NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तमिलनाडु : प्रिकोल मज़दूरों के साथ धोखा! हड़ताल खत्म कराके दूसरे राज्यों में तबादले
प्रबंधन के आश्वासन कि किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, मज़दूर काम पर लौटे, लेकिन इसके बाद प्रबंधन ने अपना ही आश्वासन तोड़ दिया। यूनियन का कहना है कि वह 10 दिसंबर को होने वाली बैठक में भविष्य की रणनीति तय करेगी।
निलीना एस.बी
07 Dec 2018
precol workers

चेन्नई: तमिलनाडु राज्य श्रम विभाग के निर्देश और कोयंबटूर में स्थित ऑटोमोटिव घटकों के निर्माता के प्रबंधन के साथ बनी कुछ मांगों पर सहमति के बाद हड़ताल के 100 दिनों के बाद, प्रिकोल के मज़दूरों ने मंगलवार को अपनी हड़ताल समाप्त कर दी, लेकिन उनकी यह जीत कुछ वक्त रही क्योंकि उनमें से 300 से अधिक को स्थानांतरण आदेश दे दिए गए।
ये श्रमिक, कोवाई मनीला प्रिकोल थोजिलालगार्गल ओटुमाई संगम (केएमपीटीओएस)  जो ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (ऐक्टू) से संबद्ध है, का हिस्सा हैं – वह प्रबंधन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ 100 दिनों से अधिक से आंदोलन में थे।
प्रबंधन के साथ एक समझौते के बाद, जब मजदूर काम पर वापस गए, तो आंदोलन में शामिल हुए कुछ सक्रिय 302 मज़दूरों को आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में स्थानांतरण के आदेश दे दिए गए। प्रबंधन द्वारा स्पष्टीकरण यह था कि हड़ताल ने कंपनी को 'गंभीर' नुकसान पहुंचाया है इसलिए उन्हें स्थानांतरित किया जा रहा है, क्योंकि कंपनी उनके रोजगार को बचाना चाहती है। श्रमिकों को इन अन्य राज्यों में स्थानांतरित होने के लिए तीन सप्ताह का वक्त दिया गया है।
संयोग से, प्रबंधन को श्रम विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर सहमत होने बाद हड़ताल को बंद किया गया था, जैसे कि विरोध करने वाले श्रमिकों के साथ मुनाफा साझा करना और बोनस की बकाया राशि का निपटारा करना, विरोध करने वाले श्रमिकों को लंबित भत्ते देना, और यह सुनिश्चित करना कि किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
इन आश्वासनों के बाद ही श्रम विभाग ने श्रमिकों से जल्द से जल्द कंपनी में वापस काम पर आने को कहा। लेकिन, प्रबंधन अपने शब्दों पर खरा नही उतरा, जबकि श्रमिक अपने वादे पर अटल रहे और काम पर लौट आए लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि एक भयानक सदमा उनके इंतजार में है।
न्यूज़क्लिक से बात करते हुए, एआईसीसीटीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के एस कुमारस्वामी ने कहा कि प्रिकोल में श्रमिकों का उत्पीड़न निरंतर जारी है। "कोई भी कह सकता है कि पूंजी का काम करने का यह सामान्य तरीका  हैं। श्रमिकों ने महसूस किया कि उनका लंबे समय तक शोषण और उत्पीड़न किया जा रहा था। हम 10 दिसंबर को श्रमिकों की एक जनरल बॉडी बैठक करेंगे और भविष्य की कार्रवाई का फैसला करेंगे। "

प्रिकोल हड़ताल क्यों हुयी 

यह पहली बार नहीं है कि प्रीकोल कर्मचारियों को प्रबंधन के दंडनीय हमलों का सामना करना पड़ रहा है। 2007 से, मजदूर नौकरी सुरक्षा, सामूहिक सौदा करने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की मान्यता के संबंध में अपनी चिंताओं को उठाने की कोशिश कर रहे हैं। निरंतर संघर्षों के चलते 2011 में उनकी यूनियन को मान्यता मिली।
तब से कंपनी ने कई संघर्ष देखे हैं और 2012 और 2013 में प्रबंधन श्रमिकों की मांगों के अनुरूप रहा। लेकिन फिर इसने मजदूरों पर हमले शुरू कर दिए, जिससे 27 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिन्हें साजिश और हत्या के लिए गिरफ्तार किया गया था। जबकि उनमें से महिलाओं समेत 25 को अदालत द्वारा बरी कर दिया गया था, दो यूनियन पदाधिकारी अभी भी जेल में हैं।
संघर्ष ने अप्रैल 2017 में एक और मोड़ लिया, जब प्रिकोल के मज़दूरों ने पूरे देश में संकट से जूझ रहे किसानों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करने के लिए एक दिवसीय हड़ताल की। उस समय किसानों में आत्महत्याएं बढ़ रही थीं और तमिलनाडु भी इसका शिकार था।
2012 में एक समझौते के मुताबिक, मजदूर अपनी व्यक्तिगत ज़रूरत के लिए एक दिन का समय निकाल सकते हैं और इसे काम के वैकल्पिक दिन के साथ तय कर सकते हैं। लेकिन प्रबंधन ने श्रमिकों को हड़ताल के खिलाफ चेतावनी दी और दंडनीय उपाय किए। श्रमिकों ने एक दिवसीय हड़ताल के लिए आठ दिन का वेतन खो दिया!
इसके अलावा, युनियन में सक्रिय मज़दूरों ने भी वित्तीय प्रतिक्रिया का सामना करना शुरू कर दिया। कुछ मज़दूरों ने कहा कि कंपनी ने आंदोलित मज़दूरों के भत्ते का कम भुगतान करके दूसरों मज़दूरों के मुकाबले भेदभाव करना शुरू कर दिया था। औसतन उन्हें 21,000-23,000 रुपये का वेतन मिला। बोनस और लाभ का  शेयर मिलाकर औसत अंतर कंपनी में विरोध करने वाले श्रमिकों और गैर-विरोध करने वालों के बीच 40,000 रुपये का था।
एक समय पर, दो यूनियन पदाधिकारियों को 10 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया था, क्योंकि फैक्ट्री परिसर के बाहर यूनियन का झंडा फहराया गया था।
इस संदर्भ में यूनियन ने जुलाई 2018 में एक नए समझौते के लिए दबाव डाला था। लेकिन प्रबंधन ने उनकी मांगों को नजरअंदाज कर दिया। 13 अगस्त को श्रमिकों ने एक चेतावनी हड़ताल की, जिसके बाद प्रबंधन ने आंशिक रूप से 144 को बंद कर दिया। इस वजह से 21 अगस्त को 100 दिन की हड़ताल शुरू हुई।

tamil nadu
pricol
precol workers
pricol protest
workers protest
Workers Strike
AICCTU
kmptos

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

लुधियाना: PRTC के संविदा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

तमिलनाडु : विकलांग मज़दूरों ने मनरेगा कार्ड वितरण में 'भेदभाव' के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया

विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!


बाकी खबरें

  • भाषा
    हड़ताल के कारण हरियाणा में सार्वजनिक बस सेवा ठप, पंजाब में बैंक सेवाएं प्रभावित
    28 Mar 2022
    हरियाणा में सोमवार को रोडवेज कर्मी देशव्यापी दो दिवसीय हड़ताल में शामिल हुए जिससे सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बाधित हुईं। केंद्र की कथित गलत नीतियों के विरुद्ध केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त मंच ने…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: “काश! हमारे यहां भी हिंदू-मुस्लिम कार्ड चल जाता”
    28 Mar 2022
    पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल और इस्लामिक देश है। अब संकट में फंसे इमरान ख़ान के सामने यही मुश्किल है कि वे अपनी कुर्सी बचाने के लिए कौन से कार्ड का इस्तेमाल करें। व्यंग्य में कहें तो इमरान यही सोच रहे…
  • भाषा
    केरल में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत लगभग सभी संस्थान बंद रहे
    28 Mar 2022
    राज्य द्वारा संचालित केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की बसें सड़कों से नदारत रहीं, जबकि टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और निजी बसें भी राज्यभर में नजर नहीं आईं। ट्रक और लॉरी सहित वाणिज्यिक वाहनों के…
  • शिव इंदर सिंह
    विश्लेषण: आम आदमी पार्टी की पंजाब जीत के मायने और आगे की चुनौतियां
    28 Mar 2022
    सत्ता हासिल करने के बाद आम आदमी पार्टी के लिए आगे की राह आसन नहीं है। पंजाब के लोग नई बनी सरकार से काम को ज़मीन पर होते हुए देखना चाहेंगे।
  • सुहित के सेन
    बीरभूम नरसंहार ने तृणमूल की ख़ामियों को किया उजागर 
    28 Mar 2022
    रामपुरहाट की हिंसा ममता बनर्जी की शासन शैली की ख़ामियों को दर्शाती है। यह घटना उनके धर्मनिरपेक्ष राजनीति की चैंपियन होने के दावे को भी कमज़ोर करती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License