NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
शीर्ष कोर्ट के फ़ैसले से ख़तरे में आए थाईलैंड के लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन
तीन सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुनवाई के दौरान संवैधानिक कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजशाही में सुधार की मांग, राजशाही को उखाड़ फेंकने की मांग की तरह है। सामाजिक कार्यकर्ताओं को डर है कि चान-ओ-चा की सरकार इनका इस्तेमाल विपक्षियों और मौजूदा प्रदर्शनों पर करेगी।
पीपल्स डिस्पैच
13 Nov 2021
Sweeping top court judgment endangers Thailand’s pro-democracy protests
राजशाही में सुधार की मांगों को प्रभावी तौर पर आपराधिक बनाने के संवैधानिक कोर्ट के फ़ैसले के बाद, बैंकॉक में कोर्ट के बाहर स्थित लोकतंत्र के प्रतीक चिन्ह को आग लगा दी गई। (फोटो: प्राचाताई)

एक एकतरफा आदेश में थाईलैंड के संवैधानिक कोर्ट ने कहा है कि लोकतंत्र समर्थित प्रदर्शन और राजशाही में सुधार की अपीलें, थाईलैंड की राजशाही को उखाड़ने की कोशिश हैं। बुधवारस 10 नवंबर को पारित किया गया यह आदेश, राजद्रोह के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे तीन युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुनवाई के दौरान दिया गया।

एनॉन नाम्पा, पानुपांग माइक जेडनॉक और पानुसाया रंग शिथिजिरावात्तनाकुल के ऊपर राजशाही में सुधार और बैंकॉक की थाम्मासात यूनिवर्सिटी में 10 अगस्त 2020 को हुए प्रदर्शन के बाद बनाई गई सरकार में सुधार करने की अपील के चलते राजद्रोह का मुक़दमा लगाया गया था। 

यह प्रदर्शन तीन राजद्रोह के कानूनों (आपराधिक सहिंता की धारा 112) के खिलाफ़ हुए पहले विरोध प्रदर्शन थे। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर थाईलैंड की राजशाही का विरोध किया गया। धारा 112 के तहत तीन से लेकर पंद्रह साल तक की जेल हो सकती है। यह दुनिया में इस तरह के कानूनों में सबसे ज़्यादा सजा है। प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अबतक 150 लोगों पर यह धारा लगाई जा चुकी है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इन तीन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जो वक्तव्य और भाषण दिए, साथ ही कार्यक्रम के दौरान और बाद में जो प्रतीकात्मक कदम उठाए, उनमें राजशाही और सरकार को उखाड़ फेंकने की मंशा है। फ़ैसले में कहा गया, "कोई भी कदम जिससे संस्थान (राजशाही) कमजोर होती है या उसकी अवमानना की जाती है, वह राजशाही को खत्म करने की मंशा बताता है।"

जिन वक्तव्यों के आधार पर इन तीनों पर मुकदमा चलाया गया था, उसमें थम्मासत यूनिवर्सिटी में युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा रखा गया मांगों का चार्टर भी शामिल है। चार्टर में धारा 112 हटाने के साथ-साथ राज परिवार की कई अरबों डॉलर की संपत्ति और संपदा में ज़्यादा पारदर्शिता, राजसी बैरक को नागरिक सरकार के हवाले करने और प्रयुत चान-ओ-चा से बतौर पर प्रधानमंत्री इस्तीफ़े की मांग रखी गई थीं। 

कोर्ट ने तीनों कार्यकर्ताओं और दूसरे "संगठन व नेटवर्कों" को सत्ता को उखाड़ने की गतिविधियों को रोकने के लिए भी कहा। इन संगठनों और नेटवर्क पर कोई भी स्पष्टता नहीं है, सामाजिक कार्यकर्ताओं को अंदेशा है कि इस फ़ैसले का इस्तेमाल सैन्य समर्थित प्रायुत-ओ-चान की सरकार लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों और राजशाही में सुधार की मांग करने वालों के खिलाफ़ कर सकती है।

तीनों सामाजिक कार्यकर्ताओं पर नात्थापोर्न टोप्रायून की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था। टोप्रायून, ओम्बड्समैन के पूर्व सलाहकार और प्रधानमंत्री प्रायुत चान-ओ-चा के कट्टर समर्थक हैं। इससे पहले नात्थापोर्न, पहले विपक्ष में रही फ्यूचर फॉरवर्ड पार्टी के खिलाफ़ याचिका में भी शामिल थे, जिसमें उनके ऊपर देशद्रोह के आरोप लगाए गए थे।   

पिछले साल संवैधानिक कोर्ट ने फ्यूचर फॉरवर्ड पार्टी को बरी कर दिया, लेकिन कोर्ट ने पार्टी को कुछ हफ़्ते बाद ही कैंपेन से जुड़े धन को लेकर आरोपों पर खत्म कर दिया। संवैधानिक कोर्ट का सैन्य समर्थित फ़ैसले लेने, पार्टियों को ख़त्म करने, यहां तक कि चुनी हुई सरकारों को भी ख़त्म करने का लंबा इतिहास रहा है।

इन तीन सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ़ लगाई गई मूल याचिका में पांच दूसरे युवा आंदोलनकारी नेता भी शामिल थे, जिन्होंने थाम्मासेट में प्रदर्शन आयोजित कराने में मदद की थी। लेकिन इस साल की शुरुआत में कोर्ट ने सिर्फ़ इन्ही तीनों पर मुक़दमा चलाने को कहा, क्योंकि इन्हीं तीनों पर राजशाही के खिलाफ़ सार्वजनिक वक्तव्य देने का आरोप लगाया जा सकता है। 

एनॉन नाम्पा और पानुपांग जाडनोक को हिरासत से पहले ही तीन महीनें तक अलग-अलग आरोपों में हिरासत में रखा गया था। इनमें राजद्रोह भी शामिल था। तीनों कार्यकर्ताओं के वकील प्राचाताई के मुताबिक़ कोर्ट ने इन तीनों की कोई भी बात नहीं सुनी। ना ही इन तीनों द्वारा सुझाए गए गवाब विशेषज्ञों को सुना गया। 

सुनवाई, तीनों कार्यकर्ताओं को सुने बिना आगे चलती रही और कोर्ट ने मूल शिकायत और कोर्ट द्वारा जांच के बाद सामने आए सबूतों के संलग्न दस्तावेजों के आधार पर ही फ़ैसला सुना दिया। 10 नवंबर को सुनवाई के दौरान नाम्पा और जादनोक ने कोर्टरूम के बाहर इंतज़ार करने का फ़ैसला किया। मतलब कोर्ट में सिर्फ़ पानासूया ही उपस्थित थे।  

राजशाही सुधारों की वकालत करने वाले समूहों में से एक थालुफाह के मुताबिक़, "संवैधानिक कोर्ट द्वारा इस तरीके से फ़ैसला दिया जाना, यह बताता है कि वह मानते हैं कि देश के ऊपर एक निरंकुश तानाशाही का शासन है।"

द स्टेंडर्ड के साथ एक इंटरव्यू में पियाबुतर साएनगकानोक्कुल ने भी इस बात की तरफ ध्यान दिलाया कि यह फ़ैसला प्रदर्शनों को आगे बढ़ाने को आपराधिक बनाता है और इससे सुधारों की मांग करने वाले सभी वर्ग प्रभावित होंगे। पियाबुतर प्रगतिशील आंदोलन के महासचिव हैं।

उन्होंने कहा, "अगर आप मुश्किल क्षेत्र में प्रवेश करना नहीं चाहते, तो राजशाही के सुधार की मांग मत करिए। बोलिए मत। इस मुद्दे को छुएं नहीं। कुछ भी ना करें। तभी आप सुरक्षित रह सकेंगे। आपकी पार्टी का खात्मा नहीं होगा। आपके सांसद बने रह सकते हैं। आपके ऊपर आपराधिक धाराएं नहीं लगाई जाएंगी। सार्वजनिक भाषणों में आपको इसके बारे में नहीं बोलना चाहिए। सिर्फ़ प्रायुत को हटाने के बारे में बोलिए। राजशाही से जुड़े मुद्दों पर मत बोलिए और आप सुरक्षित रहेंगे।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

Anon Nampa
Constitutional Court of Thailand
Lèse-majesté
Panupong Mike JadnokPanusaya
political repression
Prayut Chan-o-cha
Pro-democracy movement in Thailand
Progressive Movement Thailand
protests in thailand
Thai Lawyers for Human Rights
Thai monarchy
Thalufah

Related Stories

क्या भारत भी कुछ सीखेगा: मास्क नहीं पहनने पर थाईलैंड के प्रधानमंत्री पर जुर्माना

थाईलैंड के प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की हिंसात्मक कार्रवाई

थाईलैंड : आपातकाल की घोषणा को चुनौती देते हुए प्रदर्शनकारियों ने बड़ी रैलियां आयोजित की

बैंकॉक में सरकार-विरोधी प्रदर्शन में हज़ारों लोग सड़क पर उतरे

COVID-19 से संक्रमण में वृद्धि के चलते थाईलैंड ने आंशिक कर्फ्यू लागू किया


बाकी खबरें

  • aicctu
    मधुलिका
    इंडियन टेलिफ़ोन इंडस्ट्री : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ख़राब नियोक्ताओं की चिर-परिचित कहानी
    22 Feb 2022
    महामारी ने इन कर्मचारियों की दिक़्क़तों को कई गुना तक बढ़ा दिया है।
  • hum bharat ke log
    डॉ. लेनिन रघुवंशी
    एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता
    22 Feb 2022
    सभी 'टूटे हुए लोगों' और प्रगतिशील लोगों, की एकता दण्डहीनता की संस्कृति व वंचितिकरण के ख़िलाफ़ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगा, जो इस प्रणाली से लाभ उठाते…
  • MGNREGA
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ग्रामीण संकट को देखते हुए भारतीय कॉरपोरेट का मनरेगा में भारी धन आवंटन का आह्वान 
    22 Feb 2022
    ऐसा करते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र ने सरकार को औद्योगिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर आने की उसकी उम्मीद के खिलाफ आगाह किया है क्योंकि खपत की मांग में कमी से उद्योग की क्षमता निष्क्रिय पड़ी हुई है। 
  • Ethiopia
    मारिया गर्थ
    इथियोपिया 30 साल में सबसे ख़राब सूखे से जूझ रहा है
    22 Feb 2022
    इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 70 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है क्योंकि लगातार तीसरी बार बरसात न होने की वजह से देहाती समुदाय तबाही झेल रहे हैं।
  • Pinarayi Vijayan
    भाषा
    किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन
    22 Feb 2022
    विजयन ने राज्य विधानसभा में कहा, ‘‘केरल विभिन्न क्षेत्रों में कहीं आगे है और राज्य ने जो वृद्धि हासिल की है वह अद्वितीय है। उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक हितों के साथ की गयी अनुचित टिप्पणियों के तौर पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License