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तेलंगाना से यूपी तक : कहां है बेहतर कानून व्यवस्था, कहां है महिला सुरक्षा?
महिलाओं के साथ यौन-हिंसा और  उत्पीड़न की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं। हैदराबाद की दिल दहलानेे वाली घटना के बाद बेहतर कानून व्यवस्था का दावा करने वाली योगी सरकार के उत्तर प्रदेश में दो दलित नाबालिगों के साथ दुराचार की घटना सामने आई है।
सोनिया यादव
30 Nov 2019
stop rape
Image courtesy: Social Media
न ली जाए बेटियों की जान
है आज़ादी
बेटियों का भी हो सम्मान
है आज़ादी
न हो कन्याओं का दान
है आज़ादी
हो बेटियां भी खानदान की शान
है आज़ादी

ये पंक्तियां लंबे समय से महिला अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वालीं कमला भसीन की कविता की हैं। आज देश में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। उनकी आज़ादी खतरे में है। तमाम सुरक्षा दावों के बावजूद दुराचार की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हालात ये हैं कि अभी हम एक सदमें से उबर नहीं पाते कि दूसरी घटना हो जाती है। 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद सड़कों पर जन सैलाब देखने को मिला था लेकिन आज भी हमारे हालात जस के तस बने हुए हैं।

शुक्रवार, 29 नवंबर को देश के सामने हैदराबाद से दिल दहला देने वाली खबर आई, जहां एक वेटनरी डॉक्टर के साथ कथित सामूहिक बालात्कार के बाद उसे आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद झारखंड़ की राजधानी रांची, केरल के कूडल्लूर और फिर हैदराबाद से ही एक और दुष्कर्म की खबरों ने हिला कर रख दिया। वहीं इन बड़े शहरों की घटनाओं के बीच उत्तर प्रदेश के दो जिलों में भी दलित नाबालिगों के साथ दरिंदगी की वारदातें भी सामने आई हैं।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के मनियर थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग दलित किशोरी का अपहरण कर उससे कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया गया। इस मामले के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक संजय यादव ने शुक्रवार, 29 नवंबर को मीडिया को बताया कि 15 साल की किशोरी का पिछले दिनों अपहरण कर लिया गया। इसके बाद उसे हरियाणा के पानीपत ले जाकर उसके साथ कथित रूप से रेप किया गया।
उन्होंने बताया कि शारदा नंद राम की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), पॉक्सो कानून एवं अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।

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वहीं दूसरा मामला हरदोई से सामने आया जहां दरिंदों ने सात साल की दलित बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी। शव गांव के बाहर झाड़ियों में पड़ा मिला। मासूम के गले में चोटों के निशान पाए गए हैं। तनाव को देखते हुए गांव में भारी फोर्स तैनात की गई है। लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक घटना की एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई है।

इस मामले के संबंध में एसपी आलोक प्रियदर्शी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही खुलासा किया जाएगा।

स्थानीय पत्रकार पवन सिंह ने न्यूज़क्लिक से बतचीत में कहा, घटना गुरुवार, 28 नवंबर की है। रात सुरसा के गांव में मल्लावां से बारात आई थी। उसमें शामिल होने एक किसान परिवार की बच्ची रात करीब 8:30 बजे गई थी। रात 10 बजे वह घर आ गई। इसके बाद दोबारा बारातियों का डांस देखने चली गई। रात करीब साढ़े दस बजे के बाद वह लापता हो गई। देर रात 11 बजे तक घर वापस नहीं लौटी तो बरसात शुरू होने पर परिजनों को चिंता हुई। सभी ने काफी तलाश की पर उसका कुछ भी पता नहीं चला। सुबह करीब पांच बजे गांव के बाहर झाड़ियों में उसका शव मिला।

मृतक बच्ची के परिजनों ने बताया कि परिवार में चार बच्चे हैं, जिसमें मृतका तीसरे नंबर की थी। उनकी किसी से रंजिश नहीं है। अर्द्धनग्न हालत में मिली बच्ची के कपड़े अस्त-व्यस्त थे। शरीर पर चोटों के निशान हैं। दुष्कर्म करने के बाद उसे गला दबाकर मार दिया गया। आरोप है कि बारात में आए कुछ नशेबाजों ने घटना को अंजाम दिया।

महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली प्रत्याक्षा सिन्हा ने न्यूज़क्लिक से कहा, 'सरकारें चाहें जितना कानून व्यवस्था का दावा कर लें हकीकत यही है कि सरकारों के अंदर ही खोखला प्रशासन है। ये लोग खुद अपराधियों को बचाने वाले हैं कुलदीप सिंह सेंगर और स्वामी चिंमयानंद का मामला हमारे सामने हैं। घिनौने अपराधों में भी पक्ष-विपक्ष, हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने लगते हैं। उनके मंत्री नारी विरोधी भाषण देते हैं और उनका कोई कुछ नहीं करता'।

गौरतलब है कि प्रदेश में बीजेपी की योगी सरकार 2017 से सत्ता में है लेकिन कानून-व्यवस्था के अन्य मोर्चों के साथ ही सरकार महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी नाकाम ही रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में महिलाओं के प्रति अपराध पूरे देश में सबसे ज़्यादा हैं। वर्ष 2017 में यूपी में महिलाओं के प्रति कुल 56,011 अपराध दर्ज हुए जबकि पूरे देश में उस वर्ष ऐसे कुल 3.60 लाख अपराध दर्ज किए गए थे। वर्ष 2015 में प्रदेश में महिलाओं के प्रति कुल 35908 और 2016 में 49,262 अपराध दर्ज किए गए थे। इनमें से 2524 मामले दहेज हत्या, 12,600 घरेलू हिंसा और 15,000 अपहरण के मामले थे। 2017 में प्रदेश में बलात्कार के कुल 4246 मामले दर्ज हुए। ऐसे में ये सवाल उठना लाज़मी है कि बेहतर कानून व्यवस्था का ढोल पीटने वाली योगी सरकार में महिला सुरक्षा कहां है?

समाजसेवी कमला भसीन ने सोशल मीडिया पर महिलाओं के साथ हो रही हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'मुझे गुस्सा और रोना दोनों आ रहा है। हमारे समाज में जब तक पितृसत्ता की सोच समाज से नहीं मिटेगी, तब तक महिलाओं को उनका हक नहीं मिलेगा। उनके साथ ऐसी घटनाएं बंद नहीं होगीं'।

महिला सशक्तिकरण की आवाज़ बुलंद करने वाली और पेशे से वकील वृंदा श्रीवास्तव कहती हैं, 'हर मोर्चे पर महिलाओं को संघर्ष का सामना करना पड़ता है, चाहे घर या बाहर, सड़क हो या दफ्तर। हर जगह हम आस-पास असुरक्षा का घेरा महसूस करते हैं। अगर आज हमारी सरकारें हमारी रक्षा करने में नाकाम हैं तो हमें ऐसी सरकारें चाहिए ही क्यों'।

इसे भी पढ़े: यूपी: दलित महिला से सामूहिक बलात्कार, महिला सुरक्षा पर विफल योगी सरकार

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