था। पर अब और नहीं। नये इंडिया में ऐसे अंधविश्वास नहीं चलते।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों के सामने ही ख़ाक हो गई उनकी मेहनत, उनकी फसलें, प्रशासन से नहीं मिल पाई पर्याप्त मदद
    04 Apr 2022
    "हमारी ज़िंदगी ही खेती है। जब खेती बर्बाद होती है तो हमारी समूची ज़िंदगी तबाह हो जाती है। सिर्फ़ एक ज़िंदगी नहीं, समूचा परिवार तबाह हो जाता है। पक चुकी गेहूं की फसल की मडाई की तैयारी चल रही थी। आग लगी…
  • भाषा
    इमरान खान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
    04 Apr 2022
    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर नेशनल असेंबली (एनए) को भंग कर दिया है। इससे कुछ ही देर पहले नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री के…
  • शिरीष खरे
    कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?
    04 Apr 2022
    महाराष्ट्र के पिलखाना जैसे गांवों में टीकाकरण के तहत 'हर-घर दस्तक' के बावजूद गिने-चुने लोगों ने ही कोविड का टीका लगवाया। सवाल है कि कोविड रोधी टीकाकरण अभियान के एक साल बाद भी यह स्थिति क्यों?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License